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अभिभाषण में राज्यपाल ने दिखाई यूपी के विकास की तस्वीर*

February 9, 2026

अभिभाषण में राज्यपाल ने दिखाई यूपी के विकास की तस्वीर*

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया संबोधित

कहा: प्रदेश ने सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि विस्तार, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना विकास और व्यापक जनकल्याण के क्षेत्रों में हासिल की ठोस उपलब्धियां

Uttar Pradesh Vidhan Bhawan
Posted on 09.02.2026 Monday, Time 09.13 PM, Governor Address in Vidhan Mandal
लखनऊ, 09 फरवरी। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण प्रदेश की बदली हुई पहचान का स्पष्ट घोषणापत्र बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में ‘बॉटलनेक स्टेट’ की छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ के रूप में सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि विस्तार, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना विकास और व्यापक जनकल्याण के क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतिगत दृढ़ता, प्रशासनिक दक्षता और विकसित उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ते आत्मविश्वासपूर्ण कदमों का तथ्यात्मक और संवैधानिक प्रस्तुतीकरण रहा।

यूपी बना देश के लिए मॉडल राज्य
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति आज देशभर में एक प्रभावी मानक के रूप में उभर रही है। सरकार की कठोरता और संवेदनशीलता के संतुलित दृष्टिकोण ने संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित किया है। आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग, पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण, त्वरित एवं प्रभावी न्याय व्यवस्था तथा पारदर्शी प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से प्रदेश में भयमुक्त और विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार हुआ है। यही सुरक्षित परिवेश उत्तर प्रदेश को उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए देश के सर्वाधिक आकर्षक और भरोसेमंद राज्यों में स्थापित कर रहा है।

जीरो टॉलरेंस, सख्त कार्रवाई
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने ठोस और निर्णायक परिणाम दिए हैं। संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई में अब तक 35 माफिया व 94 सह-अपराधी दोषसिद्ध, 2 अपराधियों को मृत्युदंड, जबकि 267 अपराधी मुठभेड़ में ढेर किए गए हैं। 977 अभियुक्तों को एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया है और माफिया तत्वों से ₹4,137 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। त्वरित पुलिसिंग के लिए यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट 42 सेकंड से घटकर 6 मिनट 51 सेकंड किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने हेतु प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने कार्यरत हैं, जबकि एटीएस ने 148 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। 146 रोहिंग्या बांग्लादेशी, पाकिस्तानी व अन्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा 999 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए गए हैं।

मजबूत हुए संस्थान
राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा तंत्र की संस्थागत मजबूती की दिशा में 2017 के बाद 8 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं और 6 अन्य निर्माणाधीन हैं। इसी अवधि में 2.19 लाख से अधिक पुलिस भर्तियां, 1.58 लाख कर्मियों को प्रोन्नति तथा 83,122 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण हेतु बजट में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 41,424 होमगार्ड पदों पर नामांकन, 6 नए जिला कारागारों सहित इटावा केंद्रीय कारागार का निर्माण, और 1,010 बंदियों की समयपूर्व रिहाई कारागार सुधारों की दिशा में अहम कदम हैं। न्याय व्यवस्था को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए 10 जिलों में एकीकृत न्यायालय परिसरों को स्वीकृति, प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, 81 फास्ट ट्रैक न्यायालयों का स्थायीकरण, लोक अदालतों में 3.60 करोड़ मामलों का निस्तारण, तथा 2,609 विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया है, जिससे प्रदेश में त्वरित, पारदर्शी और जन-संवेदनशील न्याय व्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

तेज कनेक्टिविटी, तेज विकास
राज्यपाल ने अवसंरचना विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में संपर्क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 168 विकासखंड मुख्यालयों को डबल-लेन सड़कों से जोड़ा जा चुका है, जबकि 1,410 किलोमीटर लंबाई की 161 सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025–26 तक 46,600 किलोमीटर सड़कों के सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, वहीं अब तक लगभग 28,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है। अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े प्रमुख मार्गों को न्यूनतम फोर-लेन कनेक्टिविटी प्रदान करने का कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे व्यापार, परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को व्यापक गति मिल रही है।

उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल

विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।

रोशनी, भरोसा और राहत
राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले नौ वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है।

अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति
राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है।

बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार
बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 26 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादन 3.80 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 6 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है। बागवानी उत्पादों के निर्यात में ₹400 करोड़ से बढ़कर ₹1,700 करोड़ तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ किसानों को मिला है, जिससे फलों और सब्जियों से किसानों की आय ₹41,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,25,000 करोड़ तक पहुंच गई है।

गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, चीनी उद्योग को नई मजबूती
राज्यपाल ने चीनी उद्योग और गन्ना किसानों को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक किसानों को ₹3,04,321 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है, जो 1995 से 2017 के बीच हुए कुल भुगतान ₹2,13,519 करोड़ से ₹90,802 करोड़ अधिक है। राज्यपाल ने बताया कि 2017 के बाद पिपराइच, मुंडेरवा और रामाला में तीन नई चीनी मिलों की स्थापना से प्रदेश की पेराई क्षमता में प्रतिदिन 1.25 लाख क्विंटल की वृद्धि हुई है। किसानों के हित में गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, वहीं गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 84 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 59.75 करोड़ पौध किसानों तक पहुंचाई गईं तथा ₹76.88 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इन समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि चीनी उद्योग और गन्ना क्षेत्र से जुड़े 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।

गो-कल्याण ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई मजबूती
राज्यपाल ने पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गो-कल्याण को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,547 निराश्रित गोवंश की देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत 1,81,418 गोवंश गो-पालकों को सुपुर्द किए गए हैं, जिससे 1,13,631 परिवारों को स्थायी आजीविका प्राप्त हुई है। गो-पालन को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन ₹50 की दर से सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है, जिसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक ₹1,484 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। इन समन्वित प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ठोस आधार मिला है और पशुपालन आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी साधन बनकर उभरा है।

जनभागीदारी से मजबूत हुआ पर्यावरण संरक्षण
राज्यपाल ने वनों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश का वनावरण बढ़कर 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर सामाजिक जनभागीदारी से जोड़ने की रणनीति ने उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित किया है। पौधरोपण, संरक्षण और संवर्धन के समन्वित प्रयासों से प्रदेश ने सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति की है।

पारदर्शी खनन से बढ़ा राजस्व
राज्यपाल ने खनन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक प्रदेश को ₹28,920 करोड़ का खनन राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि 2012–17 की अवधि में यह मात्र ₹7,712 करोड़ था। तकनीक-सक्षम निगरानी, ई-टेंडरिंग और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था के चलते न केवल राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है।

सार्वजनिक परिवहन को नई गति
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने बताया कि निगम की 13,621 बसों ने 103.37 करोड़ किलोमीटर का संचालन किया, जिससे 37.10 करोड़ यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस कुशल प्रबंधन के परिणामस्वरूप निगम ने ₹3,810.63 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन तंत्र की मजबूती और वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है।

सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को मिला मजबूत आधार
सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूह सामाजिक समावेशन और महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। इन समूहों में 64 प्रतिशत से अधिक सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से हैं, जबकि 45,611 से अधिक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाएं भी सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ₹109 करोड़ से अधिक की धनराशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक सहभागिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिली है।

आरक्षण सुधार और लक्षित वित्तीय सहायता से सामाजिक न्याय को मजबूती
राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक न्याय की भावना को केंद्र में रखते हुए सरकार ने बाबा साहेब अंबेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 23 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया है, जिसमें इस वर्ग तथा दिव्यांगों के लिए अधिकतम ₹70,000 तक सब्सिडी का प्रावधान है। सामान्य श्रेणी में यह सब्सिडी प्रति यूनिट 25 प्रतिशत या अधिकतम ₹50,000 है। लक्षित वित्तीय सहायता की व्यवस्था ने पात्र लाभार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान किया है और उन्हें योजनाओं का वास्तविक लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये सुधार समावेशी विकास और समान अवसर की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

