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मनरेगा को खत्म करने की साजिशः अखिलेश यादव

January 7, 2026

मनरेगा को खत्म करने की साजिशः अखिलेश यादव

लखनऊ, 07 जनवरी 2026, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से क्या होगा, दरअसल ये मनरेगा को धीरे धीरे खत्म करने की भाजपा की गोपनीय साजिश है।

एक्स पर किये गए पोस्ट में श्री यादव ने कहा कि एक तरफ मनरेगा का बजट कम से कमतर करती जा रही है, तो दूसरी तरफ राज्यों पर पैसा खर्च का इतना दवाब बना दिया गया है कि जीएसटी सिस्टम में केन्द्र से पैसा न मिलने के कारण पहले से ही खाली खजाने से जूझ रहे राज्य, अतिरिक्त बजट की व्यवस्था कहां से कर पाएंगे। तीसरी तरफ सैकड़ों ग्राम सभाओं को अर्बन कैटेगरी मं डालकर उनका बजट भी भाजपा सरकार ने मार दिया है। सही मायने में मनरेगा का नाम बदलना ही नहीं बल्कि उसका राम राम करना ही भाजपा का लक्ष्य है।

January 6, 2026

SIR एसआईआरः यूपी में हटे 2.89 करोड़ मतदाता, पहली ड्राफ्ट सूची जारी

लखनऊ,06 जनवरी, 2026, उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में से एसआईआर प्रक्रिया में 2 करोड़  89 लाख मतदाताओं के नाम हटे हैं। अब सूची में 12 करोड़ 55 लाख मतदाता हैं। इसके पहले मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ 30 हजार 92 थी। यह जानकारी आज मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा CEO UP NAVDEEP RINVA IAS ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने इसके साथ ही पहली ड्राफ्ट सूची भी जारी कर दी।

श्री रिणवा ने बताया विशेष  गहन पुनरीक्षण के दौरान 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाये गए हैं। छह फरवरी तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगीं। जबकि अंतिम मतदाता सूची छङ मार्च को जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले चरण के बाद 18 प्रतिशत मतदाताओं के नाम कट गए हैं। उन्होंने कहा कि जनके नाम पहली ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं वे 6 फरवरी तक फार्म 6 भरकर जमा कर सकते हैं। ताकि उनका नाम जोड दिया जाए। अंतिम मतदाता सूची जारी होने की तिथि 6 मार्च है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी रिणवा ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को प्रक्रिया शुरु हुई थी। पहला चरण 4 नवम्बर से शुरु हुआ, उस वक्त प्रदेश में 15 करोड़ 30 हजार 92 मतदाता थे। उन्होंने बताया कि मतदाता निर्वाचन आयोग की वेबसाइट https://voters.eci.gov.in/download-eroll  https://voters.eci.gov.in/download-eroll पर अपने नाम देख सकते हैं।

उन्होंने बताया कि जो नाम कटे हैं उनमें मृतक वोटरों की संख्या 46.23 लाख है, स्थानान्तरित वोटर की संख्या 2.17 करोड़ है। वहीं जो एक से ज्यादा स्थान पर नाम पाये गए उनकी संख्या 25.47 लाख है। जिनका नाम इस ड्राफ्ट में नहीं आया है उनकी कुल संख्या 2.89 करोड़ है।

January 4, 2026

मनरेगा से बेहतर है वीबी जी राम जी योजनाः शिवराज सिंह चौहान

कांग्रेस ग्रामीण रोजगार योजना के बारे मं भ्रम फैला रही है

नई दिल्ली,04 जनवरी 2026, केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वीबी जी राम जी ग्रामीण विकास योजना मनरेगा से बेहतर है। इस योजना के बारे में कांग्रेस द्वारा अनावश्यक रूप से भ्रम फैलाया जारहा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार की भरमार थी। वे कांग्रेस द्वारा नई ग्रामीण योजना के विरोध में कांग्रेस द्वारा शुरु किये जा रहे आन्दोलन पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मनरेगा में भारी भ्रष्टाचार था। ग्राम सभाओं के सोशल आडिट में 10,51,000 से अधिक शिकायतें भ्रष्टाचार से सम्बन्धित प्राप्त हुई थीं। मनरेगा में एक ही काम को कई बार किया गया दर्शाया गया। मजदूरों की जगह मसीनों से काम करा दिया गया। मनरेगा का पैसा नहरों की सफाई सड़कों पर खर्च हुआ दिखाय दिया गया।

