मुरादाबाद, 22 जनवरी 2026 (उ.प्र.समाचार सेवा)। भाषा संवाद के लिए है विवाद के लिए नहीं। भाषा कभी भी विवाद का विषय नहीं रही है, यह संवाद का माध्यम है। ये उद्गार फिल्म अभिनेता, लेखक, निर्देशक आशुतोष राणा ने उदीषा चौपाला साहित्योत्सव के उद्धाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये।
श्री राणा ने भाषा और संवाद को लेकर फैले भ्रम को दूर किया। उन्होंने इसकी स्पष्टता को उजागर करते हुए कहा कि भाषा के आधार पर टकराव से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा के माध्यम से विवाद किया जा सकता है लेकिन भाषा कभी विवाद का विषय नहीं रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कभी अपनी भाषा को किसी पर थोपना नहीं चाहिए। मैं स्वयं भी इस बात का ध्यान रखता हूं। कोई किसी भी भाषा में संवाद करे मैं अपनी भाषा में करता हूं। यही संवाद की सच्ची भावना है।
श्री राणा ने संवाद के मंच से कहा कि भाषा किसी किताब से अधिकार संस्कार और परिवेश से सीखी जाती है। उन्होंने कहा व्यक्ति की पहचान ही भाषा से है। यदि व्यक्ति की भाषा में शिष्टता और शालीनता नहीं है, ऊर्जा नहीं है तो आप कभी भी श्रेष्ठ व्यक्ति के रूप में नहीं जाने जाएंगे। उन्होंने परिवारों और अभिभावकों को संदेश दिया कि बच्चों के साथ बड़ी बड़ी वातें कीजिए ताकि वे बड़ा सोचें। उन्होंने कहा कि बड़ों से छोटी बात सुनके मन को कष्ट होता है।
संगीत सुनने से सुनने से ही समझ में आता हैः गुलाम अब्बास खान
गायक गुलाम अब्बास खान ने संस्कृति, गायन के सत्र में मंच पर चर्चा सत्र में कहा कि संगीत सीखने पर 20 प्रतिशत ही समझ में आता है, 80 प्रतिशत सुनने पर ही समझ में आता है। उन्होंने रियाज, तालमेल और सुनने पर चर्चा की। उन्होंने कई गजलों को सुनाया। खान ने कहा कि वे मुम्बई में रहते हैं लेकिन अपने घराने से जुड़े हुए हैं।
पार्श्व गायक सुखविन्दर सिंह ने किया गायन
साहित्योत्सव के मंच पर जब पार्श्व गायक सुखविन्दर सिंह पहुंचे तो युवक युवतियों में भारी उत्साह आ गया। उनके गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। इस दौरान वीडियो बनाने और सेल्फी लेने की होड़ लगी रही।

