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लोकपर्व होली: परम्परा एवं प्रतीक चिंतन – डाॅ० राकेश सक्सेना

February 25, 2026

लोकपर्व होली: परम्परा एवं प्रतीक चिंतन – डाॅ० राकेश सक्सेना

एटा 25 फरवरी उप्रससे। भारत में होली एक लोकपर्व है जिसका वर्तमान स्वरूप पौराणिक कथाओं विशेषकर प्रह्लाद-होलिका प्रसंग और वसंतोत्सव की परम्परा से जुड़ा है। जैमिनी रचित पूर्व मीमांसा सूत्र और उनसे सम्बन्धित काठक गृह्य सूत्र में होली ( होलिका ) का उल्लेख एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार के रूप में मिलता है जो ईसा पूर्व से मनाया जा रहा है। यह सूत्र बताते हैं कि होली विवाहित महिलाओं द्वारा अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए की जाने वाली एक पूजा थी जो पूर्णमासी को मनाई जाती थी। प्राचीन उत्सव के रूप में इसको मान्यता प्राप्त है, ईसा पूर्व ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। वैदिक साहित्य में वसंतोत्सव की भावना, अग्नि की पवित्रता, ऋतु परिवर्तन का उत्सव तथा सामूहिक मंगल कामना के आधार पर होली का सांस्कृतिक बीज रूपांतरण वैदिक परम्परा में निहित है, जिसका वर्तमान स्वरूप कालांतर में पौराणिक और लोक परम्पराओं के साथ विकसित हुआ।
होली का इतिहास कई पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं से जुड़ा है। राधा-कृष्ण की प्रेमलीला, हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद( बुराई पर अच्छाई की जीत ), कामदेव की कथा (शिव के ध्यान को भंग करने के लिए कामदेव ने पुष्प वाण चलाया जिससे क्रोधित होकर शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया, बाद में रति की प्रार्थना पर शिव ने उन्हें पुनर्जीवित किया) कामदेव के पुनर्जीवन को कुछ क्षेत्रों में होली के रूप में मनाते हैं। होली को प्राचीन ग्रंथों में ‘ वसंतोत्सव ‘ कहा गया है और यह फाल्गुन मास में मनाया जाता है इसलिए इसे फाग भी कहते हैं। यह ऋतु परिवर्तन और नई फसल के स्वागत का उत्सव भी है जिसमें किसान अग्नि को अन्न समर्पित करते हैं।
मान्यता है कि इस उत्सव की शुरुआत झाँसी मुख्यालय से करीब सत्तर कि०मी० दूर ‘एरच’ कस्बा से हुई है तो कुछ लोगों का मानना है कि हरदोई से हुई जिसका उल्लेख गजेटियर्स में भी मिलता है। बहरहाल इस पर्व को मनाने की पृष्ठभूमि में मुख्य कथा हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद की है। हिरण्यकशिपु नामक असुर राजा अपने पुत्र प्रह्लाद से घृणा करता था क्योंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। उसने अपनी बहन होलिका (जिसे आग से न जलने का वरदान था) को प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने का आदेश दिया परिणामस्वरूप होलिका जल गई लेकिन प्रह्लाद बच गया। यह बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है जिसे होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। असुर राजा हिरण्यकशिपु की बहन और प्रह्लाद की मौसी होलिका से ही ‘ होली ‘ शब्द की व्युत्पत्ति हुई है। इस कथा में एक प्रतीकात्मक संदेश भी निहित है। हिरण्यकशिपु का अर्थ है– हिरण्य (सोना) और कशिपु (पलंग) अर्थात स्वर्ण पलंग वाला। हिरण्यकशिपु एक ऐसा राजा था जो अपार धन- सम्पत्ति में डूबा हुआ था जिसके कारण वह सर्वोच्च शक्ति के रूप में सभी से अधीनता की माँग करता था। प्रह्लाद का अर्थ है– जो स्वाभाविक रूप से सुख और शान्ति का भाव उत्पन्न करता है। यह शब्द ‘ आह्वाद ‘ से आया है जो पुनरुत्थान, ताजगी, आनंद को दर्शाता है। नरसिम्हा द्वारा हिरण्यकशिपु बध से यही शिक्षा प्राप्त होती है कि मनुष्य को अहंकार नहीं करनी चाहिए, अनैतिक जीवनशैली हिंसक अंत की ओर ले जाती है। होलिका दहन की परम्परा इसी कारण से हुई होगी जो दुर्भावना के सामूहिक दहन का प्रतीक बन गया। होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक है। लकड़ियों को एकत्र करके सामूहिक रूप से अग्नि प्रज्वलित करके परिक्रमा लगाना, यह सामूहिकता प्राचीन यज्ञ संस्कृति को जीवंत करती है। यह अनुष्ठान ईर्ष्या, द्वेष व अहंकार के दहन का प्रतीक भी माना जाता है।
होली पर एक-दूसरे के गालों पर रंग, गुलाल,अबीर लगाने की परम्परा है। इसकी पृष्ठभूमि में कथा अनुसार- भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को ग्वालिन राधा से प्रेम हो गया था लेकिन उन्हें इस बात का दु:ख था कि उनकी त्वचा गहरे नीले रंग की है जबकि राधा की त्वचा गोरी। इस दु:ख को दूर करने के लिए उन्होंने खेलते हुए शरारत में राधा के चेहरे पर रंग लगा दिया। माना जाता है कि रंगीन पानी एवं रंग लगाने की परम्परा यहीं से प्रारम्भ हुई। वस्तुत: रंग आनंद ही नहीं देते अपितु हमारे जीवन का आधार भी होते हैं। भारतीय संस्कृति में रंगों का विशेष महत्व रहा है। होली जैसे उत्सव में रंग- प्रेम, सौहार्द और समानता का संदेश देते हैं। रंग मानव की भावनाओं का प्रतीक भी हैं। लाल रंग यदि प्रेम और उत्साह का प्रतीक है तो सफेद शांति और पवित्रता का द्योतक है। हरा रंग समृद्धि और विकास का संकेत देता है तो नीला रंग विश्वास और स्थिरता को दर्शाता है। अत: कहा जा सकता है कि रंग जीवन के प्राण हैं, रंग ही जीवन को ऊर्जा, आनंद के साथ ही साथ जीवन को अर्थ प्रदान करते हैं। जब हमारे विचार सकारात्मक व रंगीन होंगे तभी हमारा जीवन आनंदमय बनेगा। इस प्रकार लोक जीवन से जुड़ा होली का पर्व केवल रंगों का ही नहीं अपितु प्रेम, सद्भाव, एकता,भाईचारे एवं सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

