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एटा के डाॅ०राकेश सक्सेना को नेपाल संस्था ने मातृभाषा रत्न सम्मान से किया विभूषित

February 27, 2026

एटा के डाॅ०राकेश सक्सेना को नेपाल संस्था ने मातृभाषा रत्न सम्मान से किया विभूषित

एटाका डा. राकेश सक्सेनालाई नेपाल संस्थाद्वारा मातृभाषा रत्न सम्मानबाट सम्मानित गरिएको थियो।

Dr. Rakesh Saxena of Etah was honoured with Matrabhasha Ratna Samman by Nepal Sangstha

Posted on 26.02.2026 Friday Time 07.35 PM Etah News by Anuj Mishra

एटा,27 फरवरी उप्रससे। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के सुअवसर पर काठमांडू, नेपाल की साहित्यिक संस्था शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउन्डेशन के द्वारा जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार डाॅ०राकेश सक्सेना को ‘ मातृभाषा रत्न अंतरराष्ट्रीय मानद उपाधि ‘ सम्मान से विभूषित किया गया है। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य नेपाल-भारत मैत्री सम्बन्धों को सुदृढ करना, देवनागरी लिपि के संरक्षण-संवर्द्धन को बढ़ावा देना तथा हिंदी-नेपाली जैसी मैत्री भाषाओं के वैश्विक प्रसार के साथ देश-विदेश के कवि,लेखक,साहित्यकार व शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करना है।
इसी क्रम में एटा के डाॅ०राकेश सक्सेना को चालीस वर्षों की शिक्षण सेवाओं एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनवरत सेमिनार, काव्यपाठ व काव्य कृतियों के प्रकाशन आदि साहित्यिक योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया है। आपकी इस उपलब्धि पर डाॅ० राजीव कुलश्रेष्ठ, डाॅ० भूपेन्द्र शंकर, डाॅ० भारत भूषण परिहार, डाॅ० अनिल सक्सेना, ब्रजनंदन माहेश्वरी, संजीव गोयल, डाॅ० राजेश सक्सेना, डाॅ० ए०के० सक्सेना, अनुपम जौहरी, डाॅ० राकेश मधुकर, डाॅ० हर्षबर्द्धन बिसारिया, डाॅ० पी०आर०मिश्र, राघव आमोरिया, डाॅ०जी०के०शर्मा आदि शुभचिंतकों, मित्रों व साहित्यप्रेमियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।

February 25, 2026

एटा में चौराहे पर ढाई फीट के यूट्यूबर संग रील बनाने पर ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर निलंबित

ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर पर कार्रवाई

एटा 25 फरवरी उप्रससे। जनपद में एक वायरल रील ने ट्रैफिक विभाग में हलचल मचा दी। ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक सब-इंस्पेक्टर सुरेश बाबू के साथ एक यूट्यूबर द्वारा बनाई गई रील सोशल मीडिया पर वायरल होते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया। वीडियो में सोशल मीडिया पर लोकप्रिय यूट्यूबर ‘छोटा ऊदल’ टीएसआई के पैर छूते नजर आ रहा है, जबकि बैकग्राउंड में आल्हा ऊदल का गीत बज रहा है।

यह रील एटा शहर के पंडित दीनदयाल चौराहे पर बनाई गई बताई जा रही है। वीडियो में टीएसआई सुरेश बाबू ड्यूटी के दौरान खड़े दिख रहे हैं। तभी ‘छोटा ऊदल’ नाम से मशहूर यूट्यूबर उनके पास पहुंचता है और पैर छूने का अभिनय करता है। छोटा ऊदल अपने छोटे कद और हास्य शैली के कारण सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है। लेकिन ड्यूटी के दौरान इस तरह की रील बनना विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े कर गया।
रील के वायरल होते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्याम नारायण सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए टीएसआई सुरेश बाबू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया कंटेंट बनाना और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि वीडियो कब बनाया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

घटना के बाद पुलिस महकमे में चर्चा है कि क्या ड्यूटी के दौरान इस तरह की रील बनाना आचार संहिता का उल्लंघन है? क्या संबंधित अधिकारी की जानकारी में वीडियो बनाया गया या यह अचानक की गई हरकत थी? फिलहाल विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस कार्रवाई को पुलिस विभाग का सख्त संदेश माना जा रहा है कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता के लिए वर्दी की गरिमा से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। एटा में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों पर टिकी है।

एटा में दूसरे के स्थान पर हाईस्कूल गणित परीक्षा दे रहा ‘मुन्नाभाई’ पकड़ा, एफआईआर दर्ज