श्री चौहान ने कहा कि मोदी सरकार ने अब तक मनरेगा स्कीम में 8,48000 करोड़ रूपये जारी किये हैं, जबकि यूपीए सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में इसके लिए सिर्फ 2 लाख करोड़ रूपये जारी किये थे। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में ग्रामीण रोजगार योजना के जी राम जी के लिए सरकार 1,51,282 करोड़ रुपये की व्यवस्था करेगी, इसमें केन्द्रीय हिस्सेदारी 95,600 करोड़ की होगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस योजना के बारे में भ्रम फैला कर जनता को गुमराह कर रही है। श्री चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस नए विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में उपस्थित ही नहीं थे। ज्ञातब्य है कि काग्रेस 10 जनवरी से 25 फरवरी तक मनरेगा बचाओ अभियान के तहत आन्दोलन करेगी।

नया विधेयक वीबी जी राम जी पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 21 दिसम्बर को हस्ताक्षर कर दिये। इसके बाद यह कानून बन गया है। इस बिल को राज्य सभा ने 18 दिसम्बर को पारित किया था। इसके एक घंटे बाद ही लोकसभा ने इसे पारित कर दिया था।

 

भगवान बुद्ध Lord Budhha से संबंधित पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन

भारत के लिए, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष केवल कलाकृतियाँ नहीं हैं; ये हमारी पूजनीय विरासत का और हमारी सभ्यता का अभिन्न हिस्सा हैं: प्रधानमंत्री
भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ मूलतः पाली भाषा में हैं, हमारा प्रयास है कि पाली भाषा को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुँचाया जाए और इसके लिए पाली को प्राचीन भाषा का दर्जा दिया गया है: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली, 03 JAN 2026 ( by PIB Delhi) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी Prime Minister of India Narendra Modi ने नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर Rai Ray Pithora Cultural Auditorium New Delhi में भगवान बुद्ध Lord Budhha से संबंधित पिपरहवा Piperhava के पवित्र अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसका शीर्षक है, “प्रकाश और कमल: ज्ञान प्राप्त व्यक्ति के अवशेष”। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सौ पच्चीस वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भारत की धरोहर लौट आई है, भारत की विरासत वापस आ गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज से भारत के लोग भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों को देख पाएंगे और उनके आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि हमारे बीच भगवान बुद्ध Lord Buddha के पवित्र अवशेषों के होने से हम सभी को आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका भारत से जाने और अंततः वापसी, दोनों ही अपने आप में महत्वपूर्ण पाठ हैं। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि पाठ यह है कि गुलामी केवल राजनीतिक और आर्थिक हितों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है, बल्कि यह हमारी धरोहर को भी नष्ट कर देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि यही भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ हुआ, जिन्हें गुलामी के समय में देश से बाहर ले जाया गया और लगभग एक सौ पच्चीस वर्षों तक अवशेष विदेश में रहे। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग इन्हें लेकर गए, उनके और उनके वंशजों के लिए, ये अवशेष केवल निर्जीव प्राचीन वस्तुएं थीं। इसी कारण से उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलामी के लिए पेश करने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए ये अवशेष हमारी पूजनीय देवता का हिस्सा हैं, हमारी सभ्यता का अविभाज्य हिस्सा हैं। उन्होंने घोषणा की कि भारत ने तय किया कि उनकी सार्वजनिक नीलामी की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्री मोदी ने गोदरेज समूह के प्रति आभार व्यक्त किया और बताया कि उनके सहयोग से भगवान बुद्ध से जुड़े ये पवित्र अवशेष उनकी  कर्मभूमि, उनकी चिंतन भूमि, उनकी महाबोधि भूमि और उनकी महापरिनिर्वाण भूमि में लौट आए हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि थाईलैंड में, जहां इन पवित्र अवशेषों को विभिन्न स्थानों पर रखा गया था, एक महीने से भी कम समय में चालीस लाख से अधिक भक्त इनका दर्शन करने आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वियतनाम में, जनता की भावना इतनी प्रबल थी कि प्रदर्शनी की अवधि बढ़ानी पड़ी, और नौ शहरों में लगभग 1.75 करोड़ लोगों ने अवशेषों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने यह भी इंगित किया कि मंगोलिया में, हजारों लोग गंदन मठ के बाहर घंटों इंतजार करते रहे, और कई लोग केवल इसलिए भारतीय प्रतिनिधियों को छूना चाहते थे, क्योंकि वे बुद्ध की भूमि से आए थे। उन्होंने रेखांकित किया कि रूस के किल्मिकिया क्षेत्र में, केवल एक सप्ताह में ही 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने पवित्र अवशेषों को देखा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रूस के काल्मिकिया क्षेत्र में, केवल एक सप्ताह में ही 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने पवित्र अवशेषों को देखा, जो स्थानीय जनसंख्या के आधे से अधिक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं, क्योंकि भगवान बुद्ध का उनके जीवन में गहरा प्रभाव है, उन्होंने याद किया कि उनका जन्म-स्थान वडनगर बौद्ध अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र था, और सारनाथ, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया, उनकी कर्मभूमि है। उन्होंने साझा किया कि जब भी वे सरकारी जिम्मेदारियों से दूर थे, तो वे बौद्ध स्थलों की यात्रा एक तीर्थयात्री के रूप में करते थे, और प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें दुनिया भर में बौद्ध तीर्थ स्थलों का दौरा करने का अवसर मिला है। उन्होंने नेपाल के लुंबिनी में पवित्र माया देवी मंदिर में नमन करने का अनुभव साझा किया और इसे एक असाधारण अनुभव बताया।

