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बाल्टिक देशों में सनातन संस्कृति का हो रहा विस्तार

February 8, 2026

बाल्टिक देशों में सनातन संस्कृति का हो रहा विस्तार

डॉ. चिन्मय पंड्या के संचालन में विलनियस के बैलेंस सेंटर में गायत्री यज्ञ का आयोजन

Haridwar Samachar

हरिद्वार समाचार सेवा

हरिद्वार 8 फरवरी। अपने विदेश प्रवास के दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पंड्या लिथुआनिया की राजधानी विलनियस पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने राजधानी स्थित प्रसिद्ध बैलेंस सेंटर में वैदिक विधि-विधान के साथ गायत्री यज्ञ सम्पन्न कराया। यज्ञ में स्थानीय लिथुआनियाई नागरिकों, भारतीय समुदाय तथा गायत्री परिवार से जुड़े अनेक लोगों की भावपूर्ण सहभागिता रही, जिससे वातावरण शांति, सकारात्मक ऊर्जा और पवित्र चेतना से ओतप्रोत हो गया।
गायत्री यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण एवं पवित्र अग्नि में आहुतियों के माध्यम से सर्वे भवन्तु सुखिन: तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य तथा मानवीय चेतना के उत्थान की कामना की गई। उपस्थित जनसमूह ने इस आध्यात्मिक अनुष्ठान को केवल एक धार्मिक कर्मकांड के रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन और सामूहिक चेतना को जाग्रत करने वाली प्रक्रिया के रूप में अनुभव किया।
इस अवसर पर लिथुआनियाई नागरिकों एवं युवाओं को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि प्राचीन भारतीय वैदिक साधनाएँ आज भी आधुनिक वैश्विक समाज में संतुलन, शांति, नैतिक मूल्यों और एकता की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन पूर्व और पश्चिम के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेतु को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम सिद्ध हो रहे हैं।
यह आयोजन बाल्टिक क्षेत्र में वैदिक परंपराओं के प्रति बढ़ती जागरूकता और रुचि का सजीव प्रमाण बना। विशेष रूप से लिथुआनियाई प्रतिभागियों ने यज्ञ के प्रतीकात्मक अर्थ, पंचतत्त्वों के साथ मानव के संबंध तथा प्रकृति-सम्मान की भारतीय दृष्टि के प्रति गहरी जिज्ञासा और सराहना व्यक्त की। यह कार्यक्रम अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज, हरिद्वार तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के वैश्विक दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है, जिसके अंतर्गत एशिया का प्रथम एवं विश्व का सबसे बड़ा बाल्टिक सेंटर हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह केंद्र भारत और बाल्टिक देशों के मध्य अकादमिक सहयोग, सांस्कृतिक संवाद और आध्यात्मिक आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच बनकर उभर रहा है। इस अवसर पर लिथुआनियाई नागरिकों ने सनातन संस्कृति के प्रति अपनी रुझान को व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों की निरंतरता की अपेक्षा भी प्रकट की।

February 6, 2026

रामभक्तों का अपमान विरासत का अपमान: योगी आदित्यनाथ

 

Haridwar Samachar

हरिद्वार समाचार सेवा

  • आध्यात्मिक मूल्यों के क्षरण से प्रदेश बना था अराजकता का अड्डा
  • आज दंगा-दंगाई दोनों गायब, अब बेटी सुरक्षित और व्यापारी भी
  • एक संन्यासी ने आश्रम पद्धति से सीखा, कैसे चलाना है प्रशासन
  • हरिद्वार में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति के स्थापना समारोह को संबोधित किया सीएम योगी ने

Posted on 06.02.2026 Friday, Time: 08.51 PM, Haridwar 

हरिद्वार, 06 फरवरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक समय था, जब विरासत को कोसा जाता था, अपमानित किया जाता था, लांछित किया जाता था। राम भक्तों पर गोलियां चलती थीं, उनका अपमान किया जाता था। लेकिन, यह रामभक्तों का नहीं, भारत की विरासत का अपमान होता था, भारत के आध्यात्मिक मूल्यों का अपमान होता था। इसका परिणाम यह निकला कि उत्तर प्रदेश अराजकता का अड्डा बन गया, लूट का अड्डा बन गया और दंगों की आग में झुलसने लगा। गुंडागर्दी भी चरम पर, ना बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हमारी सरकार में विरासत का सम्मान हुआ तो बेटी सुरक्षित हो गई और व्यापारी भी। आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था के रूप में भी आगे बढ़ रहा है।
सीएम योगी शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद है, न गुंडागर्दी है। न कर्फ्यू है, न दंगा है – यूपी में अब सब चंगा है। दंगा और दंगाई, दोनों गायब हो गए हैं। कर्फ्यू दंगाइयों पर लग गया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि नीति स्पष्ट थी, नीयत साफ थी। कोई सोचता था कि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो पाएगा? लेकिन, आज भव्य राम मंदिर बन गया।

