Web News

www.upwebnews.com

सरकार ने स्वीकृत किया अखंड वन्देमातरम

February 11, 2026

सरकार ने स्वीकृत किया अखंड वन्देमातरम

जन गण मन से पहले बजेगा वंदे मातरम्, सरकार ने तय किया राष्ट्र गीत का नया नियम
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है.

UP Web News

यूपी वेब न्यूज

Posted on 11.02.2026 Wednesday, Time 11.54 AM, Vandematram 
नई दिल्ली 11 फरवरी 2026, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है. इसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरों वाला 3 मिनट 10 सेकंड का पूरा संस्करण कई आधिकारिक अवसरों पर बजाया या गाया जाना अब अनिवार्य होगा. मंत्रालय का यह 10 पन्नों का आदेश 28 जनवरी को जारी किया गया है, जो सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा गया है.
आदेश के अनुसार, तिरंगा फहराए जाने के समय, राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान पर, राष्ट्र के नाम उनके संबोधन से ठीक पहले और बाद में, तथा राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन-प्रस्थान और भाषणों से पहले-बाद में ‘वंदे मातरम्’बजाया या गाया जाएगा. अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा. इस दौरान उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा.
वंदे मातरम् के समय खड़ा होना अनिवार्य
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब ‘वंदे मातरम्’ का आधिकारिक संस्करण बजाया या गाया जाए, तो श्रोताओं को सम्मान में खड़ा होना चाहिए. हालांकि, अगर किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री में यह गीत फिल्म का हिस्सा हो, तो दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी, ताकि कार्यक्रम में अव्यवस्था न हो.

दरअसल अब तक ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था, जबकि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए समय, धुन और प्रस्तुति के नियम पहले से तय हैं. यह पहली बार है जब छह अंतरों वाले विस्तारित संस्करण को आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.
तीन कैटेगरी में बांटे गए कार्यक्रम

आदेश में कार्यक्रमों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. पहली श्रेणी में वे अवसर हैं, जहां राष्ट्रीय गीत केवल बजाया जाएगा, जैसे- नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति का औपचारिक राजकीय समारोहों में आगमन-प्रस्थान, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में, राज्यपाल या उपराज्यपाल का औपचारिक कार्यक्रमों में आगमन-प्रस्थान, परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाए जाने के समय आदि.
दूसरी श्रेणी में वे कार्यक्रम शामिल हैं, जहां गीत को बजाने के साथ-साथ सामूहिक गायन भी होगा. इसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर, सांस्कृतिक और औपचारिक समारोह (परेड को छोड़कर), तथा राष्ट्रपति का किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान शामिल है. इसके लिए कोयर, साउंड सिस्टम और आवश्यकता होने पर गीत के बोल वितरित करने की भी सलाह दी गई है.
तीसरी श्रेणी में वे अवसर हैं, जहां ‘वंदे मातरम्’ गाया जा सकता है, जैसे स्कूलों के कार्यक्रम. आदेश में कहा गया है कि स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत गाकर की जा सकती है और छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के प्रयास किए जाएं.
वंदे मातरम् पर नए आदेश की खास बातें
केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है?

गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि अब ‘वंदे मातरम्’ का छह अंतरों वाला, 3 मिनट 10 सेकंड का आधिकारिक संस्करण कई सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में बजाया या गाया जाएगा.
किन-किन मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ बजाना या गाना अनिवार्य होगा?

राष्ट्रपति के आगमन-प्रस्थान, तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले-बाद, राज्यपाल/उपराज्यपाल के कार्यक्रमों और नागरिक अलंकरण समारोहों जैसे अवसरों पर.
अगर ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों बजें तो क्रम क्या होगा?

पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया जाएगा.

क्या सभी लोगों के लिए खड़ा होना जरूरी होगा?

हां, जब आधिकारिक रूप से गीत बजाया या गाया जाए तो सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा.
क्या हर स्थिति में खड़ा होना अनिवार्य है?

नहीं, अगर किसी डॉक्यूमेंट्री या न्यूज़रील में ‘वंदे मातरम्’ फिल्म का हिस्सा हो, तो खड़े होने की जरूरत नहीं होगी.
स्कूलों के लिए क्या निर्देश हैं?

