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नौ लाख करोड़ से अधिक का बजट

February 11, 2026

नौ लाख करोड़ से अधिक का बजट

वित्त संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा 2026/27 का बजट भाषण जारी, बजट का आकार 912696.36 करोड़ रूपये का प्रस्ताव किया गया है, है छुट्टा पशु ओर गौवंश संवर्धन के लिए 2000 करोड़ रुपए का ,बजट में 43565 करोड़ रूपये की नई योजनाएं सम्मिलित की गई हैं,बजट में प्राप्ति राशि 848233.18 कोड रुपए अनुमानित किया गया है,
आवकारी मद में 71278 करोड़ रूपये रखा गया है,वाहन कर से16808 करोड़ रूपये प्राप्ति का लक्षण निर्धारित किया गया है।

सरकार ने स्वीकृत किया अखंड वन्देमातरम

जन गण मन से पहले बजेगा वंदे मातरम्, सरकार ने तय किया राष्ट्र गीत का नया नियम
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है.

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यूपी वेब न्यूज

Posted on 11.02.2026 Wednesday, Time 11.54 AM, Vandematram 
नई दिल्ली 11 फरवरी 2026, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है. इसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरों वाला 3 मिनट 10 सेकंड का पूरा संस्करण कई आधिकारिक अवसरों पर बजाया या गाया जाना अब अनिवार्य होगा. मंत्रालय का यह 10 पन्नों का आदेश 28 जनवरी को जारी किया गया है, जो सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा गया है.
आदेश के अनुसार, तिरंगा फहराए जाने के समय, राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान पर, राष्ट्र के नाम उनके संबोधन से ठीक पहले और बाद में, तथा राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन-प्रस्थान और भाषणों से पहले-बाद में ‘वंदे मातरम्’बजाया या गाया जाएगा. अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा. इस दौरान उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा.
वंदे मातरम् के समय खड़ा होना अनिवार्य
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब ‘वंदे मातरम्’ का आधिकारिक संस्करण बजाया या गाया जाए, तो श्रोताओं को सम्मान में खड़ा होना चाहिए. हालांकि, अगर किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री में यह गीत फिल्म का हिस्सा हो, तो दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी, ताकि कार्यक्रम में अव्यवस्था न हो.

दरअसल अब तक ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था, जबकि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए समय, धुन और प्रस्तुति के नियम पहले से तय हैं. यह पहली बार है जब छह अंतरों वाले विस्तारित संस्करण को आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.
तीन कैटेगरी में बांटे गए कार्यक्रम

आदेश में कार्यक्रमों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. पहली श्रेणी में वे अवसर हैं, जहां राष्ट्रीय गीत केवल बजाया जाएगा, जैसे- नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति का औपचारिक राजकीय समारोहों में आगमन-प्रस्थान, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में, राज्यपाल या उपराज्यपाल का औपचारिक कार्यक्रमों में आगमन-प्रस्थान, परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाए जाने के समय आदि.
दूसरी श्रेणी में वे कार्यक्रम शामिल हैं, जहां गीत को बजाने के साथ-साथ सामूहिक गायन भी होगा. इसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर, सांस्कृतिक और औपचारिक समारोह (परेड को छोड़कर), तथा राष्ट्रपति का किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान शामिल है. इसके लिए कोयर, साउंड सिस्टम और आवश्यकता होने पर गीत के बोल वितरित करने की भी सलाह दी गई है.
तीसरी श्रेणी में वे अवसर हैं, जहां ‘वंदे मातरम्’ गाया जा सकता है, जैसे स्कूलों के कार्यक्रम. आदेश में कहा गया है कि स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत गाकर की जा सकती है और छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के प्रयास किए जाएं.
वंदे मातरम् पर नए आदेश की खास बातें
केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है?

गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि अब ‘वंदे मातरम्’ का छह अंतरों वाला, 3 मिनट 10 सेकंड का आधिकारिक संस्करण कई सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में बजाया या गाया जाएगा.
किन-किन मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ बजाना या गाना अनिवार्य होगा?

