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दान का ‘हिसाब’ मांगने वाले कालनेमियों सुनो…!

July 12, 2026

दान का ‘हिसाब’ मांगने वाले कालनेमियों सुनो…!

Ram Mandir Ayodhya

राम मंदिर अयोध्या

प्रणय विक्रम सिंह

‘​स्वस्वत्वनिवृत्तिपूर्वकं परस्वत्वोत्पादनं दानम्’ के दिव्य उद्घोष से सिंचित इस धरा पर दान कोई भौतिक सौदा या व्यापार नहीं बल्कि आत्मा की परम शुद्धि और प्रभु के चरणों में सर्वस्व समर्पण का महामार्ग है, लेकिन आज राजनीति के कुछ आधुनिक कालनेमी प्रभु श्री राम के इस पावन दरबार में भी अपनी नफरत की दुकान चमकाने के लिए ‘कमीशन’ और ‘हिसाब’ का झूठा बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं।

सत्ता से दूर होकर छटपटा रहे इन दिशाहीनों को शायद सनातन का गौरवशाली इतिहास नहीं मालूम, वरना तकादा करने से पहले वे अपने पूर्वजों की उस महान विरासत को याद कर लेते जहां दैत्यराज बलि ने भगवान वामन को तीन पग भूमि दान करते समय गुरु शुक्राचार्य के प्रबल विरोध के बाद भी अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे और सर्वस्व सौंपने के बाद कभी लौटकर स्वर्ग की ‘रसीद बुक’ नहीं मांगी थी।

ठीक इसी त्याग परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सूर्यपुत्र कर्ण ने अपने प्राणों की रक्षा करने वाले कवच-कुंडल हंसते-हंसते काटकर इंद्र को दे दिए थे पर कभी यह पूछने नहीं गए कि उन्हें किस अलमारी में छिपाकर रखा गया है, और इसी सत्य की रक्षा के लिए महाराज हरिश्चंद्र ने विश्वामित्र को अपना पूरा राज्य सौंपकर श्मशान में चांडाल की नौकरी स्वीकार की, जहां उनकी पत्नी और बच्चे तक बिक गए लेकिन उन्होंने कभी राजकोष के ‘ऑडिट’ का इंचार्ज बनने की इच्छा नहीं जताई।

जब महर्षि दधीचि ने देवताओं के वज्र के लिए अपने प्राण त्यागकर हड्डियां दान कर दीं और महाराज शिबि ने एक शरणागत पक्षी के लिए अपने शरीर का जीवित मांस तौल दिया, तब इनमें से किसी ने भी तराजू और रसीद लेकर विधाता को कटघरे में खड़ा नहीं किया था क्योंकि वे भली-भांति जानते थे कि प्रभु के चरणों में अर्पित वस्तु पर फिर इस नश्वर संसार का कोई वैधानिक दावा नहीं रह जाता।

​परंतु आज की इस कलियुगी राजनीति में कुछ ‘प्रचारवीर’ चार साल बाद अचानक टीवी चैनलों पर बैठकर और हाथ में दान की तस्वीरें लहराकर चांदी की ईंटों और रसीदों का ऐसा हिसाब मांग रहे हैं जैसे उन्होंने प्रभु को दान नहीं बल्कि कोई कर्ज दिया हो। जिन्होंने खुद अपनी स्वेच्छा से समर्पण किया था, वे आज केवल अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए गबन का ढोंग रच रहे हैं क्योंकि वास्तव में यह पीड़ा राम मंदिर की सुरक्षा या उसकी मर्यादा की है ही नहीं, बल्कि यह पीड़ा मीडिया में ‘नाम चमकाने’ और अपने ‘अहंकार’ की तृप्ति न होने की छटपटाहट है।

गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने सात्विक दान की परिभाषा बताते हुए स्पष्ट कहा है कि श्रेष्ठ दान वही है जो बिना किसी बदले की भावना या सम्मान की लालसा के दिया जाए, और हमारी लोक-परंपरा भी यही कहती है कि दाहिने हाथ से दो तो बाएं हाथ को पता न चले, अन्यथा वह दान नहीं बल्कि एक घटिया प्रदर्शन मात्र बनकर रह जाता है। आज करोड़ों हिंदुओं के एक-एक रुपए के पवित्र संकल्प और अटूट आस्था से यह भव्य और गगनचुंबी मंदिर खड़ा हुआ है, और जिन्हें इस दिव्य शिखर की ऊंचाई में, धवल फर्शों की भव्यता में और रामलला के श्रीचरणों के अलौकिक अलंकरण में अपना समर्पण दिखाई नहीं दे रहा, दोष निश्चित ही उनकी नियत और आंखों के राजनीतिक मोतियाबिंद का है।