स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ गाकर की जा सकती है.
पहले ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई प्रोटोकॉल था?
नहीं, अब तक इसके लिए कोई तय आधिकारिक नियम नहीं थे, जबकि ‘जन गण मन’ के लिए पहले से नियम मौजूद हैं.
वंदे मातरम् पर सरकार का जोर
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब केंद्र सरकार ‘वंदे मातरम्’ को लोकप्रिय बनाने पर जोर दे रही है. हाल ही में संसद में राष्ट्रीय गीत की 150वीं जयंती पर लंबी बहस हुई थी और इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड का विषय भी ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ रखा गया था.
बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचित इस गीत के पहले दो अंतरों को 1950 में भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया था. पिछले वर्ष संसद में वंदे मातरम् पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि गीत के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ ने इसके महत्व को कमजोर किया और इसे देश के विभाजन से भी जोड़ा.
नए आदेश के साथ ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और प्रस्तुति को लेकर एक स्पष्ट और औपचारिक व्यवस्था तय हो गई है, जिसे देशभर में लागू किया जाएगा.

February 8, 2026

मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत का संकल्प मजबूत बनाओ

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का उदघोष, 2047 में विभाजन का डर पालने की बजाए, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 08.09 PM, RSS Rashtriya Swayamsevak Sangh, Sar Sanghchalak, Mumbai Samvad, #RSS100

मुंबई, 08 फरवरी। देश विरोधी शक्तियों के देश विभाजन के मंसूबों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने कहा कि आप 2047 में देश विभाजन का डर पालने की बजाय, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो। जो 500 साल में सुल्तान बादशाह यहां रहकर नहीं कर सके, 200 साल में अंग्रेज नहीं कर सके। वह स्वतंत्र भारत में क्यों व कैसे होगा, यह 1947 नहीं है। हम बहुत आगे बढ़ गए हैं, अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे। भारत जुड़ जाएगा, और यह होगा। यह संकल्प मन में मजबूत बनाओ। तो ये जो कुछ लोग दुस्वप्न देख रहे हैं, उनके मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। हम सब लोग हैं, हम होने नहीं देंगे।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ यात्रा के १०० वर्ष : नए क्षितिज’ दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में मुंबई के ९०० से अधिक प्रतिष्ठित मान्यवरों को संबोधित किया। नेहरू सेंटर सभागार, वरळी में रविवार, ०८ फरवरी को संपन्न प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ. मोहन भागवत जी ने उपस्थित सदस्यों द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर मंच पर पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाडेसिया, कोंकण प्रांत संघचालक अर्जुन चांदेकर, मुंबई महानगर संघचालक सुरेश भगेरिया उपस्थित थे। पूछे गए कुल १४३ प्रश्नों को १४ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। इनमें संघ नीति, हिन्दुत्व, राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति, कला, खेल व भाषा, जीवनशैली, पर्यावरण आदि विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल रहे।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर सरसंघचालक जी ने बांग्लादेश के सवा करोड़ हिन्दुओं से संगठित होने का आह्वान किया। ऐसा होने पर अत्याचार पर स्वतः ही रोक लग जाएगी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इनमें से कोई नहीं, बल्कि हिन्दू ही संघ का सरसंघचालक होगा। उन्होंने कहा कि संघ का सरसंघचालक बनने के लिए किसी भी जाति का होना न तो बाधा है और न ही कोई अनिवार्य योग्यता। भविष्य में अनुसूचित जाति या जनजाति के कार्यकर्ता भी सरसंघचालक बन सकते हैं।

जिन पर पीढ़ी दर पीढ़ी अन्याय या अत्याचार हुआ है, उनके सर्वांगीण उत्थान होने तक तथा उनके मन में सुरक्षा की भावना उत्पन्न होने तक संविधान सम्मत आरक्षण जारी रहना चाहिए, यह संघ की स्पष्ट भूमिका है।