एटा 25 फरवरी उप्रससे। जनपद में कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के कासगंज रोड पीएसी के सामने स्थित श्री रामस्वरूप सिंह परीक्षा केंद्रहाईस्कूल गणित की परीक्षा के दौरान एक ‘मुन्नाभाई’ दूसरे परीक्षार्थी के स्थान पर पेपर हल करते हुए पकड़ा गया।

बुधवार को सुबह की पाली में गणित की परीक्षा चल रही थी। इसी दौरान एसडीएम और तहसीलदार नीरज वार्ष्णेय ने परीक्षा केंद्र का सघन निरीक्षण किया। पूछताछ के दौरान एक परीक्षार्थी संदिग्ध प्रतीत हुआ। कड़ाई से पूछने पर वह हड़बड़ा गया और जांच में फर्जी पाया गया।
पकड़ा गया युवक हेमंत, वास्तविक परीक्षार्थी अय्यूब की जगह परीक्षा दे रहा था। अधिकारियों ने उसे तत्काल हिरासत में लेकर नकल विरोधी अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। मामले में संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। इसी परीक्षा केंद्र से जुड़ा एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कथित ऑडियो में एक कर्मचारी द्वारा परीक्षार्थी से नकल कराने के लिए सुविधा शुल्क मांगने की बात कहता है।

वर्जन
एसडीएम विपिन कुमार मोरल ने बताया कि ऑडियो का संज्ञान लिया गया है। उसकी जांच की जा रही है। उन्होंने पुष्टि की कि निरीक्षण के दौरान एक ‘मुन्नाभाई’ को पकड़ा गया, जो किसी अन्य छात्र की जगह परीक्षा दे रहा था। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

