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मान्यता का सच या भविष्य से खिलवाड़? विनायक इंटरनेशनल स्कूल पर उठे तीखे सवाल

February 26, 2026

मान्यता का सच या भविष्य से खिलवाड़? विनायक इंटरनेशनल स्कूल पर उठे तीखे सवाल


विनायक इंटरनेशनल स्कूल
हाथरस। शहर के चर्चित  विनायक इंटरनेशनल स्कूल   को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों और विद्यार्थियों को गहरे असमंजस में डाल दिया है। आरोप है कि विद्यालय ने सीबीएसई की मान्यता न होने के बावजूद हाईस्कूल (दसवीं) कक्षा में छात्रों के प्रवेश ले लिए। जब बोर्ड परीक्षाओं का समय आया तो खुलासा हुआ कि विद्यार्थियों का पंजीकरण स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि मथुरा जनपद के एक विद्यालय से कराया गया है।
स्थिति तब और हैरान करने वाली हो गई जब छात्रों को परीक्षा केंद्र भी मथुरा जिले में आवंटित कर दिया गया। अभिभावकों के अनुसार, परीक्षा के दिन बच्चों को पेपर शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले विद्यालय की गाड़ियों से मथुरा ले जाया जाता है। लंबी दूरी की यह भागदौड़ बच्चों पर मानसिक दबाव भी बढ़ा रही है।
दबी जुबान में अभिभावक बताते हैं कि मथुरा के जिस विद्यालय से पंजीकरण कराया गया है, उसकी यूनिफॉर्म भी विद्यार्थियों से उनके स्वयं के खर्च पर सिलवाई गई। सवाल यह उठता है कि जब विद्यालय को दसवीं की मान्यता ही नहीं थी, तो प्रवेश क्यों लिए गए? क्या अभिभावकों को पूरी सच्चाई बताई गई थी, या फिर भविष्य के सुनहरे सपनों के नाम पर भरोसे का सौदा किया गया? शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यदि मान्यता का सच छिपाकर छात्रों का भविष्य दांव पर लगाया गया, तो यह न केवल नैतिक, बल्कि प्रशासनिक सवाल भी खड़े करता है।
शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले संस्थानों से जवाबदेही अपेक्षित है। यदि बिना मान्यता प्रवेश लेकर छात्रों को दूसरे जिले से परीक्षा दिलवाई जा रही है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अब निगाहें सीबीएसई बोर्ड पर भी टिक गई हैं। क्या भविष्य में ऐसे विद्यालय को मान्यता दी जानी चाहिए, जो शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े कर रहा हो? दबी जुबान में अभिभावकों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा के नाम पर किसी और बच्चे का भविष्य दांव पर न लगे।इनका कहना है –
विनायक इंटरनेशनल स्कूल का दसवीं कक्षा के लिए सीबीएसई रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। अगर विद्यालय ने बिना रजिस्ट्रेशन के बच्चों को दसवीं के लिए एडमिशन लिया है तो यह नियम विरुद्ध है। इस मामले में जिम्मेदार ही कार्रवाई कर सकेंगे। – डॉ जगदीश शर्मा डिस्ट्रिक्ट कोर्डिनेटर सीबीएसई
बेशक विनायक इंटरनेशनल स्कूल का सीबीएसई रजिस्ट्रेशन नहीं है। लेकिन आवश्यक कार्रवाई सम्बंधित अधिकारी ही करेंगे। – सन्त प्रकाश जिला विद्यालय निरीक्षक

मथुरा जंक्शन पर जीआरपी के पुलिस कर्मी ने दुकानदार से की मारपीट, वीडियो हुआ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल 