सुरक्षित घर, सशक्त शहर
शहरी विकास और आवास क्षेत्र में हुई प्रगति पर राज्यपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 36.37 लाख आवासों का निर्माण किया गया है, जो लक्ष्य का 99.49 प्रतिशत और देश में सर्वाधिक है। इसी तरह मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अब तक 3.67 लाख आवासों का निर्माण पूरी तरह पूर्ण हो चुका है। यह उपलब्धि गरीबों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

श्रमिक कल्याण की सशक्त व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
श्रम एवं श्रमिक कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 8 करोड़ 51 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो इस दिशा में प्रदेश की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के अंतर्गत 7,01,484 श्रमिकों को पेंशन सुरक्षा से जोड़ा गया है, जिससे श्रमिकों के भविष्य को आर्थिक संबल मिला है और उत्तर प्रदेश श्रमिक हितैषी राज्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

प्रशासनिक सुधारों, वित्तीय सुदृढ़ता और समावेशी विकास के सहारे अग्रणी राज्य बना उत्तर प्रदेश: राज्यपाल

राज्यपाल ने शिक्षा के विस्तार से लेकर आकांक्षात्मक जिलों की प्रगति और “विकसित भारत” की परिकल्पना तक सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को किया प्रस्तुत

विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की स्पष्ट तस्वीर सामने रखी। राज्यपाल ने शिक्षा के विस्तार से लेकर आकांक्षात्मक जिलों की प्रगति, आबकारी राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि और “विकसित भारत” की परिकल्पना तक सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को तथ्यात्मक और संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया। अभिभाषण में यह संदेश प्रमुख रहा कि उत्तर प्रदेश अब प्रशासनिक सुधारों, वित्तीय सुदृढ़ता और समावेशी विकास के सहारे देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में मजबूती से खड़ा हो रहा है।

शिक्षा का विस्तार
शिक्षा के क्षेत्र में हुई उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश में 6,808 सहायक अध्यापकों और 1,939 राजकीय शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे कुल 8,966 नई नियुक्तियों के माध्यम से शैक्षणिक ढांचे को सुदृढ़ किया गया है। विद्यालयों में 778 आईसीटी लैब की स्थापना, 1236 सरकारी माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना, 6 नए राज्य विश्वविद्यालयों और 71 नए राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच, दोनों को नई दिशा दी है।

*आकांक्षात्मक जिलों की उड़ान*
इसके साथ ही राज्यपाल ने आकांक्षात्मक जिलों की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश के 112 आकांक्षात्मक जिलों में शामिल उत्तर प्रदेश के 8 जिलों विशेषकर बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, चंदौली, फतेहपुर और बहराइच ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और पोषण जैसे प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार कर समावेशी विकास का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है।

*आबकारी राजस्व में ऐतिहासिक उछाल, वित्तीय सुदृढ़ता को मजबूती*
राज्यपाल ने आबकारी राजस्व में दर्ज की गई उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2016–17 में जहां प्रदेश का आबकारी राजस्व मात्र ₹14,273 करोड़ था, वहीं 2024–25 में यह बढ़कर ₹52,573 करोड़ तक पहुंच गया है। सुदृढ़ नीति, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण के परिणामस्वरूप वर्ष 2025–26 के लिए आबकारी राजस्व को ₹63,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो उत्तर प्रदेश की वित्तीय मजबूती और राजस्व प्रबंधन की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

*विकसित भारत की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश*
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य विकास की गति को और अधिक तीव्र करना, प्रशासनिक पारदर्शिता को सुदृढ़ बनाना तथा प्रदेश को “विकसित भारत” की परिकल्पना के अनुरूप अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुशासन, संवैधानिक मूल्यों और जनभागीदारी के समन्वित प्रयासों से उत्तर प्रदेश आने वाले समय में न केवल राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा, बल्कि समावेशी, संतुलित और टिकाऊ विकास के प्रभावी मॉडल के रूप में देशभर में अपनी विशिष्ट और प्रेरक पहचान भी स्थापित करेगा।