राष्ट्रपति के आगमन-प्रस्थान, तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले-बाद, राज्यपाल/उपराज्यपाल के कार्यक्रमों और नागरिक अलंकरण समारोहों जैसे अवसरों पर.
अगर ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों बजें तो क्रम क्या होगा?

पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया जाएगा.

क्या सभी लोगों के लिए खड़ा होना जरूरी होगा?

हां, जब आधिकारिक रूप से गीत बजाया या गाया जाए तो सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा.
क्या हर स्थिति में खड़ा होना अनिवार्य है?

नहीं, अगर किसी डॉक्यूमेंट्री या न्यूज़रील में ‘वंदे मातरम्’ फिल्म का हिस्सा हो, तो खड़े होने की जरूरत नहीं होगी.
स्कूलों के लिए क्या निर्देश हैं?

स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ गाकर की जा सकती है.
पहले ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई प्रोटोकॉल था?
नहीं, अब तक इसके लिए कोई तय आधिकारिक नियम नहीं थे, जबकि ‘जन गण मन’ के लिए पहले से नियम मौजूद हैं.
वंदे मातरम् पर सरकार का जोर
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब केंद्र सरकार ‘वंदे मातरम्’ को लोकप्रिय बनाने पर जोर दे रही है. हाल ही में संसद में राष्ट्रीय गीत की 150वीं जयंती पर लंबी बहस हुई थी और इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड का विषय भी ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ रखा गया था.
बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचित इस गीत के पहले दो अंतरों को 1950 में भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया था. पिछले वर्ष संसद में वंदे मातरम् पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि गीत के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ ने इसके महत्व को कमजोर किया और इसे देश के विभाजन से भी जोड़ा.
नए आदेश के साथ ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और प्रस्तुति को लेकर एक स्पष्ट और औपचारिक व्यवस्था तय हो गई है, जिसे देशभर में लागू किया जाएगा.

एटा में शादीशुदा प्रेमी युगल ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, पेड़ से लटके मिले शव

एटा 11 फरवरी उप्रससे। जनपद में मलावन थाना क्षेत्र के गांव पुरा में एक शादीशुदा प्रेमी युगल ने गांव से बाहर एक पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह ग्रामीणों ने पेड़ पर दोनों के शव लटके देखे, जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई।

सूचना मिलने पर मलावन थाना पुलिस और क्षेत्राधिकारी सकीट कृतिका सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और फील्ड यूनिट तथा डॉग स्क्वॉड को बुलाया। रमन पुत्र रामेंद्र, उम्र 20 वर्ष और रोशनी पत्नी जोगेंद्र पाल निवासी गांव पुरा के शवों को पेड़ से नीचे उतारा गया और पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया। पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था। समाज के बंधनों के कारण जब वे एक-दूसरे के नहीं हो पाए, तो उन्होंने आत्महत्या का रास्ता चुना।

वित्तीय वर्ष 2026-2027 के बजट अनुमानों पर वित्त मंत्री जी के बजट भाषण का प्रमुख अंश

Posted on 11.02.2026 Wednesday, Time 11.22 AM, Lucknow, Budget 2026-27

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UTTAR pRADESH

लखनऊ, 11 फरवरी 2026, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने आज विधान सभा में अपना बजट भाषण प्रस्तुत करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वित्तीय प्राथमिकताएं बताई। और आगामी व्यय का विवरण प्रस्तुत किया।

उनहोने कहा हमारी सरकार के पिछले और वर्तमान कार्यकाल में प्रदेश का सर्वांगीण विकास हुआ है, चाहे कानून व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण हो, अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार हो, औद्योगिक निवेश हो, रोजगार सृजन हो, महिलाओं का सशक्तीकरण हो, युवाओं का कौशल संवर्धन हो, किसानों की खुशहाली हो, गरीबी उन्मूलन हो।

● वर्ष 2024-2025 (त्वरित अनुमान) में प्रदेश की जी0एस0डी0पी0 30.25 लाख करोड रूपये आकलित हुयी है, जो गत वर्ष की तुलना में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित करता है।
प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रूपये आकलित हुयी है जो वर्ष 2016-2017 में प्रति व्यक्ति आय 54,564 रूपये के दो गुने से अधिक है।