​भ्रम फैलाकर अपनी रोटियां सेकने वाले इन राजनीतिक गिद्धों को यह बात कान खोलकर सुन लेनी चाहिए कि राम मंदिर ट्रस्ट के एसबीआई लॉकर में सिंधी समाज द्वारा समर्पित सभी 200 चांदी की ईंटों के साथ-साथ कागभुशुंडि जी की दिव्य प्रतिमा, प्रभु का स्वर्ण धनुष-बाण, चरण पादुकाएं और भक्तों का अर्पित किया गया एक-एक आभूषण पूरी तरह सुरक्षित है।

इस सत्य को झुठलाने की कोशिश करने वाले भूल रहे हैं कि यह उत्तर प्रदेश है, जहां राम और राष्ट्र के आराधक योगी आदित्यनाथ जी महाराज मुख्यमंत्री की पद पर विराजमान हैं, जिनके राज में कोई चोर, कोई ठग या कोई कालनेमी बचकर निकल ही नहीं सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी जी का अपना कोई निजी परिवार नहीं है बल्कि यह पूरा राष्ट्र ही उनका परिवार है जिसके स्वाभिमान और वैभव के लिए वे दिन-रात अपने तन-मन से जुटे हुए हैं। इसलिए समस्त रामभक्त इन देशद्रोहियों और बहरूपियों के बहकावे में न आएं और पूर्ण धैर्य रखें, क्योंकि रामजी के काम में विघ्न डालने वालों का समय आने पर इसी धरती पर दूध का दूध और पानी का पानी होगा और विधाता की लाठी से पाई-पाई का ऐसा मर्मभेदी हिसाब होगा जिसे इनकी आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।

जय जय श्री राम
​राष्ट्रहित सर्वोपरि।
भारत माता की जय!
वंदे मातरम! जय हिंद!

July 11, 2026

एटा में प्राइवेट अस्पताल में प्रसूता की मौत, गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप

Posted on 11.07.2026 Time 01.53 PM

परिजनों ने हंगामा काटते हुए एंबुलेंस चालक से की मारपीट

एटा 11 जुलाई उप्रससे। जनपद में डिलीवरी के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई। परिजनों ने शहर के न्यू लाइफ हॉस्पिटल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर पहुंची कोतवाली नगर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू कर दी है।

फिरोजाबाद के थाना एका क्षेत्र के नगला जैया निवासी माधुरी (21) पत्नी रोहित को शुक्रवार को न्यू लाइफ हॉस्पिटल में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। देर रात करीब 12 बजे उसने जुड़वा बच्चों एक बेटी और एक बेटे को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के बाद अस्पताल में लगाए गए एक इंजेक्शन के बाद माधुरी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे आगरा रेफर कर दिया।
अस्पताल के चिकित्सक उसे आगरा लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतका के पति रोहित ने आरोप लगाया कि अस्पताल संचालिका ने एक्सपायर इंजेक्शन लगाया, जिससे उनकी पत्नी की जान चली गई।
शनिवार को परिजन शव को वापस एटा ले आए और अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और लोगों ने एक एंबुलेंस चालक के साथ मारपीट भी की। घटना का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की प्रक्रिया पूर्ण कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मृतका माधुरी की शादी हाल ही में 30 अप्रैल को हुई थी। उनके पति रोहित इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। पहली बार मां बनी माधुरी की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है, जबकि नवजात जुड़वा बच्चों के सिर से जन्म लेते ही मां का साया उठ गया।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जा रही है।

