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अब आतंकवाद पर होगा निर्णायक “प्रहार“

February 27, 2026

अब आतंकवाद पर होगा निर्णायक “प्रहार“

Mratunjay Dixit, Journalist lucknow
मृत्युंजय दीक्षित
विभाजन की विभीषिका के साथ स्वतंत्र हुआ भारत, स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से पीड़ित रहा किन्तु अभी तक उसके पास आतंकवाद से लड़ने की कोई स्पष्ट नीति या रणनीति ही नहीं थी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति स्पष्ट हुयी। पहली बार माओवाद जैसे आतंकवाद को समाप्त करने के लिए एक तारीख तय की गई और उस दिशा में काम हुआ जिसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। आतंकवादी हमले होने पर सीमा पार जाकर आतंकवादियों का दमन किया जाता है। अब भारत शत्रु के घर में घुसकर बदला लेता है, ऑपरेशन सिंदूर में भारत का क्रोध सम्पूर्ण विश्व ने देखा है।
आतंकवाद के बढ़ते खतरों व देश विरोधी षड्यंत्रों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देश में पहली आतंकवाद रोधी नीति “प्रहार” जारी की है। प्रहार आतंकवाद के खिलाफ एक बहुस्तरीय रणनीति है जो खुफिया जानकारी के आधार पर चरमपंथी हिंसा की रोकथाम और उसे निष्क्रिय करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य आतंकवादियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थको को धन, हथियार और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच से वंचित करना है। इसमें साइबर क्राइम, ड्रोन हमलों. सीमा पार आतंकवाद और जटिल सुरक्षा खतरों से निपटने के सुगठित राष्ट्रीय ढांचे का भी उल्लेख किया गया है।
आजकल बहुत से आतंकवादी संगठन युवाओं की भर्ती के लिए इंटरनेट मीडिया का सहारा ले रहे हैं, इंटरनेट के माध्यम से ही साइबर ठगी आदि करके लिए धन संग्रह कर रहे हैं व लोगों की मानसिकता को अपने पक्ष में करने के लिए छद्म तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे हैं, प्रहार रणनीति आतंकवाद के इन नए तरीकों से निपटने का मार्ग दिखाती है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा जारी की गई प्रहार रणनीति, भारत के अन्दर या विदेश से उत्पन्न होने वाले आतंकी खतरों का सामना करने के लिए सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इसमें पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा गया है कि, भारत के पड़ोस में अस्थिरता का इतिहास रहा है जिसके कारण अराजक क्षेत्र उत्पन्न हुए हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र के कुछ देशों ने कभी -कभी आतंकवाद को राज्यनीति के एक साधन के रूप मे इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद भारत आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्टीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। भारत ने हमेशा आतंकवाद और किसी भी तत्व द्वारा, किसी भी घोषित या अघोषित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए इसके उपयोग की स्पष्ट व निर्विवाद रूप से निंदा की है।
नीति दस्तावेज में कहा गया है कि भारत लगातार आतंकवाद के पीड़ितों के साथ खड़ा रहा है और इस पर अडिग है कि दुनिया में हिंसा का कोई औचित्य नहीं हो सकता। यही सैद्धांतिक दृष्टिकोण आतंकवाद के विरुद्ध नई दिल्ली की शून्य सहिष्णुता की नीति का आधार है। दस्तावेज में कहा गया है, भारत लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से प्रभावित रहा है, जिसमें जेहादी आतंकवादी संगठन और उनके सहयोगी संगठन भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाने, समन्वय करने, सुविधा प्रदान करने एवं उन्हें अंजाम देने में संलिप्त हैं। भारत अलकायदा और इस्लामिक स्टेट आफ इराक एंड सीरिया जैसे वैश्विक आंतकी समूहों के निशाने पर रहा है। जो स्लीपर सेल्स के माध्यम से देश में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
नई प्रहार नीति मे बताया गया है कि, विदेशीर धरती से संचालित आतंकवादियों ने भारत में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए साजिशें रची हैं और उनके लिए काम करने वाले पंजाब व जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हमलो को अंजाम देने के लिए ड्रोन सहित नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साजो सा’मान प्राप्त करने के लिए संगठित आपराधिक नेटवर्क से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। अब आतकी इंटरनेट के नये तरीकों का भरपूर उपयोग करने लगे हैं।
प्रहार (PRAHAAR) की परिभाषा अंग्रेजी के सात शब्दों मे संयोजित है, जिसमें पहला है पी से प्रिवेंशन यानी नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलो की रोकथाम। दूसरा है आर से रिस्पॉन्स अर्थात त्वरित, आनुपातिक और सुनियोजित सैन्य व नागरिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना। तीसरा है ए से एग्रीगेटिंग इंटरनल कैपासिटीज अर्थात आतंरिक क्षमताओं को एकीकृत करना जिसमें केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और सुरक्षा बलों का आधुनिक तकनीक (AI, ड्रोन) से लैस करना शामिल है। चौथा है एच से ह्यूमन राइट्स एंड रूल आफ ला -खतरों को कम करने के लिए मानवाधिकार और कानून व्यवस्था पर आधारित प्रतिक्रिया। पांचवां ए से अटेन्यूएटिंग रेडिकलाजेशन यानी कट्टरता सहित आतंकवाद में सहायता करने वाली परिस्थितियों को कम करना। छठा भी ए से है – एलाइनिंग इंटरनेशनल एफर्ट्स जिसमें आतंकवाद से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय करना शामिल है तथा अंतिम और सातवां है आर से रिकवरी एंड रेसिलिएंस यानी समग्र समाज को मानसिक और भौतिक रूप से सशक्त बनाना।
प्रहार नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि जेसे ही आतंकी समूहों की साजिश का पता चले उसे उसी समय समाप्त कर देना भी है। गृह मंत्रालय की यह नीति उसी समय आई है जब हाल ही में तमिलनाडु से 6 संदिग्धों को पकड़ा गया है और उनसे काफी सनसनीखेज जानकारियां सामने आ रही है।
भारत सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रधानमंत्री मोदी हर वैश्विक मंच पर दोहराते रहे हैं किंतु अब सरकार ने प्रहार नीति जारी करके अपना संकल्प स्पष्ट कर दिया है कि भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले चाहे जहां पर भी बसे हों बच नहीं सकेंगे।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं . 9198571540

