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भगवान बुद्ध Lord Budhha से संबंधित पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन

January 4, 2026

भगवान बुद्ध Lord Budhha से संबंधित पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन

भारत के लिए, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष केवल कलाकृतियाँ नहीं हैं; ये हमारी पूजनीय विरासत का और हमारी सभ्यता का अभिन्न हिस्सा हैं: प्रधानमंत्री
भगवान बुद्ध की शिक्षाएँ मूलतः पाली भाषा में हैं, हमारा प्रयास है कि पाली भाषा को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुँचाया जाए और इसके लिए पाली को प्राचीन भाषा का दर्जा दिया गया है: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली, 03 JAN 2026 ( by PIB Delhi) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी Prime Minister of India Narendra Modi ने नई दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर Rai Ray Pithora Cultural Auditorium New Delhi में भगवान बुद्ध Lord Budhha से संबंधित पिपरहवा Piperhava के पवित्र अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसका शीर्षक है, “प्रकाश और कमल: ज्ञान प्राप्त व्यक्ति के अवशेष”। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सौ पच्चीस वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भारत की धरोहर लौट आई है, भारत की विरासत वापस आ गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज से भारत के लोग भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों को देख पाएंगे और उनके आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि हमारे बीच भगवान बुद्ध Lord Buddha के पवित्र अवशेषों के होने से हम सभी को आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका भारत से जाने और अंततः वापसी, दोनों ही अपने आप में महत्वपूर्ण पाठ हैं। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि पाठ यह है कि गुलामी केवल राजनीतिक और आर्थिक हितों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है, बल्कि यह हमारी धरोहर को भी नष्ट कर देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि यही भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के साथ हुआ, जिन्हें गुलामी के समय में देश से बाहर ले जाया गया और लगभग एक सौ पच्चीस वर्षों तक अवशेष विदेश में रहे। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग इन्हें लेकर गए, उनके और उनके वंशजों के लिए, ये अवशेष केवल निर्जीव प्राचीन वस्तुएं थीं। इसी कारण से उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलामी के लिए पेश करने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए ये अवशेष हमारी पूजनीय देवता का हिस्सा हैं, हमारी सभ्यता का अविभाज्य हिस्सा हैं। उन्होंने घोषणा की कि भारत ने तय किया कि उनकी सार्वजनिक नीलामी की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्री मोदी ने गोदरेज समूह के प्रति आभार व्यक्त किया और बताया कि उनके सहयोग से भगवान बुद्ध से जुड़े ये पवित्र अवशेष उनकी  कर्मभूमि, उनकी चिंतन भूमि, उनकी महाबोधि भूमि और उनकी महापरिनिर्वाण भूमि में लौट आए हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि थाईलैंड में, जहां इन पवित्र अवशेषों को विभिन्न स्थानों पर रखा गया था, एक महीने से भी कम समय में चालीस लाख से अधिक भक्त इनका दर्शन करने आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वियतनाम में, जनता की भावना इतनी प्रबल थी कि प्रदर्शनी की अवधि बढ़ानी पड़ी, और नौ शहरों में लगभग 1.75 करोड़ लोगों ने अवशेषों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने यह भी इंगित किया कि मंगोलिया में, हजारों लोग गंदन मठ के बाहर घंटों इंतजार करते रहे, और कई लोग केवल इसलिए भारतीय प्रतिनिधियों को छूना चाहते थे, क्योंकि वे बुद्ध की भूमि से आए थे। उन्होंने रेखांकित किया कि रूस के किल्मिकिया क्षेत्र में, केवल एक सप्ताह में ही 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने पवित्र अवशेषों को देखा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रूस के काल्मिकिया क्षेत्र में, केवल एक सप्ताह में ही 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने पवित्र अवशेषों को देखा, जो स्थानीय जनसंख्या के आधे से अधिक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं, क्योंकि भगवान बुद्ध का उनके जीवन में गहरा प्रभाव है, उन्होंने याद किया कि उनका जन्म-स्थान वडनगर बौद्ध अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र था, और सारनाथ, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया, उनकी कर्मभूमि है। उन्होंने साझा किया कि जब भी वे सरकारी जिम्मेदारियों से दूर थे, तो वे बौद्ध स्थलों की यात्रा एक तीर्थयात्री के रूप में करते थे, और प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें दुनिया भर में बौद्ध तीर्थ स्थलों का दौरा करने का अवसर मिला है। उन्होंने नेपाल के लुंबिनी में पवित्र माया देवी मंदिर में नमन करने का अनुभव साझा किया और इसे एक असाधारण अनुभव बताया।

