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मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत का संकल्प मजबूत बनाओ

February 8, 2026

मन में 2047 में देश विभाजन का डर नहीं, अखंड भारत का संकल्प मजबूत बनाओ

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत का उदघोष, 2047 में विभाजन का डर पालने की बजाए, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 08.09 PM, RSS Rashtriya Swayamsevak Sangh, Sar Sanghchalak, Mumbai Samvad, #RSS100

मुंबई, 08 फरवरी। देश विरोधी शक्तियों के देश विभाजन के मंसूबों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक जी ने कहा कि आप 2047 में देश विभाजन का डर पालने की बजाय, अखंड भारत के उदय की कल्पना करो। जो 500 साल में सुल्तान बादशाह यहां रहकर नहीं कर सके, 200 साल में अंग्रेज नहीं कर सके। वह स्वतंत्र भारत में क्यों व कैसे होगा, यह 1947 नहीं है। हम बहुत आगे बढ़ गए हैं, अब भारत को तोड़ने वाले टूट जाएंगे। भारत जुड़ जाएगा, और यह होगा। यह संकल्प मन में मजबूत बनाओ। तो ये जो कुछ लोग दुस्वप्न देख रहे हैं, उनके मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। हम सब लोग हैं, हम होने नहीं देंगे।

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ यात्रा के १०० वर्ष : नए क्षितिज’ दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में मुंबई के ९०० से अधिक प्रतिष्ठित मान्यवरों को संबोधित किया। नेहरू सेंटर सभागार, वरळी में रविवार, ०८ फरवरी को संपन्न प्रश्नोत्तर सत्र में डॉ. मोहन भागवत जी ने उपस्थित सदस्यों द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर मंच पर पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाडेसिया, कोंकण प्रांत संघचालक अर्जुन चांदेकर, मुंबई महानगर संघचालक सुरेश भगेरिया उपस्थित थे। पूछे गए कुल १४३ प्रश्नों को १४ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। इनमें संघ नीति, हिन्दुत्व, राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति, कला, खेल व भाषा, जीवनशैली, पर्यावरण आदि विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल रहे।

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार पर सरसंघचालक जी ने बांग्लादेश के सवा करोड़ हिन्दुओं से संगठित होने का आह्वान किया। ऐसा होने पर अत्याचार पर स्वतः ही रोक लग जाएगी।

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इनमें से कोई नहीं, बल्कि हिन्दू ही संघ का सरसंघचालक होगा। उन्होंने कहा कि संघ का सरसंघचालक बनने के लिए किसी भी जाति का होना न तो बाधा है और न ही कोई अनिवार्य योग्यता। भविष्य में अनुसूचित जाति या जनजाति के कार्यकर्ता भी सरसंघचालक बन सकते हैं।

जिन पर पीढ़ी दर पीढ़ी अन्याय या अत्याचार हुआ है, उनके सर्वांगीण उत्थान होने तक तथा उनके मन में सुरक्षा की भावना उत्पन्न होने तक संविधान सम्मत आरक्षण जारी रहना चाहिए, यह संघ की स्पष्ट भूमिका है।

संघ के स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों तथा सभी प्रकार के प्रयासों में सहभागी होना चाहिए, यह संघ की भूमिका है। किंतु केवल कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करना कठिन है, इसके लिए संस्कारित समाज मन का निर्माण उतना ही महत्वपूर्ण है। साथ ही कोई भी व्यवस्था मूल रूप से भ्रष्ट नहीं होती, बल्कि उस व्यवस्था में कार्य करने वाले व्यक्तियों का मन भ्रष्ट होता है और उसी कारण व्यवस्था भ्रष्ट होती है।

जबरदस्ती या लालच देकर धर्मांतरण किया जाता है तो वह निंदनीय है और उसका प्रत्युत्तर घर वापसी होगा, यह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा या स्वप्रेरणा से धर्म परिवर्तन करता है तो उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए। जनसंख्या का अनुपात केवल जन्मदर में कमी से नहीं बदलता, बल्कि धर्मांतरण और अवैध घुसपैठ के कारण भी बदलता है, इस ओर ध्यान दिलाते हुए अवैध घुसपैठ के संदर्भ में ‘डिटेक्ट एंड डिपोर्ट’ नीति को कठोरता से लागू करने का आह्वान किया।