मथुरा। मथुरा जंक्शन पर जीआरपी पुलिस की कथित गुंडई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक जीआरपी पुलिसकर्मी कथित तौर पर रेलवे के अधिकृत वेंडर के साथ मारपीट करता और अभद्र भाषा का प्रयोग करता दिखाई दे रहा है।
बताया जा रहा है कि मामला प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर स्थित “कृष्ण फूड” नामक स्टॉल का है, जो रेलवे द्वारा स्वीकृत वेंडर संचालित करता है। आरोप है कि जीआरपी स्टाफ सूरज चौहान ने स्टॉल संचालक से चाय बनाने के लिए कहा। इस पर वेंडर ने कथित रूप से जवाब दिया कि पहले ट्रेन निकल जाने दें, उसके बाद चाय बना देंगे।
इसी बात पर विवाद बढ़ गया और आरोप है कि पुलिसकर्मी ने गुस्से में आकर स्टॉल बंद कराते हुए वेंडर के साथ मारपीट की। इस घटना में वेंडर को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद वेंडर भयभीत बताया जा रहा है और मानसिक रूप से काफी आहत है।सूत्रों के अनुसार, पीड़ित वेंडर ने इस व्यवहार से दुखी होकर कड़ा कदम उठाने की चेतावनी भी दी है।
वहीं, वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। अभी तक इस संबंध में जीआरपी या रेलवे प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच की मांग उठ रही है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

टेट की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का उमड़ा हुजूम

मथुरा।
टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक के संयुक्त तत्वावधान में आंदोलन के तृतीय चरण में जनपद के हजारों की संख्या में शिक्षक टैंक चौराहे पर एकत्रित हुए ।वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों हेतु एनसीटीई द्वारा 2017 में एक अधिनियम पारित कर सभी के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया था । उसी के परिप्रेक्ष्य में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 को एक निर्णय में सभी शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता कर दी गई उक्त का विरोध शिक्षक संगठनों द्वारा लगातार किया जा रहा था । परंतु सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई ।
इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर के दो प्रमुख संगठनों ने लखनऊ में बैठक कर एक ही बैनर तले आंदोलन की घोषणा की । इसके अंतर्गत 22 फरवरी को  X पर # टैग अभियान चलाया गया । इसके बाद 23, 24, एवं 25 फरवरी को शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षा ड्यूटी एवं विद्यालयों में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया । आज धरना प्रदर्शन पैदल मार्च एवं ज्ञापन के कार्यक्रम में शिक्षकों ने टैंक चौराहे से पैदल मार्च करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर एकत्रित होकर नारेबाजी की एवं टेट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की ।टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय पर नगर मजिस्ट्रेट अखिलेश कुमार मिश्रा ने लिया ।
 प्रदर्शन में उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल ( पूर्व माध्यमिक ) शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष देवेंद्र सारस्वत , जिला अध्यक्ष अतुल सारस्वत , जिला महामंत्री लक्ष्मी नारायण ,  जिला कोषाध्यक्ष मनोज शर्मा , राजीव पचौरी , सूर्यवीर सिंह , हरीश चौधरी ,बदन सिंह यादव , कृष्ण कुमार , अरविंद शर्मा , शिव कुमार पचौरी , सुजीत वर्मा , नीलम गौड़  ,  शक्ति वर्मा , संगीता सारस्वत,आरती  कुरील ,  संजीव यादव ,  रमेश प्रताप सिंह , गीतम सिंह,  श्याम सुंदर  , प्रेम शंकर , गोविंद शर्मा , लवली पटेल , संजय पांचाल , उपेन्द्र पचाहरा , उपेंद्र पांडेय , मोहर पाल सिंह , उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष राजेश शर्मा , मंत्री मुकेश कुंतल , शांतनु चौधरी , विजय सिंह ,रोशन लाल , सुशीला चौधरी, चित्रा  सारस्वत ,श्याम वीर  सिंह , दिनेश चौधरी , वीरेन्द्र सिंह , पुनेंद्र बाबू , तूही राम ,अशोक प्रिया ,मुकुल कांत उपाध्याय , कुलदीप सास्वत , विजय सिंह , अमित शर्मा , मनोज कुमार , सुशेंद्र मित्तल ,नंदकिशोर ,  मुरारी लाल शर्मा , ब्रजवीर भरंगर , राजेंद्र छौंकर  , धर्मेंद्र शर्मा,  कृष्ण पाल सिंह , कृष्ण कुमार , राजेश चौधरी , कृष्णा चंदेल , सिद्धार्थ , ज्योति वीर सिंह , हेमंत कुमार , मोनिका शुक्ला , देवेंद्र कौशिक , बाबूलाल मिश्रा, कप्तान सिंह राजोरा ,लोकेंद्र मिश्रा ,तेजवीर सिंह  ,शैलेंद्र वार्ष्णेय ,राजकुमार शर्मा, कपिल कुमार, नीरू वाला, सरिता सारस्वत, सहित हजारों शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

