मेरठ, 02 जनवरी 2026 ( उत्तर प्रदेश समाचार सेवा ब्यूरो)। योगी आदित्यनाथ के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पस्चिमी उत्तर प्रदेश मे नये समीकरण बने हैं। अभी तक यह माना जा रहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार में जाट समाज को साधे रखने के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेन्द्र सिंह का शामिल होना तय है। लेकिन. इस कुछ दिनों में पश्चिम के त्यागी समाज की ओर से भी मंत्रिमंडल में अपने किसी नेता को शामिल करने के लिए लाबिंग की जा रही है। इससे केन्द्रीय और प्रदेश नेतृत्व के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि पश्चिम को साधे रखने के लिए जाट नेता को शामिल किया जाए अथवा त्यागी को।
प्रदेश में पार्टी नेतृत्व बदलने के साथ ही यह तय माना गया था। शीघ्र ही योगी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और इसमें निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। श्री चौधरी पहले भी पंचायती राज विभाग के केबिनेट मंत्री रह चुके हैं। यह इसलिए भी निश्चित माना गया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाटों को भाजपा हर हाल में अपने साथ रखना चाहती है। इसीलिए भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन करके उसे दो लोकसभा सीटें बिजनौर और बागपत सौंप दी थीं। हालांकि इस गठबंधन का विरोध भी हुआ। भाजपा के ही जाट नेताओं ने चौधरी जयंत सिंह के साथ हाथ मिलाने के फैसले से असहमति व्यक्त की थी किन्तु भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इस गठबंधन के बावजूद भाजपा जाट प्रभुत्व की सीटें मुजफ्फरनगर, कैराना और सहारनपुर हार गई।
प्रदेस की राजनीति में अब फिर से विधान सभी चुनाव 2027 को लेकर मंथन शुरु हो गया है। रणनीति बनायी जाने लगी है। सभावित मंत्रिमंडल विस्तार भी 27 के मद्देनजर ही किया जाएगा। भाजपा ने पूर्वांचल के प्रभावी कुर्मी नेता पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ओबीसी को साधने के बड़ा दांव चल दिया है। इससे जहां समाजवादी पार्टी के पीडीए को कमजोर किया जा सकता है, वहीं अपने विश्वसनीय कुर्मी वोट बैंक भी साध कर रखा जा सकता है।
इसी तरह भाजपा पश्चिम उत्तर प्रदेश को भी अपने गढ़ के रूप में बनाये रखना चाहती है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और कैराना की सीटों के लोकसभा चुनाव में हार जाने की स्थिति मे अब इन क्षेत्रों की विधान सभा सीटों के गणित को ठीक किया जा रहा है। इस गणित को ठीक करने के लिए यह भी जरूरी है कि इन क्षेत्रों की प्रभावी जातीय राजनीति को ठीक रखा जाए। इन क्षेंतों में जाटों के साथ साथ त्यागी समाज की प्रभावी संख्या है। इसीलिए संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में किसी त्यागी नेता को शामिल किये जाने पर भी विचार किया जाने लगा है। इसके लिए त्यागी समाज ने अपने एम.एल.सी. अश्विनी त्यागी का नाम आगे बढ़ा दिया है।
हालांकि माना यही जा रहा रहा है कि मंत्रिमंडल मं जाट नेता का शामिल होना तय है, और वे भूपेन्द्र चौधरी ही होंगे। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि भूपेन्द्र चौधरी का कद किसी भी हालत में कम नहीं किया जाएगा। क्योंकि उन्हें केन्द्रीय गृहमंत्री का वरहस्त प्राप्त है। इसीलिए राजनीतिक गलियारों में उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाये जाने की भी चर्चा है। हालांकि उनके ही समाज के एम.एल.सी मोहित बेनीवाल के नाम की भी कुछ प्रभावशाली लोग पैरवी कर रहे हैं।