संघ के स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों तथा सभी प्रकार के प्रयासों में सहभागी होना चाहिए, यह संघ की भूमिका है। किंतु केवल कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करना कठिन है, इसके लिए संस्कारित समाज मन का निर्माण उतना ही महत्वपूर्ण है। साथ ही कोई भी व्यवस्था मूल रूप से भ्रष्ट नहीं होती, बल्कि उस व्यवस्था में कार्य करने वाले व्यक्तियों का मन भ्रष्ट होता है और उसी कारण व्यवस्था भ्रष्ट होती है।

जबरदस्ती या लालच देकर धर्मांतरण किया जाता है तो वह निंदनीय है और उसका प्रत्युत्तर घर वापसी होगा, यह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा या स्वप्रेरणा से धर्म परिवर्तन करता है तो उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। जनसंख्या का अनुपात केवल जन्मदर में कमी से नहीं बदलता, बल्कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ के कारण भी बदलता है, इस ओर ध्यान दिलाते हुए अवैध घुसपैठ के संदर्भ में ‘डिटेक्ट एंड डिपोर्ट’ नीति को कठोरता से लागू करने का आह्वान किया।

हिन्दू और सिक्ख पहले से ही एक थे और आज भी उनके बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। उनका रक्त संबंध है। पूजा पद्धति अलग मानी जा सकती है, उनकी विशिष्टता को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन वे अलग नहीं हैं। हम सभी धर्म एक ही परंपरा से आए हैं। गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिक्ख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के संतों की वाणी संकलित की गई है। ‘हिंद की चादर’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह प्राचीन एकता पुनः स्थापित करनी है। समाज के नाते हम सभी एक हैं, यह ध्यान में रखना चाहिए। हिन्दू नाम से कोई अलग धर्म अस्तित्व में नहीं है। आज जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है, वही प्राचीन सनातन धर्म है। तथागत बुद्ध ने अपने उपदेशों के माध्यम से इसी सनातन धर्म में समयानुकूल सुधार किए। आधुनिक काल में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भी इस ओर इंगित किया।

ईसा मसीह द्वारा प्रतिपादित ईसाईयत और पैगंबर मोहम्मद द्वारा बताए गए इस्लाम का स्वरूप आज उसी रूप में दिखाई नहीं देता। इसका कारण यह है कि उनके बाद इन दोनों पंथों पर तत्कालीन राजनीति का प्रभाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप इन पंथों की आध्यात्मिकता पीछे रह गई और राजनीतिक हित अधिक प्रभावी हो गए। इन पंथों के मूल आध्यात्मिक तत्वों को प्रोत्साहन दिया जाए तो विश्वभर के राजनीतिक संघर्ष कम हो सकते हैं।

भारत रत्न सम्मान प्राप्त न होने पर भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर करोड़ों भारतीयों के हृदय पर राज कर रहे हैं। किंतु यदि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इस सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

भाजपा के सत्ता में आने से संघ को कोई प्रत्यक्ष लाभ हुआ ऐसा नहीं है, बल्कि समाज में संघ की बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता का लाभ समान विचारधारा और भारतीय नीतियों का पालन करने वाले दलों को मिला है। संघ के स्वयंसेवकों के निरंतर परिश्रम तथा समाज द्वारा संघ को मिले स्नेह और विश्वास के कारण ही संघ का कार्य बढ़ा है। संघ से संबंधित संस्थाओं, संगठनों या दलों पर संघ दबाव नहीं डालता। यहां कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को पर्याप्त स्वतंत्रता होती है, जिससे वे अपने क्षेत्र में आवश्यक निर्णय और प्रयोग जिम्मेदारी से कर सकते हैं। वे जो अच्छे कार्य करते हैं, उसका श्रेय उन्हीं को जाता है, लेकिन जहां कमियां रह जाती हैं, उसके प्रश्न अभिभावक के नाते हमारे पास आते हैं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी हम लेते हैं। संघ का कार्य केवल व्यक्ति निर्माण का कार्य है। किसी विशेष क्षेत्र में कार्य करना संघ का कार्य नहीं है।