आश्रम से मिला एमबीए का वास्तविक ज्ञान
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक अनुभव के आप उत्तर प्रदेश कैसे चला रहे हैं, तो मेरा उत्तर होता है कि आश्रम व्यवस्था से जुड़ा हूं। प्रशासन कैसे चलाना है, प्रबंधन कैसे करना है, भारत का संन्यासी आश्रम पद्धति से सीखता है। प्रशासन हमारे संस्कारों व जींस का हिस्सा है। एमबीए की वास्तविक शिक्षा तो भारतीय आश्रम पद्धति से ही मिलती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन का मॉडल बनकर उभरा है। भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें, आश्रम व गुरुकुल परंपरा में हैं। जहां कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प व प्रशासन जैसे विषयों का केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।

माघ मेले में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालुओं का स्नान
सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यहां पहले केवल अव्यवस्था देखने को मिलती थी, लेकिन आज अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बने हैं। भारत राष्ट्र यहीं से शक्ति प्राप्त करता है, और जब हमने इन आस्था केंद्रों को सम्मान के साथ आगे बढ़ाया, संरक्षित करने का काम किया, परिणाम भी सामने आया है। लंबे समय तक बीमारू रहा उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा जन्म इसी देवभूमि उत्तराखंड में हुआ है। वर्ष 1982 में भारत माता मंदिर के भव्य लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व सर संघचालक बालासाहब देवरस, दोनों की उपस्थिति रही। यह स्पष्ट करता था कि राष्ट्राध्यक्ष के प्रति हमारा सम्मान सदैव रहेगा, लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं होगा। जब देश विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहा था, तब पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत माता मंदिर के भव्य निर्माण और उसके लोकार्पण के माध्यम से पूरे देश के सामने आध्यात्मिक नेतृत्व का चिरस्थायी स्मारक समर्पित किया।

न जाति का भेद और न धर्म का अंतर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड के चार धाम भारत की चेतना के आधार हैं। जब हम लोग बचपन में हरिद्वार आते थे, तो सबके मन में यह भाव रहता था कि हरि की पैड़ी में स्नान करना है और भारत माता मंदिर के दर्शन भी करने हैं। यहां न जाति भेद था और न धर्म का कोई अंतर। भारत माता मंदिर में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक, पूरे भारत का स्वरूप प्रतिबिंबित किया गया। यह उस समय की सबसे ऊंची (हाई-राइज) इमारत भी थी। मेरा सौभाग्य है कि देश के भीतर पिछले 11 वर्षों में हमने व्यापक परिवर्तन देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी और बदरीनाथ से हरिद्वार तक, विकास की एक लंबी गाथा विरासत को संजोते हुए बढ़ रही है। यह नए भारत निर्माण की वही गाथा है, जिसका सैकड़ों वर्षों से वर्तमान पीढ़ी को इंतजार था। यह पीढ़ी यह सोच रही थी कि क्या हमारी भावनाओं के अनुरूप भारत का निर्माण हो पा रहा है या नहीं। एक प्रकार की असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। उस असमंजस से उबरने का कार्य पिछले 11 वर्षों में हमने स्पष्ट देखा है।

भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम भारत की बात करते हैं, तो भारत केवल एक भौगोलिक टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र है। यह किसी सत्ता की उपज नहीं है, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या से निकली शाश्वत चेतना का केंद्र बिंदु है। भारत का उच्चतम न्यायालय भी इस मंत्र को अंगीकार करता है कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। धर्म और विजय का यह शाश्वत स्वरूप हमें यह आभास कराता है कि धर्म कभी कमजोर नहीं होता, बल्कि उसे जानबूझकर कमजोर किया जाता है। इतिहास साक्षी है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न तो वर्तमान को सुधार पाता है और न ही भविष्य को सुरक्षित रख पाता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है। आक्रांताओं के आने से पहले भारत कोई अविकसित या उपेक्षित भूभाग नहीं था, बल्कि एक पूर्ण विकसित सभ्यता और समृद्ध संस्कृति था। यह राष्ट्र हमारे ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2000 वर्ष पहले, जिसे हम भारत का स्वर्ण युग कहते हैं, उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। इसी प्रकार आज से करीब 400 वर्ष पहले भी विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी। यह सामर्थ्य इन्हीं ऋषि-मुनियों की तपस्या के बल पर, अन्नदाता किसानों की सृजनशीलता के बल पर और कारीगरों के परिश्रम के बल पर था। जैसे ही हमने इन मूल्यों से मुंह मोड़ा, पतन की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन, आज फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत गांव आधारित राष्ट्र था। गांव आत्मनिर्भर इकाइयां थे। यहां कृषि थी, पशुपालन था, हस्तशिल्प था, चाहे वस्त्र निर्माण हो या धातु का कार्य, सब कुछ गांवों के भीतर ही होता था। यहां बाहरी सत्ता का हस्तक्षेप नहीं था, न ही किसी अनुदान पर निर्भरता थी। स्वरोजगार भारत की मूल शक्ति था। हमारा किसान उत्पादक था, कारीगर उद्यमी था, और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु। यह पूरा ढांचा ग्राम स्वराज आधारित शासन का एक सशक्त मॉडल था। भारतीय नारी की अर्थव्यवस्था में समान सहभागिता थी। उसे कभी पराधीन नहीं बनाया गया, बल्कि वह समाज और अर्थव्यवस्था की सक्रिय शक्ति रही है। लेकिन आक्रांताओं के साथ-साथ लाभ आधारित अर्थतंत्र ने स्थानीय उत्पादन व्यवस्था को नष्ट किया। स्वरोजगार की जगह टैक्स आधारित व्यवस्था ने ले ली। इस व्यवस्था में कारीगर को गुलाम बना दिया गया और किसान को करदाता बना दिया गया। जैसे ही हम आश्रम पद्धति से विमुख हुए और गुरुकुलों की परंपरा से मुंह मोड़ा, वैसे ही कारीगर गुलामी की स्थिति में पहुंच गया और किसान पर निर्भरता का बोझ बढ़ता चला गया, यहां तक कि वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। हमें याद रखना होगा कि ग्राम स्वराज की अवधारणा क्या है, जब एक गांव टूटता है, तो उसे केवल एक घटना नहीं माना जाना चाहिए। एक गांव का टूटना, उस राष्ट्र की नींव को हिला देता है।
समारोह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी मौजूद थे।

संत बोले, उत्तर प्रदेश के शेर हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह में संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘उत्तर प्रदेश का शेर’ बताते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ सबके प्रिय हैं और सबके हितकारी हैं। इनको संभाल कर रखना है। जब से योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली, तब से यूपी में रामराज्य जैसा माहौल दिखाई देता है। आज उत्तर प्रदेश में कहीं भय, अराजकता और उन्माद नहीं दिखाई देता। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि जब पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे नेता नेतृत्व कर रहे हैं, तो हमें कोई संदेह नहीं कि भारत को फिर उसी वैभव के साथ देखेंगे, जैसा हर्षवर्धन के कार्यकाल में, विक्रमादित्य के काल में देखने को मिला था।

