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स्टांप चोरी, फर्जी कार्मिक और लंबित अभिलेखों पर बड़ा एक्शन

February 20, 2026

स्टांप चोरी, फर्जी कार्मिक और लंबित अभिलेखों पर बड़ा एक्शन

*उप्र समाचार सेवा (UPSS)
**दिनांक: 19 फरवरी 2026 | स्थान: ऋषिकेश (उत्तराखंड)**

**सब-रजिस्ट्रार हरीश कुमार निलंबित, विभागीय जांच शुरू**

ऋषिकेश उप-पंजीयक कार्यालय में करोड़ों रुपये की स्टांप शुल्क अपवंचना, फर्जी कार्मिक से कार्य कराने और पंजीकरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के मामले में शासन ने कड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल की संस्तुति पर वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सब-रजिस्ट्रार हरीश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके विरुद्ध औपचारिक विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही भी प्रारंभ कर दी गई है।

यह कार्रवाई 28 जनवरी 2026 को हुए औचक निरीक्षण के बाद सामने आई गड़बड़ियों के आधार पर की गई, जिसमें कार्यालय की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।

### निरीक्षण में उजागर हुई प्रमुख अनियमितताएं

**बिना उप-निबंधक के रजिस्ट्री**
निरीक्षण के दौरान उप-निबंधक अनुपस्थित पाए गए, जबकि उनकी गैरमौजूदगी में निबंधक लिपिक द्वारा अवैधानिक रूप से विलेख पंजीकरण किया जा रहा था, जो स्थापित नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

**फर्जी/घोस्ट कर्मचारी का मामला**
कार्यालय में जितिन पंवार नामक व्यक्ति कार्य करता मिला, जिसका न तो कोई नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति रजिस्टर में नाम दर्ज था। उसके रजिस्ट्री कार्यों में शामिल होने की आशंका जताई गई।

**सैकड़ों मूल दस्तावेज वर्षों से लंबित**
नियमों के अनुसार पंजीकरण के तीन दिन के भीतर मूल अभिलेख आवेदक को लौटाना अनिवार्य है, लेकिन निरीक्षण में कई दस्तावेज महीनों और वर्षों से कार्यालय में लंबित मिले।

**अर्जेंट नकल में भी भारी देरी**
जहां 24 घंटे में नकल उपलब्ध कराई जानी चाहिए, वहां कई आवेदनों पर महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

### करोड़ों की राजस्व हानि का मामला

जांच में ग्राम माजरी ग्रांट, तहसील डोईवाला से जुड़े प्रकरणों में बड़ा खुलासा हुआ। दून घाटी विशेष महायोजना 2031 के तहत औद्योगिक भूमि को आवासीय दर्शाकर छोटे भूखंडों में पंजीकरण कराया गया। औद्योगिक दरों के बजाय आवासीय दरों पर मूल्यांकन करने से स्टांप शुल्क की भारी चोरी हुई, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का प्रारंभिक अनुमान है।

### नियमों की अनदेखी

संयुक्त जांच में पाया गया कि भारतीय स्टांप (उत्तराखंड संशोधन) अधिनियम 2015 की धारा 47-क, रजिस्ट्रेशन मैनुअल के नियम 325, 195 व 196 तथा शासन की अधिसूचना 28 अप्रैल 2016 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इन नियमों के तहत संपत्ति का सही मूल्यांकन और स्टांप शुल्क निर्धारण अनिवार्य है।

### फरियादियों ने सुनाई परेशानी

निरीक्षण के दौरान मौजूद लोगों ने बताया कि मूल दस्तावेज प्राप्त करने के लिए उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े। दस्तावेजों के अभाव में बैंक ऋण, नामांतरण और अन्य राजस्व कार्य प्रभावित हुए।

### आगे भी होंगे औचक निरीक्षण

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और राजस्व हितों से खिलवाड़ के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। अन्य उप-पंजीयक कार्यालयों की भी औचक जांच की जाएगी, ताकि पंजीकरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।