समान नागरिक संहिता पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि समाज की मानसिकता तैयार करके तथा सभी समाज घटकों को विश्वास में लेकर इस प्रकार का कानून लागू किया जाना चाहिए। उत्तराखंड तथा अन्य कुछ राज्यों में ऐसे प्रयोग हो रहे हैं, इसलिए हम उसका स्वागत करते हैं। भारत विविधता में एकता को बनाए रखने वाला देश है, यह सिद्धांत ऐसे कानून बनाते समय प्राथमिकता से ध्यान में रखना चाहिए।

संघ के कार्यकर्ताओं की औसत आयु २८ वर्ष है और इसे २५ वर्ष से नीचे लाने का प्रयास चल रहा है। देश का युवा देशभक्त और नैतिक आचरण करने वाला है। यदि उन्हें उनकी भाषा में विषय समझाए जाएं, तो वे उन्हें स्वीकार करते हैं और उसका आचरण भी करते हैं। इसलिए तार्किक पद्धति से उन्हें अपने मूल विचारों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता और अवसर देना चाहिए तथा यदि प्रयोग में कोई त्रुटि हो जाए तो उनके पीछे दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए। यदि वर्तमान पीढ़ी युवाओं की जिज्ञासा शांत करने की क्षमता विकसित करे, तो युवा पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी के समन्वय से भविष्य का सशक्त भारत निर्माण होगा। भारतीय दर्शन का प्रभाव अंतरात्मा तक पहुंचता है, जबकि पाश्चात्य प्रभाव बाहरी स्तर तक सीमित रहता है।

47 वर्षीय कलम सिंह बिष्ट ने जीती  120 किलोमीटर लम्बी ओमान  रेस !

Kalam Singh Bist, Chamoli, Ex Army Person

लंबी दूरी की दौड़ का विश्व विजेता कलम सिंह बिष्ट पूर्व सैनिक

  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक ने विश्व मंच पर भारत और  उत्तराखंड का परचम  लहराया 
  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक नायक कलम सिंह बिष्ट ने ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर कीर्तिमान बनाया है।
  • लम्बी दौड़ की श्रेणी में अभी तक मैराथन 42 किलोमीटर को सबसे लम्बी दौड़ माना जाता रहा है और यह सामान्य रोड़ पर आयोजित की जाती है। 

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 09.13 AM, Report Bhupat Singh Bist, Dehradun 

देहरादून, 08 फरवरी। ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर उत्तराखंड के कलम सिंह बिष्ट ने रिकॉर्ड बनाया है। बिष्ट पूर्व सैनिक हैं, वे गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत हुए हैं।

अल्ट्रा ट्रेल रेस का मार्ग पथरीला और रेगिस्तान की दुर्गमता लिए है जाना जाता है। ये दूरी नापने में नायक कलम सिंह बिष्ट ने 18 घंटे और 18 मिनट का समय दर्ज किया। इस दुर्गम रोमांचक दौड़ में 68 देश के हजारों धावक शामिल थे। चमोली गढ़वाल के मुन्दोली ग्राम निवासी कलम सिंह बचपन में 12 किलोमीटर रोजाना स्कूल की दूरी नापा करते थे।

जीवन में अभाव ने संघर्ष की प्रेरणा दी। पिता ने जोश भरा – जीतने से पहले छोड़ना नहीं है। 

नई युवा पीढ़ी को ड्रग और मोबाइल की लत से छुड़ाने के लिए पूर्व फौजी नायक कलम सिंह बिष्ट अब प्रशिक्षक की भूमिका में सुदूर गांवो में शिविर आयोजित कर रहें हैं अल्ट्रा ट्रेल रेस विजेता उत्तराखंड के युवाओं को अंतर -राष्ट्रीय खेलों में सफल देखना चाहते हैं।

प्रस्तुति – भूपत सिंह बिष्ट

February 7, 2026

धर्म-निरपेक्षता गलत शब्द, पंथ-निरपेक्षता होना चाहिएः डा मोहन भागवत

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष के उपलक्ष्य में शताब्दी संवाद

Posted on : 07.02.2026 Saturday, Time: 07.59 PM, Mumbai, RSS, Dr Mohan Bhagwat #RSS100YEAR