परिवहन विभाग ने प्रेस क्लब में किया संगोष्ठी का आयोजन

Haridwar Samachar

हरिद्वार समाचार सेवा, Haridwar News

एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा व एआरटीओ प्रशासन नेहा झा ने यातायात नियमों की जानकारी देते हुए पालन करने की अपील की
गंभीर समस्या बन चुकी हैं सड़क दुघर्टनाएं-धर्मेंद्र चौधरी
हरिद्वार, 6 फरवरी। सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम के तहत परिवहन विभाग हरिद्वार द्वारा प्रेस क्लब में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परिवहन विभाग के अधिकारी, प्रेस क्लब पदाधिकारी एवं पत्रकार मौजूद रहे। मुख्य अतिथि एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा ने यातायात नियमों की जानकारी देते हुए दुघर्टनाओं से बचाव के लिए वाहन चलाते समय नियमों का पालन करने, सीट बेल्ट लगाने और दोपहिया वाहन चलाने के दौरान हेलमेट अवश्य लगाने की अपील की और सभागार में मौजूद सभी पत्रकारों को यातायात नियमों का पालन करने की शपथ भी दिलायी। इस दौरान परिवहन विभाग की और से सभी पत्रकारों को हेलमेट भी वितरित किए गए। प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी, महामंत्री दीपक मिश्रा एवं कार्यक्रम संयोजक आशीष मिश्रा ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। गोष्ठी का संचालन प्रेस क्लब महामंत्री दीपक मिश्रा ने किया।
प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि देश में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं, जिन पर अंकुश लगाने के लिए यातायात नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से श्यामपुर हाइवे का जिक्र करते हुए कहा कि इस मार्ग पर दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सभी दोपहिया वाहन चालकों से अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनकर वाहन चलाने की अपील की।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सभी वाहन चालक निर्धारित यातायात नियमों का पालन करें, वाहन की गति नियंत्रित रखें और नशे में वाहन चलाने से बचें, तो सड़क दुर्घटनाओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग लगातार जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित यातायात के लिए प्रेरित कर रहा है। कहा कि पूरे देश में प्रतिमाह डेढ़ लाख और वर्षभर में पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिसमें एक लाख लोगों की मौत होती है। इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सभी को जागरूक होकर यातायात नियमों का पालन करना होगा। सड़क दुर्घटनाएं होगी, लेकिन मृत्यु दर में कमी आएगी। एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा ने कहा कि सभी वाहनों पर आगे और पीछे दोनों ओर स्पष्ट एवं मानक के अनुसार नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। उन्होंने दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनकर चलने, सीट बेल्ट लगाने, मोबाइल फोन का उपयोग न करने तथा ट्रैफिक सिग्नलों का पालन करने की सख्त अपील की। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने सभी सड़क दुघर्टना में घायल होने वालों की तत्काल मदद करने की अपील करते हुए कहा कि तुरंत मदद मिलने से कई बहुमूल्य जिंदगी बच सकती हैं। वरिष्ठ पत्रकार कौशल सिखौला, आशीष मिश्रा, आदेश त्यागी, रामचंद्र कन्नौजिया, दीपक मिश्रा, अविक्षित रमन, रजनीकांत शुक्ल, गोपाल रावत, संजय आर्य, राहुल वर्मा, प्रतिभा वर्मा, सुदेश आर्या ने एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा एवं एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा को स्मृति चिन्ह भेंट किए।
इस अवसर पर रूपेश वालिया, बालकृष्ण शास्त्री, हिमांशु द्विवेदी, तनवीर अली, गुलशन नैय्यर, कुमार दुष्यंत, जोगेंद्र मावी, सुभाष कपिल, विकास झा, श्रवण झा, मुकेश वर्मा, महताब आलम, प्रशांत शर्मा, संजय चौहान, काशीराम सैनी, महेश पारीख, शिवा अग्रवाल, विकास चौहान, नवीन चौहान, सूर्यकांत बेलवाल, सुरेंद्र बोकाड़िया, दयाशंकर वर्मा, अमित गुप्ता, रविंद्र सिंह, अरुण कश्यप, वैभव भाटिया सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

