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दुष्यंत गौतम के विरुद्ध अपमानजनक सामग्री के प्रसार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगायी

January 7, 2026

दुष्यंत गौतम के विरुद्ध अपमानजनक सामग्री के प्रसार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगायी

नई दिल्ली, 07 जनवरी 2026, दिल्ली उच्च न्यायालय ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम की अपील पर सुनवाई करते हुए उनके विरुद्ध सोशल मीडिया में किये जा रहे अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण प्रचार को तत्काल रोकने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म और न्यूज पोर्टल्स को निर्देश दिये हैं कि श्री गौतम के विरुद्ध पोस्ट गईं अपमानजनक, मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण सामग्री को तत्काल हटाया जाएगा। इसके साथ ही निर्देश दिया है कि इस तरह की सामग्री पुनः प्रेषित और प्रसारित न हो। इन वेबसाइट्स के प्रतिनिधियों को भविष्य में भी इस तरह की सामग्री नहीं अपलोड करने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

ज्ञातव्य है कि गत दिवस श्री गौतम ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपने विरुद्ध चल रहे अपमानजनक और मनगढ़ंत आरोपों से आजिज आकर मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इसके साथ ही सोशल मीडिया में हो रहे प्रचार प्रसार को भी रोकने की मांग की थी। इस याचिका को आज न्यायालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया। श्री गौतम का नाम उत्तराखण्ड के अंकिता गौतम केस में घसीटा गया था।

मनरेगा को खत्म करने की साजिशः अखिलेश यादव

लखनऊ, 07 जनवरी 2026, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से क्या होगा, दरअसल ये मनरेगा को धीरे धीरे खत्म करने की भाजपा की गोपनीय साजिश है।

एक्स पर किये गए पोस्ट में श्री यादव ने कहा कि एक तरफ मनरेगा का बजट कम से कमतर करती जा रही है, तो दूसरी तरफ राज्यों पर पैसा खर्च का इतना दवाब बना दिया गया है कि जीएसटी सिस्टम में केन्द्र से पैसा न मिलने के कारण पहले से ही खाली खजाने से जूझ रहे राज्य, अतिरिक्त बजट की व्यवस्था कहां से कर पाएंगे। तीसरी तरफ सैकड़ों ग्राम सभाओं को अर्बन कैटेगरी मं डालकर उनका बजट भी भाजपा सरकार ने मार दिया है। सही मायने में मनरेगा का नाम बदलना ही नहीं बल्कि उसका राम राम करना ही भाजपा का लक्ष्य है।

उपज प्रांतीय आम सभा बैठक 25 अगस्त 2025 वाराणसी

साध्वी रेणुका ने लगाया आश्रम हड़पने का आरोप


हरिद्वार, 7 जनवरी 2026 (उप्र समाचार सेवा) हरिपुर कलां स्थित राष्ट्र भक्ति आश्रम की साध्वी रेणुका ने आश्रम को हड़पने का आरोप लगाया है। प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए साध्वी रेणुका ने बताया कि भूमािफया और असामाजिक तत्वों द्वारा आश्रम पर कब्जे का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। साध्वी रेणुका ने बताया कि उन्होंने 3 नवम्बर को कई लोगों को नामजद करते हुए आश्रम पर कब्जे के प्रयास की एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे आरोपियों के हौसले और बढ़ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि 13 नवंबर 2025 को आपराधिक प्रवृत्ति के लोग आश्रम पहुंचे और आश्रम छोड़कर चले जाने और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस को सूचना देने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने राज्य के प्रमुख सचिव को भी पत्र लिखा, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 20 नवम्बर को कुछ हथियारबंद बदमाशों ने आश्रम में घुसकर उन पर जानलेवा हमला किया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने उन्हें छुड़ाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली। लेकिन न तो मेडिकल कराया और न ही जांच में कोई प्रगति हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें और उनके गुरु भाई को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही है। साध्वी रेणुका ने यह भी आरोप लगाया कि आश्रम से जुड़ा उत्तराधिकार का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद प्रशासन ने आश्रम को खाली करा दिया। साध्वी रेणुका ने कहा कि इन हालातों के कारण वह आज देवभूमि उत्तराखंड में बिना किसी आश्रय के रहने को मजबूर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग क है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषियों को सख्त सजा दी जाए और उनका आश्रम उन्हें वापस दिलाया जाए।
राजेंद्र श्रमिक एवं भंवर सिंह ने कहा कि साध्वी रेणुका को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन कुछ लोग आश्रम की संपत्ति को कब्जाने की नीयत से गलत हथकंडे अपना रहे हैं। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रैसवार्ता में विजयपाल, प्रवीण कुमार, मोदीमल, करुणा, सागर, बृजेश कुमार, संजीव बाबा, संजय मूलनिवासी, प्रदीप, रूपचंद एडवोकेट आदि मौजूद रहे।

पापों का हरण करती है मोक्षा एकादशी

Article First Published on  01 Dec  2011 

मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की एकदाशी

यूं तो सभी एकादशी मानवजगत को श्रेष्ठ फल देने वाली तथा उसके कष्टों को निवारण करने वाली हैं। कि्तु इसमें भी मोक्षा एकादशी का महत्व सबसे ज्यादा है। यह मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जोकि मोक्षा एकादशी के नाम से जानी जाती है। इसे गीता जयंती भी कहते हैं। क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के दौरान कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता का प्रवचन किया था। मोक्षा एकादशी के बारे में युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से शुक्लपक्ष की मोक्षा एकादशी का महात्म पूछा था। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा-नृपश्रेष्ठ मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष की एकादशी के श्रवण मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। इसका नाम है मोक्षा एकादशी यह सब पापों का हरण करने वाली है। राजन् उस दिन यत्नपूर्वक तुलसी की मंजरी तथा धूप दीपादि से भघवान दामोदर का पूजन करना चाहिए। पूर्वोक्त विधि से ही दशमी और एकादशी के नियम का पालन करना चाहिए। मोक्षा एकादशी बड़े बड़े पातकों को नाश करने वाली है। उसदिन रात्रि मे मेरी प्रसंन्नता के लिए नृत्य, गीत और स्तुति के द्वारा जागरण करना चाहिए। जिसके पितर पापवश नीच योनि में पड़े हों। वे इसका पुण्य दान करने से मोक्ष को प्राप्त होते हैं। इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह तिथि गीता जयंती के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसके बारे में गया है कि शुद्धा, विद्धा और नियम आदि का निर्णय यथापूर्व करने के अनन्तर मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी को मध्याह्न में जौ और मूँग की रोटी दाल का एक बार भोजन करके द्वादशी को प्रातः स्नानादि करके उपवास रखें।

भगवान का पूजन करें और रात्रि में जागरण करके द्वादशी को एक बार भोजन करके पारण करें। यह एकादशी मोह का क्षय करनेवाली है। इस कारण इसका नाम मोक्षदा रखा गया है। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण मार्गशीर्ष में आने वाली इस मोक्षदा एकादशी के कारण ही कहते हैं मैं महीनों में मार्गशीर्ष का महीना हूँ। इसके पीछे मूल भाव यह है कि मोक्षदा एकादशी के दिन मानवता को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश हुआ था।

(साभार कल्याण)

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