मुम्बई, 07 फरवरी 2026, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत ने कहा है कि धर्मनिरपेक्ष शब्द गलत है। हमें इसके स्थान पर पंथ निरपेक्षता शब्द का उपयोग करना चाहिए। वे आज शनिवार को यहां “संघ यात्रा के सौ वर्ष – नए क्षितिज” व्याख्यानमाला के उपलक्ष्य में आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

डा. मोहन भागवत ने कहा संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है। अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है। संघ कार्य और इसके इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने देश के इतिहास में तथागत बुद्ध के बाद संघ जैसा काम नहीं हुआ है। संघ के स्वयंसेवक संचलन करते हैं, लेकिन संघ पैरा-मिलिट्री संस्था नहीं है। संघ को जानना है तो संघ के अंदर आकर देखिये। संघ को जानना है तो यह जानना पड़ेगा कि संघ क्या नहीं है। संघ संगीतशाला नहीं, पोलिटिकल नहीं,.. संघ अनुभव का विषय है। संघ किसी की प्रतिक्रिया में नहीं, किसी के विरोध हेतु नहीं, अपने प्रचार के लिए नहीं, पावर के लिए नहीं. देश  में अच्छा होने के लिए संघ बना है। संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है। संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए। संघ को पावर नहीं चाहिए। जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएँ—उन्हें करने के लिए संघ है।

ब्रिटिश सरकार की सेफ्टी वाल योजना से बनी कांग्रेस

संघ का जो काम है, वह पूरे देश—भारतवर्ष के लिए है। उन्होने बताया कि ब्रिटिश सरकार की योजना से एक सेफ़्टी वाल के रूप में इंडियन नेशनल कांग्रेस बनी। उसी को हमारे लोगों ने आज़ादी की लड़ाई का प्रभावी हथियार बनाया। एक समाज के नाते हम एक समाज हैं क्या? इतने भेद, दकियानूसी, रूढ़ि-कुरीतियों का बोलबाला है। अशिक्षा है। इन सब से उबारकर अपने समाज को एक स्वस्थ समाज के नाते खड़ा करने की जब तक कोशिश नहीं करते, हमारे प्रयास अधूरे रहेंगे। संघ निर्माता डॉ. हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। बहुत कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा—एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था, उसमें सक्रियता से भाग लेना। ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे डा हेडगेवार

स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका और डा हेडगेवार के योगदान की चर्चा करते हुए श्री भागवत ने कहा कि डॉ. हेडगेवार अनुशीलन समिति के कोर मेंबर बने। उनका कोड नाम ‘कोकीन’ था। असहयोग आंदोलन में डॉ. हेडगेवार ने हिस्सा लिया, तो उन पर राजद्रोह का केस चला। एक वर्ष सश्रम कारावास की सज़ा उन्हें हुई। न्यायाधीश ने उनके बारे में अपने फैसले में लिखा, “उनके बचाव का भाषण उनके दिए गए भाषणों से ज़्यादा ‘सेडिशियस’ था।” उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ पहले आक्रमणकर्ता नहीं थे। वे सातवें–आठवें थे।  सिकंदर के समय से ऐसा होता आ रहा है। वे मुट्ठीभर लोग हमसे श्रेष्ठ नहीं थे, फिर भी हम बार-बार मार खाते रहे। अपने समाज में कुछ कमियाँ हैं—हम अपनी एकता भूल गए, स्वार्थी बन गए। इन सब को ठीक किए बिना, समाज को एक संगठित किए बिना यह रुकेगा नहीं। इसलिए डॉ. हेडगेवार ने सोचा, “मैं एक प्रयोग करता हूँ।” विविधताओं से भरे हुए समाज को गुणवत्ता के साथ खड़ा करने के प्रयोग उन्होंने किये। जब उन्हें वह सूत्र और पद्धति मिल गई, तो उन्होंने विजयादशमी 1925 के दिन अपने घर में बैठक बुलाई और कहा—आज से अपने संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन करने वाला संघ आरंभ हो रहा है।

