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जब जब हिन्दू जागेगा, भाग्य देश का जागेगा

January 26, 2026

जब जब हिन्दू जागेगा, भाग्य देश का जागेगा

मोहन बस्ती बुद्धि विहार द्वारा आयोजित हुआ बृहद हिंदू सम्मेलन

Hindu Sammelan Moradabad

बुद्धि विहार में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए कला भारती के महामंत्री बाबा संजीव आकांक्षी

मुरादाबाद. बुद्धि विहार मोहन बस्ती द्वारा विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन बुद्धि विहार में स्थित आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल के प्रांगण में किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन विभाग प्रचारक ब्रजमोहन जी, नगर कार्यवाह विपिन जी, मुख्य अतिथि कर्णपुरी जी महाराज एवं कार्यक्रम अध्यक्ष प्रेमवीर सिंह जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया. सरस्वती वंदना के माध्यम से मां बागेश्वरी की स्तुति की गयी. कार्यक्रम के शुरू में प्रथम वक्ता के रूप में विभाग प्रचारक ब्रजमोहन जी ने अपने विस्तृत उद्बोधन में संघ के 100 वर्ष के इतिहास, संघर्षों की दास्तान, विपरीत परिस्थितियों में संघ ने कैसे स्वयं को केवल जीवित ही नहीं रखा, विस्तारित भी किया. आज पूरे विश्व में सबसे बड़े अनुशासित संगठन के रूप में अपनी पहचान बनाने में संघ के जिन बड़े-बड़े कार्यकर्ताओं ने समर्पित भाव से स्वयं को प्रस्तुत किया उन सब की चर्चा की.
सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में स्वरूपी देवी इंटर कॉलेज की छात्राओं ने लोक नृत्य की सुंदर प्रस्तुति के उपरांत नगर कार्यवाह विपिन जी ने पांच परिवर्तनों की चर्चा करते हुए विस्तार से बताया की पांच परिवर्तनों को आत्मसात करने एवं व्यवहार में लाने से कैसे हमारा जीवन बेहतर हो सकता है. किस प्रकार हम सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करने से बचें, आचरण शुद्ध रखें, पर्यावरण का रक्षण करें, पीने वाले जल का संरक्षण करें और पेयजल को व्यर्थ न बहने दें. गिलास में उतना ही जल लेना चाहिए जितना हमें पीना है. उनके उद्बोधन के बाद बाल व्यास ने लव कुश की एक सुंदर प्रस्तुति के माध्यम से जनमानस को तालियां बजाने पर विवश कर दिया. जनमानस की प्रशंसा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद बाल व्यास ने सुंदर भजन की प्रस्तुति दी. भजनों की प्रस्तुति में ही राजकुमार गोस्वामी द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ एवं भगवान कृष्ण और मां भारती की वंदना की संगीतमय प्रस्तुति की गई.
मुख्य अतिथि के रूप में कर्णपुरी जी महाराज ने कहा की अगर आज हिंदू एकत्र नहीं हुआ तो आने वाले समय में और विपरीत परिस्थितियों उत्पन्न होगी. आज सबसे बड़ी आवश्यकता इस बात की है कि जात-पात को भूलकर, उच्च नीच के भेदभाव को खत्म कर सभी हिंदू एक मंच पर आयें, एक साथ आयें. हिंदू जब-जब एकत्र होता है,तब तक राष्ट्र की उन्नति होती है, अगर हमारे समाज में किसी प्रकार की कोई कुरीति ऐसी है जिससे सनातन धर्म का हिंदुत्व का और हिंदुओं का कोई अहित हो रहा है उनको स्वयं निकालकर आगे बढ़ाने में ही हमारी भलाई है और यही समय की मांग है. कार्यक्रम का संचालन कर रहे बाबा संजीव आकांक्षी जी ने नारा दिया कि जब-जब हिंदू जागेगा, भाग्य देश का जागेगा. हिंदू शक्ति- देश की भक्ति. अर्थात जब-जब हिंदू शक्तिशाली हुआ है, तब तक देश की भक्ति की है और देश शक्तिशाली हुआ है. इसके विपरीत अन्य विधर्मी लोग जब-जब शक्तिशाली हुए हैं देश में विघटन हुआ है, देश का विनाश हुआ है, देश की हानि हुई है. अतः संघे शक्ति कलयुगे की सूक्ति को सार्थक बनाते हुए हम सब हिंदुओं को एकत्र होने की आवश्यकता है. कार्यक्रम अध्यक्ष प्रख्यात निर्यातक एवं समाजसेवी प्रेमवीर सिंह जी ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, मातृशक्ति, कलाकारों, कार्यकर्ताओं और इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और आवाहन किया कि ऐसे सुंदर आयोजन समाज में जहां नई ऊर्जा का संचार करते हैं, वहीं सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देते हैं.ऐसे आयोजन निरंतर होते रहनी चाहिए.
कार्यक्रम के उपरांत सह भोज का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रणवीर शर्मा, शैलेंद्र सिंह, वीरेंद्र शर्मा, दिनेंद्र सिंह, अशोक कुमार, सतीश अरोड़ा, डॉ शशि चौहान, प्रदीप गुप्ता, कपिल गुप्ता, जितेंद्र सिंह, पितांबर लाल, अशोक बर्फानी, कुलदीप वर्मा, मोहन बिश्नोई, दिनेंद्र कुमार, सतीश कोहली, विमलेंद्र शर्मा, शांति भूषण वर्मा आदि का सहयोग रहा. कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  विधान परिषद सदस्य डॉक्टर जयपाल सिंह व्यस्त, विशेष गुप्ता, गिरीश वर्मा, पार्षद कविता गुप्ता उदय राज सिंह, आदि उपस्थित रहे.
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में आदर्श भटनागर, दिशा भटनागर, कुमार्जित सिंह, उत्कर्ष कुमार, भव्य जोशी, नंदिनी शर्मा, आराध्या मीना, आराध्या शर्मा, हिमांशी प्रजापति, निष्ठा सक्सेना, श्रद्धा सैनी, अंशिका शाही, अन्य सैनी, वंदना सैनी, कुमारी कनक, शुभांगी शर्मा, वर्षा राजपूत, निशा ठाकुर, रूही सिंह, प्रियांशी कश्यप, अवंतिका त्यागी, कुमारी पालक, एवं श्रीमती संध्या शर्मा, अंशु शर्मा, निकिता तोमर आदि का विशेष सहयोग रहा.

किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री

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बीबीसी के पूर्व संवाददाता मार्क टुली का निधन

नई दिल्ली 26 जनवरी 2026, भारत में बीबीसी के पूर्व संवाददाता मार्क टुली का रविवार , 25 जनवरी को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। मार्क टुली सेवानिवृति के बाद भारत में ही बस गए थे। उन्होंने लगभग 4 दशक तक पत्रकारिता की, इसमें 3 दशक भारत में बीबीसी के लिए रिपोर्टिंग की।

मार्क टुली कई महीने से बीमार थे। उनका इलाज मैक्स अस्पताल में चल रहा था। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें भारत और भारतीय संस्कृति से खास लगाव था। सनातन धर्म का बहुत सम्मान करते थे। ईसाई होने के बावजूद हमेशा हाथ में कलावा बांधते थे।

उन्होंने 1971 का भरता पाक युद्ध, आपात काल, अयोध्या आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर बेबाक रिपोर्टिंग की। वे भारत में बीबीसी की पहचान बन गए थे। टुली को 1992 में अयोध्या में 6 दिसंबर को दूसरी कर सेवा और विवादित ढांचा ध्वंस के दौरान कारसेवकों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा था। उन्होंने साहसिक पत्रकारिता की। उन्हें तथ्यात्मक रेडियो पत्रकारिता के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

मार्क टुली सेवानिवृति के बाद लंदन चले गए थे। लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा। कुछ समय बाद ही दिल्ली लौट आए और भरता को ही अपना देश और दिल्ली को घर बना लिया। यहीं रविवार को अंतिम साँस ली।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मार्क टुली के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

श्रद्धांजलि: मार्क टली सर.. आप बहुत याद आएंगे…..

Mark Tuli, BBC Correspondent India

बीबीसी संवाददाता मार्क टुली (फाइल फोटो, वरिष्ठ पत्रकार रतिभान त्रिपाठी के साथ)

रतिभान त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार, राज्य मुख्यालय लखनऊ की फेसबुक वाल से साभार

