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एटा में SBI शाखा के गेट पर भवन मालिक ने लगाया ताला, 57 लाख किराया शेष

March 30, 2026

एटा में SBI शाखा के गेट पर भवन मालिक ने लगाया ताला, 57 लाख किराया शेष

2018 में खत्म हुआ एग्रीमेंट फिर भी नहीं खाली किया भवन

एटा 30 मार्च उप्रससे। जनपद में कस्बा अलीगंज स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के गेट पर भवन स्वामी ने ताला लगा दिया। आरोप है कि बैंक ने पिछले 38 महीनों से किराए का भुगतान नहीं किया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इस घटना से बैंक के हजारों ग्राहकों के सामने लेनदेन का संकट खड़ा हो गया है।

भवन स्वामी रमेश चंद्र और उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से किराया भुगतान के लिए अवगत कराया था। इसके बावजूद बैंक की ओर से लगातार टालमटोल की जाती रही। परिवार का कहना है कि जब बार-बार कहने के बाद भी न तो किराए का समाधान हुआ और न ही कोई स्पष्ट जवाब मिला, तब मजबूर होकर बैंक के गेट पर ताला लगाने का फैसला लिया गया।

2008 से 2018 तक की अवधि का था एग्रीमेंट

भवन स्वामी रमेश चंद्र पुत्र गिरिराज सिंह, मुन्नी देवी, अनिल कुमार गुप्ता, रचना गुप्ता, आरती गुप्ता और बैंक के बीच वर्ष 2008 में एक किराया समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत बैंक को भवन 10 वर्षों के लिए दिया गया था और 50 हजार रुपए प्रतिमाह किराया तय किया गया था। यह एग्रीमेंट वर्ष 2018 में समाप्त हो गया था।

भवन स्वामियों का कहना है कि एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी अगले पांच वर्षों तक शाखा आपसी समझौते के आधार पर उसी भवन में संचालित होती रही। इस दौरान बैंक को कई बार किराया संशोधन और भवन खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि बैंक अधिकारियों को इस संबंध में कानूनी रूप से लिखित नोटिस और मौखिक सूचना दोनों दी गई थीं, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। जनवरी 2023 में बैंक की ओर से 1 लाख 51 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से किराया बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, इस पर कोई नया एग्रीमेंट साइन नहीं हुआ। इसके बाद भी शाखा उसी भवन में चलती रही। बैंक को भवन खाली करने के लिए भी नोटिस दिया था, लेकिन इस पर भी कोई असर नहीं पड़ा।
16 मार्च को भवन स्वामी की ओर से अधिवक्ता अंकित प्रताप सिंह शाक्य के माध्यम से बैंक को अंतिम नोटिस भेजा गया। जब इसके बाद भी कोई जवाब नहीं मिला, तो सुशील कुमार गुप्ता और अन्य साझेदारों ने बैंक के मुख्य द्वार पर नोटिस चस्पा कर ताला लगा दिया। इस कार्रवाई के बाद शाखा पर पहुंचे ग्राहक असमंजस की स्थिति में दिखे और कई लोगों को वापस लौटना पड़ा। बैंक में ताला लगने से शहर के व्यापारियों, खाताधारकों और स्थानीय ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रोजमर्रा के नकद लेनदेन, जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और अन्य बैंकिंग कार्य प्रभावित हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा तो इसका असर बाजार और आम लोगों की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा।
पूरे मामले में बैंक प्रबंधन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शहर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अब प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार कर रहे हैं।

भवन स्वामी सुशील कुमार गुप्ता ने बताया कि बैंक और उनके बीच 10 साल का एग्रीमेंट था, जो 2018 में समाप्त हो गया था। इसके बाद करीब पांच वर्षों तक बैंक पुराने तय किराए पर ही भवन में चलता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान लगातार किराया बढ़ाने और भवन खाली कराने की कोशिश की गई, लेकिन बैंक ने न तो किराया बढ़ाया और न ही भवन खाली किया। उनके अनुसार, बैंक पर करीब 57 लाख रुपए किराया बकाया है।

एटा में दो बार हुआ अपंजीकृत अस्पताल सील, उसके बाद भी हो रहा मरीजों का इलाज

सीएमओ की कार्यवाही पर उठे सवाल

एटा 30 मार्च उप्रससे। जनपद में कस्बा जैथरा स्थित भारतीय स्टेट बैंक के पास एम्स नाम से संचालित अपंजीकृत अस्पताल हमेशा से विवादों में रहा है। इस अस्पताल में कई गंभीर बीमारियों के सफल इलाज का दावा किया जाता है। अस्पताल में लगा बोर्ड कई रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर के नाम और उनकी उपलब्धियों को दर्शाता है। जबकि यहां बिना डिग्री डिप्लोमा के अपशिष्ट डॉक्टर यहां मरीजों का इलाज करते हैं। कई बार गर्भपात जैसी जटिल प्रक्रिया इन्ही झोलाछाप चिकित्सकों के द्वारा कराई जाती है। पिछले वर्ष तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी उमेश चंद्र त्रिपाठी ने इसी अस्पताल को सीज कर दिया था। अस्पताल संचालक ने किसी युक्ति से सील खुलवाकर दोबारा से देहात क्षेत्र से आने वाले सीधे-साधे लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना आरंभ कर दिया।

