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साम्राज्यवाद के विरुद्ध खड़ा होता ईरान

January 15, 2026

साम्राज्यवाद के विरुद्ध खड़ा होता ईरान

ईरान, ट्रंप और प्रतिरोध की राजनीति

सत्यवान सौरभ, लेखक, स्वतंत्र पत्रकार

डॉ. सत्यवान सौरभ
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ संघर्ष केवल सीमाओं या संसाधनों तक सीमित नहीं होते, वे विचारधाराओं, सत्ता-संतुलन और नैतिकता की भी परीक्षा लेते हैं। ईरान और अमेरिका के बीच दशकों से चला आ रहा टकराव ऐसा ही एक संघर्ष है, जो समय-समय पर नए रूपों में सामने आता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान यह टकराव जिस तीव्रता और आक्रामकता के साथ उभरा, उसने वैश्विक राजनीति को एक बार फिर शीतयुद्धोत्तर दौर की अस्थिरता की याद दिला दी।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही ईरान अमेरिका की रणनीतिक और वैचारिक राजनीति का लक्ष्य रहा है। अमेरिका ने ईरान को केवल एक राष्ट्र-राज्य के रूप में नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक राजनीतिक मॉडल के रूप में देखा—ऐसा मॉडल जो पश्चिमी प्रभुत्व, इज़राइल-केन्द्रित पश्चिम एशिया नीति और अमेरिकी साम्राज्यवादी सोच को चुनौती देता है। यही कारण है कि ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध, कूटनीतिक अलगाव और सैन्य दबाव लंबे समय से अमेरिकी विदेश नीति का हिस्सा रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में यह नीति और अधिक कठोर, असंवेदनशील और टकरावपूर्ण हो गई। 2015 में ईरान और विश्व शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका का एकतरफा हटना न केवल कूटनीतिक असंतुलन का उदाहरण था, बल्कि यह भी दर्शाता था कि ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय सहमति और बहुपक्षीयता को किस हद तक नज़रअंदाज़ करने को तैयार था। इसके बाद ईरान पर “अधिकतम दबाव नीति” लागू की गई, जिसका उद्देश्य ईरानी अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाना और शासन को आंतरिक विद्रोह की ओर धकेलना था।
लेकिन इतिहास साक्षी है कि दबाव हमेशा झुकाव पैदा नहीं करता। कई बार वह प्रतिरोध को जन्म देता है। ईरान के मामले में भी यही हुआ। आर्थिक कठिनाइयों, प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय अलगाव के बावजूद ईरान ने अपने राजनीतिक अस्तित्व, संप्रभुता और वैचारिक पहचान को बनाए रखा। यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि ईरान का विरोध केवल अमेरिका की नीतियों से नहीं है, बल्कि उस वैश्विक व्यवस्था से है जिसमें कुछ गिने-चुने देश स्वयं को न्यायाधीश और शेष दुनिया को अभियुक्त मान लेते हैं।
“जैसी करनी वैसी भरनी” का सिद्धांत केवल नैतिक कहावत नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी गहराई से लागू होता है। पश्चिम एशिया में दशकों तक किए गए अमेरिकी हस्तक्षेप—इराक, अफगानिस्तान, लीबिया और सीरिया—ने क्षेत्र को स्थिरता नहीं, बल्कि अराजकता दी। लोकतंत्र के नाम पर सत्ता परिवर्तन, मानवाधिकारों के नाम पर सैन्य आक्रमण और आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध के नाम पर निर्दोष नागरिकों की हत्या—इन सबने अमेरिका की नैतिक साख को गहरा नुकसान पहुँचाया। ऐसे में जब ईरान अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देता है, तो वह केवल अपनी रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है, जो ताकत को ही न्याय मानती है।
