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हिंदू समाज में समाप्त हो भेद भाव: नरेंद्र ठाकुर

April 30, 2026

हिंदू समाज में समाप्त हो भेद भाव: नरेंद्र ठाकुर

Narendra Thakur RSS

Posted on 30 April 2026, Time 07.19 PM, Thursday, Lucknow, RSS, Media Samvad, Vishwa samvad Kendra

लखनऊ, 30 अप्रैल 26 । हिंदू समाज में जाति, भाषा, प्रांत आदि के आधार पर भेदभाव समाप्त होना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगा है। इसके लिए 32 से अधिक संगठन समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने गुरुवार को नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में कहीं।

उन्होंने कहा कि आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा सामान्य यात्रा नहीं है। हमारे कार्यकर्ताओं ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। संघ विश्व में भारत माता की जय जयकार के लिए कार्य करता है। भारत को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना संघ का उद्देश्य है। प्रथम सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संघ व्यक्ति निष्ठ नहीं, तत्व निष्ठ बनने में विश्वास करता है। इसीलिए हमने किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरु माना।

उन्होंने कहा कि संघ की 85000 से अधिक दैनिक शाखाएं और 32000 से अधिक साप्ताहिक मिलन चल रहे हैं। वनवासी क्षेत्रों से लेकर नगरों तक अनगिनत सामाजिक कार्य स्वयंसेवक चला रहे हैं।

नरेंद्र ठाकुर ने संघ के भविष्य की कार्य योजना पर चर्चा करते हुए कहा कि पंच परिवर्तन का कार्य समाज में चल रहा है। सामाजिक समरसता के माध्यम से हम हिंदू समाज के बीच हर प्रकार का भेदभाव मिटाना चाहते हैं। शताब्दी वर्ष में हिंदू सम्मेलनों में समाज के सभी एक साथ आए और सहयोग किया। कुटुम्ब प्रबोधन के जरिए संघ चाहता है कि पारिवारिक व्यवस्था ठीक रहे तो समाज भी ठीक रहेगा। पर्यावरण संरक्षण भी समाज का प्रमुख कर्तव्य होना चाहिए। साथ ही स्व के आधार पर समाज का जीवन चलना चाहिए। भाषा, वेशभूषा में भी स्व का भाव होना चाहिए। इसी प्रकार सभी को नागरिक कर्तव्यों का बोध होना चाहिए। हर व्यक्ति देश, समाज के प्रति अपने कर्तव्य को समझे।

यूजीसी दिशा निर्देशों को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है। इसलिए संघ इस विषय पर अपना कोई मत व्यक्त नहीं करना चाहता, फिर भी हमारा मानना है कि समाज में सद्भाव बना रहना चाहिए।

कार्यक्रम में संघ के प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह, विश्व संवाद केंद्र के उपाध्यक्ष अशोक सिंहा, संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, प्रांत प्रचारक कौशल समेत अनेक संघ पदाधिकारी उपस्थित थे।

April 8, 2026

समाज को गौभक्त बनाएं तो स्वतः रुक जाएगी गौ-हत्या: डा मोहन भागवत

आदर्श राष्ट्र के निर्माण के लिए समाज का अच्छा होना प्राथमिक शर्त – डॉ. मोहन भागवत जी

कानून से अधिक जनजागृति आवश्यक

वृन्दावन ,संत श्रीमद्जगद्गुरू द्वाराचार्य श्रीमलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती के अवसर पर आयोजित संत सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि एक सशक्त और आदर्श राष्ट्र के निर्माण के लिए समाज का अच्छा होना प्राथमिक शर्त है।

उन्होंने धर्म, प्रजातंत्र, गौ-रक्षा और भारत की वैश्विक भूमिका पर गहन विचार रखे। उपस्थित संत-महंतों, माताओं-बहनों और प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने संतों की महिमा का बखान किया

February 16, 2026

संघ प्रमुख मोहन भागवत का दो दिवसीय लखनऊ प्रवास कल से

 

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

Posted on 16.06.2026 Time 10.10 PM Monday, Lucknow RSS Chief Dr Mohan Bhagwat
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी का दो दिवसीय प्रवास 17 फरवरी से शुरू हो रहा है। वे 18 फरवरी तक राजधानी में रहेंगे।
दी दिवसीय प्रवास में वे कुटुंब बैठक, सामाजिक सद्भाव और युवाओं के साथ संवाद करेंगे।

