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सात प्रतिशत वृद्धि के साथ भारत का ओद्योगिक प्रदर्शन मजबूतः निर्मला सीतारमण

January 30, 2026

सात प्रतिशत वृद्धि के साथ भारत का ओद्योगिक प्रदर्शन मजबूतः निर्मला सीतारमण

बजट पूर्व आर्थिक समीक्षा संसद के दोनों सदनों प्रस्तुत

FM NIRMALA SITHARAMAN PRESENTED ECONOMIC SURVEY IN PARLIAMENT

संसद में बजट 2026-27 के पूर्व आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत करती हुईं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण

Published on 30 JAN 2026 Time: 07.04 AM, Source: PIB

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 (पीआईबी) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि वित्‍त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में वास्‍तविक आधार पर उद्योग का संवर्धित सकल मूल्‍य (जीवीए) में साल दर साल 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत का औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत बना रहा। इससे पिछले वित्‍त वर्ष (2024-25) में वृद्धि में 5.9 प्रतिशत की नरमी के बाद यह अच्‍छी बढ़ोतरी का संकेत है।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्‍त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण जीवीए क्रमश: 7.72 और 9.13 प्रतिशत बढ़ा। इस सुधार की मुख्‍य वजह विनिर्माण क्षेत्र में जारी ढांचागत बदलाव हैं, जिनमें धीरे-धीरे मंहगे विनिर्माण खंड की ओर रुझान, कॉरिडोर आधारित विकास के माध्‍यम से औद्योगिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की उपलब्‍धता में सुधार और प्रौद्योगिकी को बड़े स्‍तर पर अपनाना एवं कंपनियों का औपचारीकरण शामिल हैं।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि भारत के कुल विनिर्माण मूल्‍य संवर्धन में मध्‍यम और उच्‍च प्रौद्योगिकी गतिविधियों की हिस्‍सेदारी 46.3 प्रतिशत हो गई। इसकी मुख्‍य वजह उत्‍पादन से जुड़े प्रोत्‍साहन (पीएलआई) योजनाएं और भारतीय सेमीकंडटर मिशन जैसी विभिन्न सरकारी पहल के साथ-साथ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, फार्मास्‍युटिकल, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमता में विस्‍तार हैं। समीक्षा में 2023 में प्रतिस्‍पर्धी औद्योगिक प्रदर्शन (सीआईपी) के मामले में भारत की रैंकिंग सुधरकर 37वें पायदान पर पहुंचने के साथ देश की वैश्विक स्थिति में मजबूती की बात कही गई, जबकि 2022 में भारत 40वें पायदान पर था।
समीक्षा कहती है कि भले ही, वाणिज्यिक बैंकों की तरफ से बैंक आधारित औद्योगिक कर्ज में बढ़ोतरी वित्‍त वर्ष 24 के 9.39 प्रतिशत की तुलना में घटकर वित्‍त वर्ष 25 में 8.24 प्रतिशत रह गई, लेकिन विभिन्‍न आकलनों से वर्तमान में जारी विविधीकरण के चलते बैंकों से वित्‍त के स्रोतों के दूर होने के संकेत मिले हैं। अगस्‍त 2025 की मासिक आर्थिक समीक्षा का उल्‍लेख करते हुए समीक्षा कहती है, ‘बैंक कर्ज में कमी वाणिज्यिक क्षेत्र के वित्‍तीय संसाधनों के समग्र प्रवाह में बढोतरी से मेल खाती है। वित्‍त वर्ष 20 से वित्‍त वर्ष 25 के दौरान गैर बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए वित्‍त के प्रवाह में 17.32 की सीएजीआर बढोतरी दर्ज की गई।
मुख्‍य इनपुट उद्योग
आर्थिक समीक्षा जोर देकर कहती है कि भारत के इस्‍पात और सीमेंट क्षेत्र में दुनिया के दूसरे बड़े उत्‍पादक बने रहने के साथ मुख्‍य उद्योगों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा बड़ा सीमेट उत्‍पादक है। प्रति व्‍यक्ति 540 किलोग्राम के वैश्विक औसत की तुलना में भारत में सीमेंट की घरेलू खपत प्रति व्‍यक्ति लगभग 290 किलोग्राम है। समीक्षा कहती है कि सरकार का मुख्‍य रूप से राजमार्ग, रेलवे, आवासीय योजनाओं, स्‍मार्ट सिटीज जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ग्रामीण विकास एवं औद्योगिक वृद्धि पर जोर है, जिससे सीमेंट की मांग में खासी बढ़ोतरी का अनुमान है।
निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र से मजबू‍त घरेलू मांग के चलते, बीते पांच साल में इस्‍पात क्षेत्र में व्‍यापक बदलाव देखने को मिला।
वित्‍त वर्ष 25 में 1,047.52 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्‍पादन के साथ भारत का कोयला उद्योग ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उत्‍पादन बीते वित्‍त वर्ष के 997.83 एमटी की तुलना में 4.98 प्रतिशत ज्‍यादा था।
रसायन और पेट्रो-रसायन क्षेत्र की अर्थव्‍यवस्‍था के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका बनी रही, जिसने वित्‍त वर्ष 24 में समग्र विनिर्माण क्षेत्र के जीवीए में 8.1 प्रतिशत का योगदान किया।
वित्‍त वर्ष 15-25 के  दौरान वाहन उद्योग के उत्‍पादन में लगभग 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को प्रोत्‍साहन देने के लिए कई कदम उठाए। समीक्षा में उल्‍लेख किया गया कि सरकारी पहलों के चलते हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
समीक्षा के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रणनीतिक‍ नीतिगत हस्‍तक्षेपों में ऑटोमोबाइल और वाहन कलपुर्जा उद्योग के लिए पीएलआई स्कीम (पीएलआई-ऑटो स्‍कीम), ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री सेल (एसीसी) बैटरी स्‍टोरेज’ के लिए पीएलआई स्‍कीम (पीएलआई एसीसी स्‍कीम), पीएम ई-ड्राइव स्‍कीम, पीएम ई-बस सेवा-पेमेंट सिक्‍योरिटी मैकेनिज्‍म (पीएसएम) स्‍कीम, स्‍कीम टू प्रमोट मै‍न्‍युफैक्‍चरिंग और इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार्स इन इंडिया (एसएमईसी) शामिल हैं।
समीक्षा में उल्‍लेख किया गया है कि वित्‍त वर्ष 22 के सातवीं की तुलना में वित्‍त वर्ष 25 में तीसरी बड़ी निर्यात श्रेणी बनने के साथ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सेक्‍टर हाल के वर्षों में बड़े ढांचागत बदलाव का साक्षी बना है। इस वृद्धि को घरेलू उत्‍पादन और निर्यात (चार्ट VIII. 16) में शानदार बढ़ोतरी से बल मिला है। इस बढ़ोतरी के केंद्र में मोबाइल विनिर्माण खंड रहा, जिसका उत्‍पादन मूल्‍य वित्‍त वर्ष 15 के 18,000  करोड़ रुपए से 30 गुना बढ़कर वित्‍त वर्ष 25 में 5.45 लाख करोड़ रुपए के स्‍तर पर पहुंच गया।
वॉल्‍यूम के लिहाज से दुनिया में तीसरे पायदान पर मौजूद भारत का फार्मास्‍युटिकल उद्योग वित्‍त वर्ष 25 में 191 देशों को निर्यात के साथ वैश्विक जेनेरिक्स की मांग में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। समीक्षा में उल्‍लेख किया गया है कि पिछले दशक (वित्‍त वर्ष 15 से वित्‍त वर्ष 25) में निर्यात में 7 प्रतिशत सीएजीआर बढ़ोतरी के साथ वित्‍त वर्ष 25 में फार्मास्‍युटिकल क्षेत्र का सालाना टर्नओवर 4.72 लाख करोड़ रुपए के स्‍तर पर पहुंच गया।
भविष्‍य के विकास के लिए एक रोडमैप
वैश्विक स्‍तर पर चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, लॉजिस्टिक, कारोबार में सुगमता और नवीन प्रणालियों में सुधार के साथ भारत का औद्योगिक क्षेत्र अच्‍छी तेजी का गवाह बना है। आर्थिक समीक्षा कहती है कि औद्योगीकरण के अगले दौर के लिए देश को आयात विकल्‍प पर आधारित मॉडल की तुलना में व्‍यापकता, प्रतिस्‍पर्धा, नावाचार और जीवीसी में व्‍यापक एकीकरण पर जोर देना होगा। हर खंड में पूर्ण आत्‍मनिर्भरता हासिल करने के बजाए, भारत को विविधीकरण के माध्‍यम से रणनीतिक लचीलेपन का विकास और व्‍यापक क्षमताएं हासिल करने की जरूरत है। इसके लिए आरएंडडी, प्रौद्योगिकी को अपनाने, कौशल और गुणवत्‍ता प्रणालियों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने की जरूरत है।