*जनसंख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि प्रदर्शन-परिणाम के आधार पर भी देश का नेतृत्व कर रहा उत्तर प्रदेश: राज्यपाल*

*विभिन्न योजनाओं में उत्तर प्रदेश की ‘नंबर वन’ उपलब्धियां प्रस्तुत*

विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी और “नंबर वन” राज्यों में स्थापित करने वाली उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। कृषि, किसान कल्याण, ऊर्जा, आवास, सामाजिक सुरक्षा, उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यावरण और प्रशासनिक सुधारों जैसे लगभग हर प्रमुख क्षेत्र की योजनाओं में उत्तर प्रदेश की प्रथम स्थान की उपलब्धियों को राज्यपाल ने तथ्यात्मक आधार के साथ रेखांकित किया। अभिभाषण में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि प्रदर्शन और परिणाम के आधार पर भी देश का नेतृत्व कर रहा है।

*कृषि उत्पादन में देश का सिरमौर उत्तर प्रदेश*
राज्यपाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज खाद्यान्न, गन्ना, चीनी, दुग्ध, आम और आलू उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। खाद्यान्न उत्पादन 2016–17 के 557.46 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2024–25 में 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि प्रदेश को न केवल आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में भी उसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाती है।

*किसान कल्याण योजनाओं में शीर्ष पर प्रदेश*
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। कृषि निवेश पर अनुदान का डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना। गन्ना किसानों को रिकॉर्ड ₹3 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान कर सरकार ने किसान हितैषी प्रशासन का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है।

*ऊर्जा, एथेनॉल और हरित पहल में अग्रणी*
राज्यपाल ने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। इसके साथ ही एथेनॉल उत्पादन और आपूर्ति में भी प्रदेश देश का नेतृत्व कर रहा है, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी ठोस योगदान मिला है।

*आवास, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं में नंबर वन*
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी) के अंतर्गत आवास निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। ग्रामीण स्वच्छ शौचालय निर्माण में भी प्रदेश शीर्ष पर है, जो स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी सफलता को दर्शाता है।

*सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में व्यापक कवरेज*
राज्यपाल ने बताया कि अटल पेंशन योजना में पंजीकरण में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.85 करोड़ गैस कनेक्शन देकर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, दोनों में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है।

*उद्योग, एमएसएमई और रोजगार में नया रिकॉर्ड*
96 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की स्थापना के साथ उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना है। जेम पोर्टल के माध्यम से सर्वाधिक सरकारी खरीद करने वाला राज्य भी उत्तर प्रदेश ही है, जिससे पारदर्शिता और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा मिला है।

*प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल गवर्नेंस में आगे*
राज्यपाल ने बताया कि मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर सर्वाधिक यूजर्स के साथ उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। ई-प्रॉसिक्यूशन प्रणाली के प्रभावी उपयोग में भी प्रदेश देश में नंबर वन है। सर्वाधिक 20.98 लाख एक्टिव करदाताओं के साथ उत्तर प्रदेश कर अनुपालन में भी शीर्ष पर है।

*स्वास्थ्य और डिजिटल हेल्थ में बड़ी उपलब्धि*
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत आभा आईडी निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। यह डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में प्रदेश की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, आर्थिक उन्नयन, एम्प्लॉयमेन्ट जेनरेशन की स्थिति में सुधार

