गोरखपुर, 15 फरवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत की ओर से तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पद्धति से ही विकसित हुई है। आज समाज में संघ से अपेक्षाएँ बढ़ी हैं। विश्व के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जो समाज को सुख और शांति दे सके। इसलिए वह भी हमारी तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में पाश्चात्य चिंतन का प्रभाव पड़ने लगा था, जिसने भारतीय ज्ञान परम्परा को खण्डित करने का प्रयत्न किया और अपने चिंतन को स्थापित करने का प्रयास किया। किन्तु उनकी चिंतन पद्धति अधूरी थी। भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित हमारी चिंतन पद्धति ही समाज में उत्पन्न शंकाओं का समाधान कर सकती है।