Shri Ram Mandir: विश्वास, समर्पण और सार्वजनिक जीवन में सावधानी की सीख

Champatrai General Secretary Shri Ram Janmbhumi Teerth Kshetra Trust

अखिलेश शर्मा

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें उन लोगों का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा जिन्होंने दशकों तक बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। ऐसे ही व्यक्तित्वों में विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम प्रमुखता से आता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। संगठन, संघर्ष और सेवा के कारण वे करोड़ों रामभक्तों के बीच सम्मानित हैं।
हाल के दिनों में चंपत राय एक ऐसे विवाद के केंद्र में आ गए, जिसने यह संदेश दिया कि सार्वजनिक जीवन में केवल ईमानदारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि हर कदम पर सतर्कता भी आवश्यक होती है। चर्चा इस बात की रही कि वे अपने निकट के लोगों पर अत्यधिक विश्वास कर बैठे और इसी अति विश्वास ने उन्हें अनावश्यक विवादों में ला खड़ा किया। राजनीति, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं में यह एक पुरानी कहावत है कि “विश्वास आवश्यक है, लेकिन सत्यापन उससे भी अधिक आवश्यक है।”
चंपत राय का व्यक्तित्व सदैव सादगी, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण का रहा है। उन्होंने कभी व्यक्तिगत प्रचार को महत्व नहीं दिया और हमेशा स्वयं को रामकाज का एक साधारण कार्यकर्ता बताया। यही कारण है कि उनके समर्थकों का मानना है कि यदि उनसे कोई चूक हुई भी है तो वह किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने सहयोगियों पर अधिक भरोसा करने के कारण हुई।
सार्वजनिक जीवन में कार्य करने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वे अपने आसपास ऐसे लोगों का चयन करें जो उनके विश्वास पर खरे उतरें। कई बार प्रतिष्ठित व्यक्तियों की वर्षों की कमाई हुई साख कुछ लोगों की लापरवाही या गलत आचरण के कारण प्रभावित हो जाती है। इसलिए किसी भी संस्था की मजबूती के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और समय-समय पर तथ्यों का परीक्षण आवश्यक माना जाता है।
राम मंदिर आंदोलन करोड़ों लोगों की आस्था का विषय रहा है। मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद भी ट्रस्ट और उससे जुड़े प्रत्येक पदाधिकारी पर समाज की निगाह रहती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का विवाद स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है। यही कारण है कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों से सामान्य से भी अधिक सावधानी और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है।
चंपत राय के समर्थकों का कहना है कि उनके दशकों के योगदान को किसी एक विवाद की कसौटी पर नहीं परखा जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही की मांग करने वाले लोगों का मानना है कि जितना बड़ा पद, उतनी ही अधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व भी आवश्यक है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही स्वस्थ परंपरा मानी जाती है।
यह पूरा घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि समर्पण और निष्ठा जितने आवश्यक हैं, उतनी ही आवश्यक विवेकपूर्ण सतर्कता भी है। किसी भी बड़े संगठन में व्यक्तिगत विश्वास के साथ-साथ संस्थागत व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रांति या विवाद की संभावना कम हो।
भगवान श्रीराम के आदर्श भी यही सिखाते हैं कि धर्म, मर्यादा, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलते हुए प्रत्येक निर्णय पूरी सावधानी और निष्पक्षता के साथ लिया जाए। यदि इस घटना से कोई सीख निकलती है तो वह यही है कि सार्वजनिक जीवन में विश्वास और पारदर्शिता दोनों का संतुलन ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी होता है।

July 10, 2026

Breaking: जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे प्रशासक

लखनऊ, 10 जुलाई 2026, (उप्र समाचार सेवा)। शासन ने जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया। निर्वाचित अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पूर्व पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने आदेश जारी कर दिया है।

आदेश के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष ही कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक होंगे। यह अवधि 6 माह अथवा नया चुनाव होने तक जो भी पहले हो, तक रहेगी। किंतु प्रशासक कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। वे केवल सामान्य कार्य ही करेंगे। आवश्यक होने पर नीतिगत प्रस्ताव का अनुमोदन जिलाधिकारी से लेना होगा ।

ज्ञातव्य है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण निर्धारण में विलंब के कारण पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके हैं। इसी कारण पहले ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया था। अब जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक बना दिया गया है। अनुमान है कि क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर ब्लाक प्रमुखों को भी प्रशासक बना दिया जाएगा

हालांकि ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।

सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमांत और सजग समाज के साथ ही देश सुरक्षित हो सकता है: अमित शाह