श्री मोदी ने यह भी कहा कि जापान के तो-जी मंदिर और किंकाकु-जी में उन्होंने महसूस किया कि बुद्ध के संदेश समय की सीमाओं को पार कर जाते हैं। उन्होंने चीन के शीआन में जाइंट वाइल्ड गूस पगोडा में अपनी यात्रा का उल्लेख किया, जहाँ से बौद्ध ग्रंथ पूरे एशिया में फैले थे, और जहाँ भारत की भूमिका अभी भी याद की जाती है। उन्होंने मंगोलिया में गंदन मठ की अपनी यात्रा को याद किया, जहां उन्होंने बुद्ध की विरासत के साथ लोगों के गहरे भावनात्मक जुड़ाव को देखा। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के अनुराधापुरा में जय श्री महाबोधि को देखना सम्राट अशोक, भिक्षु महिंदा और संघमित्रा द्वारा बोई गई परंपरा से जुड़ने का अनुभव था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि थाईलैंड में वाट फो और सिंगापुर में बुद्ध टूथ रिलिक मंदिर की उनकी यात्राओं ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के प्रभाव को समझने में उनके अनुभव को और गहरा किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जहाँ भी वे यात्रा करते हैं, वे भगवान बुद्ध की विरासत का एक प्रतीक लाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे चीन, जापान, कोरिया और मंगोलिया बोधि वृक्ष के पौधे साथ लेकर गये। उन्होंने इस बात पर यह जोर दिया कि कोई भी मानवता के लिए इसके गहरे संदेश की कल्पना कर सकता है, जब हिरोशिमा के बोटैनिकल गार्डन में एक बोधि वृक्ष मौजूद हो, जो परमाणु बम से प्रभावित शहर है।

प्रधानमंत्री ने उत्साहित होकर कहा, “भारत न केवल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का संरक्षक है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवित संवाहक भी है।” उन्होंने कहा कि पिपरहवा, वैशाली, देवनी मोरी और नागार्जुनकोंडा में पाये गए भगवान बुद्ध के अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत ने इन अवशेषों को हर रूप में -विज्ञान और आध्यात्मिकता- दोनों के माध्यम से सुरक्षित और संरक्षित किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने लगातार विश्वभर में बौद्ध धरोहर स्थलों के विकास में योगदान देने का प्रयास किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि जब नेपाल में भयंकर भूकंप ने एक प्राचीन स्तूप को नुकसान पहुंचाया, तो भारत ने इसके पुनर्निर्माण के लिए समर्थन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि बागन, म्यांमार में भूकंप के बाद, भारत ने ग्यारह से अधिक देवस्थलों के संरक्षण का कार्य किया। श्री मोदी ने जोर दिया कि ऐसे कई उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि भारत के भीतर भी, बौद्ध परंपरा से जुड़े स्थलों और अवशेषों की खोज और संरक्षण का कार्य लगातार प्रगति कर रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि भगवान बुद्ध की अभिधम्म, उनके शब्द और उनके उपदेश मूल रूप से पाली भाषा में थे, भारत आम लोगों के लिए पाली को सुलभ बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी कारण पाली  को एक प्राचीन भाषा का दर्जा दिया गया है, जिससे धम्म को उसके मूल सार में समझना और समझाना आसान होगा और बौद्ध परंपरा से जुड़े शोध को भी मजबूत किया जा सकेगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, किरेन रिजीजू, रामदास अठावले, राव इंदरजीत सिंह, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

इस प्रदर्शनी में पहली बार, पिपरहवा अवशेषों को, जिन्हें एक सदी से अधिक समय बाद देश वापस लाया गया है, पिपरहवा से संबंधित प्रामाणिक अवशेषों और पुरातात्त्विक सामग्री के साथ प्रस्तुत किया गया है, जो राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के संग्रहों में संरक्षित हैं।

