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बलिया का कस्बा जहां मुसलमान भी हैं सनातनी

बलिया का कस्बा जहां मुसलमान भी हैं सनातनी

स्नगरपंचायत जहां हिन्दू तो हिन्दू सात पीढियो से हजारो मुसलमान भी है सनातनी। सनातन धर्म और भगवान राम के सम्मान में नही बाजारों में बिकता है मांस, मछली, और नही कोई खाता है मांस मछली और अंडा। संजय कुमार तिवारी देश और दुनिया में सनातन धर्म की बढ़ती लोकप्रियता के बीच बलिया का अनोखा सनातन […]

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साम्राज्यवाद के विरुद्ध खड़ा होता ईरान

साम्राज्यवाद के विरुद्ध खड़ा होता ईरान

ईरान, ट्रंप और प्रतिरोध की राजनीति डॉ. सत्यवान सौरभ अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ संघर्ष केवल सीमाओं या संसाधनों तक सीमित नहीं होते, वे विचारधाराओं, सत्ता-संतुलन और नैतिकता की भी परीक्षा लेते हैं। ईरान और अमेरिका के बीच दशकों से चला आ रहा टकराव ऐसा ही एक संघर्ष है, जो समय-समय पर नए रूपों में सामने […]

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मकर संक्रांति: पतंगबाज़ी, आनंद, संस्कृति और चेतना

मकर संक्रांति: पतंगबाज़ी, आनंद, संस्कृति और चेतना

— डॉ. सत्यवान सौरभ मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन, सामाजिक सहभागिता और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह वह समय है जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है और प्रकृति के साथ-साथ मानव जीवन में भी नई ऊर्जा का संचार होता है। इस […]

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गुजरात में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

गुजरात में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

Posted Date:- Jan 11, 2026जय सोमनाथ। जय सोमनाथ। गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, ऊर्जावान युवा उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी जी, गुजरात सरकार में मंत्री जीतू भाई वाघाणी, अर्जून भाई मोढवाड़िया, डॉ प्रद्युम्न वाजा, कौशिक भाई वेकरिया, सांसद राजेश भाई, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों। आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग जुड़े हमारे […]

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युवा आदर्श : स्वामी विवेकानंद

युवा आदर्श : स्वामी विवेकानंद

12 जनवरी विशेष: मृत्युंजय दीक्षित अध्यात्मिक शक्तिपुंज, युवा आदर्श तथा प्रेरक स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता के दत्त परिवार में 12 जनवरी 1863 ईसवी को हुआ था। स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ था। स्वामी विवेकानंद के पिता विश्वनाथ दत्त कई गुणों से विभूषित थे। वे अंग्रेजी एवं फारसी भाषाओं में दक्ष थे। […]

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विश्वविद्यालय, सत्ता और साहित्य की अपमानित गरिमा

विश्वविद्यालय, सत्ता और साहित्य की अपमानित गरिमा

– डॉ. प्रियंका सौरभ गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ हुआ सार्वजनिक दुर्व्यवहार केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे समय के अकादमिक और सांस्कृतिक जीवन में गहराते संकट का स्पष्ट संकेत है। किसी आमंत्रित लेखक को मंच पर […]

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