हिन्दू और सिक्ख पहले से ही एक थे और आज भी उनके बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। उनका रक्त संबंध है। पूजा पद्धति अलग मानी जा सकती है, उनकी विशिष्टता को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन वे अलग नहीं हैं। हम सभी धर्म एक ही परंपरा से आए हैं। गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिक्ख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के संतों की वाणी संकलित की गई है। ‘हिंद की चादर’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह प्राचीन एकता पुनः स्थापित करनी है। समाज के नाते हम सभी एक हैं, यह ध्यान में रखना चाहिए। हिन्दू नाम से कोई अलग धर्म अस्तित्व में नहीं है। आज जिसे हिन्दू धर्म कहा जाता है, वही प्राचीन सनातन धर्म है। तथागत बुद्ध ने अपने उपदेशों के माध्यम से इसी सनातन धर्म में समयानुकूल सुधार किए। आधुनिक काल में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने भी इस ओर इंगित किया।

ईसा मसीह द्वारा प्रतिपादित ईसाईयत और पैगंबर मोहम्मद द्वारा बताए गए इस्लाम का स्वरूप आज उसी रूप में दिखाई नहीं देता। इसका कारण यह है कि उनके बाद इन दोनों पंथों पर तत्कालीन राजनीति का प्रभाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप इन पंथों की आध्यात्मिकता पीछे रह गई और राजनीतिक हित अधिक प्रभावी हो गए। इन पंथों के मूल आध्यात्मिक तत्वों को प्रोत्साहन दिया जाए तो विश्वभर के राजनीतिक संघर्ष कम हो सकते हैं।

भारत रत्न सम्मान प्राप्त न होने पर भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर करोड़ों भारतीयों के हृदय पर राज कर रहे हैं। किंतु यदि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इस सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

भाजपा के सत्ता में आने से संघ को कोई प्रत्यक्ष लाभ हुआ ऐसा नहीं है, बल्कि समाज में संघ की बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता का लाभ समान विचारधारा और भारतीय नीतियों का पालन करने वाले दलों को मिला है। संघ के स्वयंसेवकों के निरंतर परिश्रम तथा समाज द्वारा संघ को मिले स्नेह और विश्वास के कारण ही संघ का कार्य बढ़ा है। संघ से संबंधित संस्थाओं, संगठनों या दलों पर संघ दबाव नहीं डालता। यहां कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को पर्याप्त स्वतंत्रता होती है, जिससे वे अपने क्षेत्र में आवश्यक निर्णय और प्रयोग जिम्मेदारी से कर सकते हैं। वे जो अच्छे कार्य करते हैं, उसका श्रेय उन्हीं को जाता है, लेकिन जहां कमियां रह जाती हैं, उसके प्रश्न अभिभावक के नाते हमारे पास आते हैं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी हम लेते हैं। संघ का कार्य केवल व्यक्ति निर्माण का कार्य है। किसी विशेष क्षेत्र में कार्य करना संघ का कार्य नहीं है।

समान नागरिक संहिता पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि समाज की मानसिकता तैयार करके तथा सभी समाज घटकों को विश्वास में लेकर इस प्रकार का कानून लागू किया जाना चाहिए। उत्तराखंड तथा अन्य कुछ राज्यों में ऐसे प्रयोग हो रहे हैं, इसलिए हम उसका स्वागत करते हैं। भारत विविधता में एकता को बनाए रखने वाला देश है, यह सिद्धांत ऐसे कानून बनाते समय प्राथमिकता से ध्यान में रखना चाहिए।

संघ के कार्यकर्ताओं की औसत आयु २८ वर्ष है और इसे २५ वर्ष से नीचे लाने का प्रयास चल रहा है। देश का युवा देशभक्त और नैतिक आचरण करने वाला है। यदि उन्हें उनकी भाषा में विषय समझाए जाएं, तो वे उन्हें स्वीकार करते हैं और उसका आचरण भी करते हैं। इसलिए तार्किक पद्धति से उन्हें अपने मूल विचारों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता और अवसर देना चाहिए तथा यदि प्रयोग में कोई त्रुटि हो जाए तो उनके पीछे दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए। यदि वर्तमान पीढ़ी युवाओं की जिज्ञासा शांत करने की क्षमता विकसित करे, तो युवा पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी के समन्वय से भविष्य का सशक्त भारत निर्माण होगा। भारतीय दर्शन का प्रभाव अंतरात्मा तक पहुंचता है, जबकि पाश्चात्य प्रभाव बाहरी स्तर तक सीमित रहता है।