1898 में खोजे गए पिपरहवा अवशेषों का प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में केंद्रीय स्थान है। ये सबसे शुरुआती और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अवशेषों में से एक हैं जो सीधे भगवान बुद्ध से जुड़े हैं। पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसकी व्यापक रूप से उस स्थान के रूप में पहचान की गयी है जहाँ भगवान बुद्ध ने सांसारिकता के त्याग से पहले अपने प्रारंभिक जीवन का अधिकांश हिस्सा बिताया था।

भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सके इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर करना होगा मजबूत : दत्तात्रेय होसबाले

सदभाव के साथ मिलकर मनानी होंगी सभी महापुरुषों की जयंतियां

समाज परिर्वतन के लिए सभी धार्मिक, सामाजिक संगठनों व समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर करने होंगे प्रयास

रोहतक, 4 दिसंबर 2026 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सके इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा, आंतरिक ताकत देनी होगी और संघ पिछले 100 वर्षों से इसके लिए ही कार्यरत है। देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर आगे आना होगा। सदभाव के साथ सभी महापुरुषों की जयंती मिलकर मनानी होंगी तभी राष्ट्र मजबूत होगा और जात-पात की खाई को पाटा जा सकेगा। दत्तात्रेय होसबाले रविवार को रोहतक के गोहाना रोड स्थित शिक्षा भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में “सज्जन शक्ति की समाज परिवर्तन में भूमिका” विषय पर सामाजिक सदभाव विचार गोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, क्षेत्र प्रचारक जतिन कुमार, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य रामेश्वर, क्षेत्र कार्यवाह रोशन लाल, प्रांत संघचालक प्रताप सिंह, प्रचारक डॉ सुरेंद्र पाल, कार्यवाह डॉ प्रताप सिंह, सहकार्यवाह राकेश, डॉ प्रीतम सिंह, प्रचार प्रमुख राजेश कुमार भी मौजूद रहे।

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत प्राचीन काल में सोने की चिड़िया कहलाता था इसलिए भारत ने विदेशी आक्रांताओं के आक्रमणों को भी झेला है। उन्होंने कहा कि 1600 ई में जब इंग्लैंड में ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापना हुई, उस समय भारत का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार व्यवस्था में 23 प्रतिशत हिस्सा था। इससे यह पता चलता है कि प्राचीन काल में भारत आर्थिक तौर पर कितना समृद्ध था। हमारी ज्ञान परंपरा, संस्कृति विश्व के सभी देशों से अच्छी थी, हम समस्त विश्व को एक कुटुम्ब तथा भारत के सभी धर्मों, परंपराओं, रीति-रिवाजों को अपना मानते हैं। एक चीटी में भी ईश्वर का अंश देखते हैं, लेकिन हम जाति-पाति, भिन्न-भिन्न पंथों में बंट गए और विदेशी आक्रांताओं ने इसका फायदा उठाया और हमें लंबे समय तक गुलामी झेलनी पड़ी। इसका परिणाम यह रहा कि देश की स्वतंत्रता के वर्षों बाद भी हम गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। हम अपना आत्मविश्वास खो बैठे हैं। इस आत्मविश्वास को पुन: प्राप्त करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को आगे आकर प्रयास करने होंगे। होसबाले ने कहा कि आक्रांता बनकर किसी देश को लूटना, उसकी संस्कृति को खत्म करना, राक्षसी आनंद के लिए किसी को दबाना हमारी प्रवृत्ति नहीं है। क्योंकि हम तो पूरे विश्व को एक कुटुम्ब मानते हैं। हम तो अपने पैरों पर खड़े होकर दूसरों को आगे बढ़ाने, विश्व को मानवता सिखाने वाली संस्कृति के लोग हैं । संघ पिछले 100 वर्षों से व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा है। ताकि समाज का हित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का काम होता है बाहरी ताकतों से देश की रक्षा करना, देश में संतुलन बनाए रखना, कानून व्यवस्था स्थापित करना लेकिन युवाओं का मार्गदर्शन करना, उनमें संस्कार का निर्माण करना, संस्कृति को बढ़ावा देना, कुरीतियों को खत्म करना, अच्छे नागरिक तैयार करना इन सबकी जिम्मेदारी समाज की होती है। इसके लिए समाज की सज्जन शक्ति को ही प्रयास करने होंगे। हमें विकास के साथ-साथ राष्ट्र धर्म, राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए बताया कि 1946 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान बिल्कुल पूरी तरह से धाराशाही हो गया था लेकिन युद्ध के महज 15 वर्षों बाद ही जापान विश्व के सामने फिर से खड़ा हो गया। इसके पीछे का प्रमुख कारण उन लोगों की देशभक्ति, शिक्षा व समाज की शक्ति है।