धर्म स्थल और पर्यटन स्थल में फर्क किया जाना चाहिए: आलोक कुमार

Haridwar Samachar

हरिद्वार समाचार सेवा

Posted on: 06.02.2026 Friday, Time: 07.51 PM , Ramchandra Kannojia 
हरिद्वार, 5 फरवरी। विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि हिन्दू समाज के धार्मिक पूजा स्थलों एवं श्रद्धा केंद्रों की अपनी प्राचीन परंपराएं, मर्यादाएं एवं धार्मिक व्यवस्था है। मंदिर पर्यटन या भ्रमण के स्थल नहीं हैं। इसलिए धर्म स्थल और पर्यटन स्थल में फर्क किया जाना चाहिए। मंदिर में भगवान की प्रतिष्ठा होती है और श्रद्धालु पूजा-अर्चना के उद्देश्य से वहां आते हैं। जो इस परंपरा में विश्वास रखते हों, उन्हें ही मंदिरों और अन्य धर्मस्थलों पर जाने की अनुमति हो। जो धर्म मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता और मूर्ति तोड़ने का आदेश देता हो अथवा जो मानते हों कि उन्हीं का भगवान, उन्हीं की पुस्तक से उन्हें मोक्ष मिलेगा। ऐसे संदर्भों में धार्मिक संस्थाएं अपनी परंपरागत व्यवस्था लागू कर सकती हैं। भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी के समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना कार्यक्रम में भाग लेने आए हरिद्वार आए विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि नवरात्रि के दौरान किए जाने वाला गरबा नृत्य केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, अपितु माता अंबा की आराधना से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। पारंपरिक रूप से इसे नंगे पैर एवं दीप ज्योति की परिक्रमा करते हुए देवी की आराधना के रूप में किया जाता है। ऐसे आयोजनों की मूल धार्मिक भावना एवं परंपरा को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इस कार्यक्रम में अन्य धर्मों के लोगों को आने का आग्रह करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्व के विभिन्न धर्मों में भी उनके विशिष्ट धार्मिक स्थलों को लेकर विशेष परंपराएं हैं। इस्लाम धर्म में मक्का-मदीना के पवित्र स्थलों पर गैर मुस्लिम प्रवेश प्रतिबंधित है तथा विभिन्न ईसाई संप्रदायों एवं अन्य धार्मिक परंपराओं में भी धार्मिक स्थलों के संबंध में विशेष व्यवस्थाएं प्रचलित हैं। हमे यह स्वीकार है। क्योंकि वह उनके विशिष्ट धार्मिक स्थल हैं। विश्व हिन्दू परिषद का मानना है कि प्रत्येक धर्म को अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है। उत्तराखण्ड की जनसंख्या संरचना के विषय पर विश्व हिन्दू परिषद की चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में डेमोग्राफी में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। विश्व हिन्दू परिषद मांग करती हैं कि यह अध्ययन किया जाए कि हरिद्वार एवं आसपास के क्षेत्रों में किसी विशेष समुदाय की बसावट किसी संगठित योजना के अंतर्गत तो नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद का मानना है कि धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए समाज एवं शासन को मिलकर संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत कार्य करना चाहिए। कोटद्वार में हुई घटना के संबंध में पूछे गए प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। विहिप ने बजरंग दल सहित अपने सभी संगठनों को कानून के दायरे में रहकर काम करने का प्रशिक्षण दिया है। संगठन कानून के दायरे में रहकर ही गौरक्षा, लव जेहाद, धर्मांतरण आदि विषयों पर काम करते हैं। कहा कि साथ ही कांग्रेस को बताना चाहिए कि क्या वह कानून हाथ में लेकर मारपीट करने वाले को बब्बर शेर मानती है। यूजीसी के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यूजीसी मामला सुप्रीम कोर्ट में है। उम्मीद है कि सर्वोच्च अदालत इस पर सर्वमान्य निर्णय देगी। पत्रकारवार्ता के दौरान विहिप के प्रांत प्रचार प्रसार विभाग प्रमुख पंकज चौहान व अन्य विहिप पदाधिकारी मौजूद रहे।

February 5, 2026

भारत की आजादी में हिंदी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान-राज्यपाल

  • प्रेस क्लब ने किया हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी समारोह का आयोजन
  • जन सरोकारों से जुड़ा है प्रेस क्लब-धर्मेंद्र चौधरी
Haridwar Samachar

