उप्र समाचार सेवा (UPSS)
दिनांक: 17 फरवरी 2026 | स्थान: वीरभद्र, ऋषिकेश (उत्तराखंड)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जौनसार-बावर क्षेत्र के लोगों की जातीय पहचान से जुड़े ‘जौनसारी’ और ‘जनसारी’ नामकरण विवाद को महत्वपूर्ण मानते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि यह मामला मात्र वर्तनी की त्रुटि नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय के अधिकारों और सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच से संबंधित है।
गजट की गलती से बढ़ी समस्या
राज्य गठन के समय जारी केंद्र सरकार के आधिकारिक गजट में “Jaunsari” के स्थान पर “Jansari” दर्ज हो गया था। इस त्रुटि के चलते संबंधित समुदाय को केंद्रीय योजनाओं का लाभ लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
न्यायालय के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि:
इस गलती को सुधारने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?
केंद्र सरकार से इस संबंध में क्या पत्राचार या प्रगति हुई?
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न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर हुई ऐसी त्रुटियां सामाजिक और संवैधानिक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है।
जनहित याचिका का आधार
यह याचिका विकासनगर निवासी द्वारा दायर की गई, जिसमें कहा गया कि गलत नामांकन के कारण जौनसारी समुदाय की आधिकारिक पहचान प्रभावित हो रही है और योजनाओं का लाभ मिलने में अड़चनें आ रही हैं।
आगे की कार्यवाही
अब राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि केंद्र स्तर पर संशोधन की प्रक्रिया शुरू हुई है या नहीं।
इस मामले को जनजातीय अधिकारों और प्रशासनिक शुद्धता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न के रूप में देखा जा रहा है।

