मुरादाबाद। आज 7 फरवरी का पंचांग। नारदानंद ऋषि आश्रम लालबाग के अध्यक्ष बाबा संजीव आकांक्षी ने जिसे जारी किया।
मुरादाबाद। आज 7 फरवरी का पंचांग। नारदानंद ऋषि आश्रम लालबाग के अध्यक्ष बाबा संजीव आकांक्षी ने जिसे जारी किया।
हरिद्वार समाचार सेवा
Posted on 06.02.2026 Friday, Time: 08.51 PM, Haridwar
हरिद्वार, 06 फरवरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक समय था, जब विरासत को कोसा जाता था, अपमानित किया जाता था, लांछित किया जाता था। राम भक्तों पर गोलियां चलती थीं, उनका अपमान किया जाता था। लेकिन, यह रामभक्तों का नहीं, भारत की विरासत का अपमान होता था, भारत के आध्यात्मिक मूल्यों का अपमान होता था। इसका परिणाम यह निकला कि उत्तर प्रदेश अराजकता का अड्डा बन गया, लूट का अड्डा बन गया और दंगों की आग में झुलसने लगा। गुंडागर्दी भी चरम पर, ना बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी। हमारी सरकार में विरासत का सम्मान हुआ तो बेटी सुरक्षित हो गई और व्यापारी भी। आज उत्तर प्रदेश देश की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था के रूप में भी आगे बढ़ रहा है।
सीएम योगी शुक्रवार को हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद है, न गुंडागर्दी है। न कर्फ्यू है, न दंगा है – यूपी में अब सब चंगा है। दंगा और दंगाई, दोनों गायब हो गए हैं। कर्फ्यू दंगाइयों पर लग गया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि नीति स्पष्ट थी, नीयत साफ थी। कोई सोचता था कि 500 वर्षों के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो पाएगा? लेकिन, आज भव्य राम मंदिर बन गया।
आश्रम से मिला एमबीए का वास्तविक ज्ञान
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक अनुभव के आप उत्तर प्रदेश कैसे चला रहे हैं, तो मेरा उत्तर होता है कि आश्रम व्यवस्था से जुड़ा हूं। प्रशासन कैसे चलाना है, प्रबंधन कैसे करना है, भारत का संन्यासी आश्रम पद्धति से सीखता है। प्रशासन हमारे संस्कारों व जींस का हिस्सा है। एमबीए की वास्तविक शिक्षा तो भारतीय आश्रम पद्धति से ही मिलती है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन का मॉडल बनकर उभरा है। भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें, आश्रम व गुरुकुल परंपरा में हैं। जहां कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प व प्रशासन जैसे विषयों का केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर मिलता है।
माघ मेले में अब तक 21 करोड़ श्रद्धालुओं का स्नान
सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा चुके हैं। यहां पहले केवल अव्यवस्था देखने को मिलती थी, लेकिन आज अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ धाम व केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बने हैं। भारत राष्ट्र यहीं से शक्ति प्राप्त करता है, और जब हमने इन आस्था केंद्रों को सम्मान के साथ आगे बढ़ाया, संरक्षित करने का काम किया, परिणाम भी सामने आया है। लंबे समय तक बीमारू रहा उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर लगातार प्रगति पथ पर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरा जन्म इसी देवभूमि उत्तराखंड में हुआ है। वर्ष 1982 में भारत माता मंदिर के भव्य लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व सर संघचालक बालासाहब देवरस, दोनों की उपस्थिति रही। यह स्पष्ट करता था कि राष्ट्राध्यक्ष के प्रति हमारा सम्मान सदैव रहेगा, लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं होगा। जब देश विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहा था, तब पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत माता मंदिर के भव्य निर्माण और उसके लोकार्पण के माध्यम से पूरे देश के सामने आध्यात्मिक नेतृत्व का चिरस्थायी स्मारक समर्पित किया।
