नैमिषारण्य से शुरू होगी परिक्रमा यात्रा- पवन सिंह चौहान
लखनऊ । लोक भारती द्वारा उत्तर प्रदेश में स्थित चारों परिक्रमा पथों (अयोध्या, मथुरा, नैमिषारण्य, चित्रकूट) के हर कोस पर हरिशकरी (पीपल, बरगद, पाकड़ एक ही थाले में) रोपित कर उनको हरिशंकरी की माला पहनाने का अभियान चल रहा है। यात्रा प्रभारी लोक भारती के अवध क्षेत्र अध्यक्ष पवन सिंह चौहान ने बताया प्रथम चरण में आगामी 24 से 29 अक्टूबर तक एक यात्रा का आयोजन नैमिषारण्य के 84 कोस के परिक्रमा पथ पर किया जा रहा है। जिसमें अभियान में प्रत्येक कोस का नामकरण प्रतिनिधि ऋषि के नाम से पूज्य संतो एवं जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति में समाज के द्वारा हरिशंकरी रोपण किया जाएगा । हर कोस पर लगने वाले हरिशंकरी को भविष्य में कोस पड़ाव के रूप में स्थापित किया जाएगा । लोक भारती के बृजेन्द्र पाल सिंह (राष्ट्रीय संगठन मंत्री) ने बताया हर कोस पड़ाव पर शासन के द्वारा प्रकाश, जल, प्रशाधन एवं बैठने की व्यवस्था की मांग की जाएगी । इन हरिशंकरी का रोपण समाज के सभी वर्गों को आमंत्रित कर शासन व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उत्सव पूर्वक (यज्ञ, स्वास्ती वाचन, मत्रोच्चार, परिक्रमा आदि) किया जाएगा। लोक भारती के श्री गोपाल उपाध्याय (राष्ट्रीय संगठन सचिव) ने बताया परिक्रमा का उद्घाटन 24 अक्टूबर शनिवार को प्रातः 9 बजे नैमिषारण्य के चक्रतीर्थ पर हरिशंकरी रोपित करके प्रारंभ होगा तथा हर कोस पर हरिशंकरी लगाते हुए यात्रा के स्वरूप में 29 अक्टूबर को समाप्त होगा । यात्रा के दौरान स्थान-स्थान पर जनसभाएं एवं उत्सवों का आयोजन किया जाएगा । जिसमें प्रदेश सरकार के अनेक मंत्रीगण स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं पूज्य संतगणों को आमंत्रित किया गया है । इससे पूर्व में लोक भारती मथुरा के गोवर्धन परिक्रमा पथ एवं चित्रकूट के कामदगिरी परिक्रमा पथ पर हरिशकरी रोपित कर चुका है। अवध प्रान्त सयोजक लोक भारती कमलेश सिह ने यात्रा मार्ग की जानकारी देते हुए बताया, यात्रा 24 को चक्रतीर्थ नैमिषारण्य से प्रारम्भ होकर कोरौना द्वारिकाधीश, हरैया, नगवों कोथाँवा, गिरधरपुर उमरारी, साक्षी गोपालपुर, देवगवा, मंडरुआ, जरिगंवा, नैमिषारण्य, बरेठी होते हुए मिश्रिख पर समाप्त होगी। वार्ता में पवन सिंह चौहान , बृजेन्द्र पाल सिंह (राष्ट्रीय संगठन मंत्री), गोपाल उपाध्याय (संगठन सचिव लोक भारती) , सौरभ सिंह (सह सम्पर्क प्रमुख) , कमलेश सिंह (प्रांत संयोजक लोक भारती) कौशल चंद्रवंशी आदि बंधु उपस्थित रहे।
