Posted on 15.02.2026 Sunday Time 09.30 AM Maha Shivaratri
उत्तर प्रदेश समाचार सेवा और यूपी वेब न्यूज के सभी संवाददाताओं, पाठकों और विज्ञापनदाताओं को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
सर्वेश कुमार सिंह
निदेशक/संपादक
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शाहजहांपुर में बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ
Posted on 13.02.2026 Time 06.29 Friday, Shahjahanpur, Ramchandra Mission, Meditation, DADA ji, Dhyan Sadhana
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम की पुण्य धरा पर आज बीस दिवसीय बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ पूर्ण दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के अनुपम वातावरण में हुआ। प्रातःकालीन साधना से प्रारंभ हुआ यह महोत्सव मानो साधकों की चेतना को नवप्रकाश से आलोकित करने का विराट यज्ञ बन गया। देश–विदेश से आये हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान-साधना कर मानव कल्याण और विश्व शांति के लिए मंगल कामना कीं।
उत्सव का शुभारंभ सुबह के ध्यान सत्र के साथ हुआ, जिसमें वातावरण शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ ने अपने प्रेरक संदेश में बसंत पंचमी के आध्यात्मिक रहस्य को उद्घाटित करते हुए कहा कि बसंत केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि चेतना के नवीकरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि सहज मार्ग के साधकों के लिए बसंत पंचमी केवल प्राकृतिक उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि एक दिव्य स्मृति और चेतना का उत्सव है। इसी पावन तिथि को दिव्य प्रकाश ने पृथ्वी पर अवतरण का संकल्प लिया था। वर्ष 1873 की बसंत पंचमी को फतेहगढ़ में एक ऐसी महान आत्मा का अवतरण हुआ, जिसने मानवता की आध्यात्मिक यात्रा को नवीन दिशा प्रदान की। वही महापुरुष आगे चलकर ‘लालाजी महाराज’ के नाम से विख्यात हुए। संसार उस समय उनके महत्त्व से अनभिज्ञ था, क्योंकि महान आत्माएं प्रायः बिना किसी उद्घोष के सामान्य मानव रूप में प्रकट होती हैं। परंतु प्रकृति ने उस दिवस मानव जाति को मौन वचन दिया था कि चेतना का पुनरुत्थान एक नई ज्योति के रूप में प्रकट होगा।
दाजी ने कहा कि लालाजी महाराज के माध्यम से मानवता को एक विस्मृत आध्यात्मिक धरोहर प्राणाहुति का पवित्र विज्ञान पुनः प्राप्त हुआ, जिसे ‘प्राणस्य प्राणः’, अर्थात जीवन के मूल तत्व का संचार कहा गया है। यह सूक्ष्म, गूढ़ और दिव्य विद्या मानव अंतःकरण में ईश्वरीय चेतना के संचार का माध्यम बनी। उन्होंने उल्लेख किया कि यह परंपरा सर्वप्रथम अयोध्या में भगवान श्रीरामचन्द्र से तिहत्तर पीढ़ी पूर्व पूज्य ऋषभदेवजी महाराज द्वारा प्रतिपादित की गई थी।

पूज्य दाजी ने मिशन के अभ्यासियों से आह्वान किया कि वे इस बसंत उत्सव को केवल एक पर्व के रूप में न देखें, बल्कि इसे आत्म-परिष्कार, अंतर्मुखी साधना और चेतना के उत्कर्ष का अवसर बनाएं। उन्होंने कहा कि जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति अपने पुराने आवरण को त्यागकर नव सृजन की ओर अग्रसर होती है, वैसे ही अभ्यासी को भी अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पुष्प खिलाने चाहिए।
बसंत उत्सव में संपूर्ण आश्रम परिसर में श्रद्धा, साधना और शांति का दिव्य वातावरण दिखाई दिया ।यह उत्सव आने वाले बीस दिनों तक साधना, सेवा और सत्संग के माध्यम से मानव चेतना को उन्नत करने का अनुपम अवसर प्रदान करेगा।
सायंकाल में भी ध्यान सत्र में दाजी ने ध्यान कराया।
#dajji #heartfulness #sriramchandramission
#meditation
ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ बसंतोत्सव
शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत
Posted on 12.02.2026 Time 04.05 PM Thursday
(संजीव गुप्ता उ. प.समाचार शाहजहांपुर से)
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, रामचंद्र मिशन आश्रम में बसंत उत्सव का शुभारंभ आज से
शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, बाबूजी के प्रपौत्र विनीत चंद्रा सुयश सिन्हा, सुमन अग्रवाल, ममता अग्रवाल, सौमेंद्र त्यागी, सहित सैकड़ों अभ्यासियों और छोटे छोटे बच्चों ने फूल भेंटकर ने उनका भव्य स्वागत किया ।
पूज्य दाजी के आगमन से आश्रम परिसर मानो साधना की सुवास और चेतना की उजास से आलोकित हो उठा। वातावरण में शांति, प्रेम और आत्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम दृष्टिगोचर हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक स्पंदित कर दिया।
यहां पहुंचने के बाद दाजी पूरे आश्रम का निरीक्षण किया।
उत्सव में सहभागिता हेतु देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेशों से भी हजारों अभ्यासी शाहजहांपुर आश्रम पहुँच रहे हैं।
शाम को पूज्य दाजी ने उपस्थितअभ्यासियों को ध्यान कराया।
रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर दिन भर अभ्यासियों का तांता लगा
शाहजहांपुर । श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में मनाये जा रहे बसंत उत्सव के लिए देश विदेश से अभ्यासियों के आने का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया जो बुधवार देर रात तक जारी रहा। रेलवे और बस स्टेशन से मिशन के स्वंय सेवकों ने अभ्यासियों को बस द्वारा आश्रम पहुंचाया।
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श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम का स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ से गूंजेगी आध्यात्मिक चेतना 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में होगा आयोजन
Posted on 10.02.2026 Tuesday, Time 07.17 PM, Shahjahanpur by Sanjiv Gupta
(संजीव गुप्त, उप्र समाचार सेवा)
शाहजहांपुर, 10 फरवरी 2026, शाहजहांपुर की धरती केवल ऐतिहासिक और अमर शहीदों की स्मृतियों की ही वाहक नहीं रही है, बल्कि यह आध्यात्मिक चेतना की भी एक उज्ज्वल प्रयोगशाला रही है।
यह हम सब के लिए गौरव की बात है कि वर्ष 1945 में इसी पुण्यभूमि पर महात्मा रामचन्द्र जी महाराज ने श्री रामचन्द्र मिशन की स्थापना की थी। यह स्थापना मात्र एक संस्था का जन्म नहीं था बल्कि मानव हृदय को आत्मबोध की ओर ले जाने वाला एक आध्यात्मिक आंदोलन था जिसने निरंतर विस्तार पाया और आज विश्व के 164 देशों में श्री रामचन्द्र मिशन के केंद्र हैं। वर्ष 1976 में शाहजहांपुर में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (बाबूजी) ने अपने गुरु फतेहगढ़ के महात्मा रामचन्द्र जी महाराज (लालाजी) की स्मृति में मिशन के प्रथम आश्रम की स्थापना की थी। यह आश्रम साधकों के लिए साधना, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना के विकास का स्थायी केंद्र बना। यह आश्रम केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि अनगिनत आत्माओं के अंतर्मन को शांति, प्रेम और सौहार्द से आलोकित करने वाला आध्यात्मिक तीर्थ बन गया।
अब यह आश्रम अपनी स्वर्ण जयंती की देहरी पर खड़ा है-पचास वर्षों की साधना, सेवा और संकल्प की गौरवशाली कथा को समेटे हुए इस ऐतिहासिक अवसर पर आश्रम का वृहद स्तर पर जीर्णोद्धार किया गया है। आश्रम की पचास वर्षों की स्वर्णिम यात्रा के पूर्ण होने पर श्री रामचन्द्र मिशन के अध्यक्ष और पूज्य गुरुदेव कमलेश डी पटेल (दाजी) के सानिध्य और मार्गदर्शन में स्वर्ण जयंती समारोह ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।
12 फरवरी से उत्सव का शुभारंभ
श्री रामचन्द्र मिशन आश्रम में 12 फरवरी से 2 मार्च तक पांच चरणों में ‘बसंत उत्सव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।
पांच चरणों में होगा उत्सव
बसंत उत्सव पांच चरणों आयोजित किया जा रहा है प्रत्येक चरण में देश विदेश से करीब पांच हजार लोग सहभागिता कर आध्यात्मिक विकास के वाहक बनेंगे।
पहला चरण 12 फरवरी से 14 फरवरी, दूसरा चरण 16 फरवरी से 18 फरवरी, तीसरा चरण 20 फरवरी से 22 फरवरी, चौथा चरण 24 फरवरी से 26 फरवरी तथा पांचवा चरण 28 फरवरी से 2 मार्च तक चलेगा। इस तरह 20 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक महाकुंभ में लगभग 25 से 30 हजार लोगों के यहां पहुंचने की संभावना है।
अभ्यासियों के ठहरने और अन्य व्यवस्थाएं
बाहर से आने वाले अभ्यासियों के ठहरने की व्यवस्था आश्रम परिसर और विभिन्न होटलों और गेस्ट हाउस में की गई है। सभी अभ्यासियों के भोजन की व्यवस्था आश्रम परिसर में रहेगी।
आवागमन की व्यवस्था
बाहर से आने वाले अभ्यासियों के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन से आश्रम लाने और वापस पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। 24 घंटे मिशन के स्वंय सेवक रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर मौजूद रहेंगे। साथ ही लखनऊ हवाई अड्डा, दिल्ली हवाई अड्डा, लखनऊ रेलवे स्टेशन पर भी किसी अभ्यासी को असुविधा न हो इसके लिए मिशन के स्वंय सेवक मौजूद रहेंगे।
यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक मिलन का महाकुंभ होगा। विविध आध्यात्मिक सत्र, ध्यान शिविर और सत्संग कार्यक्रमों के माध्यम से यह समारोह मानव जीवन को अंतर्मुखी बनाने की प्रेरणा देगा। यह स्वर्ण जयंती समारोह अतीत की उपलब्धियों का स्मरण और भविष्य के संकल्पों का उद्घोष है। शाहजहांपुर की इस पुण्य धरा से उठने वाली साधना की यह ध्वनि आज विश्व के कोने-कोने तक पहुँच चुकी है। श्री रामचन्द्र मिशन का यह आश्रम आज भी मानव को मानवता से जोड़ना के मूल उद्देश्य को लेकर अग्रसर है। स्वर्ण जयंती का यह महापर्व केवल एक संस्था का उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के उत्थान का सामूहिक संकल्प है, जहाँ श्रद्धा, साधना और सेवा एक साथ प्रवाहित होगें।