रेलवे ने चलाईं दो और होली स्पेशल

Indian Rail

–बिहार और पूर्वांचल से होगी कनेक्टिविटी
Post on 27.2.26
Friday, Time 7.45 Am
Moradabad, Rajesh Bhatia

मुरादाबाद,27 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
होली का त्योहार मनाने घर जाने वाले यात्रियों के राहत मिलेगी। रेलवे ने सफर में सुविधा के लिए दो और स्पेशल ट्रेनें दौड़ाने का शेड्यूल जारी किया है।
मुरादाबाद रेल प्रशासन के अनुसार पटना से अमृतसर के बीच स्पेशल 04663-64 ट्रेन आज से रवाना होगी। अमृतसर से 27 फरवरी और दो व पांच मार्च और पटना से 28 फरवरी और 3 व 5 मार्च को संचालित होगी।यह स्पेशल ट्रेन मंडल में रुड़की, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली व हरदोई स्टेशनों पर रुकेंगी।
जबकि दूसरी स्पेशल ट्रेन आनंद विहार से गोरखपुर के बीच (04026-25) चलेगी। आनंद विहार से 27 फरवरी से दो मार्च और गोरखपुर से 28 फरवरी से 3 मार्च तक चलेगी। मंडल में हापुड़, मुरादाबाद,रामपुर,बरेली और शाहजहांपुर में ठहराव रहेगा।

February 26, 2026

पांच महीने देरी से चलेगी नंदा देवी समेत तीन ट्रेनें

–रायवाला-देहरादून के बीच चार घंटे का ब्लाँक

Post on 26.2.26
Thursday Time 9.30 pm
Moradabad, Rajesh Bhatia

मुरादाबाद,26 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
रायवाला-देहरादून के बीच सिंगल लाइन पर काम के लिए पांच महीने के लिए ब्लाँक मंजूर किया गया है। ब्लाँक के चलते नंदा देवी समेत तीन ट्रेनें देरी से संचालित होगी।
रेल प्रशासन ने देहरादून रेल सेक्शन में काम के लिए चार घंटे का पाँवर ब्लाँक लिया गया है। इसके चलते हफ्ते में तीन दिन ट्रेनों के संचालन में फेरबदल किया गया है। काठगोदाम- देहरादून एक्सप्रेस-14119 डेढ़ घंटे की देरी से चलेगी। इसी तरह बनारस-देहरादून जनता एक्सप्रेस (15119) आधा घंटा और कोटा देहरादून नंदा देवी एक्सप्रेस-12401-ट्रेन 15 मिनट की देरी से रवाना होगी।