ट्रंप की विदेश नीति का एक और खतरनाक पहलू उसका व्यक्तिवादी और आवेगपूर्ण स्वभाव था। कूटनीति संवाद और धैर्य से चलती है, जबकि ट्रंप की राजनीति ट्वीट, धमकी और शक्ति-प्रदर्शन पर आधारित थी। ईरानी जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या इसी मानसिकता का परिणाम थी। यह घटना न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन थी, बल्कि इसने पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया। इसके बाद ईरान की प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब वह केवल सहने की नीति पर नहीं चल रहा।
ईरान की राजनीति को अक्सर पश्चिमी मीडिया में कट्टर, दमनकारी और पिछड़ा बताकर प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन यह चित्रण अधूरा और एकांगी है। ईरान की जनता ने बार-बार यह साबित किया है कि वे बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे, चाहे वह कितनी भी आकर्षक शब्दावली में क्यों न लपेटा गया हो। ईरान में सरकार की आलोचना होती है, विरोध होते हैं, लेकिन जब बात राष्ट्रीय संप्रभुता की आती है, तो जनता और सत्ता एकजुट दिखाई देते हैं। यही वह तत्व है जिसे पश्चिमी रणनीतिकार अक्सर समझने में चूक जाते हैं।
भारत जैसे देशों के लिए यह पूरा परिदृश्य एक गंभीर चेतावनी भी है और अवसर भी। ईरान भारत का पारंपरिक मित्र रहा है—ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय संपर्क (चाबहार बंदरगाह) और मध्य एशिया तक पहुँच के लिहाज़ से ईरान का महत्व असंदिग्ध है। लेकिन अमेरिका के दबाव में भारत का ईरान से दूरी बनाना उसकी स्वतंत्र विदेश नीति पर प्रश्न खड़े करता है। किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को किसी तीसरे देश की नाराज़गी के डर से गिरवी न रखे।
आज वैश्विक राजनीति एक संक्रमण काल से गुजर रही है। एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था की पकड़ ढीली पड़ रही है और बहुध्रुवीयता का उदय हो रहा है। ऐसे में ईरान जैसे देश, जो लंबे समय से दबाव और प्रतिबंधों के बीच खड़े रहे हैं, नए शक्ति-संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। रूस-चीन-ईरान के बढ़ते समीकरण इस बदलाव के संकेत हैं। यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अब दुनिया केवल वाशिंगटन के इशारों पर नहीं चलेगी।
अंततः प्रश्न यह नहीं है कि ईरान सही है या अमेरिका गलत। वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या वैश्विक राजनीति में शक्ति ही न्याय का एकमात्र पैमाना होगी, या फिर अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और समानता के सिद्धांतों को वास्तविक सम्मान मिलेगा। यदि बड़े राष्ट्र अपनी करनी से दुनिया को डराते रहेंगे, तो भरनी के रूप में उन्हें अस्थिरता, अविश्वास और प्रतिरोध ही मिलेगा।
ईरान और ट्रंप के दौर की अमेरिकी राजनीति हमें यही सिखाती है कि दमन से स्थायित्व नहीं आता, और धमकी से सम्मान नहीं मिलता। इतिहास अंततः उसी का पक्ष लेता है जो अपनी संप्रभुता, आत्मसम्मान और जनता की चेतना के साथ खड़ा रहता है। और शायद यही “जैसी करनी वैसी भरनी” का सबसे बड़ा राजनीतिक अर्थ है।