उन्होंने कहा कि देश पर इतने आक्रमण हुए, आक्रांताओं ने हमारी शिक्षा व्यवस्था, हमारी संस्कृति को खत्म करने के अनेकों प्रयास किए लेकिन इतने आक्रमणों के बाद भी हम खत्म नहीं हुए तो इसके पीछे जो ताकत है वह है हमारी परिवार व्यवस्था। विदेशी यात्रियों ने भी अपने यात्रा के अनुभवों में हमारी परिवार व्यवस्था का वर्णन प्रमुखता से किया है। क्योंकि हमारी परिवार व्यवस्था में बच्चों को स्किल व संस्कार दोनों चीजें एक साथ दी जाती रही है। उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं में प्रतिभा बहुत है लेकिन आज हमारा युवा नशे की दलदल में फंसकर पथभ्रष्ट हो रहा है। पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव में आकर अपनी संस्कृति से दूर होता जा रहा है। युवाओं को नशे से बचाने व संस्कारित करने के लिए सामाजिक, धामिक संगठनों व समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर कार्य करने होंगे। देश एक बार फिर से विश्व का नेतृत्व करे इसके लिए समाज की सज्जन शक्ति को देश को अंदर से मजबूत करना होगा, बाहर से ताकतवर बनाना होगा। निजी स्वार्थों को छोड़कर, जात-पात, भाषा, पंथ से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण, समाज परिवर्तन के कार्य करने होंगे। संघ इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए संघ ने समाज परिवर्तन के लिए 5 संकल्प लिए हैं। इसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, कुटुम्ब प्रबोधन तथा नागिरक कर्त्तव्य हैं। यदि हमें देश को स्वाभिमानी व शक्तिशाली बनाना है तो इन पांच संकल्पों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प लेना होगा। पूरे हरियाणा से विभिन्न आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा सामाजिक नेतृत्व करने वाले महानुभाव विचार गोष्ठी में उपस्थित रहे।

सरकार्यवाह ने समाज के लोगों के सवालों के दिए जवाब

सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कार्यक्रम में समाज के लोगों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि समाज में चिंतन-मथन होते रहना चाहिए। इससे ही समाज की उन्नत्ति होती है और संघ इसके लिए ही कार्यरत है। इसके अलावा संघ का कोई विशेष एजेंडा नहीं है। क्योंकि संघ की स्थापना के समय सरसंघचालक डॉ हेडगेवार ने कहा था कि समाज का कार्य पूण होने के बाद संघ को समाज में विलीन हो जाना है। अगर समाज एक बार जागृत हो जाए तो फिर संघ को अलग से काम करने की जरुरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने नैतिक शिक्षा, गीता व भगवत गीता के एक सवाल के जवाब में कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता का पाठ पढ़ाया जा सके, धार्मिकता समझाई जा सके इसके लिए नई शिक्षानीति में प्रयास किए गए हैं। लेकिन वर्षों से जो पाठयक्रम हम पढ़ते आ रहे हैं उसको दिमाग से निकलने में समय लगेगा तब तक समाज के सभी बुद्धिजीवियों व शिक्षण संस्थाओं के संचालकों को अपने विद्यालयों में देशभक्ति, संस्कृति, पंच परिर्वतन के बारे में जानकारी देनी होगी। युवाओं को नशे से बचाने के लिए सबको सामूहिक प्रयास करने होंगे क्योंकि यह एक तरह से अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी भारत के नागिरक के साथ यदि कुछ गलत होता है तो संघ पीड़ित व्यक्ति के समर्थन में आवाज उठाता है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार में हमारे विचारधारा वाले लोग जरुर हैं लेकिन संघ सरकार का रिमोट कंट्रोल नहीं है। सरकार संविधान के अनुसार अपना कार्य करती है। छुआछुत के सवाल के जवाब में दत्तात्रेय ने कहा कि 1969 में संघ के सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने संत समाज से छुआछुत के विरोध में एक प्रस्ताव पास करवाया था। समाज से छुआछुत खत्म हो इसके लिए संघ एक कुआ-एक श्मशान- सब के लिए मंदिर प्रवेश अभियान चलाए हुए ह