तीन दिन चलेगी टनकपुर – देहरादून एक्सप्रेस
मुरादाबाद।
टनकपुर से काठगोदाम एक्सप्रेस ट्रेन अब तीन दिन चलेगी। सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता के अनुसार रेलवे ने टनकपुर एक्सप्रेस 15019- 50 ट्रेन अभी तक एक दिन चलती है। रेलवे ने इसे विस्तार देते हुए हफ्ते में तीन दिन चलाने का निर्णय लिया गया है। ट्रेन का आज से टनकपुर से मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को संचालित होने लगा।

भारी मात्रा में फफूंद लगी मिठाई नष्ट, खाद्य विभाग की छापेमारी में कई प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूने

Santosh Kumar Singh
Gorakhpur
26/02/2026

गोरखपुर। जनपद में मिलावटखोरी एवं असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गुरुवार को विभिन्न औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्रों में सघन छापेमारी अभियान चलाया गया। सहायक आयुक्त (खाद्य)-II डॉ. सुधीर कुमार सिंह के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में दूषित खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई तथा कई प्रतिष्ठानों से नमूने संग्रहित किए गए।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की। अभियान के तहत जे.पी. ट्रेडर्स/इंडस्ट्रीज से मैदा का नमूना लिया गया। गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने पर कैंपियरगंज क्षेत्र में लगभग 21 हजार रुपये मूल्य का मैदा सीज किया गया।
इसी क्रम में सहजनवा क्षेत्र के भगवानपुर स्थित वैभव गृह उद्योग से ‘मोटी सेवई’ का नमूना जांच के लिए संकलित किया गया। वहीं समृद्धि इंटरप्राइजेज से कन्फेक्शनरी उत्पाद का नमूना लिया गया तथा बाजार में विक्रय के लिए उपलब्ध चाउमीन का भी नमूना गुणवत्ता परीक्षण हेतु संग्रहित किया गया।
छापेमारी के दौरान टीम को कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में ऐसी मिठाइयां मिलीं जिनमें फफूंद लगी हुई थी तथा उनकी वैधता अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरा मानते हुए विभागीय टीम ने लगभग 10 क्विंटल (करीब 1000 किलोग्राम) दूषित मिठाइयों को मौके पर ही नष्ट कराया। नष्ट की गई सामग्री की अनुमानित कीमत करीब दो लाख रुपये बताई गई है।
सहायक आयुक्त (खाद्य) डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान लिए गए सभी नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिले में ऐसे अभियान निरंतर जारी रहेगा।

माध्यमिक शिक्षकों का डीएम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन, विभिन्न मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

Santosh Kumar Singh
Gorakhpur
26/02/2026

टीईटी से मुक्ति, पुरानी पेंशन बहाली और स्थानांतरण नीति लागू करने की उठाई मांग*

Gorakhpur: Secondary teachers stage dharna at DM office, submit memorandum with various demands

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के तत्वावधान में गुरुवार को जिलाध्यक्ष राजेश धर दुबे के नेतृत्व में शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट स्थित पर्यटन भवन परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपनी लंबित समस्याओं एवं मांगों को लेकर आवाज बुलंद करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के माध्यमिक शिक्षकों की कई महत्वपूर्ण समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं किया गया है। शिक्षकों ने विशेष रूप से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूर्ण रूप से मुक्त किए जाने की मांग उठाई। उनका कहना था कि नियुक्ति के समय लागू नियमों के आधार पर कार्यरत शिक्षकों पर बाद में नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
संघ के जिलाध्यक्ष राजेश धर दुबे ने कहा कि शिक्षकों की सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना की बहाली है। नई पेंशन योजना से शिक्षकों का भविष्य असुरक्षित हो गया है, जिससे उनमें व्यापक असंतोष व्याप्त है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों के हित में पुरानी पेंशन व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग की।
इसके अलावा शिक्षकों ने स्थानांतरण एवं समायोजन के लिए प्रदेश स्तर पर एक समान एवं पारदर्शी नीति लागू किए जाने की भी मांग की। शिक्षकों का कहना था कि स्पष्ट नीति के अभाव में कई शिक्षकों को वर्षों तक असुविधाजनक स्थानों पर कार्य करना पड़ रहा है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि बीएलओ ड्यूटी सहित अन्य प्रशासनिक कार्यों में शिक्षकों की लगातार तैनाती से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए सरकार तक शिक्षकों की समस्याएं पहुंचाने की मांग की। इस दौरान संघ के पदाधिकारी एवं जनपद के विभिन्न विद्यालयों से आए बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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