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अमेरिकी और इजरायल के संयुक्त हमलों का ईरान ने दिया जवाब

February 28, 2026

अमेरिकी और इजरायल के संयुक्त हमलों का ईरान ने दिया जवाब

Posted on 28.02.2026 Time 09.15 PM Saturday

Iran responds to joint US-Israeli strikes

तेहरान 28 फरवरी। अमरीका और इज़राइल के ईरान पर समन्वित हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश में ईरान में सैन्य अभियान शुरू करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मौजूदा ईरानी शासन अमरीका के व्‍यापक राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए खतरा है और इसे रोकने के लिए अमरीकी सेना ने व्यापक सैन्‍य अभियान शुरू किया है।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्‍यामिन नेतन्‍याहू ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन लायन्स रोर के अन्‍तर्गत इज़राइल और अमरीका का संयुक्‍त सैन्‍य अभियान शुरू किए जाने की पुष्टि की है। राष्ट्र को संबोधित एक वीडियो संदेश में उन्होंने इस कार्रवाई को ईरान से उत्पन्न अस्तित्व के संकट से निपटने के लिए आवश्यक बताया।
अमरीका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में व्यापक सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच यह हमले किए गए हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने बताया है कि इजरायली हमलों में ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरज़ादेह और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर के मारे जाने की आशंका है।
इससे पहले इस्राएली सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि पश्चिमी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर व्यापक हमले किए जा रहे हैं।
ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में विस्फोटों की खबर है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तेहरान में विस्फोट से घना धुआं देखा गया। यह हमला सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालयों के नजदीक हुआ। हमलों के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और मोबाइल फोन सेवाएं बाधित हो गई हैं। जानमाल के नुकसान की स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है। इस बीच इस्राएल के हवाई हमलों के बाद इराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है।
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई ठिकानों पर हमला किया है और अबू धाबी, बहरीन तथा कुवैत में विस्फोटों की खबर है। इस्राएली सेना ने ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की पुष्टि की है। रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने देश में आपातकाल घोषित किया है।
उधर, बहरीन ने मनामा में अमरीकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय को मिसाइल हमले में निशाना बनाये जाने की पुष्टि की है। अबू धाबी में एक जबरदस्‍त विस्फोट की खबर है। कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि क्षेत्र में स्थित सभी इस्राएली और अमरीकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए। संयुक्त अरब अमीरात में दुबई हवाई अड्डे पर अगली सूचना तक सभी उड़ानें स्‍थगित कर दी गई हैं।
इस बीच ईरान ने कहा है कि अमरीका और इस्राएल को पूरी ताकत के साथ जवाब दिया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में अमरीका और इस्राएल के संयुक्‍त हमलों की निंदा की और इसे आक्रामक कार्रवाई बताया। ईरानी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद से इस संबंध में तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है।
उधर, कतर के विदेश मंत्रालय ने ईरान के मिसाइल हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि जवाबी हमले का उसका अधिकार सुरक्षित है। कुवैत ने भी ईरानी हमलों के बाद आत्मरक्षा के अधिकार की बात कही है।

ईरान-इजरायल युद्ध रोकने की अंतरराष्ट्रीय मांग

International calls for an end to the Iran-Israel war

नई दिल्ली, 28 फरवरी। पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध पर कई देशों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रूस ने ईरान पर अमरीका और इज़राइल द्वारा किए जा रहे हमलों को तत्काल रोकने का आह्वान किया है और कहा है कि स्थिति को राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान के मार्ग पर वापस लाना आवश्यक है। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन कार्यों का शीघ्रता से निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए जिन्हें उसने गैर-जिम्मेदाराना बताया है और जिनसे क्षेत्र में और अधिक अस्थिरता का खतरा है। मंत्रालय ने कहा कि वह पहले की तरह ही अंतरराष्ट्रीय कानून, आपसी सम्मान और हितों के संतुलन पर आधारित शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रयासों में सहायता करने के लिए तत्पर है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी है कि अमरीका, इस्राएल और ईरान के बीच नए सिरे से संघर्ष छिड़ने से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि फ्रांसीसी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पश्चिम एशिया में राष्ट्र के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। श्री मैक्रों ने ईरान से अपने परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रमों को रोकने और पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को समाप्त करने का आह्वान किया, इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाने का भी आह्वान किया।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लॉयन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा है कि ईरान में हो रहे घटनाक्रम बेहद चिंताजनक हैं। दोनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान में सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, नागरिकों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ निकटतम समन्वय में वे यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि क्षेत्र में यूरोपीय संघ के नागरिकों को पूरा समर्थन प्राप्त हो।

