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नहाने के विवाद में संघर्ष, कैदी ने गैंगस्टर का गाल काटा

January 6, 2026

नहाने के विवाद में संघर्ष, कैदी ने गैंगस्टर का गाल काटा

महोबा। Mahoba Jila Jail ज़िला उपकारागार में नहाने के दौरान हुए मामूली विवाद ने हिंसक झगड़े का रूप ले लिया। जेल के बाथरूम में पानी पड़ने को लेकर दो कैदियों के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते गंभीर मारपीट में बदल गई। इस दौरान एक कैदी ने गैंगस्टर एक्ट के आरोपी के गाल को दांतों से काट लिया, जिससे उसका मांस कटकर लटक गया।
घटना में 27 वर्षीय कैदी कमलेश गंभीर रूप से घायल हो गया। वह जून 2021 से गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल में निरुद्ध है। आरोप है कि जानलेवा हमले के मामले में फरवरी 2023 से जेल में बंद कैदी हरिओम तिवारी से नहाने के दौरान पानी पड़ने को लेकर उसका विवाद हुआ था। गुस्से में हरिओम ने कमलेश पर हमला कर उसके जबड़े और गाल को दांतों से काट लिया।
घायल कैदी के जोर-जोर से चिल्लाने पर जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। जेल प्रशासन ने आनन-फानन में कमलेश को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसके गाल पर चार टांके लगाए। डॉक्टरों के अनुसार घायल की हालत फिलहाल स्थिर है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे वापस जेल भेज दिया गया।
जेल परिसर के भीतर हुई इस गंभीर मारपीट की घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन इसे सामान्य घटना बताते हुए टिप्पणी करने से बचता नजर आ रहा है। घटना शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित जिला उपकारागार की बताई जा रही है।

सीएचसीसी ने सराही यूपी विधान सभा की कार्यप्रणाली

कनाडा से भी अधिक प्रभावशाली है उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली : सीएचसीसी प्रतिनिधिमंडल

लखनऊ। कैनेडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स (सीएचसीसी) के 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज उत्तर प्रदेश विधान सभा में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से शिष्टाचार भेंट की। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि कार्य संस्कृति, तकनीकी नवाचार और विधायी दक्षता के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश विधान सभा कनाडा की कई विधायी संस्थाओं से भी अधिक प्रभावशाली, सशक्त और अनुकरणीय प्रतीत होती है।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल को विधान सभा परिसर का विस्तृत भ्रमण कराया गया, जिसमें सदन की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रियाओं तथा संस्थागत ढांचे से अवगत कराया गया।
भ्रमण एवं संवाद के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश विधान सभा की सुव्यवस्थित कार्यसंस्कृति, आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं, डिजिटल पहलों और पारदर्शी संचालन की मुक्त कंठ से सराहना की।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना UP Vidhan Sabha Ahyaksh Satish Mahana  ने प्रतिनिधिमंडल को विधान सभा में लागू किए गए आधुनिकीकरण प्रयासों, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ई-विधान प्रणाली तथा पारदर्शिता और सुशासन को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान सभा लोकतांत्रिक मूल्यों को केंद्र में रखते हुए नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाकर प्रभावी एवं उत्तरदायी विधायी भूमिका का निर्वहन कर रही है।
इस अवसर पर विधायन, सार्वजनिक नीति, निवेश-अनुकूल वातावरण, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और डिजिटल गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।
प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार की प्रगतिशील नीतियों, पारदर्शी प्रशासन तथा दीर्घकालिक विकास दृष्टि की प्रशंसा करते हुए इसे निवेश और व्यापार के लिए अनुकूल बताया।
सीएचसीसी प्रतिनिधिमंडल ने माननीय अध्यक्ष द्वारा प्रदान किए गए समय, मार्गदर्शन और खुले संवाद के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की संस्थागत सहभागिता भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश और कनाडा के बीच व्यापार, निवेश और नीतिगत सहयोग को नई दिशा देगी।
प्रतिनिधिमंडल ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी उत्तर प्रदेश सरकार एवं विधान सभा के साथ संवाद और सहयोग निरंतर जारी रहेगा, जिससे आर्थिक विकास, नवाचार और समावेशी प्रगति के साझा लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।
सीएचसीसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अध्यक्ष डॉ. अजय प्रकाश मिश्रा ने किया। 25 सदस्यीय कैनेडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स (सीएचसीसी) के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नरेश चावड़ा ने अध्यक्ष के रूप में किया। प्रतिनिधिमंडल में कुशाग्र दत्त शर्मा अध्यक्ष (प्रेसिडेंट), राकेश कांतारिया ट्रेड मिशन चेयर, अमित चौधरी सह-अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के रूप में शामिल रहे। इसके अतिरिक्त फल्गुन भंडेरी, आनंद आचार्य एवं विपुल रबारी राष्ट्रीय निदेशक के रूप में प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव विधानसभा श्प्रदीप कुमार दुबे समेत सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कन्नौज जेल से दो कैदी फरार, चार जेल कर्मी निलंबित

