एडीजे कोर्ट दस का फैसला, अदालत में आरोप साबित नहीं कर सकीं छजलैट पुलिस
Post on 26.2.26
Thursday, Time 5.35 pm
Moradabad, Rajesh Bhatia
मुरादाबाद,26 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
गोकशी में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को रिहाई मिल गई। गुरुवार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बजरंग दल के तीन कार्यकर्ताओं समेत पांच लोगों को बरी कर दिया। दो साल पुराने केस में पुलिस ठोस सबूत नहीं रख सकीं। बयानों में आपसी विरोधाभास से दोष सिद्ध नहीं हो सका।
गोकशी का यह मामला जनवरी, 2024 का है। जिले के छजलैट थाना क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं के अवशेष मिले। घटना के बाद क्षेत्रीय बजरंग दल व अन्य लोगों ने विरोध जताया। पहले एसडीएम दफ्तर पर गोवंशीय पशुओं के अवशेषों को लेकर प्रदर्शन किया। बाद में छजलैट थाने के सामने संगठन के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने गोकशी मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। केस की तफ्तीश करते हुए मामले में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
केस की सुनवाई मुरादाबाद में एडीजे कोर्ट -10 जितेन्द्र सिंह की अदालत में हुईं। कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक गुल बहार सिंह ने पैरवी की।केस में पुलिस ने बजरंग दल के तीन कार्यकर्ता और दो अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता दयानंद शर्मा ने पक्ष रखा। बताया कि सुनवाई में छह गवाहों के बयान हुए। कोर्ट में पर्याप्त साक्ष्य साबित नहीं हो सकें। गुरुवार को अदालत ने साक्ष्य साबित न होने पर बजरंग दल कार्यकर्ता मोनू विश्नोई, राजीव चौधरी, रमन के अलावा शाहबुद्दीन समेत सभी पांचों आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए।
