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इस्लामी एजेण्डे पर ममदानी

January 4, 2026

इस्लामी एजेण्डे पर ममदानी

न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी के कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने के एक दिन बाद ही उनका इस्लामी एजेण्डा उजागर हो गया है। ममदानी ने दिल्ली हिंसा के आरोपी उमर खालिद से सहानुभूति दिखाकर और उसके लिए कुछ करने की मंशा जाहिर करके अपने सेकुलर चेहरे से नकाब हटा दिया है। ममदानी अमेरिका के सबसे बड़े शहर के पहले मुसलमान मेयर बनने के बाद भारत के अलगवादी और दिल्ली हिंसा के आरोपी उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल से 9 दिसम्बर को मिले थे। इस दौरान उन्होंने उमर के विचारों का समर्थन करते हुए एक पत्र लिखा था। यह पत्र मेयर पद की शपथ लेने के दिन ही वायरल हुआ है। मेयर ममदानी का हस्तलिखित ये पत्र जिसमें खालिद की तारीफ की गई है, बनो ज्योत्सना लाहिड़ी ने जारी किया है जोकि उमर की साथी है।  पत्र से जाहिर होता है कि मेयर का चुनाव जीतने के तुरंत बाद  वे अब पूरी तरह से एक मुसलमान नेता के तौर पर अपने एजेण्डे पर आ गए हैं। उनकी इस हरकत ने जहां वैश्विक इस्लामी सोच को उजागर किया है, वहीं उन भारतवंशी न्यूयार्कवासियों की भी आंखें खोल दी हैं, जिन्होंने मेयर के चुनाव में ममदानी का इसलिए समर्थन किया था, क्योंकि वे भारतीय मूल के मुसलमान हैं। वे उनमें एक अच्छे नेक, सच्चे, सेकुलर मुसलमान की छवि देख रहे थे। यदि भारतवंशी हिन्दू और सिखों ने न्यूयार्क मेयर के चुनाव में ममदानी का समर्थन नहीं किया होता तो वे इस अमरीकी सबसे बड़े शहर के मेयर शायद नहीं बनते। भारतवंशियों को सबसे पहला झटका तब लगा जब ममदानी ने एक जनवरी को कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली। दूसरा झटका अगले ही दिन लगा, जब ममदानी का  दिल्ली हिंसा के मास्टरमाइंड जेल में बंद जवाहरलाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को सहानुभूति में लिखा पत्र वायरल हुआ। बनो ज्योत्सना लाहिड़ी ने एक्स पर पोस्ट किया है। उमर खालिद का समर्थन सिर्फ इसलिए किया गया है क्योंकि वह मुसलमान है। ममदानी को इससे कोई मतलब नहीं है कि दिल्ली के जिन दंगों में वह आरोपी है, उनमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। इन दंगों में एक आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की भी हत्या हुई थी। इतने बड़े दंगे के आरोपी का समर्थन और उससे सहानुभूति व्यक्त करने का सिर्फ एक मात्र कारण वैश्विक इस्लामी एडेण्डा है। यह एजेण्डा हर स्तर पर चलाया जा रहा है चाहे वह पाकिस्तान हो, बंगलादेश हो, यूरोप या अमेरिका। इनका एकमात्र उद्देश्य इस्लामी वर्चस्व कायम करना है चाहे वह कैसे भी हो, वोट से हो या बुलेट से। बस इस्लामी राज्य कायम होने चाहिए। लेकिन, भारत के सेकुलर बने बहुसंख्यक आज भी इस एजेण्डे को समझने को तैयार नहीं हैं। वे इससे अपनी आंखें मूंदे हैं। आसन्न खतरे का भी कोई एहसास उन्हें नहीं है। जरूरत ऐसे छद्म सेकुलर ममदानियों से सावधान रहने की है। वे चाहे अमेरिका, यूरोप में हों या भारत में हों। उन्हें उनकी अपनी भाषा में ही उत्तर समझ में आता है।