Ratibhan Tripathi Senior Journalist

पत्रकारिता जगत में दैदीप्यमान नक्षत्र सरीखे पत्रकार और लेखक सर विलियम मार्क टली का रविवार को निधन हो गया। 90 वर्ष के मार्क टली भारत में बीबीसी के लिए काम करने वाले सबसे चर्चित पत्रकार रहे हैं। बीबीसी के लिए यूं तो वह अंग्रेजी में रिपोर्टिंग करते थे लेकिन उनका हिंदी ज्ञान ग़ज़ब का था। उनकी और मेरी पहली मुलाकात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जाने-माने पत्रकार व लेखक और पंडित नेहरू व इंदिरा गांधी के करीब रहे पीडी टंडन के प्रयागराज स्थित आवास में हुई थी। संभवतः वह किसी फ्रांसीसी फिल्म निर्माता के साथ टंडन जी से मिलने आए थे। फिल्म निर्माता फिरोज गांधी पर कोई डाॅक्यूमेंट्री बनाने की तैयारी में थे। टंडन जी ने उसी वक्त मुझे भी अपने घर बुलाया था। तब मैं दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग करता था। उन्होंने ही मार्क टली से मेरा परिचय कराया था।
अंग्रेज से अंग्रेजी भाषा में बोलने की अपेक्षा की जाती है लेकिन मार्क ने मुझसे हिंदी में बात की, अच्छी हिंदी में बात की। उनके बोल-चाल से लग ही नहीं रहा था कि वह अंग्रेज हैं। उनका उच्चारण विशुद्ध भारतीय था। उनका अंदाज देखकर मुझे बहुत सुखद अनुभूति हुई थी। वह तन से तो अंग्रेज थे लेकिन मन से भारतीय ही थे। ईसाई होते हुए भी वह एक हिंदू की तरह दाहिने हाथ में कलावा बांधते थे।
बातचीत में मार्क ने मुझे अपने जीवन की बहुत सारी बातें बताई थीं और अपना विजिटिंग कार्ड दिया था। मेरा नंबर भी लिया था। बाद में जब वह फिर से प्रयागराज आए तो मुझे फोन किया और जिस होटल में ठहरे थे, वहीं बुलाया। वह किसी रिपोर्टिंग के सिलसिले में ही आए थे। हम लोगों ने घंटों बातचीत की, चाय पी। उसी समय उन्होंने अपने साथ अयोध्या में हुई घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि कारसेवकों ने उन्हें किस तरह बंधक बनाया था। फिर प्रशासन ने उन्हें कैसे मुक्त कराया था। पत्रकारिता के लिए उन्हें पहले पद्मश्री और फिर पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने भारतीय राजनीति समेत अनेक विषयों पर कई महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी हैं।
मार्क टली को भारत और भारतीय परंपराओं का अच्छा ज्ञान था। उन्हें भारतीय परंपराओं से लगाव भी कम नहीं था। 1935 में कलकत्ता में जन्मे मार्क टली ने मुलाकात के दौरान बातचीत में मुझसे कहा था कि रतिभान जी, मैं हर हाल में भारत में रहना चाहता हूं। उनकी यह चाहत पूरी भी हुई। आज जब मार्क टली नहीं रहे तो उनकी यादों की बरात सी आ गई। उनके सान्निध्य में बिताए पल, उनकी बातचीत और हंसता मुस्कुराता चेहरा याद आ रहा है। अलविदा मार्क टली सर…आप बहुत याद आएंगे। आपकी पत्रकारिता और भारत के लिए प्रेम सदा याद किया जाएगा।

January 25, 2026

मुरादाबाद के चिरंजी लाल को पद्मश्री, लगातार तीसरी बार मुरादाबाद को पद्मश्री

Chiranji laal yadav, Moradabad

पद्मश्री चिरंजी लाल यादव, मुरादाबाद

मुरादाबाद, 25 जनवरी 2026, (उप्र समाचार सेवा) दस्तकारी में अपने हुनर से लोहा मनवाने वाले हस्तशिल्पी चिरंजी लाल यादव को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। भारत सरकार ने हस्तशिल्प में दस्तकार की नक्काशी को सराहते हुए अवार्ड देने का ऐलान किया है। मुरादाबाद को लगातार तीसरी बार पद्मश्री का खिताब मिला है।
गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा से मुरादाबाद का नाम देश भर में चमका है। इस साल पद्मश्री पुरस्कार मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव को मिलेगा। शहर के गुरहट्टी क्षेत्र में कटरा पूरन जाट में रहने वाले 56 साल के चिरंजी लाल का आज भी नायाब नक्काशी में हुनर है। धातु उत्पादों पर नायाब नक्काशी उकेरने वाले चिरंजी लाल को अब तक अन्य कई अवार्ड मिल चुके हैं। शिल्प गुरु, तीन बार स्टेट अवार्ड और नेशनल अवार्ड मिल चुका है। इस बार उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है।
इससे पहले मुरादाबाद में 2024 में दिलशाद हुसैन और 2025 बाबूराम यादव को पुरस्कार मिल चुका है।
पुरस्कार मिलने से खुश चिरंजी लाल को पद्मश्री मिलने की खबर से घर पर लोग बधाई देने पहुंचने लगे। इस मौके पर आर्टीजन एसोसिएशन के आजम अंसारी समेत अन्य लोगों ने चिरंजी लाल यादव को पुरस्कार मिलने पर बधाईयां दी।

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