हरिद्वार समाचार सेवा

हरिद्वार, 4 फरवरी। प्रेस क्लब द्वारा हिंदी पत्रकारिता द्वि शताब्दी समारोह में आजादी के बाद राष्ट्र पुनः निर्माण में हिंदी पत्रकारिता विषय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। देवपुरा चौक स्थित भारत सेवाश्रम के सभागार में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी एवं महामंत्री दीपक मिश्रा ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह को बुके देकर सम्मानित किया। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार सुनील दत्त पांडे द्वारा राज्यपाल की उपलब्धियों एवं अनुकरणीय योगदान से अवगत कराया। मंच का संचालन वरिष्ठ पत्रकार संजय आर्य ने किया। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राओं ने राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी। राज्यपाल लेफ्टिनेंट गुरमीत सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता का सामाजिक चेतना, मूल्यों और सिद्धांतों के साथ राष्ट्रहित में परिवर्तन जीवन और राष्ट्र की प्रगति, आध्यात्मिक, सामाजिक विकास के साथ भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदंत मार्तंड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता सामाजिक सुधार, समाज की आत्मा का दर्पण, वंचितों की आवाज, लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने पत्रकारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए वेलफेयर सेंटर एवं प्रतियोगिताओं में पत्रकारों के बच्चों को शामिल किए जाने और उनकी सुरक्षा का प्रस्ताव रखते हुए प्रेस क्लब को तीन माह के अंदर ठोस प्रस्ताव देने के लिए कहा। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार निर्मल पाठक ने कहा कि मूल्य और सिद्धांतों पर चलते हुए हिंदी पत्रकारिता 200वें वर्ष में प्रवेश कर रही है और राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अंग्रेजों की हुकूमत में हिंदी पत्रकारिता ने संघर्ष किया। हिंदी अखबार सामाजिक चेतना का माध्यम बने। निर्मल पाठक ने कहा कि सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए सामाजिक समरसत्ता बनाए रखने में अखबारों की अच्छी भूमिका रही। 1870-75 के बाद और 1920 के आसपास आजादी के आंदोलन में अखबारों ने तेवर दिखाने शुरू किए। आजादी के लिए संघर्ष में महात्मा गांधी के आंदोलन को धार दी। सामाजिक बिखराव और चुनौतियों का सामना भी अखबारों ने किया। निर्मल पाठक ने कहा कि देश की आधी आबादी हिंदी का इस्तेमाल करती है। इसलिए हिंदी पत्रकारिता और हिंदी अखबारों की लोकप्रियता आज भी बनी हुई है। उन्होंने प्रेस क्लब को समारोह आयोजन की बधाई भी दी। प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रेस क्लब जन सरोकारों से जुड़ा हुआ है। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किए जा रहे द्वि शताब्दी समारोह का यह द्वितीय चरण है। पांच चरणों में हिंदी पत्रकारिता को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने राज्यपाल का कार्यक्रम में पहुंचने पर आभार जताया। वरिष्ठ पत्रकार कौशल सिखोला, आदेश त्यागी, गोपाल रावत, शिवशंकर जायसवाल, नरेश गुप्ता, हिमांशु द्विवेदी, शिवा अग्रवाल आदि ने गंगा जली एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर राज्यपाल का स्वागत किया। शिवांग अग्रवाल एवं हिमांशु द्विवेदी ने अपनी लिखी पुस्तक राज्यपाल को भेंट की। अविक्षित रमन, रामचंद्र कनौजिया, राहुल वर्मा, रजनीकांत शुक्ला आदि ने शाल शॉल ओढ़ाकर मुख्य वक्ता निर्मल पाठक का स्वागत किया। इस दौरान महेश पारीख, सुभाष कपिल, गुलशन नैयर, काशीराम सैनी, रूपेश वालिया, महताब आलम, राव रियासत पुंडीर, मनोज खन्ना, राजेंद्र गोस्वामी, देवेंद्र शमार्, संदीप रावत, कुलभूषण शर्मा, रविंद्र सिंह, मनोज सिरोही, सूर्यकांत बेलवाल, विकास झा, श्रवण झा, त्रिलोकचंद भट्ट, दयाशंकर वर्मा, सुदेश आर्य, राहुल वर्मा, प्रदीप गर्ग, गोपाल पटवार, लव शर्मा, पुष्पराज धीमान, अनिरुद्ध भाटी, डा. सुशील उपाध्याय, डा.योगेश योगी, डा. परविंदर कुमार, रोहित सिखौला, मुकेश वर्मा, सुनील पाल, राजकुमार, जोगिंदर मावी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
राधिका नगराथ, केके त्रिपाठी, शैलेंद्र गोदियाल, संजय चौहान, कुशलपाल चौहान, डा.शिव शंकर जायसवाल, डा.सुशील उपाध्याय, अमित शर्मा, डा.शिवा अग्रवाल, अमित गुप्ता, बालकृष्ण शास्त्री, संजीव शर्मा, संदीप शर्मा, रामेश्वर गौड़, तनवीर अली, नरेश दीवान शैली, लव शर्मा, शिवांग अग्रवाल सहित कई पत्रकारों ने कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

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