न जाति का भेद और न धर्म का अंतर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड के चार धाम भारत की चेतना के आधार हैं। जब हम लोग बचपन में हरिद्वार आते थे, तो सबके मन में यह भाव रहता था कि हरि की पैड़ी में स्नान करना है और भारत माता मंदिर के दर्शन भी करने हैं। यहां न जाति भेद था और न धर्म का कोई अंतर। भारत माता मंदिर में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक, पूरे भारत का स्वरूप प्रतिबिंबित किया गया। यह उस समय की सबसे ऊंची (हाई-राइज) इमारत भी थी। मेरा सौभाग्य है कि देश के भीतर पिछले 11 वर्षों में हमने व्यापक परिवर्तन देखा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज से लेकर केदारपुरी और बदरीनाथ से हरिद्वार तक, विकास की एक लंबी गाथा विरासत को संजोते हुए बढ़ रही है। यह नए भारत निर्माण की वही गाथा है, जिसका सैकड़ों वर्षों से वर्तमान पीढ़ी को इंतजार था। यह पीढ़ी यह सोच रही थी कि क्या हमारी भावनाओं के अनुरूप भारत का निर्माण हो पा रहा है या नहीं। एक प्रकार की असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। उस असमंजस से उबरने का कार्य पिछले 11 वर्षों में हमने स्पष्ट देखा है।
भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम भारत की बात करते हैं, तो भारत केवल एक भौगोलिक टुकड़ा मात्र नहीं है। भारत ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र है। यह किसी सत्ता की उपज नहीं है, बल्कि ऋषि परंपरा की तपस्या से निकली शाश्वत चेतना का केंद्र बिंदु है। भारत का उच्चतम न्यायालय भी इस मंत्र को अंगीकार करता है कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। धर्म और विजय का यह शाश्वत स्वरूप हमें यह आभास कराता है कि धर्म कभी कमजोर नहीं होता, बल्कि उसे जानबूझकर कमजोर किया जाता है। इतिहास साक्षी है कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न तो वर्तमान को सुधार पाता है और न ही भविष्य को सुरक्षित रख पाता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है। आक्रांताओं के आने से पहले भारत कोई अविकसित या उपेक्षित भूभाग नहीं था, बल्कि एक पूर्ण विकसित सभ्यता और समृद्ध संस्कृति था। यह राष्ट्र हमारे ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2000 वर्ष पहले, जिसे हम भारत का स्वर्ण युग कहते हैं, उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। इसी प्रकार आज से करीब 400 वर्ष पहले भी विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी। यह सामर्थ्य इन्हीं ऋषि-मुनियों की तपस्या के बल पर, अन्नदाता किसानों की सृजनशीलता के बल पर और कारीगरों के परिश्रम के बल पर था। जैसे ही हमने इन मूल्यों से मुंह मोड़ा, पतन की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन, आज फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत गांव आधारित राष्ट्र था। गांव आत्मनिर्भर इकाइयां थे। यहां कृषि थी, पशुपालन था, हस्तशिल्प था, चाहे वस्त्र निर्माण हो या धातु का कार्य, सब कुछ गांवों के भीतर ही होता था। यहां बाहरी सत्ता का हस्तक्षेप नहीं था, न ही किसी अनुदान पर निर्भरता थी। स्वरोजगार भारत की मूल शक्ति था। हमारा किसान उत्पादक था, कारीगर उद्यमी था, और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु। यह पूरा ढांचा ग्राम स्वराज आधारित शासन का एक सशक्त मॉडल था। भारतीय नारी की अर्थव्यवस्था में समान सहभागिता थी। उसे कभी पराधीन नहीं बनाया गया, बल्कि वह समाज और अर्थव्यवस्था की सक्रिय शक्ति रही है। लेकिन आक्रांताओं के साथ-साथ लाभ आधारित अर्थतंत्र ने स्थानीय उत्पादन व्यवस्था को नष्ट किया। स्वरोजगार की जगह टैक्स आधारित व्यवस्था ने ले ली। इस व्यवस्था में कारीगर को गुलाम बना दिया गया और किसान को करदाता बना दिया गया। जैसे ही हम आश्रम पद्धति से विमुख हुए और गुरुकुलों की परंपरा से मुंह मोड़ा, वैसे ही कारीगर गुलामी की स्थिति में पहुंच गया और किसान पर निर्भरता का बोझ बढ़ता चला गया, यहां तक कि वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। हमें याद रखना होगा कि ग्राम स्वराज की अवधारणा क्या है, जब एक गांव टूटता है, तो उसे केवल एक घटना नहीं माना जाना चाहिए। एक गांव का टूटना, उस राष्ट्र की नींव को हिला देता है।
समारोह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी मौजूद थे।
संत बोले, उत्तर प्रदेश के शेर हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