  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित किया
  • स्मार्ट बॉर्डर की कल्पना पर आधारित भारत की बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विश्व में सबसे आधुनिक होगी
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश को जम्मू कश्मीर और नॉर्थईस्ट में आतंकवाद और नक्सलवाद से निजात मिली है जो हमारी साझी सफलता का सूचक है
  • आने वाले 3 सालों में हम नारकोटिक्स की समस्या को गंभीर क्षति पहुंचाकर इस पर विजय प्राप्त करेंगे
  • मोदी जी ने जनसांख्यिकी परिवर्तन का अध्य्यन करने, उसमें असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को चिन्हित करने और भविष्य में इसे रोकने के उपाय सुझाने के लिए डेमोग्राफी मिशन की शुरूआत की है
  • रूथलैस अप्रोच के साथ जनसांख्यिकी में असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को रोकना मोदी सरकार का संकल्प है
  • सीमांत क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्यिकी परिवर्तन का मूल कारण घुसपैठ है
  • गृह मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में असामान्य कारणों से जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव की सूचना जल्द से जल्द नीचे से उच्चतम स्तर तक पहुंचाने के महत्व पर बल दिया
  • मोदी सरकार 31 हज़ार करोड़ से 1610 किलोमीटर लंबे म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी कर रही है
  • प्रॉक्सी वार, घुसपैठ, कट्टरपंथ का प्रसार, नारकोटिक्स, तस्करी, ड्रोन, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय परिवर्तन रोकना, सीमा को रहने लायक बनाना और वहां से पलायन रोकना और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे उद्देश्य हैं
Posted Date:- Jul 09, 2026

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय और श्री बंडी संजय कुमार, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो और सीमांत राज्यों के पुलिस महानिदेशकों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि इस सम्मेलन से समग्र सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण को संस्थागत रूप मिला है और आने वाले समय में तटीय सीमा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में भी हम समग्रता से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा, निराकरण की चिंता और इस दिशा में उपयुक्त उपायों को नीतिगत स्वरूप देने का काम होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि स्मार्ट बॉर्डर की कल्पना पर आधारित भारत की बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विश्व में सबसे आधुनिक होगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार, संबद्ध सीमा रक्षक बल, राज्य एवं ज़िला प्रशासन, भारत सरकार के संबंधित हितधारक तथा स्थानीय नागरिकों के परस्पर जुड़ाव के साथ एक मज़बूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण कर रही है। श्री शाह ने कहा कि सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमांत और सजग समाज के साथ ही देश सुरक्षित हो सकता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश को जम्मू कश्मीर और नॉर्थईस्ट में आतंकवाद और नक्सलवाद से निजात मिली है जो हमारी साझी सफलता का सूचक है। उन्होंने कहा कि आने वाले 3 सालों में हम नारकोटिक्स की समस्या को गंभीर क्षति पहुंचाकर इस पर भी विजय प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि देश को घुसपैठिया मुक्त बनाने और घुसपैठ हो ही न सके, इसके लिए एक मज़बूत तंत्र का निर्माण कर रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि पहले समस्याएं स्थायी और समाधान अस्थायी थे, मोदी सरकार में समस्याओं की जड़ पर प्रहार कर समाधानों को स्थायी बनाया जा रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर में 400 प्रतिशत वृद्धि कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इसे आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने वायब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत देश के अंतिम गांव को देश का प्रथम गांव कहा है, इसके तहत पलायन रोकने, रोजगार बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का शत प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने जनसांख्यिकी परिवर्तन का अध्य्यन करने, उसमें असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को चिन्हित करने और भविष्य में इसे रोकने के उपाय सुझाने के लिए डेमोग्राफी मिशन की शुरूआत की है। उन्होंने कहा कि रूथलैस अप्रोच के साथ जनसांख्यिकी में असामान्य कारणों से हो रही वृद्धि को रोकना मोदी सरकार का संकल्प है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्यिकी परिवर्तन का मूल कारण घुसपैठ है।

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केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए मोदी सरकार ने चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड का निर्माण किया है जिससे हमने अपनी अप्रोच को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव में बदला है। मोदी सरकार आइसोलेटेड सीमा चौकी की व्यवस्था से एकीकृत सुरक्षा ग्रिड का निर्माण करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। गृह मंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में असामान्य कारणों से जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव की सूचना जल्द से जल्द नीचे से उच्चतम स्तर तक पहुंचाने के महत्व पर बल दिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार 31 हज़ार करोड़ से 1610 किलोमीटर लंबे म्यांमार बॉर्डर पर बाड़बंदी कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रॉक्सी वार, घुसपैठ, कट्टरपंथ का प्रसार, नारकोटिक्स, तस्करी, ड्रोन, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय परिवर्तन रोकना, सीमा को रहने लायक बनाना और वहां से पलायन रोकना और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे उद्देश्य हैं।

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