विधान सभा सत्र आरम्भ होने के पूर्व मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ : 09 फरवरी, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान मण्डल में आज से बजट सत्र प्रारम्भ हो रहा है। राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल जी का अभिभाषण और सामान्य बजट, यह बजट सत्र के दो महत्वपूर्ण एजेण्डे होते हैं। संसदीय परम्परा के अनुरूप इसकी शुरुआत राज्यपाल जी के अभिभाषण से होगी। राज्यपाल जी द्वारा समवेत सदन को अपना अभिभाषण सम्बोधन के माध्यम से दिया जाएगा। राज्यपाल जी का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भावी कार्ययोजना का एक दस्तावेज होता है, जिसे राज्यपाल जी द्वारा सदन के माध्यम से प्रदेश की जनता-जनार्दन को समर्पित किया जाता है। सभी सदस्य इस पर चर्चा करते हैं।
मुख्यमंत्री जी आज यहां विधान भवन परिसर में विधान मण्डल सत्र से पूर्व मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे थे। वर्ष 2026-27 का सामान्य बजट आगामी 11 फरवरी को प्रस्तुत होगा और फिर इस पर चर्चा होगी। अन्त में अनुदान मांगों को पारित किया जाएगा। बजट सत्र आज 09 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्यपाल जी के अभिभाषण के सदन के पटल पर रखे जाने के उपरान्त यह पहली बार होगा, जब उत्तर प्रदेश सरकार की आर्थिक उपलब्धियों पर आधारित आर्थिक सर्वेक्षण भी सदन में प्रस्तुत किया जायेगा। हमने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से उबारकर भारत की इकोनॉमी के ब्रेक-थ्रू स्टेट के रूप में स्थापित किया है। उन सभी कारकों और उत्तर प्रदेश के आर्थिक उन्नयन की इस यात्रा को जानने का अधिकार सभी माननीय जनप्रतिनिधियों और प्रदेश की जनता-जनार्दन को होना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, आर्थिक उन्नयन, एम्प्लॉयमेन्ट जेनरेशन की स्थिति में सुधार तथा प्रदेश के वित्तीय प्रबन्धन के सुदृढ़ीकरण आदि विषयों से सम्बन्धित आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत होगी। राज्य को पिछले 05 वर्ष से लगातार रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में स्थापित किया गया है। राज्यपाल जी के अभिभाषण और बजट पर चर्चा के दौरान सभी सदस्यों के लिए यह रिपोर्ट प्रदेश के डाटा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विधान मण्डल लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधारस्तम्भ है। यह संवाद से चलता है, कार्रवाई को बाधित करके नहीं। हमारी सरकार संवाद से समस्या के समाधान पर विश्वास करती है। सरकार प्रत्येक मुद्दे पर चर्चा-परिचर्चा करने तथा सभी सदस्यों के बहुमूल्य सुझावों को स्वीकार करने को तैयार है। उन सुझावों पर चर्चा करके राज्य के हित में आवश्यक कदम उठाने के लिए तत्पर है। लेकिन सदन की कार्रवाई को बाधित न किया जाए और अनावश्यक शोर-गुल से बचा जाए।
मुख्यमंत्री जी ने सभी पक्षों के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि हमें विधायिका के सर्वोच्च मंच को जनता-जनार्दन से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने तथा संवाद से समस्या के समाधान की दिशा में एक नया मार्ग आगे बढ़ाने की दिशा में अपना प्रयास करना चाहिए। विगत 09 वर्षों में उत्तर प्रदेश विधान मण्डल में कार्रवाई के नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। यह वर्ष हमारी सरकार का 10वां बजट प्रस्तुत करने का है, ऐसे में यह सत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इस पर पूरे प्रदेश और देश की निगाहें होंगी।
मुख्यमंत्री जी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट सत्र उत्तर प्रदेश के विकास की स्पीड को और तीव्र करने में एक बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। यह  अनेक प्रकार के विधायी कार्यों को सम्पन्न करने तथा समस्त सदस्यों के महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने का भी एक मंच बनेगा।