January 29, 2026

अक्रूर इंटर कॉलेज में लेंटर गिरने से तीन मजदूर घायल, एक की हालत गंभीर

हाथरस, 29 जनवरी (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा)। शहर के बागला कॉलेज रोड स्थित अक्रूर इंटर कॉलेज परिसर में निर्माण कार्य के दौरान बड़ा हादसा हो गया। भगवान भोलेनाथ मंदिर के बाहर लेंटर डालते समय शटरिंग और सरिया सहित लेंटर अचानक नीचे गिर गया, जिससे मलबे में दबकर तीन मजदूर घायल हो गए। घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और क्षेत्र में हड़कंप फैल गया।
स्थानीय लोगों और अन्य मजदूरों की मदद से घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया और तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की पहचान भारत पुत्र रमेश चंद्र, योगेंद्र पुत्र मनोहर लाल निवासी अमरपुर घना थाना हाथरस गेट तथा अजय पुत्र सुनील निवासी नगला इमलिया थाना हाथरस जंक्शन के रूप में हुई है। इनमें भारत की हालत गंभीर होने पर उसे अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही घायलों के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद मौके से ठेकेदार और निर्माण कार्य का मालिक फरार हो गए। थाना कोतवाली हाथरस गेट पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

हाथरस में अलंकार अग्निहोत्री का ऐलान 1 फरवरी को भारत बंद, 7 को हाथरस से दिल्ली तक पैदल मार्च

पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री बोले कानून वापस नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
Alankar Agnihotri in Hathras

हाथरस में अलंकार अग्निहोत्री सवर्ण नेताओं से वार्ता करते हुए

वार्ता करते  पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री व  राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरिया

Published on 29.01.2026, Thursday, 10:21 PM, Report by Neeraj Chakrapani, Hathras, UP Samachar Sewa
हाथरस, 29 जनवरी (यूपी समाचार सेवा)। इस्तीफा दे चुके बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के साथ संयुक्त रूप से हाथरस में प्रेस वार्ता कर यूजीसी कानून के विरोध में 1 फरवरी को भारत बंद तथा 7 फरवरी को हाथरस से दिल्ली पीएमओ कार्यालय तक पैदल मार्च का एलान किया।
प्रेस वार्ता के दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने सांसदों और विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि समय रहते इस कानून पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केवल रोक लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे यूजीसी कानून को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने सवर्ण समाज से आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरिया ने कहा कि यह कानून सवर्ण समाज के भविष्य पर सीधा प्रहार है और इससे बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कानून वापस नहीं लिया तो आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा।
इससे पूर्व जिले में पहुंचने पर राष्ट्रीय सवर्ण परिषद द्वारा निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का फूल मालाओं से स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग मौजूद रहे।
अलंकार अग्निहोत्री ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर रोक लगाए जाने को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक कॉर्पोरेट कंपनियों के हित में काम कर रहे हैं और यह कानून देश को नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने शहीद पार्क में शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का धन्यवाद है जिसने इस कानून पर रोक लगाई और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन के तहत सवर्ण समाज को पहले से ही अपराधी मानकर नियम लागू किए गए, जिससे समाज के बच्चों का भविष्य संकट में पड़ सकता था।
उन्होंने कहा कि जब किसी भी जनप्रतिनिधि की ओर से इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तब उन्हें लगा कि सिस्टम के अंदर के व्यक्ति को बाहर आकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अब जनता जाग चुकी है और यह कानून किसी भी कीमत पर लागू नहीं हो पाएगा।
प्रेस वार्ता में परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

आर्थिक सहयोग का एक नया युग

भारत -यूरोपियन यूनियन का ऐतिहासिक व्यापार समझौता

Published on 29.01.2026, Thursday, 10:05 PM, Article by Mratunjay Dixit, Lucknow, UP Samachar Sewa

