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हरिद्वार में कुत्तों की संख्या नियंत्रण का कार्य शुरू

February 19, 2026

हरिद्वार में कुत्तों की संख्या नियंत्रण का कार्य शुरू

*हरिद्वार में आवारा कुत्तों की संख्या को सुरक्षित और मानवीय तरीके से नियंत्रित करने के लिए पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम दोबारा शुरू किया गया है।*

_हरिद्वार नगर निगम ने शहर के लगभग 85% कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कराने के लिए ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के साथ मिलकर यह अभियान शुरू किया है।_

*हरिद्वार, उत्तराखंड* (फरवरी, 19 2026)— ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया (जिसे पहले ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल इंडिया कहा जाता था) एक पशु संरक्षण संगठन है, जो दुनिया भर में पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए काम करता है। इस संगठन ने हरिद्वार नगर निगम के साथ मिलकर शहर में बड़े पैमाने पर पशु जन्म नियंत्रण और रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम फिर से शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत, शहर के लगभग 85% आवारा कुत्तों को पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के अनुसार सुरक्षित और मानवीय तरीके से पकड़ा जाएगा। उनकी नसबंदी की जाएगी और रेबीज से बचाव का टीका लगाया जाएगा। इसके बाद उन्हें उसी जगह पर छोड़ दिया जाएगा, जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या को सही और मानवीय तरीके से नियंत्रित करना है। इससे कुत्तों का स्वास्थ्य बेहतर होगा, लोगों और कुत्तों के बीच होने वाली परेशानियाँ कम होंगी, और अनचाहे पिल्लों के जन्म को रोका जा सकेगा।

ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के साथ इस कार्यक्रम के जरिए हरिद्वार, उत्तराखंड के अन्य शहरों—देहरादून, रुद्रपुर, रुड़की, नैनीताल, ऋषिकेश, काशीपुर और मसूरी—की तरह इस अभियान का हिस्सा बन जाएगा। इससे पूरे राज्य में आवारा कुत्तों की देखभाल और संख्या नियंत्रण के प्रयास और मजबूत होंगे।

इस पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए कुत्तों के व्यवहार से जुड़ी जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित होंगी, जानकारी देने वाली सामग्री बाँटी जाएगी और लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जाएँगे।

डॉ. पियूष पटेल, ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया की पशु व जनजागरूकता टीम के निदेशक, ने कहा, “हरिद्वार में हमारी यह पहल पूरे राज्य में आवारा कुत्तों की संख्या को बेहतर ढंग से संभालने में मदद करेगी। पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम अपनाकर अब उत्तराखंड के कई शहरों के साथ हरिद्वार भी कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए एक व्यवस्थित और लंबे समय तक चलने वाला तरीका अपना रहा है। यह हरिद्वार जैसे शहर के लिए खास तौर पर जरूरी है,, जहाँ हर साल लाखों लोग आते हैं, इस वजह से लोगों और कुत्तों का आमना-सामना ज्यादा होता है।। उत्तराखंड के कई शहरों में सफल रहा यह कार्यक्रम अब हरिद्वार में भी कुत्तों की संख्या को मानवीय तरीके से नियंत्रित करने में मदद करेगा। आगे चलकर इससे लोगों और कुत्तों के बीच होने वाली दिक्कतें कम होंगी और कुत्तों की देखभाल भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।”

सराय में स्थित पशु जन्म नियंत्रण केंद्र सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सीधे आकर दी जाने वाली शिकायतें और अनुरोध स्वीकार करेगा। आवारा कुत्तों से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए लोग ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के हेल्पलाइन नंबर 9568844151 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया द्वारा योजनाबद्ध और व्यवस्थित तरीके से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम से सामुदायिक कुत्तों की संख्या में स्पष्ट रूप से कमी आई है और उनकी आबादी की बढ़ोतरी धीमी हुई है। इन परिणामों से यह साबित होता है कि जब इस तरह के कार्यक्रम को सही तरीके से और बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो कुत्तों की संख्या का मानवीय प्रबंधन न केवल संभव है, बल्कि लंबे समय तक सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के लिए बेहद जरूरी भी है।

गोरखपुर के जटेपुर में नल से निकल रहा नाले जैसा गंदा पानी*

संतोष कुमार सिंह
गोरखपुर

*रामबाग मोहल्ले में जनस्वास्थ्य पर खतरा, शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन*