हिन्दू समाज के संगठन के अलावा संघ कुछ नहीं करेगा

संघ की कार्य पद्यति को बताते हुए डा मोहन भागवत ने आगे कहा कि संघ ने पहले से तय किया – सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है। देश में जितने अच्छे काम हो रहे हैं, वो ठीक से चलें और गतंव्य तक पहुंचे इसीलिए संघ है। एक लाख तीस हज़ार से अधिक छोटे-बड़े सेवा कार्य बिना सरकारी पैसा लिए, समाज के सहयोग से अपना पैसा खर्च करके स्वयंसेवक करते हैं। शाखा क्या है? एक घंटे का समय निकालना, सब भूलकर भगवा झंडे के तले अपने भारत का विचार मन में रखते हुए, उसके प्रति भक्ति मन में रखते हुए खड़े होना. जो शाखा में आए हैं, वे कौन हैं, किस जात-पात के हैं, क्या नाम है, कितना कमाते हैं, कितना पढ़े हैं—इस पर विचार नहीं नहीं करना; बल्कि ये मानना कि वे हमारे अपने हैं। ऐसे उनके साथ मिलकर शरीर, मन, बुद्धि को शक्तिशाली बनाने वाले व्यायाम प्रतिदिन करना।

गुरु नानक देव जी ने हिन्दुस्थान शब्द का प्रयोग अपनी वाणी में किया

संघ का मानना है कि भारत में सब हिंदू ही हैं और कोई नहीं है। हिंदू यानी क्या है? हिंदू कहने से हम इसे रिलिजन न मानें; यह किसी विशेष समुदाय का नाम नहीं है। इसे पूजा-कर्मकांड न मानें। हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि विशेषण है। बाबर का पंजाब पर आक्रमण हुआ। श्री गुरु नानक देव जी ने देश में सब अत्याचार देखा, तो उन्होंने लिखा, “खुरासान खसमाना कीआ, हिंदुस्तानु डराइआ। आपै दोसु न देई करता, जमु करि मुगलु चड़ाइआ॥” गुरु नानक जी ने अपनी वाणी में ‘हिंदुस्थान’ का प्रयोग किया है। उन्होंने लिखा है कि इतने अत्याचार हुए कि न हिंदू महिलाओं का शील बचा, न मुस्लिम महिलाओं की अस्मत बची। बाकी सब बदल जाता है, लेकिन हिंदुस्थान का सनातन स्वभाव नहीं बदला।

सबसे प्राचीन होने के नाते हम अग्रज हैं

भारत धर्म-प्राण देश है। हम जानते हैं सब एक हैं। सबको साथ चलना है, किसी को छोड़ना नहीं है। धर्म-निरपेक्षता गलत शब्द है; पंथ-निरपेक्षता होना चाहिए। दुनिया को धर्म देकर, देश का उपकार करने के लिए, बिना अहंकार के भारत का जन्म है। संस्कृति हम सबको जोड़ती है। भाषाएँ अनेक हैं, देवी-देवता अनेक हैं। खान-पान, रीति-रिवाज अलग-अलग हैं। दस हजार–पंद्रह हजार वर्षों से यह चलता आ रहा है, आधुनिक दौर में भी। परंतु उसके ऊपर, इसके परे हम सबकी एक पहचान है—उसे हम हिंदू कहते हैं। भारत भूगोल का नाम नहीं, स्वभाव का नाम है। सबसे प्राचीन होने के नाते हम अग्रज हैं। दुनिया के लोग आएँगे और हमारा चरित्र देखेंगे, हमसे सीखेंगे। हम दुनिया की महाशक्ति नहीं बनेंगे; हम विश्वगुरु बनेंगे। हम भाषण और दादागिरी से नहीं, बल्कि नेतृत्व से सिखाएँगे। हम शिवाजी नहीं हो सकते, लेकिन शिवाजी महाराज के नक्शेकदम पर चल सकते हैं।

February 5, 2026

इंडो-यूएस ट्रेड डील: कृषि और डेयरी पर कोई समझौता नहीं, किसान हित पूरी तरह सुरक्षित –  शिवराज सिंह चौहान

‘किसान हित सर्वोपरि’, मुख्य अनाज, मिलेट्स, फल और डेयरी उत्पादों पर कोई खतरा नहीं – श्री चौहान