● वर्ष 2025-2026 में प्रति व्यक्ति आय 1,20,000 रूपये होने का अनुमान है। प्रदेश में हम लगभग 06 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से ऊपर उठाने में सफल हुये हैं। बेरोजगारी की दर 2.24 प्रतिशत रह गयी है।

*वित्तीय वर्ष 2026-2027 के बजट अनुमानों पर माननीय वित्त मंत्री जी के बजट भाषण का प्रमुख अंश*

●एसडीजी इंडिया इण्डेक्स में उत्तर प्रदेश की रैंकिंग जो वर्ष 2018-2019 में 29 वें स्थान पर थी, बेहतर होकर वर्ष 2023-2024 में 18 वें स्थान पर आ गयी है।
● राज्य सरकार द्वारा फरवरी, 2024 में चौथे ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मिट का सफलतम आयोजन किया गया।
● अब तक लगभग 50 लाख करोड़ रूपये के एमओयू हस्ताक्षरित हो चुके हैं जिनसे लगभग 10 लाख रोजगार का सृजन सम्भावित है।
● इनमें से, अब तक लगभग 15 लाख करोड़ रूपये के निवेश की लगभग 16 हजार से अधिक परियोजनाओं के 04 ग्राउण्ड ब्र्रेकिंग समारोह सम्पन्न हो चुके हैं।
● उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माण केन्द्र है। देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का 65 प्रतिशत उत्पादन प्रदेश में होता है।
● भारत की 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेन्ट्स इकाईयाँ प्रदेश में स्थित हैं। प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 44,744 करोड़ रूपये तक पहुंच गया है।
● उद्योग और तकनीक में निवेश के साथ ही प्रदेश में नवाचार को बढ़ावा देने हेतु किये गये प्रयासों के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर स्टार्ट अप रैंकिंग में ‘‘लीडर श्रेणी’’ की रैंकिंग हासिल हुई है।

सपा विधायक, चाचा समेत कई के जाति प्रमाणपत्र रद्द

Posted on 11.02.2026, Time !1.12 AM, Moradabad, Rajesh Bhatia

मुरादाबाद, 11 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
पंचायत चुनाव से पहले जिले में सियासी हलचल बढ़ गई। बिलारी के सपा विधायक मो. फहीम, चाचा मो उस्मान और उनकी बेटियों समेत कई के जाति प्रमाणपत्र को फर्जी मानते हुए रद्द कर दिया गया। इसी जाति प्रमाणपत्र के चलते विधायक की चचेरी बहन व मो उस्मान की बेटी फरहीन के पिछली बार जिला पंचायत सदस्य वार्ड 27 में नामांकन पत्र को निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया।
मामले की शुरुआत 2017 में हुई। बिलारी में शमसुद्दीन की ओर से इशरत जहां के झोझा जाति प्रमाणपत्र को चुनौती दी। इस पर इशरत जहां मंडलीय अपील में चलीं गईं। झोझा प्रमाणपत्र को लेकर बिलारी विधायक मो फहीम के खिलाफ इब्राहीमपुर के हारुन जाफर ने शिकायत की। बिलारी के सिहाली गांव के विश्वास यादव उर्फ लवली यादव ने 19 जुलाई, 24 को जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र समिति के समक्ष वाद दायर किया। मामले की जांच की। शिकायत में कहा गया कि इब्राहीमपुर निवासी विधायक, चाचा उस्मान और पुत्रियां फरहीन जहां और समरीन के जाति प्रमाणपत्र फर्जी है। समिति ने दोनों पक्षों के अभिलेख और साक्ष्यों के आधार पर विधायक आदि के प्रमाणपत्र को फर्जी माना।

मंडलीय अपील और हाईकोर्ट जाएंगे
विधायक के चाचा पूर्व प्रधान मो उस्मान का कहना है कि उन्होंने अपने परिजनों की जाति झोजा  से जुड़े होने के सन् 1911 से 2024 तक के दस्तावेजी साक्ष्य मुरादाबाद में जनपद स्तरीय समिति को मुहैया कराए थे पर दस्तावेजों को नजर अंदाज किया गया। आदेश को लेकर मंडलीय अपीलीय फोरम में अपील करेंगे। साथ ही हाईकोर्ट भी जाएंगे।

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