गोरखपुर। नगर निगम क्षेत्र के जटेपुर उत्तरी वार्ड नंबर 27 स्थित रामबाग मोहल्ले में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। यहां घरों में लगे नलों से पीने योग्य स्वच्छ जल के स्थान पर नाले जैसा गंदा, काला और बदबूदार पानी निकल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति इतनी खराब है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही किसी भी घरेलू उपयोग के लायक।
मोहल्ले के निवासियों के अनुसार पिछले कई दिनों से नलों से दूषित पानी आ रहा है। दुर्गंध इतनी तेज है कि पानी को छूना भी मुश्किल हो रहा है। कई परिवार मजबूरी में बाजार से बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग दूर के हैंडपंपों से पानी ढोकर ला रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि जिस पानी से वे अपने बच्चों की प्यास बुझाती थीं, आज वही पानी बीमारी का कारण बनता दिख रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और त्वचा संबंधी शिकायतें सामने आने लगी हैं। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो संक्रामक बीमारियां फैलना तय है।
मोहल्लेवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जलकल विभाग और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सबसे गंभीर बात यह है कि जलकल विभाग के जीएम का फोन तक नहीं उठ रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही फोन नहीं उठाएंगे तो जनता अपनी समस्या किससे कहे?
लोगों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि जनस्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दे पर विभाग की यह उदासीनता अस्वीकार्य है। “हर घर जल योजना का दावा करने वाले अधिकारी क्या जटेपुर की स्थिति से अनजान हैं, या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं? यदि पाइपलाइन में लीकेज है या सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है तो उसे तत्काल दुरुस्त करना विभाग की जिम्मेदारी है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, हम टैक्स और पानी का बिल समय से जमा करते हैं, लेकिन बदले में हमें गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा है। शिकायत करने पर फोन तक नहीं उठाया जाता। आखिर हमारी सुनवाई कौन करेगा?”
विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी के सेवन से हैजा, टायफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन को इसे सामान्य तकनीकी समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए, बल्कि इसे संभावित जनस्वास्थ्य आपात स्थिति की तरह लेना चाहिए।
मोहल्ले के लोगों ने मांग की है कि तत्काल जलकल और नगर निगम की संयुक्त टीम मौके पर भेजी जाए, पाइपलाइन की जांच हो, पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और जब तक समस्या का स्थायी समाधान न हो, तब तक स्वच्छ पानी के टैंकरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
जनता का यह भी कहना है कि यदि अधिकारी फोन तक नहीं उठाएंगे और जमीनी हालात का जायजा नहीं लेंगे तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का स्पष्ट उदाहरण होगा। रामबाग मोहल्ले के लोग फिलहाल भय और आक्रोश के बीच जीवन जी रहे हैं। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और क्या जीएम जलकल जनता की पीड़ा सुनने के लिए आगे आएंगे, या हालात किसी बड़ी बीमारी के बाद ही सुधरेंगे?
जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और ठोस कार्रवाई ही प्रशासन की संवेदनशीलता की असली परीक्षा होगी।

Gorakhpur कैंप में ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखों की रोशनी गई, डीएम ने दिए जांच के आदेश

Posted on 19.02.2026, Thursday Time 05.50 PM, Santosh Kumar Singh, Gorakhpur संतोष कुमार सिंह , गोरखपुर*मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, कई की रोशनी गई*

गोरखपुर, 19 फरवरी। जिले के सिकरीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में आयोजित मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप के बाद सामने आए गंभीर संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑपरेशन के बाद कई मरीजों की हालत बिगड़ गई, जिनमें से नौ मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, जबकि कई अन्य की आंखों की रोशनी चली गई। यह मामला सामने आते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि 1 फरवरी को न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में आई कैंप आयोजित किया गया था, जिसमें करीब 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, खून आना और मवाद जैसी शिकायतें शुरू हो गईं। धीरे-धीरे स्थिति इतनी बिगड़ी कि 18 मरीजों में गंभीर संक्रमण पाया गया।
इन्दारी निवासी संजय सिंह ने बताया कि वे अपने पिता का ऑपरेशन कराने अस्पताल गए थे। ऑपरेशन के बाद आंख से लगातार खून आने लगा। पहले वाराणसी ले जाया गया, फिर दिल्ली तक इलाज कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। अंततः डॉक्टरों ने आंख निकालने की सलाह दी। संजय सिंह का कहना है कि उनके परिवार के दो लोगों का ऑपरेशन हुआ था और दोनों की स्थिति गंभीर हो गई।
इसी तरह रेखा नामक महिला ने बताया कि उनकी सास का ऑपरेशन भी इसी कैंप में हुआ था। ऑपरेशन के बाद आंख में तेज दर्द और मवाद की शिकायत शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि 18 मरीजों की हालत बिगड़ने की जानकारी है और कई लोग अलग-अलग शहरों में इलाज करा रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई मरीजों को गोरखपुर से बाहर दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच और कल्चर रिपोर्ट में गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई है।
मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि सिकरीगंज के एक निजी अस्पताल में आंख के ऑपरेशन के बाद संक्रमण की बात सामने आई है। पीड़ित मरीजों का अलग-अलग स्थानों पर इलाज चल रहा है। कुछ मरीजों को गंभीर संक्रमण हुआ है। अस्पताल को सील कर दिया गया है और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई और पंजीकरण निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि 4 फरवरी को जानकारी मिली कि 1 फरवरी को 30 ऑपरेशन किए गए थे। कई मरीजों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जिला स्तरीय कमेटी गठित कर जांच शुरू की गई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर संक्रमण का प्रतीत हो रहा है। एहतियातन अस्पताल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है और संबंधित ऑपरेशन थिएटर की जांच की जा रही है।
इस घटना ने निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था और ऑपरेशन प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि लापरवाही और संक्रमण नियंत्रण में कमी के कारण यह स्थिति बनी। कई परिवारों की जिंदगी में अंधेरा छा गया है।
फिलहाल पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पीड़ित परिवार न्याय और उचित उपचार की उम्मीद में हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री “बजट पर युवा संवाद कार्यक्रम” में हुए शामिल*