February 24, 2026

एटा में ऑटो-ट्रैक्टर भिड़ंत में मासूम समेत 6 लोग घायल, जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती

एटा 24 फरवरी उप्रससे। जनपद के मिरहची थाना क्षेत्र में अखतोली गांव के पास एक ऑटो और ट्रैक्टर की टक्कर हो गई। इस हादसे में एक मासूम समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया।

घायलों अभिषेक ने बताया कि वह अपनी बहन अंजलि और पड़ोस की महिला सुमन पत्नी बृजेश कुमार के साथ ऑटो में सवार था। ऑटो में कुल आधा दर्जन से अधिक लोग सवार थे, जो अखतोली गांव के पास ट्रैक्टर से टकरा गया। जिसमें अभिषेक पुत्र बृजेश, निवासी ओढ़नी, सुनीता पत्नी सुमित, महक पुत्री सुमित, ज्ञान सिंह पुत्र साहब सिंह, नित्या पुत्री सुमित, सरोज देवी पत्नी बृजेश और अंजलि पुत्री बृजेश घायल हो गए। सूचना पर पहुंची मिरहची पुलिस ने तत्काल घायलों को जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया जहां घायलों का उपचार जारी है।

मिरहची थाना प्रभारी नीतू वर्मा ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल को मौके पर भेजा गया था। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और मामले की जांच की जा रही है।

एटा में मोर को पकाते समय युवक को किया गिरफ्तार, वन विभाग ने दर्ज कराई रिपोर्ट

एटा 24 फरवरी उप्रससे। जनपद में नया गांव थाना क्षेत्र के नगला चंदी गांव में वन्य कर्मियों ने पुलिस की मदद से एक युवक को राष्ट्रीय पक्षी मोर पकाते हुए रंगे हाथ पकड़ा। आरोपी के खिलाफ भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत एफआईआर दर्ज कराई है।