February 8, 2026

विधान सभा सत्र संचालन में दलीय नेता सहयोग करें: सतीश महाना

Yogi Adityanath

दलीय नेताओं की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्वागत किया

Posted on 08.02.2026, Time: 08.01 AM, UP Assembly session 

लखनऊ, 08 फरवरी 2026, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने 09 जनवरी 2026 से प्रारम्भ हो रहे 18वीं विधान सभा सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सभी दलीय नेताओं से सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि संसदीय व्यवस्था में संवाद तथा सकारात्मक चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से लोकतंत्र सुदृढ़ होता है। विधानसभा चर्चा और परिचर्चा का मंच है, शोर-शराबे का नहीं। सहमति और असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। शोर-शराबे से न तो सरकार की बात सामने आती है और न ही विपक्ष की।विधान भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सभी दलीय नेताओं ने विधान सभा अध्यक्ष को सदन संचालन में सहयोग देने का आश्वासन दिया।

बैठक में विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि यह देश की सबसे बड़ी विधान सभा है। स्वाभाविक रूप से उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यवाही पूरे देश के विधान मंडलों के लिए एक मानक एवं आदर्श प्रस्तुत करती है। श्री महाना ने कहा कि सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर देर शाम तक सदन की कार्यवाही संचालित की जाएगी, ताकि प्रत्येक सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पूर्व के इतिहास पर दृष्टि डाली जाए तो विगत चार वर्षों में इस विधानसभा में सर्वाधिक चर्चा हुई है।विधान सभा अध्यक्ष ने सभी दलों के नेताओं से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने पक्ष को सदन में शालीनता एवं संसदीय मर्यादा के अंतर्गत रखें और प्रेमपूर्ण वातावरण में बहस करें। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार पूर्व के सत्रों में सभी का सहयोग प्राप्त हुआ है, उसी प्रकार इस सत्र में भी सहयोग की आशा है।इस अवसर पर सभी दलीय नेताओं ने विधान सभा अध्यक्ष की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि आपके दिशा-निर्देशन में विधान सभा में निरंतर कुछ नया देखने को मिल रहा है। उम्मीद है कि भविष्य में भी नए प्रयोगों के साथ विधान सभा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।बैठक में नेता सदन एवं प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सर्वदलीय बैठक में संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने सभी दलीय नेताओं को आश्वस्त किया कि सरकार पूरी गंभीरता के साथ विकास को नई गति देने एवं आगे बढ़ाने के लिए कार्य करेगी। सरकार सभी मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। संसदीय कार्य मंत्री ने माननीय मुख्यमंत्री जी की भावना के अनुरूप सभी दलीय नेताओं से सदन में शांतिपूर्ण सहयोग की अपील की।इस अवसर पर माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री माता प्रसाद पाण्डेय, माननीय नेता अपना दल (सोनेलाल) श्री राम निवास वर्मा, माननीय नेता राष्ट्रीय लोकदल श्री राजपाल बालियान, माननीय नेता सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी श्री ओमप्रकाश राजभर, माननीय नेता निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल श्री रमेश सिंह, माननीय नेता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस श्रीमती आराधना मिश्रा ‘मोना’ तथा जनसत्ता लोकतांत्रिक दल के माननीय नेता कुंवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ के स्थान पर श्री विनोद सरोज ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और सदन की कार्यवाही को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने में हर प्रकार का सहयोग देने का आश्वासन दिया।इससे पूर्व माननीय विधान सभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना जी की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना के अतिरिक्त समिति के सदस्य श्री जयवीर सिंह, श्रीमती बेबी रानी मौर्य, श्री सुशील कुमार शाक्य, श्री जयप्रताप सिंह, श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, श्री पंकज सिंह, श्री रविदास मेहरोत्रा, डॉ. संग्राम यादव, श्री आशु मलिक तथा विशेष आमंत्रित सदस्य श्री रामनिवास वर्मा, श्री राजपाल सिंह बालियान, श्री रमेश, श्री ओमप्रकाश राजभर और श्रीमती आराधना मिश्रा ‘मोना’ शामिल हुए।इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान सभा के प्रमुख सचिव श्री प्रदीप कुमार दुबे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

