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जरासंध’ की खुशी तात्कालिक है…

✍️ प्रणय विक्रम सिंह इतिहास का सबसे बड़ा भ्रम यह है कि वह युद्धभूमि में दिखाई देने वाले दृश्य को ही अंतिम सत्य मान लेता है। किंतु भारत की सभ्यता ने कभी केवल दृश्य को सत्य नहीं माना। उसने परिणाम से पहले उद्देश्य को देखा, विजय से पहले धर्म को देखा और पराक्रम से पहले […]

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जंतर-मंतर: अराजकता का अखाड़ा

प्रणय विक्रम सिंह यह जंतर-मंतर की सड़क है। यहां हर सुबह एक नई ‘क्रांति’ की बोली लगती है, और हर शाम उसकी लाश पर वैचारिक भाषणों के कसीदे पढ़े जाते हैं। जो लोग इतिहास और समाज के सतही पन्नों को पढ़कर संतुष्ट हो जाते हैं, वे इस जमावड़े को ‘जन-आक्रोश’ कह सकते हैं। किंतु यदि […]

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भारतीय रेलवे में नई हाइड्रोजन क्रांति

प्रधानमंत्री ने कई रेलवे स्टेशनों का भी दिया उपहार मृत्युंजय दीक्षित जुलाई 17, 2026 का दिन भारतीय रेलवे के लिए एक स्मरणीय दिन बन गया है क्योंकि इस दिन रेल यातायात में विकसित भारत के नये युग का सूत्रपात हुआऔर भा रत को हाइड्रोजन ट्रेन का उपहार मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली […]

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दान का ‘हिसाब’ मांगने वाले कालनेमियों सुनो…!

प्रणय विक्रम सिंह ‘​स्वस्वत्वनिवृत्तिपूर्वकं परस्वत्वोत्पादनं दानम्’ के दिव्य उद्घोष से सिंचित इस धरा पर दान कोई भौतिक सौदा या व्यापार नहीं बल्कि आत्मा की परम शुद्धि और प्रभु के चरणों में सर्वस्व समर्पण का महामार्ग है, लेकिन आज राजनीति के कुछ आधुनिक कालनेमी प्रभु श्री राम के इस पावन दरबार में भी अपनी नफरत की […]

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Shri Ram Mandir: विश्वास, समर्पण और सार्वजनिक जीवन में सावधानी की सीख

अखिलेश शर्मा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें उन लोगों का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा जिन्होंने दशकों तक बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। ऐसे ही व्यक्तित्वों में विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का […]

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