वन विभाग की टीम को मौके से खून से सना चाकू, मोर के जले हुए पंख और एक बर्तन में पकते हुए मोर के अंग मिले। यह बरामदगी आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत मानी जा रही है। वन कर्मियों को मोर पकाए जाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल मौके पर पहुंचकर आरोपी चरण सिंह उर्फ गोलू पुत्र सरमन निवासी नगला चंदी को पकड़ा।

वन विभाग के कर्मचारी सक्षम त्रिपाठी, वन रक्षक सचिन कुमार, न्यूनतम वेतन कर्मी धर्मेंद्र कुमार, उजीर सिंह और समर पाल ने नया गांव थाना पुलिस को लिखित शिकायत दी। थाना प्रभारी चंद्रशेखर ने बताया कि आरोपी पर मोर पकाने का आरोप है और एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है।

February 23, 2026

एटा में मलावन केंद्र पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट नेहाईस्कूल इंग्लिश पेपर में पकड़े दो ‘मुन्ना भाई’ पकड़े,

दूसरे के स्थान पर दे रहे थे परीक्षा

एटा 23 फरवरी उप्रससे। जिले के मलावन थाना क्षेत्र में स्टेटिक मजिस्ट्रेट ने सघन चेकिंग के दौरान हाईस्कूल अंग्रेजी की परीक्षा दे रहे दो ‘मुन्ना भाई’ पकड़े। ये दोनों दूसरे परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे।

मलावन स्थित आर.के.एस.एच.एस.एस. परीक्षा केंद्र पर प्रथम पाली में अंग्रेजी का पेपर चल रहा था, तभी स्टेटिक मजिस्ट्रेट और तहसीलदार नीरज वार्ष्णेय की टीम केंद्र का भ्रमण कर रही थी। नीरज वार्ष्णेय को दोनों पर शक हुआ, जिसके बाद पूछताछ में उन्होंने सच उगल दिया। पकड़े गए फर्जी परीक्षार्थी अंशुल पुत्र मुनेश शुभम नामक परीक्षार्थी की जगह परीक्षा दे रहा था। दूसरा फर्जी परीक्षार्थी सुबोध पुत्र संजय पवन कुमार के स्थान पर परीक्षा दे रहा था।

तहसीलदार नीरज वार्ष्णेय ने बताया कि दोनों ‘मुन्ना भाइयों’ के विरुद्ध नकल विरोधी अधिनियम वर्ष 2025 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जा रही है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।

एटा में संत निरंकारी मिशन के सैकड़ों अनुयायियों ने नहर पर श्रमदान कर गंदगी और घास-फूस हटाकर की सफाई

 

एटा 23 फरवरी उप्रससे। शहर में आगरा रोड स्थित हजारा नहर पर संत निरंकारी मिशन द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया गया। संत निरंकारी मिशन सेवादल के सैकड़ों महिला-पुरुष अनुयायियों ने श्रमदान कर नहर की सफाई की और लोगों को जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का संदेश दिया।

मिशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत हर वर्ष नदियों और नहरों की साफ-सफाई का अभियान चलाया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष भी हजारा नहर पर व्यापक सफाई कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

हाथों में झाड़ू-फावड़ा लेकर सुबह से जुटे श्रद्धालु

प्रातःकाल से ही सेवादल के सदस्य हाथों में झाड़ू, फावड़ा और खुरपी लेकर सफाई कार्य में जुट गए। अनुयायियों ने नहर के दोनों पुलों के आसपास जमा कचरा, घास-फूस और गंदगी हटाकर पूरे क्षेत्र को साफ-सुथरा किया। अभियान के दौरान लोगों को जागरूक करते हुए बताया गया कि भारत में नदियां और नहरें आस्था से जुड़ी हैं, इसलिए इन्हें गंदा करना हमारी संस्कृति और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। जल स्रोतों को स्वच्छ रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

स्थानीय लोगों से की स्वच्छता अपनाने की अपील

मिशन के सदस्यों ने एटा वासियों से अपने घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि गंदगी से बीमारियां फैलती हैं, जबकि स्वच्छ वातावरण से स्वस्थ जीवन संभव है। सेवादल पदाधिकारियों ने बताया कि यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति स्थायी जागरूकता पैदा करना इसका उद्देश्य है। आने वाले समय में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर चलाए जाएंगे।

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