20 मार्च शुक्रवार को शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फिर छापा मारा। इस दौरान टीम को कई खामियां मिली किंतु उन कमियों को नजर अंदाज करते हुए केवल ऑपरेशन थिएटर को सील कर खानापूर्ति की गई। अस्पताल संचालक तथाकथित डॉक्टर दानिश से स्पष्टीकरण मांगा गया। स्वास्थ्य विभाग के लचर रवैया ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यहां कितना भी कानून का उल्लंघन करो सब जायज है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में दलालों व चापलूसों के चंगुल में फंसे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अवैध को वैध कर दिया जाता है। इसी कारण फर्जी डॉक्टर बनकर इलाज करने वाला डॉक्टर दानिश स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से स्थानीय लोगों की आंखों में धूल झोंककर हर बार कानूनी शिकंजे से बच जाता है।

सूत्रों के अनुसार चिकित्सा विभाग पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत बताई जाती है। अस्पताल से होने वाली मोटी कमाई का एक हिस्सा मुख्य चिकित्सा अधिकारी के ऑफिस में पहुंचाया जाता है। इसी वजह से हर बार वह कानूनी शिकंजे से बच निकलता है और कुछ समय बाद अपना कारोबार दोबारा शुरू कर देता है। जबकि नियमानुसार बिना पंजीयन अस्पताल चलाना पूरी तरह अवैध है। पकड़े जाने पर जुर्माना और संचालक के विरुद्ध एफ आई आर दर्द कराए जाने का प्रावधान है।

वेस्ट यूपी राज्य की मांग, कितना समर्थन

Editorial Posted on 30.03.2026, Time 06.26 AM , Monday, By Editor Sarvesh Kumar Singh 

West UP State

पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की बात एक बार फिर से उठी है और यह बात उठाई है बसपा की अध्यक्ष बहन मायावती ने। तो यह प्रश्न एक बार फिर यह चर्चा में आ गया है कि क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव जो 2027 में होना है उसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा अहम रूप से उठेगा और क्या यह एक खास मुद्दा बन पाएगा।

बहन मायावती ने एक ट्वीट किया है। वैसे यह ट्वीट तो जो कल प्रधानमंत्री का भाषण हुआ, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कल उद्घाटन हुआ । उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और तमाम नेता वहां मौजूद थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बहन मायावती ने ट्वीट में यह कहा है कि इस एयरपोर्ट का पूरा प्रोजेक्ट , नक्शा और इसकी भूमिका सब कुछ हमारी सरकार में बन चुकी थी। अगर केंद्र सरकार ने उस समय जो केंद्र में यूपीए की सरकार थी, कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार थी, अगर उसने अड़ंगा ना लगाया होता और हमारा सहयोग किया होता, तो यह पहले ही बन चुका होता। यह जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट दरअसल बहुजन समाज पार्टी की कल्पना है और उसने ही इसकी भूमिका तैयार की थी। उसने ही निर्माण के लिए पहल भी की थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आगरा एक्सप्रेसवे बना उसी तरह से यह भी अब तक बन चुका होता। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी कटाक्ष किए। उन्होंने कह समाजवादी पार्टी की सरकार आई 2012 में और उसने हमारी सरकार द्वारा शुरू किए गए जन कल्याण के कार्य गरीबों के उत्थान के लिए कार्य और योजनाएं बंद करने का उन्हें पलटने का नाम बदलने का काम किया।  तमाम जो महापुरुषों के नाम पर हमने नगरों का नामकरण किया उन्हें बदल diya।

समाजवादी पार्टी सरकार ने दलित महापुरुषों के नाम हटा दिए गए और वह केवल बदले की भावना से ही काम करते रहे। इसके साथ ही मायावती ने जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही है वह सबसे आखिर में अपने ट्वीट में कही है।मायावती जी ने कहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा भी अहम है और यह बनना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच की स्थापना की बात को भी बल दिया। यह दो मांगे बहुत लंबे समय से या कहा जाए तीन से चार दशक से चली आ रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच पश्चिम उत्तर प्रदेश में बने इसकी मांग तो लगभग 40 साल पुरानी है। लेकिन आज तक उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। बड़ा राज्य होने के कारण दो या तीन राज्य बनाने की बात भी बार-बार होती रही है। पश्चिम उत्तर प्रदेश अलग राज्य होना चाहिए। यह मांग कई मंचों से उठी लेकिन कभी भी प्रभावी रूप से इसकी ना तो पैरवी हो पाई और ना ही कोई दल इसे प्रभावी रूप से उठाने के लिए तैयार हो पाया। हां, यह बात जरूर है कि बीच-बीच में समय-समय पर हरित प्रदेश के नाम पर इस मांग को राष्ट्रीय लोकदल उठाता रहा। लेकिन अब राष्ट्रीय लोकदल भी इसके बारे में कोई बात नहीं करता।