कन्नौज। Kannauj जिला जेल से दो कैदियों के फरार होने के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए जेल कर्मियों की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में चार जिला जेल कर्मियों को दोषी पाए जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
निलंबित किए गए कर्मियों में जेल वार्डर शिवेंद्र सिंह यादव, जेल वार्डर शिवचरन, उप कारापाल बद्री प्रसाद और कारापाल विनय प्रताप सिंह शामिल हैं। सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मामले की विस्तृत जांच डीआईजी कारागार, कानपुर परिक्षेत्र को सौंपी गई है। साथ ही जिला जेल कन्नौज के अधीक्षक की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
बताया गया है कि फरार हुए दोनों बंदी अंकित और डम्पी कन्नौज जिला जेल से भागने में सफल रहे। घटना के बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, वहीं फरार कैदियों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

January 5, 2026

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिले सीएम योगी आदित्यनाथ

नई दिल्ली, 05 जनवरी 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज दिल्ली में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नडड्डा और कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। उनकी यह मुलाकात राजनीति शिष्टाचार के अन्तर्गत हुई। किन्तु माना जा रहा है राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ योगी जी ने प्रदेश की राजनीति पर भी चर्चा की। इसमें संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में फेरबदल भी शामिल है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था के 1000 वर्ष

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

सोमनाथ… ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित Somnath सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है…“सौराष्ट्रे सोमनाथं च…यानि ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है। ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है।

शास्त्रों में ये भी कहा गया है:

“सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।
लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥”

अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है। मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है।

दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था।

वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था।

सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे।

1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है। जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है। हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दुःख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है।

हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा। सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था। ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था। ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी। हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे।

सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है। ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है।

1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था। लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया। और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया।

महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ। उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही। साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है। वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है।

ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया। उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें।

1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया। 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की।

उन्होंने कहा, “दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे। ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे।

इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है। ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए। पहले की तरह सशक्त। पहले की तरह जीवंत। यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है। इसका अनुसरण आपको गौरव से भर देता है। इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु। इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा।”

ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।

सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’, अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।

जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है, हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है। हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही।

इन्हीं विचारों ने हमें हर कालखंड में, हर परिस्थिति में फिर से उठ खड़े होने, मजबूत बनने और आगे बढ़ने का सामर्थ्य दिया है। इन्हीं मूल्यों और हमारे लोगों के संकल्प की वजह से आज भारत पर दुनिया की नजर है। दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है। वो हमारे इनोवेटिव युवाओं में निवेश करना चाहती है। हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं। योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं। ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं। आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है।

अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है। सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा, “भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्याः क्षयमुपगता यस्य। अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं। जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गए हैं।

आज भी दादा सोमनाथ के दर्शन से ऐसी ही अनुभूति होती है। मन में एक ठहराव आ जाता है, आत्मा को अंदर तक कुछ स्पर्श करता है, जो अलौकिक है, अव्यक्त है।

1026 के पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद 2026 में भी सोमनाथ का समुद्र उसी तीव्रता से गर्जना करता है और तट को स्पर्श करती लहरें उसकी पूरी गाथा सुनाती हैं। उन लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठता रहा है।

अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं। उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। इतिहास के पन्नों में वे केवल फुटनोट हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है। सोमनाथ हमें ये बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ आज भी आशा का अनंत नाद है। ये विश्वास का वो स्वर है, जो टूटने के बाद भी उठने की प्रेरणा देता है।

अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं। एक नए संकल्प के साथ, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए। एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।

जय सोमनाथ !

 

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