मर्यादा की पुनर्प्रतिष्ठा की वर्षगांठ
लेखकः प्रणय विक्रम सिंह आज समय अपने सौभाग्य पर आह्लादित है। आज… भारत की चेतना एक शिखर पर ठहरकर अपने इतिहास को, अपनी मर्यादा को नमन कर रही है। यह वही मर्यादा है जिसे वाल्मीकि ने राजा के नहीं, मनुष्य राम के चरित्र में देखा। और जिसे तुलसी ने भक्ति नहीं, लोक-मंगल का आधार कहा। […]
