लखनऊ। अलीगंज के सेक्टर-जे स्थित कोठारी बंधु पार्क में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन और समरसता भोज ने हिंदू समाज की एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों, विचारधाराओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य स्पष्ट रूप से समाज को जोड़ना, भेदभाव की दीवारों को तोड़ना और राष्ट्रहित में संगठित होकर आगे बढ़ने का संदेश देना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत समरसता भोज के साथ हुई, जिसमें सभी ने एक साथ बैठकर भोजन किया। यह केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि सामाजिक समानता और आपसी भाईचारे का प्रतीक था। आयोजकों ने यह संदेश दिया कि जब समाज एक पंक्ति में बैठकर भोजन कर सकता है, तो वह हर चुनौती का सामना भी एकजुट होकर कर सकता है। इसके बाद सम्मेलन का वैचारिक सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें राष्ट्र, समाज और संस्कृति को लेकर गंभीर और विचारोत्तेजक वक्तव्य सामने आए।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लखनऊ विभाग के विभाग प्रचारक अनिल ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि हिंदू समाज की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतिहास साक्षी है—जब-जब समाज संगठित हुआ है, तब-तब भारत ने प्रगति की है और जब समाज बिखरा है, तब चुनौतियाँ बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर कार्य करता है और ऐसे विराट हिंदू सम्मेलन समाज को जागृत करने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल अपने अधिकारों की चर्चा तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को भी आत्मसात करें।
इसके पश्चात ज्योतिषाचार्य आचार्य मनोजानंद ने अपने वक्तव्य में सनातन संस्कृति की गहराई और उसकी वैज्ञानिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और उद्देश्यपूर्ण ढंग से जीने की संपूर्ण व्यवस्था है। आज समाज में जो भ्रम, तनाव और विघटन दिखाई देता है, उसका मूल कारण अपने सांस्कृतिक मूल्यों से दूरी है। उन्होंने कहा कि विराट हिंदू सम्मेलन और समरसता भोज जैसे आयोजन समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने परिवार और समाज में संस्कारों के पुनर्स्थापन पर विशेष बल दिया।
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रदीप श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में राष्ट्र सुरक्षा और सामाजिक अनुशासन के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज का हर नागरिक राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रभक्ति को आचरण में उतारने का आह्वान किया।
भारतीय केसरिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज कृष्ण श्रीवास्तव ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा कि हिंदू समाज को अब केवल सहनशील नहीं, बल्कि संगठित और सजग होना होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के बिना किसी भी प्रकार का राष्ट्रीय उत्थान संभव नहीं है। ऐसे सम्मेलन यह प्रमाणित करते हैं कि हिंदू समाज एकजुट है और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति के पतन के लिए सुनियोजित षड़यंत्र रचे गए। वर्ष 1932 में देश में लगभग सात लाख गुरुकुल थे, लेकिन एक साजिश के तहत आज़ादी के बाद भी गुरुकुलों के दमन की संस्कृति को लगातार बढ़ावा दिया गया। परिणामस्वरूप आज पूरे देश में मात्र लगभग चार सौ गुरुकुल ही शेष रह गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद देश में जिस प्रकार की दमनकारी नीतियाँ अपनाई गईं, उनसे हिंदू हितों को लगातार कुचलने का कुचक्र रचा गया। हिंदू समाज की गौरक्षा की परंपरा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया गया, जिसके चलते गौरक्षा के स्थान पर गौरभक्षण की संस्कृति हावी होती चली गई।
सम्मेलन के दौरान स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, सेवा कार्य, युवाओं के मार्गदर्शन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषयों पर भी गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि समाज को केवल भाषणों से नहीं, बल्कि निरंतर जमीनी कार्यों से मजबूत किया जा सकता है। यह भी स्पष्ट किया गया कि यह आयोजन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर किया गया। सम्मेलन में आचार्य नमेश ने कहा कि हिंदू मां भारती की आत्मा हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी उपस्थित लोगों ने हिंदू समाज की एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। कोठारी बंधु पार्क में आयोजित यह विराट हिंदू सम्मेलन और समरसता भोज सामाजिक चेतना को नई दिशा देने वाला आयोजन सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम में सोनेलाल श्रीवास्तव, डॉo पीo एनo शर्मा, नीरज गुप्ता, राजेन्द्र श्री, बदरूलाल, सच्चिदानन्द श्रीवास्तव, आशा बदरू, दुर्गेश मिश्र, अनुराग श्रीवास्तव, अजय सिंह, नन्दन उपाध्याय, डॉo अनिल दीक्षित, राष्ट्रेश्वर मिश्र, रामलाल, अमित कुमार अग्रवाल, विशाल श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, देवी प्रसाद सिंह, संजीवन गुप्ता, प्रदीप, शरत, रामसेवक गौड़ सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

