Web News

www.upwebnews.com

बीबीसी के पूर्व संवाददाता मार्क टुली का निधन

January 26, 2026

बीबीसी के पूर्व संवाददाता मार्क टुली का निधन

नई दिल्ली 26 जनवरी 2026, भारत में बीबीसी के पूर्व संवाददाता मार्क टुली का रविवार , 25 जनवरी को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। मार्क टुली सेवानिवृति के बाद भारत में ही बस गए थे। उन्होंने लगभग 4 दशक तक पत्रकारिता की, इसमें 3 दशक भारत में बीबीसी के लिए रिपोर्टिंग की।

मार्क टुली कई महीने से बीमार थे। उनका इलाज मैक्स अस्पताल में चल रहा था। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें भारत और भारतीय संस्कृति से खास लगाव था। सनातन धर्म का बहुत सम्मान करते थे। ईसाई होने के बावजूद हमेशा हाथ में कलावा बांधते थे।

उन्होंने 1971 का भरता पाक युद्ध, आपात काल, अयोध्या आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर बेबाक रिपोर्टिंग की। वे भारत में बीबीसी की पहचान बन गए थे। टुली को 1992 में अयोध्या में 6 दिसंबर को दूसरी कर सेवा और विवादित ढांचा ध्वंस के दौरान कारसेवकों के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा था। उन्होंने साहसिक पत्रकारिता की। उन्हें तथ्यात्मक रेडियो पत्रकारिता के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

मार्क टुली सेवानिवृति के बाद लंदन चले गए थे। लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा। कुछ समय बाद ही दिल्ली लौट आए और भरता को ही अपना देश और दिल्ली को घर बना लिया। यहीं रविवार को अंतिम साँस ली।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मार्क टुली के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

श्रद्धांजलि: मार्क टली सर.. आप बहुत याद आएंगे…..

Mark Tuli, BBC Correspondent India

बीबीसी संवाददाता मार्क टुली (फाइल फोटो, वरिष्ठ पत्रकार रतिभान त्रिपाठी के साथ)

रतिभान त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार, राज्य मुख्यालय लखनऊ की फेसबुक वाल से साभार

Ratibhan Tripathi Senior Journalist

पत्रकारिता जगत में दैदीप्यमान नक्षत्र सरीखे पत्रकार और लेखक सर विलियम मार्क टली का रविवार को निधन हो गया। 90 वर्ष के मार्क टली भारत में बीबीसी के लिए काम करने वाले सबसे चर्चित पत्रकार रहे हैं। बीबीसी के लिए यूं तो वह अंग्रेजी में रिपोर्टिंग करते थे लेकिन उनका हिंदी ज्ञान ग़ज़ब का था। उनकी और मेरी पहली मुलाकात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जाने-माने पत्रकार व लेखक और पंडित नेहरू व इंदिरा गांधी के करीब रहे पीडी टंडन के प्रयागराज स्थित आवास में हुई थी। संभवतः वह किसी फ्रांसीसी फिल्म निर्माता के साथ टंडन जी से मिलने आए थे। फिल्म निर्माता फिरोज गांधी पर कोई डाॅक्यूमेंट्री बनाने की तैयारी में थे। टंडन जी ने उसी वक्त मुझे भी अपने घर बुलाया था। तब मैं दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग करता था। उन्होंने ही मार्क टली से मेरा परिचय कराया था।
अंग्रेज से अंग्रेजी भाषा में बोलने की अपेक्षा की जाती है लेकिन मार्क ने मुझसे हिंदी में बात की, अच्छी हिंदी में बात की। उनके बोल-चाल से लग ही नहीं रहा था कि वह अंग्रेज हैं। उनका उच्चारण विशुद्ध भारतीय था। उनका अंदाज देखकर मुझे बहुत सुखद अनुभूति हुई थी। वह तन से तो अंग्रेज थे लेकिन मन से भारतीय ही थे। ईसाई होते हुए भी वह एक हिंदू की तरह दाहिने हाथ में कलावा बांधते थे।
बातचीत में मार्क ने मुझे अपने जीवन की बहुत सारी बातें बताई थीं और अपना विजिटिंग कार्ड दिया था। मेरा नंबर भी लिया था। बाद में जब वह फिर से प्रयागराज आए तो मुझे फोन किया और जिस होटल में ठहरे थे, वहीं बुलाया। वह किसी रिपोर्टिंग के सिलसिले में ही आए थे। हम लोगों ने घंटों बातचीत की, चाय पी। उसी समय उन्होंने अपने साथ अयोध्या में हुई घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि कारसेवकों ने उन्हें किस तरह बंधक बनाया था। फिर प्रशासन ने उन्हें कैसे मुक्त कराया था। पत्रकारिता के लिए उन्हें पहले पद्मश्री और फिर पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने भारतीय राजनीति समेत अनेक विषयों पर कई महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी हैं।
मार्क टली को भारत और भारतीय परंपराओं का अच्छा ज्ञान था। उन्हें भारतीय परंपराओं से लगाव भी कम नहीं था। 1935 में कलकत्ता में जन्मे मार्क टली ने मुलाकात के दौरान बातचीत में मुझसे कहा था कि रतिभान जी, मैं हर हाल में भारत में रहना चाहता हूं। उनकी यह चाहत पूरी भी हुई। आज जब मार्क टली नहीं रहे तो उनकी यादों की बरात सी आ गई। उनके सान्निध्य में बिताए पल, उनकी बातचीत और हंसता मुस्कुराता चेहरा याद आ रहा है। अलविदा मार्क टली सर…आप बहुत याद आएंगे। आपकी पत्रकारिता और भारत के लिए प्रेम सदा याद किया जाएगा।