January 26, 2026

जब जब हिन्दू जागेगा, भाग्य देश का जागेगा

मोहन बस्ती बुद्धि विहार द्वारा आयोजित हुआ बृहद हिंदू सम्मेलन

Hindu Sammelan Moradabad

बुद्धि विहार में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए कला भारती के महामंत्री बाबा संजीव आकांक्षी

मुरादाबाद. बुद्धि विहार मोहन बस्ती द्वारा विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन बुद्धि विहार में स्थित आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल के प्रांगण में किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन विभाग प्रचारक ब्रजमोहन जी, नगर कार्यवाह विपिन जी, मुख्य अतिथि कर्णपुरी जी महाराज एवं कार्यक्रम अध्यक्ष प्रेमवीर सिंह जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया. सरस्वती वंदना के माध्यम से मां बागेश्वरी की स्तुति की गयी. कार्यक्रम के शुरू में प्रथम वक्ता के रूप में विभाग प्रचारक ब्रजमोहन जी ने अपने विस्तृत उद्बोधन में संघ के 100 वर्ष के इतिहास, संघर्षों की दास्तान, विपरीत परिस्थितियों में संघ ने कैसे स्वयं को केवल जीवित ही नहीं रखा, विस्तारित भी किया. आज पूरे विश्व में सबसे बड़े अनुशासित संगठन के रूप में अपनी पहचान बनाने में संघ के जिन बड़े-बड़े कार्यकर्ताओं ने समर्पित भाव से स्वयं को प्रस्तुत किया उन सब की चर्चा की.
सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में स्वरूपी देवी इंटर कॉलेज की छात्राओं ने लोक नृत्य की सुंदर प्रस्तुति के उपरांत नगर कार्यवाह विपिन जी ने पांच परिवर्तनों की चर्चा करते हुए विस्तार से बताया की पांच परिवर्तनों को आत्मसात करने एवं व्यवहार में लाने से कैसे हमारा जीवन बेहतर हो सकता है. किस प्रकार हम सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करने से बचें, आचरण शुद्ध रखें, पर्यावरण का रक्षण करें, पीने वाले जल का संरक्षण करें और पेयजल को व्यर्थ न बहने दें. गिलास में उतना ही जल लेना चाहिए जितना हमें पीना है. उनके उद्बोधन के बाद बाल व्यास ने लव कुश की एक सुंदर प्रस्तुति के माध्यम से जनमानस को तालियां बजाने पर विवश कर दिया. जनमानस की प्रशंसा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद बाल व्यास ने सुंदर भजन की प्रस्तुति दी. भजनों की प्रस्तुति में ही राजकुमार गोस्वामी द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ एवं भगवान कृष्ण और मां भारती की वंदना की संगीतमय प्रस्तुति की गई.
मुख्य अतिथि के रूप में कर्णपुरी जी महाराज ने कहा की अगर आज हिंदू एकत्र नहीं हुआ तो आने वाले समय में और विपरीत परिस्थितियों उत्पन्न होगी. आज सबसे बड़ी आवश्यकता इस बात की है कि जात-पात को भूलकर, उच्च नीच के भेदभाव को खत्म कर सभी हिंदू एक मंच पर आयें, एक साथ आयें. हिंदू जब-जब एकत्र होता है,तब तक राष्ट्र की उन्नति होती है, अगर हमारे समाज में किसी प्रकार की कोई कुरीति ऐसी है जिससे सनातन धर्म का हिंदुत्व का और हिंदुओं का कोई अहित हो रहा है उनको स्वयं निकालकर आगे बढ़ाने में ही हमारी भलाई है और यही समय की मांग है. कार्यक्रम का संचालन कर रहे बाबा संजीव आकांक्षी जी ने नारा दिया कि जब-जब हिंदू जागेगा, भाग्य देश का जागेगा. हिंदू शक्ति- देश की भक्ति. अर्थात जब-जब हिंदू शक्तिशाली हुआ है, तब तक देश की भक्ति की है और देश शक्तिशाली हुआ है. इसके विपरीत अन्य विधर्मी लोग जब-जब शक्तिशाली हुए हैं देश में विघटन हुआ है, देश का विनाश हुआ है, देश की हानि हुई है. अतः संघे शक्ति कलयुगे की सूक्ति को सार्थक बनाते हुए हम सब हिंदुओं को एकत्र होने की आवश्यकता है. कार्यक्रम अध्यक्ष प्रख्यात निर्यातक एवं समाजसेवी प्रेमवीर सिंह जी ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, मातृशक्ति, कलाकारों, कार्यकर्ताओं और इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और आवाहन किया कि ऐसे सुंदर आयोजन समाज में जहां नई ऊर्जा का संचार करते हैं, वहीं सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देते हैं.ऐसे आयोजन निरंतर होते रहनी चाहिए.
कार्यक्रम के उपरांत सह भोज का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रणवीर शर्मा, शैलेंद्र सिंह, वीरेंद्र शर्मा, दिनेंद्र सिंह, अशोक कुमार, सतीश अरोड़ा, डॉ शशि चौहान, प्रदीप गुप्ता, कपिल गुप्ता, जितेंद्र सिंह, पितांबर लाल, अशोक बर्फानी, कुलदीप वर्मा, मोहन बिश्नोई, दिनेंद्र कुमार, सतीश कोहली, विमलेंद्र शर्मा, शांति भूषण वर्मा आदि का सहयोग रहा. कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  विधान परिषद सदस्य डॉक्टर जयपाल सिंह व्यस्त, विशेष गुप्ता, गिरीश वर्मा, पार्षद कविता गुप्ता उदय राज सिंह, आदि उपस्थित रहे.
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में आदर्श भटनागर, दिशा भटनागर, कुमार्जित सिंह, उत्कर्ष कुमार, भव्य जोशी, नंदिनी शर्मा, आराध्या मीना, आराध्या शर्मा, हिमांशी प्रजापति, निष्ठा सक्सेना, श्रद्धा सैनी, अंशिका शाही, अन्य सैनी, वंदना सैनी, कुमारी कनक, शुभांगी शर्मा, वर्षा राजपूत, निशा ठाकुर, रूही सिंह, प्रियांशी कश्यप, अवंतिका त्यागी, कुमारी पालक, एवं श्रीमती संध्या शर्मा, अंशु शर्मा, निकिता तोमर आदि का विशेष सहयोग रहा.