नंदगांव और रावल में रंगोत्सव की धूम, श्रद्धालुओं पर बरसे गुलाल और फूल

मथुरा। ब्रज क्षेत्र में होली का उत्साह चरम पर है। गुरुवार को नंदगांव और रावल में पारंपरिक ढंग से होली का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
नंदगांव में हुरियारों का स्वागत
नंदगांव, जो भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की स्थली माना जाता है, वहां लट्ठमार होली की परंपरा पूरे उत्साह के साथ निभाई गई। बरसाना से आए हुरियारों का नंदगांव की हुरियारिनों ने पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, रासिया गायन और “होरी खेलन आए नंदलाल” जैसे भजनों के बीच वातावरण भक्तिमय बना रहा।
नंदभवन परिसर में श्रद्धालुओं पर गुलाल और फूलों की वर्षा की गई। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस बल तैनात रहा तथा जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई।
रावल में राधारानी की स्मृति में होली
वहीं राधारानी की जन्मस्थली रावल में भी होली का विशेष आयोजन हुआ। मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने फूलों और अबीर-गुलाल से होली खेली। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाकर वातावरण को ब्रजमय बना दिया।
रावल में आयोजित फूलों की होली आकर्षण का केंद्र रही। मंदिर प्रांगण में भक्तों ने “राधे-राधे” के जयकारों के बीच रंगोत्सव का आनंद लिया।
प्रशासन रहा मुस्तैद
दोनों स्थानों पर जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की गई। अधिकारियों ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
ब्रज की होली की यह अनूठी परंपरा श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है, जिसे देखने के लिए हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