January 14, 2026

ललितपुर में एलयूसीसी से जुड़े चार गिरफ्तार, धन दोगुना करने का देते थे लालच

ललितपुर, 14 जनवरी 2026 (उप्रससे)। आम जनता का धन दोगुना करने का लालचदेखकर करोड़ों की ठगी करने के आरोप में पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों ने स्वीकार किया है कि वे एलयूसीसी नमक संस्था में भोले भाले लोगों का धन जमा करते थे।

अपर पुलिस महानिदेशक कानपुर जोन कानपुर एवं पुलिस महानिरीक्षक झांसी, परिक्षेत्र झांसी के निर्देश के क्रम में, पुलिस अधीक्षक मो मुश्ताक के निर्देशन व अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह एंव क्षेत्राधिकारी तालबेहट रक्षपाल सिंह के निकट पर्यवेक्षण में थाना तालबेहट पर पंजीकृत मुअसं 6/2026 धारा 111/318(4)/ 61(2)/ 338/ 352/351(3)/ 336(3)/ 340(2) BNS के अभियोग में वाँछित अभियुक्तगण भरत वर्मा, मुकेश कुमार जैन, रविशंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी, विनोद कुमार तिवारी उर्फ रानू को गिरफ्तार किया गया है ।

थाना तालबेहट पर शिकायतकर्ता द्वारा दिये गये प्रार्थना पत्र के आधार पर अभियुक्तगण द्वारा एक संगठित होकर अपने आर्थिक लाभ के लिये एलयूसीसी LUCC नाम की एक चिटफंड कम्पनी के माध्यम से धोखाधड़ी कर षड्यन्त्र पूर्वक कूटरचित दस्तावेज तैयार करते हुये प्रार्थी के रुपये लेकर हड़प लेते थे एवं प्रार्थी द्वारा अपना रुपया वापस मांगने पर टाल-मटोल करते हुये गाली-गलौच करना तथा जान से मारने की धमकी देते थे।

सूचना के आधार पर थाना तालबेहट पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया था । प्रकरण की गंभीरता व व्यापकता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक मो मुश्ताक द्वारा टीमें गठित की गयीं थी । गठित टीमों द्वारा सर्विलांस (मैनुअली/टैक्नीकल), वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन व अन्य एकत्रित साक्ष्यों की मदद से 4 अभियुक्तगण गिरफ्तार किया गया है

हिन्दू सम्मेलनकर ध्यान भटका रही है भाजपा- जय प्रकाश अंचल

बलिया, 14 जनवरी 2026 (उप्रससे)। बैरिया से सपा के विधायक जयप्रकाश अंचल ने जगह जगह हो रहे हिंदू सम्मेलन को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के पास कोई काम नही है, काम नही होने के कारण जनता का दिल और दिमाग कैसे भटकाया जाए इसके लिए वो लोग अनवरत काम कर रहे है जिस सड़क से हम लोग आ रहे है वह सड़क पूरी तरह से टूटी हुई है और मुख्यमंत्री ने बयान दिया था कि पूरे प्रदेश की सड़को को गड्ढा मुक्त कर देंगे।इस सड़क की दशा इतनी खराब है कि इस सड़क पर बाइक गिरती है और आम जनता को तकलीफ होती है सरकार सड़क बनाने पर दिल और दिमाग नही लगा रही है हिंदू मुस्लिम और भारत पाकिस्तान करके लोगों का दिल दिमाग डायवर्ट करना चाहती है।भारत देश एक धर्म निरपेक्ष देश है इस देश में कौन हिंदू है कौन मुसलमान है कौन सिख हुआ कौन ईसाई है किसी को पूजा,इबादत,नमाज करने के लिए प्रतिबंध नही है तो आप धर्म की राजनीति क्यों कर रहे है आप विकास की राजनीति कीजिए।

वही बंगाल में ईडी की कार्यवाही को लेकर कहा कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बुरी हार की संभावना लग गई है इस लिए दिलेर मुख्यमंत्री को जनहित के मुद्दे पर कार्य करने के वाली मुख्यमंत्री को परेशान करने की नियत से वहां भारतीय जनता पार्टी ईडी का छापा डलवा रही है कि किस तरह से उन्हें परेशान किया जाए और उन्हें सत्ता से बेदखल किया जाए मुझे जानकारी नहीं है कि अमित शाह क्या कर रहे है लेकिन कही न कही बंगाल के साथ केन्द्र सरकार अन्याय कर रही है।