टैरिफ घटने से चावल, मसाले और टेक्सटाइल निर्यात को मिलेगा बल, कपास किसानों की आय बढ़ेगी – श्री शिवराज सिंह

शिवराज सिंह चौहान

केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

Posted on :05 FEB 2026 , 10.36 PM by PIB Delhi

नई दिल्ली, भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे भ्रामक आरोपों के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में भारतीय कृषि, विशेषकर कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह डील प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी का नया उदाहरण है और प्रधानमंत्री जी ने शुरू से साफ कर दिया था कि किसान हित सर्वोपरि हैं।

दिल्ली में आज मीडिया से चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारे मुख्य अनाज, फल, प्रमुख फसलें, मिलेट्स और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारतीय कृषि या डेयरी पर किसी तरह का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित पूरी तरह संरक्षित हैं और इस समझौते से उल्टा भारत के किसानों को नए अवसर मिलेंगे।

छोटे किसानों की चिंता और यूएस फार्म प्रोडक्ट्स पर स्थिति स्पष्ट

इस आशंका पर कि देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर है और छोटे किसानों पर असर पड़ सकता है, केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि कोई “बड़ी चीज़” भारत के बाजार में अचानक नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सभी मुख्य फसलें, मुख्य अनाज, फल और डेयरी उत्पाद सुरक्षित हैं और किसी भी ऐसे क्षेत्र के लिए बाजार नहीं खोला गया है, जो भारतीय किसानों के लिए नुकसानदेह हो सके।

यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी के उस ट्वीट से पैदा संशय पर, जिसमें अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स के ज़्यादा भारत आने की बात कही गई थी, श्री चौहान ने कहा कि वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल ने संसद में पूरे तथ्य स्पष्ट कर दिए हैं और वे स्वयं भी दोहरा रहे हैं कि छोटे और बड़े, सभी भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और मुख्य कृषि उत्पादों के लिए बाजार इस प्रकार नहीं खोला गया है कि किसानों पर दबाव बने।

चावलमसाले और टेक्सटाइल निर्यात को नया बल

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि भारत पहले से ही अमेरिका सहित विभिन्न देशों को चावल का बड़ा निर्यातक है और हाल के आंकड़ों के अनुसार लगभग 63,000 करोड़ रुपये के चावल का निर्यात किया गया था।

उन्होंने कहा कि टैरिफ कम होने से हमारे चावल, मसालों और टेक्सटाइल के निर्यात को बल मिलेगा और जब टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बढ़ेगा तो इसका सीधा लाभ कपास उगाने वाले हमारे किसानों को होगा। श्री चौहान ने कहा कि यह समझौता समग्र रूप से भारत के किसानों के हित में है और विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने के बावजूद तथ्य यही हैं कि किसान हित सुरक्षित हैं और निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं।

अगर विपक्ष बोलने ही नहीं देगा तो समझाया कैसे जाएगा

जब यह सवाल उठा कि विपक्ष कह रहा है कि अगर ट्रेड डील कर रहे हैं तो सरकार आकर फाइन प्रिंट को संसद और देश के सामने समझाए, तो कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने दोहराया कि डील की सारी डिटेल्स समय पर सामने आएंगी, लेकिन उसका मूल साफ है – किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं

किसान अन्नदाताकिसानों की सेवा भगवान की पूजा

कृषि मंत्री ने चिंता जताई कि कृषि का क्षेत्र इतना बड़ा है कि किसी भी तरह की अफवाह से किसानों में अनावश्यक चिंता और बेचैनी पैदा हो सकती है, इसलिए सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन देना जरूरी है। उन्होंने कहा, “मैं एक बार फिर कहना चाहता हूँ, किसान अन्नदाता हैं, अन्नदाता मतलब जीवनदाता। उनके हित ही देश के हित हैं और वे हित सुरक्षित हैं।”

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भावुक शब्दों में कहा कि किसानों की सेवा सरकार के लिए भगवान की पूजा के समान है और मोदी सरकार हर कदम पर किसान के पक्ष में खड़ी रहेगी।

« Newer PostsOlder Posts »