ओमान के विदेश मंत्रालय ने एक वक्‍तव्‍य में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से युद्धविराम लागू करने के लिए तत्काल बैठक बुलाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अंतरराष्ट्रीय कानून के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाने का आह्वान किया। मंत्रालय ने आगाह किया कि ईरान पर अमरीका-इज़राइल के हमले से संघर्ष के ऐसे गंभीर परिणाम उत्पन्न होने का खतरा है जिन्हें क्षेत्रीय स्तर पर ठीक नहीं किया जा सकता। हमले से पहले ओमान अमरीका-ईरान की अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अपनी धरती पर हुए हमलों की निंदा की है और कहा कि ये हमले ईरान द्वारा उसके हवाई क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन करते हुए किए गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि कुवैत इस हमले की गंभीरता और उचित जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवोट ने कहा कि ईरानी जनता को अपनी सरकार के फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेल्जियम को इस बात का गहरा दु:ख है कि राजनयिक प्रयासों से पहले कोई समझौता नहीं हो सका।
नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ने कहा कि इस हमले को इस्राएल ने सुरक्षात्‍मक हमला बताया है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है।

इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं। इंडोनेशिया को अमरीका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने का गहरा अफसोस है। इस कारण पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ गया है। इंडोनेशिया ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद तथा कूटनीति को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है।

फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने हमलों के बाद ईरान और पश्चिम एशिया में फिलीपींस के नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया है। प्रवासी श्रमिक विभाग के अनुसार, 2024 में पश्चिम एशिया में लगभग 21 लाख फिलीपींस के श्रमिक थे।