January 13, 2026

वीबी जी राम जी के लाभ जन जन बताएं: किरण रिजीजू

लखनऊ 13 जनवरी 2026। भारत सरकार के मंत्री किरेन रिजिजू जी ने कहा उत्तर प्रदेश बहुत ही महत्वपूर्ण प्रदेश है। उत्तर प्रदेश में गांव-गांव तक पहुंचकर वीबी-जी राम जी अधिनियम से होने वाले लाभ जन-जन तक पहुंचाये जाएगें। उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी से ग्रामीण भारत का उत्थान होने वाला है।
श्री रिजिजू ने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा प्रदेश है, इसलिए यहां यह अभियान बड़े स्तर पर चलना चाहिए। केंद्र सरकार, यूपी सरकार और संगठन के साथ मिलकर यह योजना पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी। पुरानी मनरेगा में भ्रष्टाचार की गारंटी थी, अब एक रुपए की भी धांधली नहीं होगी।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मनरेगा में 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी गांव तथा ग्रामीणों का उतना विकास नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। पहले कुछ लोग आपस में तालमेल करके करोड़ों की लूट कर लेते थे। भ्रष्टाचार की गारंटी थी। इसलिए कानून में बदलाव लाना पड़ा।
श्री रिजिजू ने कहा कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और सख्त मॉनिटरिंग से जुड़ी है। आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन से मजदूरी की चोरी असंभव हो गई। रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिनों तक की गई है। कृषि प्रधान भारत को जल संरक्षण, स्वास्थ्य, चावल उत्पादन में भारत को नंबर एक बनाने जैसे लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं। गांवों की वास्तविक जरूरतों के हिसाब से काम होंगे।
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकसित भारत जी राम जी के जरिए बड़ा बदलाव आने वाला है। यह बड़ा प्रदेश है और यहां गांव-गांव तक यह अभियान जाएगा। गांवों की परिस्थितियों में क्रांतिकारी बदलाव होगा। किसी के दुष्प्रभाव से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने हर गांव और हर घर से प्रस्ताव लेने की बात कही ताकि योजना नीचे तक प्रभावी हो।
श्री रिजिजू ने कहा कि सीएए के दौरान कांग्रेस और सपा ने मुस्लिमों को बरगलाने की कोशिश की, जबकि किसी की नागरिकता नहीं छीनी गई। अब एसआईआर और वीबी-जी राम जी को लेकर कांग्रेस और सपा भ्रम फैला रही है।
उन्होंने बताया कि अगर यह योजना यूपी में सफल हुई तो पूरे देश में सफल होगी। यह अभियान विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्यशाला ग्रामीण भारत के विकास और पारदर्शिता के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बनी है। जल्द ही यह योजना प्रदेश के हर कोने तक पहुंचेगी, जिससे लाखों ग्रामीण परिवारों को मजबूत रोजगार और आजीविका का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को ‘गोरखपुर रत्न’ से सम्मानित किया

गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में लोक गायिका और बिहार में भाजपा की विधायक मैथिली ठाकुर को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

‘गोरखपुर महोत्सव’ का समापन कार्यक्रम

लखनऊ, 13 जनवरी, 2026,  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज गोरखपुर में चम्पा देवी पार्क, रामगढ़ताल में आयोजित तीन दिवसीय ‘गोरखपुर महोत्सव’ के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली जनपद की 06 विभूतियों को ‘गोरखपुर रत्न’ से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने महोत्सव की स्मारिका ‘अभ्युदय’ का विमोचन किया।

गोरखपुर महात्सव में स्मारिका अभ्युदय का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर की पुरातन से आधुनिक समय तक की परम्परा, सभ्यता एवं संस्कृति को लेकर तीन दिनों से ‘गोरखपुर महोत्सव’ उत्साह व उल्लास के साथ आयोजित हुआ। महोत्सव में कला, संस्कृति, विज्ञान, शिल्पकला जैसे जीवन के प्रत्येक पक्षों का प्रदर्शन किया गया। गोरखपुर की शिल्पकला को भी इस महोत्सव के माध्यम से प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ। युवाओं के लिए विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। इस महोत्सव में ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत व जनपद स्तर पर गायन, वादन, नाटक आदि सहित कला के विविध रूपों में आयोजित प्रतिस्पर्धाओं के विजेता कलाकारों को भी मंच उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसमें ‘गोरखपुर महोत्सव’ काफी सफल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यहाँ 06 विभूतियों को ‘गोरखपुर रत्न’ दिया गया है, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में कुछ नया एवं अलग कार्य करने का प्रयास किया है। इन विभूतियों ने शिक्षा, खेल, कला तथा कृषि जैसे क्षेत्रों में गोरखपुर का नाम रोशन किया है। 65 से 70 लाख की आबादी वाले गोरखपुर से 05 से 06 लोगों का चयन करना एक कठिन कार्य है। ‘गोरखपुर रत्न’ का सम्मान प्राप्त करने वाली सभी विभूतियाँ बधाई की पात्र हैं। यह सम्मान हमारी वर्तमान पीढ़ी, कलाकारों एवं अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह समाज से कुछ लेने के बजाय समाज को कुछ देने की सामर्थ्य स्वयं में विकसित करे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज गोरखपुर सहित उत्तर प्रदेश विकास की नई बुलन्दियों को छू रहा है। वर्ष 2017 और आज के गोरखपुर में जमीन-आसमान का अन्तर है। वर्ष 2017 से पूर्व गोरखपुर विकास की दौड़ में पीछे छूट गया था। गोरखपुर उपेक्षित व असुरक्षित था। पूरे गोरखपुर में गुण्डागर्दी व उपद्रव का माहौल था, विकास का अभाव था, गन्दगी के कारण इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियाँ होती थीं। जब समाज स्वच्छता के प्रति जागरूक नहीं होता है, तब उसका दुष्परिणाम भी वह भोगता है। वर्ष 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश व गोरखपुर में अराजकता थी। हर दूसरे रोज दंगा होता था, तब न व्यापारी सुरक्षित थे और न ही बेटियाँ सुरक्षित थीं। उद्यमी गुण्डा टैक्स देने के लिए मजबूर थे, विकास के सभी कार्य ठप थे। नौजवानों को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता था।