हरिद्वार में आयोजित स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह में संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘उत्तर प्रदेश का शेर’ बताते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ सबके प्रिय हैं और सबके हितकारी हैं। इनको संभाल कर रखना है। जब से योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली, तब से यूपी में रामराज्य जैसा माहौल दिखाई देता है। आज उत्तर प्रदेश में कहीं भय, अराजकता और उन्माद नहीं दिखाई देता। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि जब पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे नेता नेतृत्व कर रहे हैं, तो हमें कोई संदेह नहीं कि भारत को फिर उसी वैभव के साथ देखेंगे, जैसा हर्षवर्धन के कार्यकाल में, विक्रमादित्य के काल में देखने को मिला था।
Posted on 02.02.2026 Monday, Time: 07.10 PM, Teerthankar Mahaveer University TMU, Shrimad Bhagwadgeeta, Dr Jagdeesh Kothari, Moradabad
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के आईकेएस सेंटर की ओर से उद्देश्य, अवसर और व्यावसायिक जीवनः श्रीमद्भगवद्गीता से सीख पर 12वीं राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में प्रतिष्ठित भगवदाचार्य और ज्योतिषाचार्य डॉ. जगदीश कोठारी ने बतौर मुख्य वक्ता की शिरकत
मुरादाबाद, 02 फरवरी 2026, प्रतिष्ठित भगवदाचार्य और ज्योतिषाचार्य डॉ. जगदीश कोठारी ने श्रीमद्भगवद्गीता के चयनित श्लोकों के जरिए जीवन के उद्देश्य, आत्मज्ञान और निष्काम कर्म के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमें निष्काम कर्म के सिद्धांत को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। इससे न केवल व्यावसायिक सफलता प्राप्त की जा सकती है, बल्कि आंतरिक संतोष और मानसिक शांति भी मिलती है। डॉ. कोठारी तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम- आईकेएस की ओर से उद्देश्य, अवसर और व्यावसायिक जीवनः श्रीमद्भगवद्गीता से सीख पर टिमिट के सभागार में आयोजित 12वीं राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इससे पूर्व ज्योतिषाचार्य डॉ. जगदीश कोठारी, आई स्पेशलिस्ट डॉ. उपमा अवस्थी, यूथ मेंटर श्री अरविंदाक्ष माधव दास, इस्कॉन के प्रतिनिधि श्री अरुणोदय कीर्तन दास आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके कॉन्क्लेव का शुभारम्भ किया। इस मौके पर डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही। प्रो. मंजुला जैन ने यूनिवर्सिटी की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि गीता का कर्मयोग युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठावान रहने, परिणाम की चिंता किए बिना निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आत्मविकास, अनुशासन और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए ऐसे आयोजनों को भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कॉन्क्लेव के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने वक्ताओं से जीवन, करियर, नेतृत्व और मूल्य-आधारित शिक्षा से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
आई स्पेशलिस्ट डॉ. उपमा अवस्थी ने मानसिक स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली और आंतरिक शांति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कह, गीता के सिद्धांत आज भी तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यूथ मेंटर श्री अरविंदाक्ष माधव दास ने युवाओं से कहा, जुनून और स्पष्ट उद्देश्य के बिना सफलता अधूरी रहती है। उन्होंने गीता के जरिए नेतृत्व क्षमता, आत्मअनुशासन और सशक्त निर्णय लेने की कला पर बल दिया। उन्होंने युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ प्रतिबद्ध और नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा दिलवाई। इस्कॉन के प्रतिनिधि श्री अरुणोदय कीर्तन दास ने कहा, जब व्यावसायिक जीवन में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का समावेश हो जाता है, तब व्यक्ति न केवल सफलता प्राप्त करता है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनता है। टीएमयू आईकेएस सेंटर की कोऑर्डिनेटर डॉ. अलका अग्रवाल ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, नेतृत्व, कर्मयोग और नैतिक मूल्यों की एक सशक्त और व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। इस अवसर पर डॉ. मनोज अग्रवाल, डॉ. चंचल चावला, डॉ. विभोर जैन, डॉ. विवेक पाठक, डॉ. अमीषा सिंह आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। संचालन डॉ. माधव शर्मा ने किया।
