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मकर संक्रांति त्योहारों की परम्परा का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व : मुख्यमंत्री

January 15, 2026

मकर संक्रांति त्योहारों की परम्परा का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में मकर संक्रांति के अवसर पर पत्रकारों से बात की

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को गोरखनाथ मन्दिर में गुरु गोरखनाथ को खिचडी प्रसाद अर्पित करते हुए

लखनऊ, 15 जनवरी, 2026   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति के पावन पर्व की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विगत दिवस से ही प्रदेश के लाखों श्रद्धालुगण पवित्र धर्म स्थलों पर जाकर अपनी आस्था का नमन कर रहे है। उनका सौभाग्य है कि ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः 04 बजे श्री भगवान गोरखनाथ जी को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री आज श्री गोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर में मकर संक्रांति के अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर रहे थेमुख्यमंत्री जी ने कहा कि शिवावतार भगवान गोरखनाथ जी को लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाने के लिए आये हुए हैं और वह निरन्तर पवित्र खिचड़ी चढ़ा रहे हैं। इसी प्रकार प्रयागराज संगम में लाखों श्रद्धालु, कल्पवासी और पूज्य संतजन प्रयागराज की धरती पर उपस्थित होकर न केवल अपनी साधना में रत हैं, अपितु भगवान वेणी माधव, भगवान प्रयागराज, मां गंगा, मां यमुना, मां सरस्वती के सान्निध्य में संगम में आस्था की पवित्र डुबकी लगा रहे हैं। यह सिलसिला लगातार आज भी जारी है।

मकर संक्रांति त्योहारों की परम्परा का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व : मुख्यमंत्री

मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में खिचड़ी प्रसाद अर्पित किया

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मकर संक्रांति भारत के पर्व और त्योहारों की परम्परा का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्व है। वास्तव में भगवान सूर्य इस जगत की आत्मा है। जगतपिता सूर्य की उपासना का यह पर्व समस्त शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए प्रशस्त तिथि मानी जाती है। अर्थात आज के बाद से सनातन धर्म की परम्परा में सभी मांगलिक कार्यक्रम प्रारम्भ हो जाएंगे। ज्योतिषीय परम्परा के अनुसार सूर्य का अयन वृत्त 12 विभिन्न भागों में विभाजित है। एक राशि से दूसरी राशि में सूर्यदेव का संक्रमण संक्रांति कहलाती है। जब भगवान सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में संक्रमण होता है, तब यह संक्रमण मकर संक्रांति कहलाती है। अर्थात अगले 06 माह मकर राशि से मिथुन राशि तक भगवान सूर्य उत्तरायण रहेंगे। उत्तरायण के समय दिन बड़े तथा रात्रि छोटी होती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जीवन्तता के लिए सूर्य का प्रकाश कितना महत्वपूर्ण है और भारत की ऋषि परम्परा ने जीवन के लिए कितना महत्व दिया है, इसका अनुमान इस पर्व के माध्यम से लगा सकते हैं। मकर संक्रांति का पर्व देश के पूरब, पश्चिम, उत्तर तथा दक्षिण सभी हिस्सों में अलग-अलग नाम और रूप से आयोजित होता है। पूरब में बिहू या तिलवा संक्रांति, पश्चिम में लोहड़ी या मकर संक्रांति, दक्षिण भारत में पोंगल तथा उत्तर भारत में खिचड़ी संक्रांति के रूप में श्रद्धालुजन मकर संक्रांति का आयोजन श्रद्धाभाव से करते हैं। शुभ मुहूर्त कल सायं काल से ही प्रारम्भ हो चुका है। हमारे सनातन धर्म की परम्परा में मुहूर्त का शुभ लगन सूर्योदय के साथ प्रारम्भ होता है। आज ब्रह्म मुहूर्त से मकर संक्रांति में खिचड़ी चढ़ाने का मुहूर्त प्रारम्भ हो चुका है।