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दस जनवरी से मनरेगा बचाओ आन्दोलन चलाएगी कांग्रेस

January 4, 2026

दस जनवरी से मनरेगा बचाओ आन्दोलन चलाएगी कांग्रेस

नई दिल्ली, 04 जनवरी 2026, कांग्रेस ने वीबी जी राम जी ग्रामीण रोजगार योजना का विरोध करने और मनरेगा को बचाने के लिए 10 जनवरी से देश व्यापी आन्दोलन करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस का आन्दोलन जिला और ग्राम सभाओं के स्तर पर किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य की विधान सभाओं के घेराव की भी योजना है। देश भर में मनरेगा को बचाने के लिए कांग्रेस 4 ब़ड़ी रैलियां भी करेगी।

काग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश और केसी बेणुगोपाल ने पत्रकार वार्ता में घोषणा की है कि कांग्रेस का आन्दोलन 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। इसके साथ ही इस कानून को अदालत में चुनौती दी जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि आन्दोन में जी राम जी को वापस लेने की मांग की जाएगी।

आन्दोलन के चरणों की घोषणा करते हुए कांग्रेस नेताओं ने ब ताया कि 10 व 11 जनवरी को देश भऱ के सभी जिला मुख्यालयों पर उपवास, धरना और प्रदर्शन के कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 12 से 29 जनवरी तक पंचायतों में जनसम्पर्क, बैठकें और सभाएं आयोजित की जाएंगीं।जबकि 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर बैठकें और सभाएं होंगीं। इसी क्रम में 7 से 15 फरवरी तक विधान सभाओं के  घेराव का कार्यक्म है। इसके बाद 16 से 25 फरवरी के बीच देश के चार प्रमुख स्थानों पर रैलियां होंगीं। इन रैलियों में राष्ट्रीय नेता भाग लेंगे।

मनरेगा से बेहतर है वीबी जी राम जी योजनाः शिवराज सिंह चौहान

कांग्रेस ग्रामीण रोजगार योजना के बारे मं भ्रम फैला रही है

नई दिल्ली,04 जनवरी 2026, केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वीबी जी राम जी ग्रामीण विकास योजना मनरेगा से बेहतर है। इस योजना के बारे में कांग्रेस द्वारा अनावश्यक रूप से भ्रम फैलाया जारहा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार की भरमार थी। वे कांग्रेस द्वारा नई ग्रामीण योजना के विरोध में कांग्रेस द्वारा शुरु किये जा रहे आन्दोलन पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मनरेगा में भारी भ्रष्टाचार था। ग्राम सभाओं के सोशल आडिट में 10,51,000 से अधिक शिकायतें भ्रष्टाचार से सम्बन्धित प्राप्त हुई थीं। मनरेगा में एक ही काम को कई बार किया गया दर्शाया गया। मजदूरों की जगह मसीनों से काम करा दिया गया। मनरेगा का पैसा नहरों की सफाई सड़कों पर खर्च हुआ दिखाय दिया गया।

श्री चौहान ने कहा कि मोदी सरकार ने अब तक मनरेगा स्कीम में 8,48000 करोड़ रूपये जारी किये हैं, जबकि यूपीए सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में इसके लिए सिर्फ 2 लाख करोड़ रूपये जारी किये थे। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में ग्रामीण रोजगार योजना के जी राम जी के लिए सरकार 1,51,282 करोड़ रुपये की व्यवस्था करेगी, इसमें केन्द्रीय हिस्सेदारी 95,600 करोड़ की होगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस योजना के बारे में भ्रम फैला कर जनता को गुमराह कर रही है। श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस नए विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में उपस्थित ही नहीं थे। ज्ञातब्य है कि काग्रेस 10 जनवरी से 25 फरवरी तक मनरेगा बचाओ अभियान के तहत आन्दोलन करेगी।

नया विधेयक वीबी जी राम जी पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 21 दिसम्बर को हस्ताक्षर कर दिये। इसके बाद यह कानून बन गया है। इस बिल को राज्य सभा ने 18 दिसम्बर को पारित किया था। इसके एक घंटे बाद ही लोकसभा ने इसे पारित कर दिया था।

 

मथुरा में सर्राफा कारोबारी की हत्या

मथुरा, 04 जनवरी 2026 (उ.प्र.समाचार सेवा)। महानगर के गोविंद नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत लाल दरवाजा स्थित तेलीपाड़ा मोहल्ले में रविवार सुबह सर्राफा कारोबारी की हत्या से सनसनी फैल गई। चांदी कारोबारी का खून से लथपथ शव उनके बेड पर पड़ा मिला। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सतीश चंद्र गर्ग के रूप में हुई है जो चांदी खरीदकर उसे पिघलाकर बेचने का कार्य करते थे। उनका तीन मंजिला मकान है, जिसमें ऊपर और नीचे किरायेदार रहते हैं जबकि बीच की मंजिल पर वह स्वयं अकेले रहते थे। रविवार सुबह जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुई तो किरायेदारों ने पुलिस को सूचना दी।सूचना मिलते ही एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ सिटी एवं गोविंद नगर थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दरवाजा खुलवाया तो सतीश चंद्र गर्ग का शव खून से लथपथ अवस्था में बेड पर पड़ा मिला।