गोरखपुर महोत्सव में लोकगीत प्रस्तुत करती हुईं मैथिली ठाकुर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार गोरखपुर के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प अभियान के साथ आगे बढ़ी। आज उसके परिणाम हम सभी को धरातल पर देखने को मिल रहे हैं। आज से 08 से 10 वर्ष पूर्व जो गोरखपुर आया होगा, आज वह इसे पहचान नहीं पाएगा। यह बदलाव केवल गोरखपुर में नहीं, बल्कि हर जनपद में देखने को मिलेगा। अयोध्या, काशी, लखनऊ तथा प्रयागराज में 08 से 10 वर्ष बाद आने वाला प्रत्येक व्यक्ति यहाँ हुए विकास कार्य देखकर आश्चर्य में पड़ जाता है।
मुख्यमंत्री  ने कहा कि जब सुरक्षा का बेहतर वातावरण होता है, तो निवेश आता है। गोरखपुर में पिछले 08 वर्षों में हजारों करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। इसके माध्यम से 50 हजार नौजवानों को रोजगार प्राप्त हुआ है और युवाओं का पलायन रुका है। पहले गोरखपुर में एक विश्वविद्यालय था, आज यहाँ 04 विश्वविद्यालय हैं। गोरखपुर में होटल मैनेजमेण्ट का भी संस्थान बन गया है। गीडा में नाइलेट का एक नया केन्द्र प्रारम्भ हो चुका है। सहजनवां में गरीब बच्चों को आवासीय शिक्षा देने के लिए अटल आवासीय विद्यालय बनाया गया है।

गोरखपुर रत्न सम्मान प्रदान करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोरखपुर आज पर्यटन का एक बेहतरीन केन्द्र है। आज गोरखपुर में विकास की प्रत्येक योजना प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचती है। उत्तर प्रदेश ने यह उपलब्धि धैर्य व अनुशासन से हासिल की है। हमारा धैर्य हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। जीवन हताशा व निराशा का नाम नहीं है। एक सामान्य भारतीय अपनी मेहनत व पुरुषार्थ से आगे बढ़ता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व उन्होंने गोरखपुर व उत्तर प्रदेश की उपेक्षा पर हमेशा संघर्ष किया। इंसेफेलाइटिस के उन्मूलन के लिए आन्दोलन भी किया। हमारी सरकार बनने के बाद इंसेफेलाइटिस को खत्म कर दिया गया। यदि कार्य करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई कार्य असम्भव नहीं है। डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश को विकास की धारा में आगे बढ़ाने तथा माफिया, अपराध एवं दंगा मुक्त करने के कार्य इसी दृढ़ इच्छाशक्ति से ही किए हैं। प्रदेश सरकार ने युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाने तथा अन्नदाता किसानों के जीवन में परिवर्तन लाने का कार्य किया है। प्रत्येक व्यापारी व उद्यमी को भयमुक्त वातावरण तथा प्रत्येक बेटी को आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर एवं सुरक्षित माहौल दिया गया है। यदि किसी बेटी के साथ किसी ने गलत किया, तो उससे सख्ती से निपटा जा रहा है।
इस अवसर पर केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में ‘गोरखपुर महोत्सव’ ने विशाल स्वरूप ले लिया है। देश व प्रदेश में इस महोत्सव की गूंज हो रही है। इस महोत्सव से संस्कृति व विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। इसके माध्यम से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हम सभी को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए और अपने देश व प्रदेश को निरन्तर आगे बढ़ाने में अपना सहयोग करते रहना चाहिए।
कार्यक्रम को सांसद रवि किशन शुक्ल ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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