श्री मोदी ने यह भी कहा कि जापान के तो-जी मंदिर और किंकाकु-जी में उन्होंने महसूस किया कि बुद्ध के संदेश समय की सीमाओं को पार कर जाते हैं। उन्होंने चीन के शीआन में जाइंट वाइल्ड गूस पगोडा में अपनी यात्रा का उल्लेख किया, जहाँ से बौद्ध ग्रंथ पूरे एशिया में फैले थे, और जहाँ भारत की भूमिका अभी भी याद की जाती है। उन्होंने मंगोलिया में गंदन मठ की अपनी यात्रा को याद किया, जहां उन्होंने बुद्ध की विरासत के साथ लोगों के गहरे भावनात्मक जुड़ाव को देखा। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के अनुराधापुरा में जय श्री महाबोधि को देखना सम्राट अशोक, भिक्षु महिंदा और संघमित्रा द्वारा बोई गई परंपरा से जुड़ने का अनुभव था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि थाईलैंड में वाट फो और सिंगापुर में बुद्ध टूथ रिलिक मंदिर की उनकी यात्राओं ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के प्रभाव को समझने में उनके अनुभव को और गहरा किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जहाँ भी वे यात्रा करते हैं, वे भगवान बुद्ध की विरासत का एक प्रतीक लाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे चीन, जापान, कोरिया और मंगोलिया बोधि वृक्ष के पौधे साथ लेकर गये। उन्होंने इस बात पर यह जोर दिया कि कोई भी मानवता के लिए इसके गहरे संदेश की कल्पना कर सकता है, जब हिरोशिमा के बोटैनिकल गार्डन में एक बोधि वृक्ष मौजूद हो, जो परमाणु बम से प्रभावित शहर है।

प्रधानमंत्री ने उत्साहित होकर कहा, “भारत न केवल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का संरक्षक है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवित संवाहक भी है।” उन्होंने कहा कि पिपरहवा, वैशाली, देवनी मोरी और नागार्जुनकोंडा में पाये गए भगवान बुद्ध के अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत ने इन अवशेषों को हर रूप में -विज्ञान और आध्यात्मिकता- दोनों के माध्यम से सुरक्षित और संरक्षित किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने लगातार विश्वभर में बौद्ध धरोहर स्थलों के विकास में योगदान देने का प्रयास किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि जब नेपाल में भयंकर भूकंप ने एक प्राचीन स्तूप को नुकसान पहुंचाया, तो भारत ने इसके पुनर्निर्माण के लिए समर्थन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि बागन, म्यांमार में भूकंप के बाद, भारत ने ग्यारह से अधिक देवस्थलों के संरक्षण का कार्य किया। श्री मोदी ने जोर दिया कि ऐसे कई उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि भारत के भीतर भी, बौद्ध परंपरा से जुड़े स्थलों और अवशेषों की खोज और संरक्षण का कार्य लगातार प्रगति कर रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि भगवान बुद्ध की अभिधम्म, उनके शब्द और उनके उपदेश मूल रूप से पाली भाषा में थे, भारत आम लोगों के लिए पाली को सुलभ बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी कारण पाली  को एक प्राचीन भाषा का दर्जा दिया गया है, जिससे धम्म को उसके मूल सार में समझना और समझाना आसान होगा और बौद्ध परंपरा से जुड़े शोध को भी मजबूत किया जा सकेगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, किरेन रिजीजू, रामदास अठावले, राव इंदरजीत सिंह, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