January 20, 2026

स्वतंत्रता आन्दोलन में डा. हेडगेवार जी का योगदान

प्रहार पर प्रहार जो करते है रात-दिन, आजादी में तुम्हारा, क्या योगदान है?
कितने ही भुलाए गए, कितने छिपाए गए,अनगिनत का समाया, इसमें प्राण दान है।

एक रीति-नीति से बद्ध ,सत्ता के करीबी थे जो,इतिहास ने उनका ही गाया गुणगान है।

हुंकार से हिल गईं,अंग्रेजी शासन की चूलें, उनको उग्रवादी कह,जाने क्यों बुलाया गया।
खून और पसीना जिनका, आजादी में है शामिल, ऐसे महापुरुषों को मेरा प्रणाम है।

मेरी स्वरचित ये पंक्तियां उद्घाटित करती है कि भारत की आजादी में अनेकानेक लोगों का योगदान है।कतिपय को इतिहास के पन्नों में उनके कार्य और बलिदान के अनुरूप उचित स्थान नहीं मिल पाया तो इसका कदापि ये अर्थ नहीं है कि वे वन्दनीय, स्मरणीय व स्तुत्य नहीं है। ऐसे ही महापुरुष हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम सरसंघचालक केशवराव बलिराम हेडगेवार। जिनके विषय में देश के कुछ दल और लोग कहते हैं कि देश की आजादी में संघ का कोई योगदान नहीं रहा। वास्तव में ऐसे लोग डॉ. हेडगेवार द्वारा आजादी हेतु किए गए संघर्ष को नकारकर देश में नकारात्मकता का वातावरण पैदा कर संघ के प्रति दुर्भावना जाग्रत करना चाहते हैं। आजादी के इस कालखंड के इतिहास का अवलोकन करने पर हमें ज्ञात होता हैं कि चाहेंं खिलाफत आंदोलन हो या असहयोग और नमक सत्याग्रह, सभी में डॉक्टर हेडगेवार जी ने अपने स्वयंसेवकों के साथ सक्रिय रूप से भाग लिया और जेल भी गए। “होनहार बिरवान के होत चिकने पात” कहावत के अनुसार डॉक्टर हेडगेवार जी में बचपन से ही राष्ट्रभक्ति और ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। इसे उनकी बचपन की दो घटनाएं रेखांकित करती हैं। प्रथम क्वीन विक्टोरिया की जयंती पर स्कूल में बांटी गई मिठाइयों को फेंक देना क्योंकि उनके मन में यह बात घर कर गई थी कि हम उनकी जयंती पर मिठाई क्यों खाएं? जिन्होंने हमें गुलाम बना रखा है और दूसरी घटना स्कूल में ब्रिटिश इंस्पेक्टर के आने पर उन्होंने सहपाठियों के साथ “वंदे मातरम” का उद्घोष किया जिसके कारण उनका स्कूल से निष्कासन हुआ। डॉक्टर साहब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की राष्ट्रभक्ति और हिंदू संस्कृति की विचारधारा से प्रभावित थे इसलिए उन्होंने 1910 में चिकित्सा शिक्षा के लिए कोलकाता जाने का निर्णय लिया जो उसे समय क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था और वे क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़े और क्रांतिकारी प्रशिक्षण प्राप्त किया। 1916 में नागपुर लौटने पर वे कांग्रेस से जुड़कर विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव बने और 1920 के नागपुर कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा जो उस समय पारित नहीं हुआ लेकिन यह प्रस्ताव कांग्रेस ने 9 साल बाद वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में पारित किया जिसके पारित होने पर डॉक्टर हेडगेवार ने तब संघ की सभी शाखों में कांग्रेस का अभिनंदन करने और 26 जनवरी 1930 को तिरंगा फहराने का निर्देश दिया। 