लाखों की संख्या में जुटेंगे श्रद्धालु, खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंगलवार रात से ही श्रद्धालुओं ने डाला डेरा
खिचड़ी मेला की हर व्यवस्था पर खुद नजर बनाए हुए हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर, 13 जनवरी। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार गुरुवार तड़के (15 जनवरी) को ब्रह्म मुहूर्त में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी चढ़ाकर समूचे जनमानस की सुख-समृद्धि की मंगलकामना करेंगे। हालांकि बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला मंगलवार रात (13 जनवरी) से ही शुरू हो गया। तमाम श्रद्धालु बुधवार को भी खिचड़ी चढ़ाएंगे जबकि गुरुवार को यहां आस्था का जनसमुद्र दिखेगा।
समूची प्रकृति को ऊर्जस्वित करने वाले सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर खिचड़ी चढ़ाने की यह अनूठी परंपरा पूरी तरह लोक को समर्पित है। मान्यता है कि महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाकर मन्नत मांगने वाला कभी निराश नहीं होता। अरुणोदय काल में मकर संक्रान्ति का महापर्व गुरुवार को मनाया जायेगा। इस दिन उत्तर प्रदेश, बिहार तथा देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाएंगे। आनुष्ठानिक कार्यक्रमों का शंखनाद गुरुवार भोर में ही हो जाएगा। सबसे पहले गोरक्षपीठ की तरफ से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खिचड़ी चढ़ाकर बाबा को भोग अर्पित करेंगे। इसके बाद मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे और जनसामान्य की आस्था, खिचड़ी के रूप में निवेदित होनी शुरू हो जाएगी।
मंदिर व प्रशासन की ओर से खिचड़ी महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री खुद सभी व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। मकर संक्रांति पर्व को लेकर मंदिर व मेला परिसर सज धजकर पूरी तरह तैयार है। समूचा मंदिर क्षेत्र सतरंगी रोशनी में नहाया हुआ है। यहां श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया है। मंदिर प्रबंधन की तरफ से उनके ठहरने और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। प्रशासन की तरफ से रैन बसेरों में भी पूरी व्यवस्था की गई है।
हाथरस, 11 जनवरी 2026 (उप्रससे)। युवा दिवस एवं स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मीडिया कोऑर्डिनेटर बी.के. दिनेश ने युवाओं से पवित्र ब्रह्मचारी जीवन की प्रेरणा स्वामी विवेकानंद से लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत के उत्थान के लिए युवाओं की ऊर्जा को सबसे बड़ा आधार बताया था और कहा था कि यदि उन्हें 100 ऊर्जावान ब्रह्मचारी युवा मिल जाएं तो वे भारत का चेहरा बदल सकते हैं।
बी.के. दिनेश ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में एक ओर भक्ति और पूजा-पाठ बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर काम विकार का प्रभाव भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे समाज और युवा वर्ग अपनी ऊर्जा खो रहा है। उन्होंने कहा कि असली शक्ति और मर्दानगी काम वासनाओं में नहीं, बल्कि संयम, चरित्र और राष्ट्र सेवा में है। युवाओं को अपनी शक्ति को आध्यात्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय निर्माण में लगाना चाहिए।
उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रह्मचर्य को लेकर सृष्टि के संचालन की चिंता करना मनुष्य की कमजोरी को दर्शाता है। वेदों में वर्णित ब्रह्मचर्य को ओज, तेज और बुद्धि का आधार बताया गया है। उन्होंने कहा कि सभी से आजीवन ब्रह्मचर्य की अपेक्षा नहीं की जा सकती, लेकिन संयमित जीवन अपनाकर युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा दे सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत भ्रमण के दौरान स्वामी विवेकानंद के शिष्य हाथरस के सहायक स्टेशन मास्टर शरत चंद्र गुप्त थे, जो बाद में संन्यास लेकर स्वामी सदानंद कहलाए। इस ऐतिहासिक घटना का उल्लेख हाथरस सिटी स्टेशन पर लगे शिलालेख में था, जो स्टेशन के जीर्णोद्धार के दौरान लापरवाही से हट गया और आज वह स्मृति लुप्त हो चुकी है।
बी.के. दिनेश ने कहा कि स्वामी विवेकानंद को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब भारत का युवा अपनी ऊर्जा को राष्ट्र को आध्यात्मिक, सामाजिक और भौतिक रूप से सशक्त बनाने में लगाए।