मायावती जी की जब सरकार थी तो उन्होंने तीन बार पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग करके एक नया राज्य बनाने की और पूरे उत्तर प्रदेश के विभाजन की की मांग रखी थी। उन्होंने इसके लिए विधानसभा से प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार के पास भेजे भी थे। उन प्रस्तावों में पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ-साथ एक पूर्वांचल राज्य और बुंदेलखंड राज्य को अलग से बनाने की मांग की गई थी। लेकिन उस समय की केंद्र सरकारों ने इन प्रस्तावों पर भी कोई ध्यान नहीं दिया।

अब मायावती ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले इस मुद्दे को फिर से उठाकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है और यह उम्मीद भी जगा दी है पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों में कि उनको एक नया राज्य मिल सकता है अगर बहुजन समाज पार्टी का साथ दें तो। इसके साथ ही बुंदेलखंड में भी यह मांग उठती रही है कि अलग राज्य बने। पूर्वांचल में भी इसकी मांग होती रही है।

भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी चर्चा होती है। भारतीय जनता पार्टी भी यूं तो अलग राज्य के मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है। लेकिन उत्तर प्रदेश को अलग करने के लिए अभी तक कोई निर्णय नहीं ले सकी है। पश्चिम उत्तर प्रदेश अगर बनता है तो ये पश्चिम की जनता के लिए एक बड़ा ही लाभकारी और सुविधाजनक राज्य होगा क्योंकि उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की दूरी भी बहुत ज्यादा है। तमाम वादकारियों को इलाहाबाद पहुंचने में बहुत कष्ट होता है। तो यूं तो इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच संभवत नहीं मिलेगी जब तक कि राज्य नहीं बनेगा। जब राज्य बनेगा तो स्वाभाविक रूप से हर राज्य का एक हाई कोर्ट होता है और वह हाई कोर्ट फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश को स्वाभाविक रूप से मिल जाएगा। अब देखना पड़ेगा कि कितना समर्थन होता है। क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता मायावती जी की इस मांग के साथ खड़ी होती है और इस मांग के साथ ही इसको बल मिलता है।

यह बात भी स्पष्ट है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग करने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी कभी भी साथ नहीं आई है। समाजवादी पार्टी नीतिगत रूप से यह मानती है कि राज्य का विभाजन उचित नहीं है। यह बात मुलायम सिंह यादव जी ने भी स्पष्ट कर दी थी कि वह राज्य के विभाजन के पक्ष में नहीं है। देखना है कि राज्य का विभाजन होता है या नहीं होता है या यह चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएगा और अगर चुनावी मुद्दा बनेगा भी तो यह कितना प्रभावी मुद्दा बनेगा आने वाले विधानसभा चुनाव में। लेकिन बहन मायावती ने एक बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर बहस छेड़ दी  चर्चा छेड़ दी है। इसके लिए जरूरी है,  जनमानस तैयार हो। लोग खड़े हो और लोग इस मांग को प्रभावी रूप से उठाएं तब शायद राजनीतिक निर्णय हो सकता है।

सर्वेश कुमार सिंह

The demand for a separate state for western Uttar Pradesh has been raised once again by BSP president Mayawati. So the question has once again come up as to whether the issue of western Uttar Pradesh as a separate state will figure prominently in the Uttar Pradesh Assembly elections to be held in 2027 and whether it will be able to become a major issue.

March 29, 2026

श्रीकृष्ण जन्मभूमि और ईदगाह मामले की सुनवाई अब 10 अप्रैल को

Allahabad High Court

प्रयागराज, इलाहाबाद हाईकोर्ट में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद मामले की सुनवाई अब अगली तारीख पर होगी। यह तारीख 10 अप्रैल निर्धारित की गई है। इसि मामले की सुनवाई शनिवार को होनी थी। संबंधित पक्षों की ओर से समय पर जवाब दाखिल नहीं हो सके। इस कारण सुनवाई टल गई। कोर्ट ने अब 10 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।

अमेरीकी शहरों में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन

Agitation against Donald Trum in America

वाशिंगटन, 29 मार्च 26,अमेरिका और यूरोप में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। कई शहरो में लोग नो किंग्स के नारे के लिखे बैनर और प्लेकार्ड लेकर प्रदर्शन में पहुंचे हैं। ये प्रदर्शन डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति, आब्रजन नीति के खिलाफ हो रहे हैं।

प्रदर्शनों में लाखों लोग देश भर के शहरों में नो किंग्स के नारे के साथ एकत्रित हुए। प्रदर्शन के आयोजकों ने कहा कि ये प्रदर्शन एक समन्वित राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा थे, जिसके तहत देश भर में तीन हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।

सेंट पाल स्थित मिनेसोटा स्टेट कैपिटल में ट्रंप के खिलाफ हुए प्रदर्शन में सबसे ज्यादा भीड देखी गई है। अनुमान है कि यहां दो लाख से अधिक लोग एकत्रित हुए और प्रदर्शन किया।

 

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