संघ समाज में माला के धागे की तरह करता है काम

सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि समाज में हो रहे अच्छे परिर्वतन के लिए संघ ने कभी श्रेय नहीं लिया। संघ तो समाज में माला के उस धागे की तरह कार्य करता है जैसे एक धागा फूलों को जोड़कर माला बना देता है लेकिन वह किसी को दिखाई नहीं देता। ठीक उसी प्रकार संघ समाज से किसी प्रकार की कोई प्रशंसा नहीं चाहता।

यूपी के 18 ए आरटीओ के तबादले

♦लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में बड़ा फेरबदल हुआ है. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के निर्देश पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 18 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (ARTO)के तत्काल प्रभाव से तबादले कर दिए गए हैं. ​ट्रांसपोर्ट कमिश्नर द्वारा जारी सूची में प्रशासन और प्रवर्तन दोनों इकाइयों के अधिकारियों को इधर-उधर किया गया है. इस फेरबदल में लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा और कानपुर कई महत्वपूर्ण जिलों की कमान बदली गई है. लखनऊ में यातायात नियमों के उल्लंघन और ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के लिए आलोक कुमार यादव को एआरटीओ प्रवर्तननियुक्त किया गया है.

1.चम्पा लाल, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), सिद्धार्थ नगर
2.अशोक कुमार श्रीवास्तव, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), गाजियाबाद
3.कौशल कुमार सिंह,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), सोनभद्र
4.हरिओम, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन), बदायूँ
5.वैभव सोती,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल बरेली
6.आलोक कुमार यादव,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल लखनऊ
7. सतेन्द्र कुमार सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल मथुरा
8.मानवेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), सहारनपुर
9.विन्ध्यांचल कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन), प्रथम दल कानपुर
10.विनय कुमार सिंह,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), आगरा
11.कृष्ण कुमार यादव, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), फर्रुखाबाद
12.उमेश चन्द्र कटियार,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) रायबरेली
13.गुलाब चन्द्र,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल अयोध्या
14.देवदत्त कुमार,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्राविधिक) मेरठ
15.विपिन कुमार,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) बागपत
16.हरिओम,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल शाहजहाँपुर
17.प्रतीक मिश्रा,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल फतेहपुर
18.नीतू शर्मा,सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल बुलंदशहर

विधान सभा अध्यक्ष ने विधायक के निधन पर व्यक्त किया शोक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने जनपद बरेली के फरीदपुर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र–122 से विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल जी के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
अध्यक्ष ने कहा कि प्रो. श्याम बिहारी लाल जी दो बार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित होकर जनसेवा में सक्रिय रहे। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास, जनसमस्याओं के समाधान तथा सामाजिक सरोकारों के प्रति सदैव सजग और प्रतिबद्ध जनप्रतिनिधि थे। उनकी सरलता, सौम्य व्यवहार और कर्मठता के कारण वे जनमानस में विशेष सम्मान रखते थे। अध्यक्ष जी ने कहा कि प्रो श्याम बिहारी लाल जी का निधन न केवल उनके परिजनों एवं समर्थकों, बल्कि प्रदेश की राजनीति और सामाजिक जीवन के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं हो सकेगी।
अध्यक्ष जी ने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल देने की प्रार्थना की है।

खालिद की रिहाई को अमेरिकी सांसदों का पत्र

नई दिल्ली, 04 जनवरी 2026, दिल्ली दंगों के आरोपी जे एन यू के पूर्व छात्र उमर खालिद की रिहाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस के 8 सांसदों ने पत्र लिखा है। ये पत्र 30 दिसंबर 2025 को अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रआ को लिखा गया है।

पत्र में सांसदों ने खालिद को जमानत नहीं मिलने और केस का ट्रायल शुरू नहीं होने पर चिंता व्यक्त की है।

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