February 7, 2026

SIR यूपी में समय सीमा 6 मार्च तक बढ़ाई गई

Navdeep Rinva CEO UP

नवदीप रिणवा , मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश

लखनऊ, 07 फरवरी 2026. प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण- 2026 के अंतर्गत 6 मार्च, 2026 तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएगी। उन्होंने बताया आपत्तियों के संबंध में फार्म 7 के माध्यम से मृत, स्थानांतरित, दोहरी प्रविष्टि, अनुपस्थित आदि मतदाताओं के संबंध में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए कार्रवाई की जा रही है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची को शुद्ध एवं त्रुटिरहित तैयार किये जाने हेतु विलोपन कार्यवाही की जाती है। फॉर्म-7 में प्रस्तुत आवेदन के आधार पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा मतदाता सूची से किसी मतदाता का नाम विलोपित किए जाने की कार्यवाही की जाती है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार विद्यमान नामावली में नाम के प्रस्तावित समावेश के लिए प्रत्येक आपत्ति या नाम को हटाये जाने के लिए आवेदन प्ररूप-7 में होगा और केवल ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाएगा, जिसका नाम पहले से ही उस मतदाता सूची में सम्मिलित है। साथ ही आपत्तिकर्ता को फार्म-7 में स्वयं का विवरण यथा-नाम, मतदाता फोटो पहचान पत्र संख्या, स्वयं का एवं संबंधी का मोबाइल नम्बर इत्यादि देना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि फॉर्म-7 में प्राप्त आपत्तियों की सूची निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा फार्म-10 में तैयार की जाती है। दावे एवं आपत्तियों की अवधि में प्राप्त आपत्तियों की सूची फार्म-10 में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के नोटिस बोर्ड पर प्रतिदिन प्रदर्शित की जाती है तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को साप्ताहिक रूप से उपलब्ध करायी जाती है। साथ ही राजनैतिक दलों एवं जन सामान्य की सुविधा हेतु फार्म-7 में प्राप्त आवेदनों की उक्त सूची (फार्म-10) जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रतिदिन अपलोड की जाती है, जिसका लिंक मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहता है।

उन्होंने बताया कि फार्म-7 में प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए निस्तारण किया जाता है, जिसके अन्तर्गत नोटिस निर्गत करना, बूथ लेवल अधिकारी द्वारा स्थलीय सत्यापन की कार्यवाही करते हुए रिपोर्ट लगाया जाना तथा न्यूनतम 7 दिन की अवधि के पश्चात् निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा यथावश्यक सुनवाई की प्रक्रिया करते हुए प्रस्तुत आवेदन पर निर्णय लिया जाना सम्मिलित है। किसी व्यक्ति के नाम को मतदाता सूची में सम्मिलित करने के विरूद्ध आपत्ति के प्रकरण में आपत्तिकर्ता को फार्म-13 में नोटिस निर्गत की जाती है। जिस व्यक्ति का नाम सम्मिलित करने के विरूद्ध आपत्ति की गयी है उस व्यक्ति को फार्म-14 में नोटिस निर्गत की जाती है।

उन्होंने बताया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 1960 के नियम 19 के अनुसार निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी आपत्ति के संबंध में सुनवाई की तारीख, समय और स्थान निर्धारित कर उसकी सूचना अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करेगा और सुनवाई की सूचना/नोटिस जारी करेगा। नियम 19 के अनुसार सूचना/निर्गत नोटिस के अन्तर्गत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा ऐसी हर आपत्ति की संक्षिप्त जाँच की जाएगी। इस हेतु निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा आपत्तिकर्ता/व्यक्ति को अपने समक्ष उपस्थित होने तथा समुचित साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु कहा जा सकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा आवेदन थोक में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। केवल व्यक्तिगत आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। यही सिद्धांत डाक से प्राप्त आवेदनों पर भी लागू होगा। थोक आवेदन का आशय उन आवेदनों से है जिन्हें अनेक व्यक्तियों की ओर से एक व्यक्ति द्वारा जमा किया जाता है। हालांकि परिवार के सदस्यों से जुडे़ एक साथ प्रस्तुत व्यक्तिगत आवेदनों को स्वीकार किया जा सकता है।