*संतोष कुमार सिंह*
*गोरखपुर*

गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी वे भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा योगिराज बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में आयोजित “बजट पर युवा संवाद कार्यक्रम” में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया।आम बजट 2026-27 को लेकर यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें स्कूल और कॉलेजों से आए हुए छात्रों ने हिस्सा लिया।

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट के बजट में बढ़ोतरी की गई है, ताकि हमारे नौजवान देश के विकास में अपना योगदान दे सकें। वर्तमान में एनीमेशन ग्राफिक्स AI का चलन है। कंटेंट क्रिएशन के लिए युवाओं को अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएशन के लिए युवाओं को अवसर मिलेगा। आज युवाओं को इस बजट को समझने की जरूरत है। बजट के विषयों को ठीक से समझें और उसे जन-जन तक पहुंचाएं।

गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस में युवती से दुष्कर्म के आरोपी टीटीई पर 10 हजार का इनाम घोषित*

 

*संतोष कुमार सिंह*
*गोरखपुर*

गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस ट्रेन में एक युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी टीटीई पर 10 हजार रुपये का इनाम रखा गया है। गोरखपुर के रेलवे जीआरपी एसपी लक्ष्मी निवास मिश्र ने जानकारी दी कि आरोपी फरार टीटीई राहुल कुमार, एनईआर के वाराणसी डिवीजन में कार्यरत है।उसे बर्खास्त करने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है, और वह घटना के बाद से फरार है।

जानकारी के अनुसार, टीटीई ने एक एनसीसी कैडेट युवती के साथ दुष्कर्म किया। युवती परीक्षा देने मऊ गई थी और लौटते समय भीड़ के कारण वह टिकट नहीं ले सकी। इस वजह से वह एसी कोच में खड़ी थी। आरोपी ने उसे सीट दिलाने के बहाने अपने केबिन में बुलाया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। एसपी जीआरपी लक्ष्मी निवास मिश्रा ने बताया कि युवती की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। यह घटना रविवार को हुई थी। युवती अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन से मऊ से लौट रही थी। टीटीई ने उसे टिकट बनाने और सीट देने के बहाने केबिन में बुलाया। पहले सामान्य बातचीत की, लेकिन फिर उसने अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। जब युवती ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे धमकी दी और दुष्कर्म किया। यह घटना इंदारा और देवरिया के बीच हुई।
घटना के बाद युवती ने 112 पर फोन किया, जिससे टीटीई देवरिया में ट्रेन से उतरकर भाग गया। जीआरपी पुलिस ने बताया कि पीड़ित युवती ने शिकायत दर्ज कराई है। वह गोरखपुर में किराए के कमरे में रहकर भर्ती की तैयारी कर रही थी और एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट परीक्षा देने मऊ गई थी। परीक्षा के बाद लौटते समय स्टेशन पर भीड़ के कारण वह टिकट नहीं ले सकी थी।
युवती का आरोप है कि टीटीई ने केबिन में बैठाने के बाद दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। सामान्य बातचीत के कुछ समय बाद उसका व्यवहार बदल गया और उसने दुष्कर्म किया। जब युवती ने विरोध किया, तो आरोपी ने बिना टिकट यात्रा का मामला बनाकर कार्रवाई की धमकी दी। पीड़िता ने शोर मचाया और 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचित किया। जैसे ही मामला सामने आया, आरोपी टीटीई देवरिया स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर भाग गया।

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