निगम-व्यापारियों में नहीं बनीं अंतिम सहमति

दुकानों का किराया विवाद

अपर नगर आयुक्त से हुई किराया वृद्धि पर वार्ता

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 07.28 PM

Moradabad Samachar

मुरादाबाद समाचार

मुरादाबाद, 8 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
नगर निगम की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने का विरोध दूसरे दिन भी कायम रहा। शहर में बाजार बंद के चलते मेयर विनोद अग्रवाल और अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह की मौजूदगी में व्यापारियों में वार्ता शुरू हुईं। काफी देर चलीं वार्ता में अंतिम सहमति नहीं बन सकीं हालांकि विवाद को देखते हुए हर मार्केट से एक दो व्यापारियों संग सोमवार को निगम से वार्ता होगी।
शहर में नगर निगम की 488 दुकानें हैं। निगम प्रशासन ने सरकार के निर्देश के बाद दुकानों का किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि 2015-16 में दुकानों के किराए में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव पर व्यापारी राजी नहीं हुए। लंबे समय से किराए में अब बढ़ोतरी की गई। पर व्यापारियों ने विरोध कर बाजार बंद कर दिया। किराया वृद्धि विवाद के निपटारे के लिए
रविवार को निगम प्रशासन व व्यापारियों के बीच वार्ता का हुईं। मेयर के हस्तक्षेप के बाद पीली कोठी पर मेयर कैंप हुईं वार्ता में तमाम व्यापारी और निगम अधिकारी रहे।
व्यापारी नितिन राज का कहना है कि दुकानों के किराए में अप्रत्याक्षित वृद्धि की गई। कई मार्केट में किराया कम है। दुकानों का किराया सर्किल रेट के हिसाब से लिया जा रहा है। 15 साल तक किराए के बाद नए सिरे से किराया निर्धारित होगा। हालांकि निगम ने किराया निर्धारण का आश्वासन दिया है।
मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि 25 साल बाद किराए में वृद्धि की गई है। दुकानदारों को किराए में छूट का प्रस्ताव रखा गया है। तीस प्रतिशत की छूट दी गई है।

47 वर्षीय कलम सिंह बिष्ट ने जीती  120 किलोमीटर लम्बी ओमान  रेस !

Kalam Singh Bist, Chamoli, Ex Army Person

लंबी दूरी की दौड़ का विश्व विजेता कलम सिंह बिष्ट पूर्व सैनिक

  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक ने विश्व मंच पर भारत और  उत्तराखंड का परचम  लहराया 
  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक नायक कलम सिंह बिष्ट ने ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर कीर्तिमान बनाया है।
  • लम्बी दौड़ की श्रेणी में अभी तक मैराथन 42 किलोमीटर को सबसे लम्बी दौड़ माना जाता रहा है और यह सामान्य रोड़ पर आयोजित की जाती है। 

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 09.13 AM, Report Bhupat Singh Bist, Dehradun 

देहरादून, 08 फरवरी। ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर उत्तराखंड के कलम सिंह बिष्ट ने रिकॉर्ड बनाया है। बिष्ट पूर्व सैनिक हैं, वे गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत हुए हैं।

अल्ट्रा ट्रेल रेस का मार्ग पथरीला और रेगिस्तान की दुर्गमता लिए है जाना जाता है। ये दूरी नापने में नायक कलम सिंह बिष्ट ने 18 घंटे और 18 मिनट का समय दर्ज किया। इस दुर्गम रोमांचक दौड़ में 68 देश के हजारों धावक शामिल थे। चमोली गढ़वाल के मुन्दोली ग्राम निवासी कलम सिंह बचपन में 12 किलोमीटर रोजाना स्कूल की दूरी नापा करते थे।

जीवन में अभाव ने संघर्ष की प्रेरणा दी। पिता ने जोश भरा – जीतने से पहले छोड़ना नहीं है। 