नशाखोरी को लेकर विहिप चलाएगा नशा मुक्ति अभियान: मिलिंद परांडे

  • समाज बढ़ रहे पारिवारिक विघटन पर विहिप नेता मिलिंद परांडे ने जताई चिंता
  • बजरंग दल की अखिल भारतीय बैठक का शुभारंभ
Bajrang Dal Meeting Lucknow

बजरंगदल की बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांदे

Posted on 07.02.2026 Saturday, Time: 05.52 PM

लखनऊ। विश्व हिंदू परिषद की युवा इकाई बजरंग दल की एस आर इंस्टीट्यूशंस,सीतापुर रोड बीकेटी लखनऊ में दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक का शुभारंभ विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, एस आर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन एवं विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, बजरंगदल के राष्ट्रीय संयोजक किशन प्रजापत, सह संयोजक विवेक ,पूज्य संत राम शरण दास जी महाराज, विश्व हिन्दू परिषद लखनऊ पूर्वी क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री गजेंद्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया ।।
इस अखिल भारतीय बैठक में पूरे देश से सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए जिसमें प्रत्येक प्रदेश की बजरंग दल की टोली उपस्थित रही।
कार्यक्रम में ही आयोजित पत्रकार वार्ता में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के केन्द्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने बताया युवाओं में बढ़ रहे नशे को लेकर चिंता जताई और कहा समाज के विभिन्न वर्गों में युवा वर्ग नशे की दिशा में बढ़ता जा रहा है समाज में कई प्रकार के नशे को अपना रहा है। इसमें विशेष रूप से समाज को जागृत होकर युवाओं को नशा मुक्ति के लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने अपने संवाद में कहा कि आज परिवारों का विघटन होता जा रहा है। नई पीढ़ी के परिवारों में पारिवारिक कलह बढ़ती जा रही है । यह बहुत ही चिंता का विषय है। इसको लेकर समाज में आ रही कमियों को लेकर परिवार के बीच समन्वय की आवश्यकता है।

उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया ने कहा कि 2023 में देश की 13 लाख महिलाएं लापता हुईं। इनमें से एक बड़ा वर्ग लव जिहाद का शिकार हुआ है। केरल की हजारों लड़कियां लव जिहाद का शिकार हुई। इस असंतुलन के पीछे कई अराजक तत्व योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से धार्मिक मतांतरण, लव जिहाद, बांग्लादेश और म्यांमार से हो रही मुस्लिम घुसपैठ, और हिन्दू समाज में घटती जन्मदर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सुनियोजित रूप से आर्थिक प्रलोभन, छल कपट या दबाव के माध्यम से मुसलमानों एवं ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण ने कई क्षेत्रों में स्थानीय हिन्दू जनसंख्या को कम किया है।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री श्री परांडे ने कहा कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत मुस्लिमों के एक वर्ग द्वारा हिन्दू युवतियों को फंसाकर उनका मतांतरण कराया जा रहा है, जो केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक हमला है। सीमावर्ती राज्यों जैसे असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और अब दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और आर्थिक दृष्टिकोण से जागरूक हिन्दू समाज में परिवार सीमित रखने की प्रवृत्ति है, परंतु बाकी वर्गों में इस पर कोई नियंत्रण नहीं है, जिससे असंतुलन और तेज होता जा रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट ने भारत में जनसंख्या वितरण की गहराई से समीक्षा प्रस्तुत की है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ वर्गों में जन्मदर जहां स्थिर या बढ़ती हुई है, वहीं हिन्दू समाज में यह दर घट रही है। भारत के स्थायित्व, संस्कृति और एकता की रक्षा की आवश्यकता है। सभी राष्ट्रप्रेमी नागरिकों, संतों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों से अपील है कि वे इन विषयों पर जनजागरण में सहभागी बनें।

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