1921 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले असहयोग आंदोलन में डॉक्टर हेडगेवार जी ने सक्रिय भागीदारी निभाई और “स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” जैसे नारे लगाने और भड़काऊ भाषणों के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया तथा 19 अगस्त 1921 से 11 जुलाई 1922 तक 1 साल जेल में रहे। जेल से रिहाई के बाद 12 जुलाई 1922 को मोतीलाल नेहरू, राजगोपालाचारी जैसे अनेक नेताओं की उपस्थिति में डॉक्टर साहब का भव्य स्वागत किया गया। 1925 में आरएसएस की स्थापना के बाद भी डॉक्टर साहब ने स्वतंत्रता संग्राम से दूरी नहीं बनाई बल्कि 1930 में गांधी जी के नमक सत्याग्रह के समांतर चले “जंगल सत्याग्रह” में सरसंघचालक पद से त्यागपत्र देकर सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया और वन कानूनों का उल्लंघन करने के कारण 11 साथियों के साथ गिरफ्तार हुए और 9 महीने जेल में रहे ।यह मध्य प्रांत का सबसे सफलतम सत्याग्रह माना जाता है।महात्मा गांधी जी ने 8 अगस्त 1942 को गोवलिया टैंक मैदान ,मुंबई पर आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया जिससे महाराष्ट्र के अमरावती, वर्धा चंद्रपुर में विशेष आंदोलन हुए जिसका नेतृत्व संघ के अधिकारी दादा नायक बाबूराव, अण्णाजी ने किया और गोली लगने पर संघ के स्वयंसेवक बालाजी रायपुरकर का बलिदान हुआ। डॉ. हेडगेवार जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ 1925 को विजयादशमी के दिन हिंदू समाज को संगठित करने और उसके चरित्र निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की क्योंकि उनका मानना था कि असंगठित समाज स्वतंत्रता को बनाए रखने में अक्षम है। शायद यही बात कुछ विशिष्ट विचारधारा वाले दलों के लोगों को अच्छी नहीं लगती है और वे डॉक्टर हेडगेवार जी के आजादी में योगदान को नकारते हैं जबकि डॉक्टर साहब बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे पहले क्रांतिकारी,फिर कांग्रेसी कार्यकर्ता और अंत में समाज सुधारक बने जो उनकी राष्ट्रभक्ति का द्योतक है। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी तथा स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र को मजबूत रखने हेतु आरएसएस की स्थापना उनकी दूरगामी राष्ट्रवादी सोच का परिणाम है जिसके लिए वे वन्दनीय व अभिनन्दनीय हैं और उनका समग्र योगदान इतिहास में उचित स्थान पाने का हकदार है।

Chandra Prakash Sharma, Poet, Writer, Rampur, Uttar Pradesh

Chandra Prakash Sharma

डॉ.चन्द्रप्रकाश शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार निवास -नसीराबाद (प्रकाश इण्टर कालेज),मिलक, रामपुर (उ.प्र.)-244701 मोबाइल -8273463656

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