नई युवा पीढ़ी को ड्रग और मोबाइल की लत से छुड़ाने के लिए पूर्व फौजी नायक कलम सिंह बिष्ट अब प्रशिक्षक की भूमिका में सुदूर गांवो में शिविर आयोजित कर रहें हैं अल्ट्रा ट्रेल रेस विजेता उत्तराखंड के युवाओं को अंतर -राष्ट्रीय खेलों में सफल देखना चाहते हैं।

प्रस्तुति – भूपत सिंह बिष्ट

दुकानों का किराए बढ़ाने के विरोध में कटरानाज में बाजार बंद

दुकान सील करने की चेतावनी से भड़के दुकानदार

मुरादाबाद, 7 फरवरी (उप्र समाचार सेवा)।
शनिवार को नगर निगम के किराया बढ़ाए जाने का विरोध शुरू हो गया है। टाउन हॉल समेत अन्य दुकानदारों ने निगम के फैसले पर आपत्ति जताते हुए बाजार बंद दिया। दोपहर बाद से विरोध गर्माया तो तमाम व्यापारी एकजुट हो गए और कई घंटे दुकानें नहीं खोली। मामले में कड़ा विरोध जताने के देर रात व्यापारियों ने बैठक भी बुलाई है।
नगर निगम की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने पर तमाम व्यापारी नाराज है। व्यापारियों का कहना है कि दुकानों के किराया कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया गया। एक हफ्ते पहले निगम ने दुकानदारों से नया किराया जमा करने को कहा। पर शनिवार को मामले ने तूल पकड़ा। निगम की दुकान सील करने की चेतावनी से व्यापारी खफा हो गए और दुकानों को बंद करने का निर्णय ले लिया। दोपहर दो बजे से कटरानाज, पटेल मार्केट, टाउन हॉल, अंबेडकर पार्क समेत अन्य दुकानों पर विरोध शुरू हो गया। व्यापारियों ने दुकानों के शटर गिरा दिए और विरोध स्वरूप प्रदर्शन किया। शाम तक दुकानें बंद रहीं। अब व्यापारी इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है। देर रात व्यापारियों की बैठक भी बुलाई गई जिसमें अगली रणनीति पर विचार विमर्श किया जाएगा।

February 7, 2026

Hathras UGC  बिल के विरोध में पदयात्रा रोकी, अलंकार अग्निहोत्री धरने पर

  • अपने आवास के बाहर धरने पर बैठे  पंकज धवरिया व सस्पेंड पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री Alankar Agnihotri
DHARNA BY ALANKAR AGNIHOTRI IN HATHRAS

हाथरस में दिल्ली यात्रा रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिनोहोत्री

Posted on : 07.02.2026 Saturday, Time: 08.35 PM,
हाथरस।यूजीसी बिल के विरोध में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद द्वारा प्रस्तावित पदयात्रा को पुलिस ने रोक दिया। प्रशासन के अनुसार जिले में धारा 144 लागू होने के कारण किसी भी प्रकार के जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरिया ने अकेले झंडा लेकर पदयात्रा शुरू करने का प्रयास किया, जिस पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान तीखी नोकझोंक हुई।
पदयात्रा रोकने की सूचना पर सस्पेंड पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri अलंकार अग्निहोत्री भी हाथरस पहुंचे और पंकज धवरिया Pankaj Dhavariya के कंचन नगर स्थित आवास के बाहर उनके साथ जमीन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार डरी हुई है और उसका कोर वोटर उससे दूर हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि असल मुद्दों को उठाने वालों को रोका जा रहा है, जबकि कथित हिंदू सम्मेलनों को अनुमति दी जा रही है।
हाथरस से दिल्ली तक प्रस्तावित थी यात्रा
सवर्ण संगठनों की यह पदयात्रा हाथरस से दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास तक प्रस्तावित थी। सुबह से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और एसडीएम सदर राजबहादुर मौके पर मौजूद रहे। पदयात्रा में शामिल होने की घोषणा करने वाले कई संगठनों के पदाधिकारियों को पहले ही नजरबंद कर दिया गया था।
पदयात्रा रोके जाने के बाद पंकज धवरिया अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी बिल और एससी/एसटी एक्ट के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है और सरकार के इशारे पर पदयात्रा को जबरन रोका गया।
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