इस प्रदर्शनी में पहली बार, पिपरहवा अवशेषों को, जिन्हें एक सदी से अधिक समय बाद देश वापस लाया गया है, पिपरहवा से संबंधित प्रामाणिक अवशेषों और पुरातात्त्विक सामग्री के साथ प्रस्तुत किया गया है, जो राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के संग्रहों में संरक्षित हैं।

1898 में खोजे गए पिपरहवा अवशेषों का प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में केंद्रीय स्थान है। ये सबसे शुरुआती और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अवशेषों में से एक हैं जो सीधे भगवान बुद्ध से जुड़े हैं। पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसकी व्यापक रूप से उस स्थान के रूप में पहचान की गयी है जहाँ भगवान बुद्ध ने सांसारिकता के त्याग से पहले अपने प्रारंभिक जीवन का अधिकांश हिस्सा बिताया था।

January 3, 2026

यूपी के सीएम से मिले सीआईआई के प्रतिनिधि, बतायीं उद्योग जगत की समस्याएं

लखनऊ, 03 जनवरी : बेहतर कानून व्यवस्था और स्थिर प्रशासनिक माहौल के चलते उत्तर प्रदेश अब देशभर के उद्योग जगत की पहली पसंद बनता जा रहा है। सुरक्षा, अनुशासन और निष्पक्ष शासन ने निवेशकों का भरोसा प्रदेश में मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप बड़े, मध्यम और छोटे तीनों सेगमेंट के उद्योग तेजी से उत्तर प्रदेश की ओर रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री से भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष श्री राजीव मेमानी, नई दिल्ली,  श्री उमाशंकर भरतिया, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, इण्डिया ग्लाइको लि०, दिल्ली / नोएडा व श्री सुनील मिश्रा ने मुलाकात कर निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विस्तार को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश का सिस्टम और गवर्नेंस मॉडल पूरी तरह बदला है। अब जमीन पर काम करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुआ है और परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं।

 

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के विजन में उद्यमी सहयोग करना चाह रहे हैं। सीएम योगी के साथ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बढ़ाने के लिए भी विचार विमर्श किया गया। उत्तर प्रदेश में डिक्रिमिनलाइजेशन विधेयक लागू होने के बाद इंडस्ट्री का भरोसा और बढ़ा है। इसके साथ ही प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों और प्रोत्साहन के कारण ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है।

 

एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब से औद्योगिक इकोसिस्टम को मिली मजबूती

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर प्रतिनिधिमंड ने स्पष्ट रूप से कहा कि सख्त कानून-व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश का औद्योगिक वातावरण पूरी तरह बदल दिया है। निवेश निर्णयों के लिए आवश्यक सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स हब तथा बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के तेज विकास ने राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम को नई मजबूती प्रदान की है।

 

सिंगल-विंडो सिस्टम और डिजिटल प्रक्रियाओं से उद्योग स्थापना हुई आसान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुए विचार-विमर्श में यह भी सामने आया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अब केवल नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो रहा है। प्रदेश सरकार की सिंगल-विंडो सिस्टम सेवा निवेश मित्र जहां वर्तमान में 43 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं उपलब्ध है, जहा भौतिक हस्तक्षेप के बिना समयबद्ध डिजिटल स्वीकृतियों के चलते प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। राज्य सरकार की प्रो-इंडस्ट्री नीति और त्वरित निर्णय क्षमता निवेश को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। इसी क्रम में उच्चीकृत निवेश मित्र 3.0 को जल्द लांच किया जायेगा जिसमें एआई व चैटबाट जैसी सुविधाओं से निवेशकों की निवेश यात्रा और आसान होगी ।

 

 

यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर उद्यमी उत्साहित

प्रतिनिधियों ने कहा कि समग्र रूप से बेहतर कानून व्यवस्था, सशक्त इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी प्रशासन और उद्योगों को मिल रहे सहयोग के चलते उत्तर प्रदेश एक विश्वसनीय और स्थिर निवेश राज्य के रूप में उभर रहा है। यही कारण है कि देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगपति आने वाले समय में यूपी में नए निवेश और विस्तार योजनाओं को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि तय मानी जा रही है।

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