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एटा पहुंचे बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री

January 29, 2026

एटा पहुंचे बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री

Published on 29.01.2026, Thursday, 09:40 PM, Report by Anuj Mishra , Etah, UP Samachar Sewa 

इस्तीफे के बाद बोले – UGC काला कानून, सरकार सवर्णों को बना रही स्वघोषित अपराधी

Alankar Agnihotri in Etah

एटा पहुंचने पर अलंकार अग्निहोत्री का हुआ भव्य स्वागत

एटा 29 जनवरी उप्रससे। शहर मुख्यालय स्थित शहीद पार्क में अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी कानून को सवर्ण समाज के लिए “काला कानून” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कानून सामान्य वर्ग को स्वघोषित अपराधी बनाने का काम कर रहा है। उनका आरोप था कि इस कानून के तहत बिना ठोस आधार के आरोप लगाए जा सकते हैं और युवाओं को समता समिति के सामने पेश किया जाएगा, जहां फर्जी शिकायतकर्ता भी खड़े किए जा सकते हैं।

यूजीसी कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित अभद्रता के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देने वाले बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री गुरुवार को एटा पहुंचे। शहीद पार्क में उनका सैकड़ों की संख्या में जुटे सवर्ण समाज के लोगों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान यूजीसी कानून के खिलाफ जमकर नारेबाजी होती रही और माहौल पूरी तरह विरोधी स्वर में नजर आया।

उन्होंने कहा, “जब आपके बेटे-बेटियां पढ़ने जाएंगे, तो उन पर निराधार आरोप लग सकते हैं। इस प्रक्रिया में बच्चों का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न तक संभव है। यह कानून सिर्फ एक वर्ग को नहीं, बल्कि समाज के दो वर्गों को आपस में लड़ाकर दोनों का नुकसान करता है।
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने केंद्र और राज्य सरकार के जनप्रतिनिधियों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें “अकर्मण्य” बताते हुए कहा कि अधिकतर जनप्रतिनिधियों को कानून की धाराओं की जानकारी तक नहीं होती। उन्होंने कहा, “ये संसद और विधानसभा में जाते हैं, हाथ उठाकर समर्थन कर देते हैं और ताली बजाकर लौट आते हैं। अगर ये एक्ट को पढ़ते, तो अपने समाज के लिए कुछ करते। यूजीसी एक्ट में जो विघटनकारी प्रावधान हैं, उन पर कभी गंभीर चर्चा ही नहीं हुई।

अलंकार अग्निहोत्री ने सवाल उठाया कि 13 तारीख को यह कानून लागू हुआ, लेकिन पूरे देश में इस पर कोई व्यापक बहस क्यों नहीं हुई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी सवाल बताया। राजनीतिक गोद में बैठने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि कलराज मिश्र ने इस कानून को असंवैधानिक बताया, तो क्या वह भी किसी की गोद में बैठ गए? उन्होंने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।
अपने खिलाफ इस्तेमाल किए गए अपशब्दों और आरोपों पर उन्होंने कहा कि सबको पता है यह सब किसने किया। उन्होंने दावा किया कि उनके और उनके साथियों के फोन सर्विलांस पर हैं और उन्हें किसी पुराने मामले में फंसाने की साजिश रची जा रही है।
राजनीतिक पार्टी बनाने के सवाल पर उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा, “साला पंडित पागल- सवाल में ही मेरा जवाब छुपा है।”
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज के विभिन्न संगठनों से बातचीत चल रही है और इस कानून के विरोध में जल्द ही नई रणनीति बनाई जाएगी।

शहीद पार्क में मौजूद लोगों में खासा उत्साह और आक्रोश देखने को मिला। मंच से लगातार कानून वापस लेने की मांग उठती रही। कार्यक्रम के दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा, लेकिन सभा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। इस्तीफे के बाद एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह खुलकर सड़क पर उतरना और सरकार व कानून पर सीधे सवाल उठाना एटा की इस सभा को सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि आने वाले दिनों के बड़े आंदोलन की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।