नरसी का भात प्रसंग सुन श्रोताओं के नेत्र हुए अश्रुपूरित

बाबा भोलेनाथ मेरी नैया तो उबारो…
( संजीव गुप्ता द्वारा )
श्रीरामकथा के तीसरे दिन मुमुक्षु आश्रम परिसर उस वक़्त भक्ति, संवेदना और आध्यात्मिक ऊष्मा से आलोकित हो उठा, जब कथाव्यास संत विजय कौशल जी महाराज ने ‘नरसी का भात’ प्रसंग का हृदयस्पर्शी वर्णन किया। उनके मधुर और भावपूर्ण कथन ने श्रोताओं को ऐसी भावावस्था में पहुँचा दिया कि अनेक लोग अश्रुपूरित नेत्रों से कथा का रसास्वादन करते रहे। कथाव्यास ने सुनाया कि कृष्णभक्त नरसी मेहता अत्यंत दरिद्र थे और अपनी बेटी नानीबाई का भात भरने में असमर्थ थे। नानीबाई के ससुराल वालों ने व्यंग्य में बहुत लंबी सूची (मायरा) भेजी थी। जब उनकी पुत्री के ससुराल पक्ष में ‘भात’ (एक पारंपरिक सामाजिक रीति) देने का अवसर आया, तब समाज के सामने उनकी गरीबी उपहास का कारण बन गई। लोग ताने कसने लगे कि निर्धन नरसी अपनी पुत्री की लाज कैसे रख पाएंगे। संत विजय कौशल जी ने उस दृश्य का ऐसा जीवंत चित्र खींचा कि श्रोता मानो उसी युग में पहुँच गए। उन्होंने भावपूर्ण स्वर में कहा कि जब संसार साथ छोड़ देता है, तब सच्चा भक्त अपने आराध्य के चरणों में सिर रख देता है। नरसी ने भी यही किया। उन्होंने पूरी निष्ठा से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। नरसी की अटूट भक्ति से विवश होकर श्री कृष्ण स्वयं एक धनी सेठ के रूप में आए और अद्भुत मायरा भरा। भगवान कृष्ण के द्वारा साक्षात उपस्थित होकर नगरवासियों के सामने नरसी की लाज रखने का पूरा प्रसंग सुनकर श्रोतागण भावविभोर हो गए।
इसके आगे कथा व्यास ने देवर्षि नारद एवं भगवान विष्णु की कथा का प्रसंग सुनाया। नारद की कठिन तपस्या से भयभीत होकर इंद्रदेव ने कामदेव को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा। कामदेव तमाम प्रयासों के बावजूद भी उनकी तपस्या नहीं भंग कर पाए और अंतत: उन्होंने नारद से क्षमा मांगी। नारद को यह अहंकार उत्पन्न हो गया कि उन्होंने कामदेव को जीत लिया है एवं वे इस अहंकार का प्रदर्शन भगवान शिव के समक्ष करने लगे। इस पर भगवान शिव ने विष्णु से नारद का अहंकार तोड़ने का अनुरोध किया। भगवान विष्णु ने नारद के मार्ग में एक सुंदर नगर बसाया। वहां के राजा की सुंदर कन्या विश्वमोहिनी के स्वयंवर में जब नारद पहुंचे तो वे उसका सौंदर्य देखकर मोहित हो उठे एवं उन्होंने भगवान विष्णु का आह्वान किया। भगवान विष्णु ने उन्हें वानर का रूप दे दिया। स्वयंवर में अंतत: विश्वमोहिनी ने भगवान विष्णु को वरमाला पहनाई। सरोवर में अपना मुख देखकर नारद ने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को श्राप दिया कि जिस प्रकार मैंने नारी का वियोग सहन किया है, उसी तरह आपको भी पत्नी का वियोग सहना करना पड़ेगा। कालांतर में भगवान विष्णु ने प्रभु श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया और नारद के श्राप के कारण ही उन्हें माता सीता का वियोग सहना पड़ा। कथा के अंत में “बाबा भोलेनाथ मेरी नैया तो उबारो..” भजन पर भक्त आह्लादित होकर नृत्य करने लगे।
*पूजन, आरती एवं प्रसाद वितरण*
तीसरे दिन के मुख्य यजमान डॉ के. के. शुक्ला एवं श्रीमती मधुरानी शुक्ला थे। कथा का समापन प्रभु श्रीराम की आरती से हुआ। प्रसाद वितरण श्री कमलेश त्रिवेदी एवं श्रीमती मधुलिका त्रिवेदी की तरफ से हुआ।

*ये रहे उपस्थित*
इस अवसर पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद, अनंत श्री स्वामी सर्वेश्वरानंद, अनंत श्री स्वामी अभेदानन्द, स्वामी गंगेश्वरानंद, श्री राजीव कृष्ण अग्रवाल, श्री ए बी सिंह, श्री अशोक अग्रवाल, रुद्रपुर से श्री विष्णु बंसल एवं श्री राजेन्द्र गोयल, श्री वेद प्रकाश गुप्ता, श्री रामचंद्र सिंघल, डॉ अमीर सिंह यादव, प्रबंध समिति के सचिव प्रो अवनीश मिश्र, प्राचार्य प्रो आर के आजाद, उपप्राचार्य प्रो अनुराग अग्रवाल, श्री हरीश चंद्र श्रीवास्तव, मेजर अनिल मालवीय, प्रो देवेंद्र सिंह, डॉ आदर्श पांडेय, डॉ रमेश चंद्रा, डॉ प्रतिभा सक्सेना, डॉ पवन गुप्ता, शिवओम शर्मा सहित भक्तों की भारी भीड़ उपस्थित रही।

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