Article Posted on 19.04.2026 Time 07.48 PM , Reservation bill for Women in Parliament, PM Narendra Modi, Writer Name: Sarvesh Kumar Singh
महिला आरक्षण बिल से संबंधित विधेयक के शुक्रवार 17 अप्रैल को लोकसभा में गिर जाने के बाद एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम कल शाम को हुआ। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आए और उन्होंने 8:30 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन यह उनके पिछले संबोधन से बिल्कुल अलग है। यह संबोधन यूं तो एक बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर है। लेकिन यह राजनीतिक संबोधन भी कहा जा सकता है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें राजनीतिक घटनाक्रम और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। इतना तीखा हमला शायद ही कभी प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर बोला हो। चाहे वो चुनावी रैली हो, संसद में उनके भाषण हो या जनसभाएं हो। प्रधानमंत्री ने कभी इतनी तीखी बातें और इतना कड़ा हमला कभी कांग्रेस और विपक्ष पर नहीं किया जितना उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में किया।
उन्होंने एक तरह से कांग्रेस को और पूरे विपक्ष को आईना दिखा दिया। भारत की आजादी से लेकर आज तक के कांग्रेस के फैसलों की समीक्षा कर दी और उन्होंने कांग्रेस को एंटी रिफॉर्म दल घोषित कर दिया और विपक्ष के बारे में तो उन्होंने कहा कि संपूर्ण विपक्ष ने कल जो महिला आरक्षण पर फैसला लिया और उस बिल को पास नहीं होने दिया। बिल को गिरा दिया। यह इन विपक्षी दलों ने पाप किया है। उन्होंने पाप की संज्ञा दी और कहा कि इस पाप की सजा इन विपक्षी दलों को भुगतनी पड़ेगी। जनता इसका फैसला सुनाएगी। जनता इसका जवाब देगी
प्रधानमंत्री कल बहुत भावावेश में थे। उनके अंदर का जो आक्रोश था वो साफ झलक रहा था। स्पष्ट झलक रहा था। क्योंकि एक ऐसा बिल जिसके लिए महिलाओं ने सपना सजोया था और जिसके लिए राजनीतिक दल भी 40 साल से प्रयास कर रहे थे, मांग कर रहे थे, चाहे सरकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रही हो या सरदार मनमोहन सिंह जी की रही हो या उसके पहले भी पीवी नरसिंह राव जी की रही हो, वीपी सिंह की सरकार रही हो। महिला आरक्षण का मुद्दा हमेशा उठता रहा और सभी दल कहते रहे कि हम महिला आरक्षण बिल लाना चाहते हैं। महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाना चाहिए। लेकिन जब आरक्षण देने का समय आया और लोकसभा में एक बिल आया। एक नहीं तीन बिल आए। जिसमें पहला बिल 131वां संशोधन विधेयक था। संविधान संशोधन विधेयक जिसके अनुसार लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जानी है। इस बिल को प्रस्तुत किया गया और जब इस पर मतदान हुआ तो यह पारित नहीं हुआ। संपूर्ण विपक्ष ने इसका विरोध किया और बिल गिर गया। बिल ही नहीं गिरा। इससे महिलाओं के सपने गिर गए। सपने टूट गए, चूरचूर हो गए।
इसी बात की पीड़ा को प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया। उन्होंने चुन चुन कर दलों के नाम लिए। उन्होंने टीएमसी का नाम लिया कि बंगाल की महिलाएं टीएमसी को माफ नहीं करेंगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के सपनों को तोड़ दिया और अब इस पार्टी का डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से कोई मतलब नहीं है। उत्तर प्रदेश की महिलाएं समाजवादी पार्टी को सबक सिखाएंगी। उन्होंने दक्षिण की पार्टियों को, स्टालिन की पार्टी पर भी निशाना साधा और सबसे तीखा हमला तो उन्होंने कांग्रेस पर ही किया।
उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने कैसे-कैसे रिफॉर्म का विरोध किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब जब विकसित भारत के लिए कोई रिफॉर्म होता है तो कांग्रेस उसका विरोध करती है। चाहे वो रिफॉर्म सीएए बिल का हो, चाहे वो जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का हो, चाहे वो तीन तलाक का मुद्दा हो, चाहे यह महिला आरक्षण का बिल। हमेशा कांग्रेस ने विरोध किया और इन रिफॉर्म के साथ वह कभी खड़ी नहीं हुई।
उन्होंने याद दिलाया कि 40 साल तक ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को कांग्रेस ने दबाए रखा। कांग्रेस दबाने की, भटकाने की राजनीति करती रही और वही हस महिला आरक्षण का कांग्रेस ने किया। उन्होंने कांग्रेस को कहा कि कांग्रेस अपने इस कार्य का भी परिणाम भुगतेगी और कांग्रेस को जनता जवाब देगी। एक मौका था कांग्रेस के पास और संपूर्ण विपक्ष के पास कि वे महिलाओं को न्याय दिला सकते थे, सहभागी हो सकते थे। लेकिन वो यह मौका गवा बैठे। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कही।
इसका संबंध राजनीति के उस मुद्दे से था जो लगातार चुनावी मुद्दा भी बनता रहा। चुनावी घोषणा पत्रों में जगह पाता रहा। महिला आरक्षण। इसी पर प्रधानमंत्री ने संबोधन किया। यह समय की मांग थी कि प्रधानमंत्री अपना पक्ष रखें क्योंकि यह पहला ऐसा मौका है। नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 12 साल में जब उनका कोई बिल गिर गया है। हालांकि ये सोचने और समझने की बात सत्तारूढ़ दल के लिए भी है। एनडीए के लिए भी है कि आखिर बिल क्यों गिरा? बिल के लिए आवश्यक बहुमत जुटाने की रणनीति क्यों नहीं बनाई गई? यह भी विचारणीय प्रश्न है।
विपक्ष एकजुट था। विपक्ष तालियां बजा रहा था। मेज थपथपा रहा था। महिलाओं को आरक्षण से वंचित करने के लिए यह महिलाएं देख रही थी। अब फैसला जनता के हाथ है, महिलाओं के हाथ में है कि वह इस पूरे घटनाक्रम को प्रक्रिया को कैसे लेती हैं। हालांकि विपक्ष के भी अपने तर्क हैं। कल राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेस के राज्यसभा में नेता और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बात कही। उनकी बात का भी महत्व है। उसे भी नकारा नहीं जा सकता। उनका अपना पक्ष है। उन्होंने कहा कि यह जो 543 की वर्तमान संख्या है इसी में 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है? इसी में दे दिया जाए। हम साथ देंगे। ये उनका अपना पक्ष है।
लेकिन सत्तारूढ़ दल चाहता है कि सदस्यों की संख्या बढ़ाकर, संसद को विस्तारित करके आरक्षण दिया जाए। कुल मिलाकर अब संसद का यह सत्र था जो बजट सत्र था । 28 जनवरी से शुरू हुआ था। यह 18 तारीख को 18 अप्रैल को समाप्त हो गया। तीन सत्रों में मतलब तीन भागों में यह बजट सत्र पूरा हुआ। यह समाप्त हो गया है और इसके साथ ही अब यह तय हो गया है कि अगला लोकसभा चुनाव बगैर महिला आरक्षण के होगा। यानी कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को संसद में आरक्षण मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
लेखक: वरिष्ठ पत्रकार हैं।