पुलिस के अनुसार मृतक के चेहरे पर चोट के निशान भी पाए गए हैं जिससे मामला और अधिक संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। वहीं कमरे में रखी अलमारी खुली होने के कारण लूट के इरादे से हत्या की आशंका जताई जा रही है। फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्रित किए, साथ ही डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया।

 

मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पत्नी रजनी गर्ग का चार वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उनके तीन पुत्र मुकुल (पुणे), मयंक (नोएडा) एवं अभिषेक (गुरुग्राम) में नौकरी करते हैं। पत्नी के निधन के बाद से सतीश चंद्र गर्ग मकान में अकेले ही रह रहे थे।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि घटना के खुलासे के लिए पांच पुलिस टीमें गठित की गई हैं और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि वारदात में मृतक का कोई परिचित शामिल हो सकता है।

 

घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

 

सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल से की शिष्टाचार भेंट

लखनऊ, 04 जनवरी 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज राजभवन में राज्यपाल श्रीमती आनन्दी बेन पटेल से शिष्टाचार भेंट की।

आईसीएआर द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 नई किस्में राष्ट्र को समर्पित भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ दिया हैः शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली, 04 JAN 2026 ( By PIB Delhi) केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान Shivraj Singh Chauhan ने आज नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स स्थित ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ICAR द्वारा विकसित 25 फील्ड फसलों की 184 उन्नत किस्मों का अनावरण किया। इस अवसर पर श्री चौहान ने कहा कि भारत एक खाद्य-कमी वाले देश से वैश्विक खाद्य प्रदाता वाले देश में बदल गया है जो कृषि विकास एवं खाद्य सुरक्षा में एक ऐतिहासिक रूप से मील का पत्थर साबित हुआ है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने चावल के उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ दिया है और दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत का चावल उत्पादन 150.18 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 145.28 मिलियन टन है, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। साथ ही दुनिया के खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका भी मजबूत हुई है।

उन्होंने पोषण सुरक्षा पर सरकार के फोकस पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भारत का लक्ष्य अब सिर्फ़ पर्याप्त भोजन पैदा करना नहीं है, बल्कि दालों और तिलहनों पर विशेष ध्यान देते हुए पौष्टिक तथा उच्च गुणवत्ता वाली फसलें सुनिश्चित करना भी है।

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, ने कहा कि पिछले दशक में विकसित और जारी की गई फसल किस्मों की संख्या पिछले चार से पांच दशकों में जारी की गई किस्मों की तुलना में अधिक हैं जो देश में कृषि अनुसंधान को दी गई अभूतपूर्व गति और प्राथमिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सभी किस्मों का विकास जलवायु लचीलेपन, बायोफोर्टिफिकेशन, प्राकृतिक और जैविक खेती प्रणालियों के लिए उपयुक्तता तथा अम्लीय एवं खारी मिट्टी जैसी चुनौतियों का समाधान करने पर केन्द्रित होगा, ताकि कृषि को अधिक टिकाऊ एवं उभरते तनावों के प्रति लचीला बनाया जा सके।

सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि बीज के क्षेत्र में एक साथ सुधार, परिवर्तन तथा जानकारी दी जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नवाचार किसानों तक जल्दी और पारदर्शी तरीके से पहुंचें। उन्होंने कहा कि बीज की उपलब्धता को मजबूत करने के लिए बीज गुणन दर को 1.5 से 2 गुना बढ़ाया गया है जबकि राष्ट्रीय एवं राज्य बीज निगम सस्ती कीमतों पर गुणवत्ता वाले बीज सुनिश्चित कर रहे हैं।

श्री चतुर्वेदी ने कहा कि भाकृअनुप की देखरेख में बीज ट्रेसबिलिटी तथा निजी क्षेत्र के अनुसंधान की मान्यता से नई किस्में किसानों तक एक से दो साल पहले पहुंच सकेंगी। 1969 में किस्मों की अधिसूचना शुरू होने के बाद से, 57 सालों में 7,205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया गया है। इनमें से, 3,236 किस्में अकेले पिछले 11-12 सालों में अधिसूचित की गईं जिसमें पिछले पांच सालों में 1,661 किस्में शामिल हैं जो किस्मों के विकास में तेज़ी से बढ़ोतरी को दिखाता है।

हाल ही में जारी की गई 184 किस्मों में 122 अनाज, 6 दालें, 13 तिलहन, 11 चारा फसलें, 6 गन्ना, 24 कपास (जिसमें 22 बीटी कपास शामिल हैं) और जूट और तंबाकू की एक-एक किस्म शामिल हैं। भाकृनुप संस्थानों, राज्य/केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा निजी बीज कंपनियों द्वारा विकसित ये किस्में जलवायु-अनुकूल, अधिक उपज देने वाली तथा प्रमुख कीटों और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी हैं। कई किस्मों में विशेष गुण होते हैं जैसे लवणता, सूखा, कम फास्फोरस, शाकनाशी, कीटों और बीमारियों के प्रति सहनशीलता, जल्दी पकना, बायोफोर्टिफिकेशन, उच्च प्रोटीन, दाना न झड़ना तथा कई बार कटाई वाली चारे की क्षमता। इनमें बेहतर चावल, मक्का, बाजरा, दालें, तिलहन, गन्ना, कपास, जूट और चारा फसलें शामिल हैं जो विशिष्ट तनावों और उत्पादन प्रणालियों के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

 

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