लोकपर्व होली: परम्परा एवं प्रतीक चिंतन – डाॅ० राकेश सक्सेना

एटा 25 फरवरी उप्रससे। भारत में होली एक लोकपर्व है जिसका वर्तमान स्वरूप पौराणिक कथाओं विशेषकर प्रह्लाद-होलिका प्रसंग और वसंतोत्सव की परम्परा से जुड़ा है। जैमिनी रचित पूर्व मीमांसा सूत्र और उनसे सम्बन्धित काठक गृह्य सूत्र में होली ( होलिका ) का उल्लेख एक प्राचीन हिन्दू त्यौहार के रूप में मिलता है जो ईसा पूर्व से मनाया जा रहा है। यह सूत्र बताते हैं कि होली विवाहित महिलाओं द्वारा अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए की जाने वाली एक पूजा थी जो पूर्णमासी को मनाई जाती थी। प्राचीन उत्सव के रूप में इसको मान्यता प्राप्त है, ईसा पूर्व ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। वैदिक साहित्य में वसंतोत्सव की भावना, अग्नि की पवित्रता, ऋतु परिवर्तन का उत्सव तथा सामूहिक मंगल कामना के आधार पर होली का सांस्कृतिक बीज रूपांतरण वैदिक परम्परा में निहित है, जिसका वर्तमान स्वरूप कालांतर में पौराणिक और लोक परम्पराओं के साथ विकसित हुआ।
होली का इतिहास कई पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं से जुड़ा है। राधा-कृष्ण की प्रेमलीला, हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद( बुराई पर अच्छाई की जीत ), कामदेव की कथा (शिव के ध्यान को भंग करने के लिए कामदेव ने पुष्प वाण चलाया जिससे क्रोधित होकर शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया, बाद में रति की प्रार्थना पर शिव ने उन्हें पुनर्जीवित किया) कामदेव के पुनर्जीवन को कुछ क्षेत्रों में होली के रूप में मनाते हैं। होली को प्राचीन ग्रंथों में ‘ वसंतोत्सव ‘ कहा गया है और यह फाल्गुन मास में मनाया जाता है इसलिए इसे फाग भी कहते हैं। यह ऋतु परिवर्तन और नई फसल के स्वागत का उत्सव भी है जिसमें किसान अग्नि को अन्न समर्पित करते हैं।
मान्यता है कि इस उत्सव की शुरुआत झाँसी मुख्यालय से करीब सत्तर कि०मी० दूर ‘एरच’ कस्बा से हुई है तो कुछ लोगों का मानना है कि हरदोई से हुई जिसका उल्लेख गजेटियर्स में भी मिलता है। बहरहाल इस पर्व को मनाने की पृष्ठभूमि में मुख्य कथा हिरण्यकशिपु और प्रह्लाद की है। हिरण्यकशिपु नामक असुर राजा अपने पुत्र प्रह्लाद से घृणा करता था क्योंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। उसने अपनी बहन होलिका (जिसे आग से न जलने का वरदान था) को प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने का आदेश दिया परिणामस्वरूप होलिका जल गई लेकिन प्रह्लाद बच गया। यह बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है जिसे होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। असुर राजा हिरण्यकशिपु की बहन और प्रह्लाद की मौसी होलिका से ही ‘ होली ‘ शब्द की व्युत्पत्ति हुई है। इस कथा में एक प्रतीकात्मक संदेश भी निहित है। हिरण्यकशिपु का अर्थ है– हिरण्य (सोना) और कशिपु (पलंग) अर्थात स्वर्ण पलंग वाला। हिरण्यकशिपु एक ऐसा राजा था जो अपार धन- सम्पत्ति में डूबा हुआ था जिसके कारण वह सर्वोच्च शक्ति के रूप में सभी से अधीनता की माँग करता था। प्रह्लाद का अर्थ है– जो स्वाभाविक रूप से सुख और शान्ति का भाव उत्पन्न करता है। यह शब्द ‘ आह्वाद ‘ से आया है जो पुनरुत्थान, ताजगी, आनंद को दर्शाता है। नरसिम्हा द्वारा हिरण्यकशिपु बध से यही शिक्षा प्राप्त होती है कि मनुष्य को अहंकार नहीं करनी चाहिए, अनैतिक जीवनशैली हिंसक अंत की ओर ले जाती है। होलिका दहन की परम्परा इसी कारण से हुई होगी जो दुर्भावना के सामूहिक दहन का प्रतीक बन गया। होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक है। लकड़ियों को एकत्र करके सामूहिक रूप से अग्नि प्रज्वलित करके परिक्रमा लगाना, यह सामूहिकता प्राचीन यज्ञ संस्कृति को जीवंत करती है। यह अनुष्ठान ईर्ष्या, द्वेष व अहंकार के दहन का प्रतीक भी माना जाता है।
होली पर एक-दूसरे के गालों पर रंग, गुलाल,अबीर लगाने की परम्परा है। इसकी पृष्ठभूमि में कथा अनुसार- भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को ग्वालिन राधा से प्रेम हो गया था लेकिन उन्हें इस बात का दु:ख था कि उनकी त्वचा गहरे नीले रंग की है जबकि राधा की त्वचा गोरी। इस दु:ख को दूर करने के लिए उन्होंने खेलते हुए शरारत में राधा के चेहरे पर रंग लगा दिया। माना जाता है कि रंगीन पानी एवं रंग लगाने की परम्परा यहीं से प्रारम्भ हुई। वस्तुत: रंग आनंद ही नहीं देते अपितु हमारे जीवन का आधार भी होते हैं। भारतीय संस्कृति में रंगों का विशेष महत्व रहा है। होली जैसे उत्सव में रंग- प्रेम, सौहार्द और समानता का संदेश देते हैं। रंग मानव की भावनाओं का प्रतीक भी हैं। लाल रंग यदि प्रेम और उत्साह का प्रतीक है तो सफेद शांति और पवित्रता का द्योतक है। हरा रंग समृद्धि और विकास का संकेत देता है तो नीला रंग विश्वास और स्थिरता को दर्शाता है। अत: कहा जा सकता है कि रंग जीवन के प्राण हैं, रंग ही जीवन को ऊर्जा, आनंद के साथ ही साथ जीवन को अर्थ प्रदान करते हैं। जब हमारे विचार सकारात्मक व रंगीन होंगे तभी हमारा जीवन आनंदमय बनेगा। इस प्रकार लोक जीवन से जुड़ा होली का पर्व केवल रंगों का ही नहीं अपितु प्रेम, सद्भाव, एकता,भाईचारे एवं सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

February 24, 2026

एटा में ऑटो-ट्रैक्टर भिड़ंत में मासूम समेत 6 लोग घायल, जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती

एटा 24 फरवरी उप्रससे। जनपद के मिरहची थाना क्षेत्र में अखतोली गांव के पास एक ऑटो और ट्रैक्टर की टक्कर हो गई। इस हादसे में एक मासूम समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया।

घायलों अभिषेक ने बताया कि वह अपनी बहन अंजलि और पड़ोस की महिला सुमन पत्नी बृजेश कुमार के साथ ऑटो में सवार था। ऑटो में कुल आधा दर्जन से अधिक लोग सवार थे, जो अखतोली गांव के पास ट्रैक्टर से टकरा गया। जिसमें अभिषेक पुत्र बृजेश, निवासी ओढ़नी, सुनीता पत्नी सुमित, महक पुत्री सुमित, ज्ञान सिंह पुत्र साहब सिंह, नित्या पुत्री सुमित, सरोज देवी पत्नी बृजेश और अंजलि पुत्री बृजेश घायल हो गए। सूचना पर पहुंची मिरहची पुलिस ने तत्काल घायलों को जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया जहां घायलों का उपचार जारी है।

मिरहची थाना प्रभारी नीतू वर्मा ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल को मौके पर भेजा गया था। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और मामले की जांच की जा रही है।

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