February 27, 2026

अब आतंकवाद पर होगा निर्णायक “प्रहार“

Mratunjay Dixit, Journalist lucknow
मृत्युंजय दीक्षित
विभाजन की विभीषिका के साथ स्वतंत्र हुआ भारत, स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से पीड़ित रहा किन्तु अभी तक उसके पास आतंकवाद से लड़ने की कोई स्पष्ट नीति या रणनीति ही नहीं थी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति स्पष्ट हुयी। पहली बार माओवाद जैसे आतंकवाद को समाप्त करने के लिए एक तारीख तय की गई और उस दिशा में काम हुआ जिसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। आतंकवादी हमले होने पर सीमा पार जाकर आतंकवादियों का दमन किया जाता है। अब भारत शत्रु के घर में घुसकर बदला लेता है, ऑपरेशन सिंदूर में भारत का क्रोध सम्पूर्ण विश्व ने देखा है।
आतंकवाद के बढ़ते खतरों व देश विरोधी षड्यंत्रों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देश में पहली आतंकवाद रोधी नीति “प्रहार” जारी की है। प्रहार आतंकवाद के खिलाफ एक बहुस्तरीय रणनीति है जो खुफिया जानकारी के आधार पर चरमपंथी हिंसा की रोकथाम और उसे निष्क्रिय करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य आतंकवादियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थको को धन, हथियार और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच से वंचित करना है। इसमें साइबर क्राइम, ड्रोन हमलों. सीमा पार आतंकवाद और जटिल सुरक्षा खतरों से निपटने के सुगठित राष्ट्रीय ढांचे का भी उल्लेख किया गया है।
आजकल बहुत से आतंकवादी संगठन युवाओं की भर्ती के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहे हैं, इंटरनेट के माध्यम से ही साइबर ठगी आदि करके लिए धन संग्रह कर रहे हैं व लोगों की मानसिकता को अपने पक्ष में करने के लिए छद्म तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे हैं, प्रहार रणनीति आतंकवाद के इन नए तरीकों से निपटने का मार्ग दिखाती है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा जारी की गई प्रहार रणनीति, भारत के अन्दर या विदेश से उत्पन्न होने वाले आतंकी खतरों का सामना करने के लिए सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इसमें पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा गया है कि, भारत के पड़ोस में अस्थिरता का इतिहास रहा है जिसके कारण अराजक क्षेत्र उत्पन्न हुए हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र के कुछ देशों ने कभी -कभी आतंकवाद को राज्यनीति के एक साधन के रूप मे इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद भारत आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्टीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। भारत ने हमेशा आतंकवाद और किसी भी तत्व द्वारा, किसी भी घोषित या अघोषित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इसके उपयोग की स्पष्ट व निर्विवाद रूप से निंदा की है।
नीति दस्तावेज में कहा गया है कि भारत लगातार आतंकवाद के पीड़ितों के साथ खड़ा रहा है और इस पर अडिग है कि दुनिया में हिंसा का कोई औचित्य नहीं हो सकता। यही सैद्धांतिक दृष्टिकोण आतंकवाद के विरुद्ध नई दिल्ली की शून्य सहिष्णुता की नीति का आधार है। दस्तावेज में कहा गया है, भारत लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित रहा है, जिसमें जेहादी आतंकवादी संगठन और उनके सहयोगी संगठन भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाने, समन्वय करने, सुविधा प्रदान करने एवं उन्हें अंजाम देने में संलिप्त हैं। भारत अलकायदा और इस्लामिक स्टेट आफ इराक एंड सीरिया जैसे वैश्विक आंतकी समूहों के निशाने पर रहा है। जो स्लीपर सेल्स के माध्यम से देश में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
नई प्रहार नीति मे बताया गया है कि, विदेशीर धरती से संचालित आतंकवादियों ने भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए साजिशें रची हैं और उनके लिए काम करने वाले पंजाब व जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हमलो को अंजाम देने के लिए ड्रोन सहित नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साजो सा’मान प्राप्त करने के लिए संगठित आपराधिक नेटवर्क से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। अब आतकी इंटरनेट के नये तरीकों का भरपूर उपयोग करने लगे हैं।
प्रहार (PRAHAAR) की परिभाषा अंग्रेजी के सात शब्दों मे संयोजित है, जिसमें पहला है पी से प्रिवेंशन यानी नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलो की रोकथाम। दूसरा है आर से रिस्पॉन्स अर्थात त्वरित, आनुपातिक और सुनियोजित सैन्य व नागरिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना। तीसरा है ए से एग्रीगेटिंग इंटरनल कैपासिटीज अर्थात आतंरिक क्षमताओं को एकीकृत करना जिसमें केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और सुरक्षा बलों का आधुनिक तकनीक (AI, ड्रोन) से लैस करना शामिल है। चौथा है एच से ह्यूमन राइट्स एंड रूल आफ ला -खतरों को कम करने के लिए मानवाधिकार और कानून व्यवस्था पर आधारित प्रतिक्रिया। पांचवां ए से अटेन्यूएटिंग रेडिकलाजेशन यानी कट्टरता सहित आतंकवाद में सहायता करने वाली परिस्थितियों को कम करना। छठा भी ए से है – एलाइनिंग इंटरनेशनल एफर्ट्स जिसमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय करना शामिल है तथा अंतिम और सातवां है आर से रिकवरी एंड रेसिलिएंस यानी समग्र समाज को मानसिक और भौतिक रूप से सशक्त बनाना।
प्रहार नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि जेसे ही आतंकी समूहों की साजिश का पता चले उसे उसी समय समाप्त कर देना भी है। गृह मंत्रालय की यह नीति उसी समय आई है जब हाल ही में तमिलनाडु से 6 संदिग्धों को पकड़ा गया है और उनसे काफी सनसनीखेज जानकारियां सामने आ रही है।
भारत सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रधानमंत्री मोदी हर वैश्विक मंच पर दोहराते रहे हैं किंतु अब सरकार ने प्रहार नीति जारी करके अपना संकल्प स्पष्ट कर दिया है कि भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले चाहे जहां पर भी बसे हों बच नहीं सकेंगे।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं . 9198571540

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