मृत्युंजय दीक्षित
भारत और यूरोपियन यूनियन के मध्य 27 जनवरी 2026 को हुआ ससझौता एक व्यापक बदलाव वाला समझौता है। यह बहु प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता बिना किसी दबाव के, लम्बी सहज सरल वार्ताओं के उपरांत यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में सपंन्न हुआ। इस समझौते से भारत और यूरोप के के मध्य व्यापारिक संबंधों के प्रगाढ़ होने की प्रबल सम्भावना है।
भारत और यूरोपियन यूनियन के साथ हुआ यह समझौता वर्ष 2027 में लागू होगा और तब तक सभी 27 सदस्य देशों की संसद के द्वारा इसका पारण किया जाएगा। यह समझौता कई दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है इससे सर्वाधिक लाभ कृषि व किसानों को होगा क्योंकि डेयरी सेक्टर आदि इससे मुक्त रखा गया है। इससे कपड़ा, चमड़ा व फुटवियर, हस्तशिल्प फर्नीचर आदि क्षेत्रो के लिए नए अवसर खुलेंगे। इलेक्ट्रानिक उत्पादों पर टैरिफ 14 प्रतिशत से घटकर शून्य रह जाएगा जिस कारण विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से सहायता प्राप्त होगी। यूरोपीय बाजारों में आसान पहुंच से बिल्ड इन इंडिया आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और भारत तेजी से निर्यात बढ़ाने में सक्षम होगा। रत्न आभूषणों पर भी टैरिफ शून्य हो जाएगा जिस कारण डिजाइन और शुद्धता आधारित आभूषण निर्यात में यूरोपीय बाज़ारों के साथ वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़त मजबूत होगी। टैरिफ में कटौती से यूरोपीय बाज़ारों मे पहुंच होगी लागत कम होगी जिससे प्लेन सोने और जड़े हुए आभूषणों की ईयू में मांग बढ़ेगी। यूरोपीय थोक विक्रेता एवं बड़े ब्रांड के साथ गहरे संबंध बनाने और नए आर्डर पाने के अवसर भी मिलेंगे। मुक्त व्यापार समझौता कृषि और समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात बढ़ाने में सक्षम होगा। किसानों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की आय मे वृद्धि होगी। मछली पालन प्रोसेसिंग और लॉजिटिक्स क्षेत्र में नौकरियां बढेंगी। काली मिर्च और इलायची जैसे मसाले यूरोप में बेहतर पहुंच का लाभ उठा सकेंगे।समझौता लागू हो जाने के बाद फार्मा -मेडिकल उपकरणों से भी टैरिफ घटकर शून्य हो जाएगा ।
यह समझौता लागू हो जाने के बाद भारत के 17 राज्यों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इनमें पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना ,पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों को बड़ा लाभ होगा। उत्तर प्रदेश को भी इस समझौते का बड़ा लाभ मिलेगा। ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते के कारण प्रदेश की ओद्यौगिक क्षमता कृषि उत्पादन और एसएमएमई सेक्टर को नई गति मिलने की सम्भावना है। अभी यूपी से होने वाले कुल निर्यात में यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 9 से 12 प्रतिशत है यानी अभी हर वर्ष 210 हजार करोड़ रु का निर्यात होता है जो आगामी पांच वर्ष में बढ़कर 40 हजार करोड़ रु होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। मुक्त व्यापार समझौता लागू हो जाने के बाद भारतीयों के लिए यूरोपीय कारें सस्ती और सुलभ हो जाएंगी।
यह एफटीए मात्र एक रणनीतिक दस्तावेज नहीं अपितु भारत और यूरोपियन यूनियन के लिए बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण में आगे बढ़ाने का अवसर देने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस समझौते के धरातल पर उतरने के कारण एक नई आर्थिक क्रांति का उदय होगा। यूरोपियन बाज़ारों में 93 प्रतिशत भारतीय निर्यात को बिना शुल्क प्रवेश प्राप्त होने जा रहा है यह कोई सामान्य बात नहीं है। यही कारण है कि प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी ने ”मन की बात” में उद्यमियो को गुणवत्ता (क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी) का मूल मंत्र दिया है। अब भारतीय उद्यमियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादकता का स्तर उन्नत करना ही होगा।
मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह हमारे किसानों तथा छोटे उद्योगों की यूरोपीय बाज़ारों तक पहुँच आसान बनाएगा । मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। यह सिर्फ व्यापार समझौता नही है यह साझा समृद्धि का नया ब्लू प्रिंट है। बदलती वैश्विक व्यवस्था, बढती भू राजनैतिक अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय तनावों के बीच भारत और यूरोपीय संघ की यह ऐतिहासिक साझोदारी वैश्विक स्थिरता को मजबूती प्रदान करेगी। स्वाभाविक है कुछ वैश्विक ताकतें इस समझौते से असहज हैं। अमेरिका के टैरिफ वार के बीच भारत ने दुनिया के दूसरे देशों को एक नई राह दिखाई है। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की सहमति ने भारत के लिए 27 देशों के बाजारों को खोल दिया है। यह समझौता अब तक का सबसे बड़ा और प्रभावी व्यापार समझौता बन गया है। यही कारण है कि इसे मदर ऑफ़ ऑल डील्स कहा जा रहा है।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. – 9198571540

दुर्घटना में घायल एवं दिवंगत युवक के परिवार की हर संभव मदद की जाएगी -विधायक रामरतन


ललितपुर ML A

Published on 29.01.2026, Thursday, 09:57 PM, Report by Ajay Varya , Lalitpur, UP Samachar Sewa

ललितपुर, 29 जनवरी (उप्रससे अजय बरया)- सदर विधायक रामरतन कुशवाहा और लोकप्रिय जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र रावत ने बरखेरा में दुर्घटना में दिवंगत शिवेंद्र सिंह और घायलों अनुज,शंकर यादव के परिवार में जाकर ढाढस बंधाया। सभी तरह की मदद का आश्वासन दिया तथा झांसी सांसद प्रतिनिधि मनीष दीक्षित से सभी समुचित चिकित्सीय सुविधाएं दिलाने और हर संभव सहयोग करने के लिए अनुरौध किया।
भाजपा और विधायक रामरतन कुशवाहा ने कहा कि की विधान सभा का हर वोटर हमारा परिवार है।पूरी भाजपा उनके साथ है। हम हर तरीके से न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे

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