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बलिया में एक घर में मिले लापता किन्नर और युवक के शव

February 19, 2026

बलिया में एक घर में मिले लापता किन्नर और युवक के शव

कमरे में दो लोगों की मिली लाश,हड़कंप।
रिपोर्ट – संजय कुमार तिवारी
स्थान – बलिया यूपी
डेट – 19/02/2026

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया से इस वक्त की सबसे बड़ी और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आ रही है। बैरिया थाना क्षेत्र के रानीगंज में एक बंद कमरे के भीतर दो लाशें मिली।”पूरा मामला सुसाइड की एक सूचना से शुरू हुआ, लेकिन जब पुलिस जांच के लिए घर के भीतर दाखिल हुई, तो वहां एक नहीं बल्कि दो-दो लाशें मिलीं। पहली लाश 28 साल के युवक रवि गुप्ता की थी, जिसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। लेकिन चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब घर की तलाशी ली गई।”

“बीती 17 फरवरी से लापता रेखा किन्नर, जिनकी उम्र करीब 62 साल थी, उनका शव भी उसी रवि गुप्ता के घर से बरामद हुआ है। एक तरफ युवक की खुदकुशी और दूसरी तरफ लापता किन्नर का शव मिलना… ये महज इत्तेफाक है या फिर किसी खौफनाक वारदात की पटकथा? पुलिस अधीक्षक बलिया ओमवीर सिंह ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है।”
​”रानीगंज कस्बे में आज उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब विजय गुप्ता के बेटे रवि का शव फंदे से लटका मिला। पुलिस सुसाइड की जांच करने पहुंची थी, लेकिन घर के भीतर की बदबू ने पुलिस को शक में डाल दिया। तलाशी शुरू हुई तो दो दिन से गायब रेखा किन्नर की लाश भी बरामद हो गई। आखिर रवि के घर में रेखा किन्नर की लाश क्या कर रही थी? क्या रवि ने पहले रेखा की हत्या की और फिर डर के मारे खुदकुशी कर ली? पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की परतें खोलने में जुट गई है। इस पूरे मामले पर पुलिस अधीक्षक बलिया, श्री ओमवीर सिंह का क्या कहना है, आप खुद सुनिए..

हरिद्वार में कुत्तों की संख्या नियंत्रण का कार्य शुरू

*हरिद्वार में आवारा कुत्तों की संख्या को सुरक्षित और मानवीय तरीके से नियंत्रित करने के लिए पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम दोबारा शुरू किया गया है।*

_हरिद्वार नगर निगम ने शहर के लगभग 85% कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कराने के लिए ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के साथ मिलकर यह अभियान शुरू किया है।_

*हरिद्वार, उत्तराखंड* (फरवरी, 19 2026)— ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया (जिसे पहले ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल इंडिया कहा जाता था) एक पशु संरक्षण संगठन है, जो दुनिया भर में पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए काम करता है। इस संगठन ने हरिद्वार नगर निगम के साथ मिलकर शहर में बड़े पैमाने पर पशु जन्म नियंत्रण और रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम फिर से शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत, शहर के लगभग 85% आवारा कुत्तों को पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के अनुसार सुरक्षित और मानवीय तरीके से पकड़ा जाएगा। उनकी नसबंदी की जाएगी और रेबीज से बचाव का टीका लगाया जाएगा। इसके बाद उन्हें उसी जगह पर छोड़ दिया जाएगा, जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या को सही और मानवीय तरीके से नियंत्रित करना है। इससे कुत्तों का स्वास्थ्य बेहतर होगा, लोगों और कुत्तों के बीच होने वाली परेशानियाँ कम होंगी, और अनचाहे पिल्लों के जन्म को रोका जा सकेगा।

ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के साथ इस कार्यक्रम के जरिए हरिद्वार, उत्तराखंड के अन्य शहरों—देहरादून, रुद्रपुर, रुड़की, नैनीताल, ऋषिकेश, काशीपुर और मसूरी—की तरह इस अभियान का हिस्सा बन जाएगा। इससे पूरे राज्य में आवारा कुत्तों की देखभाल और संख्या नियंत्रण के प्रयास और मजबूत होंगे।

इस पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए कुत्तों के व्यवहार से जुड़ी जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित होंगी, जानकारी देने वाली सामग्री बाँटी जाएगी और लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जाएँगे।

डॉ. पियूष पटेल, ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया की पशु व जनजागरूकता टीम के निदेशक, ने कहा, “हरिद्वार में हमारी यह पहल पूरे राज्य में आवारा कुत्तों की संख्या को बेहतर ढंग से संभालने में मदद करेगी। पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम अपनाकर अब उत्तराखंड के कई शहरों के साथ हरिद्वार भी कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए एक व्यवस्थित और लंबे समय तक चलने वाला तरीका अपना रहा है। यह हरिद्वार जैसे शहर के लिए खास तौर पर जरूरी है,, जहाँ हर साल लाखों लोग आते हैं, इस वजह से लोगों और कुत्तों का आमना-सामना ज्यादा होता है।। उत्तराखंड के कई शहरों में सफल रहा यह कार्यक्रम अब हरिद्वार में भी कुत्तों की संख्या को मानवीय तरीके से नियंत्रित करने में मदद करेगा। आगे चलकर इससे लोगों और कुत्तों के बीच होने वाली दिक्कतें कम होंगी और कुत्तों की देखभाल भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।”

सराय में स्थित पशु जन्म नियंत्रण केंद्र सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सीधे आकर दी जाने वाली शिकायतें और अनुरोध स्वीकार करेगा। आवारा कुत्तों से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए लोग ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के हेल्पलाइन नंबर 9568844151 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया द्वारा योजनाबद्ध और व्यवस्थित तरीके से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम से सामुदायिक कुत्तों की संख्या में स्पष्ट रूप से कमी आई है और उनकी आबादी की बढ़ोतरी धीमी हुई है। इन परिणामों से यह साबित होता है कि जब इस तरह के कार्यक्रम को सही तरीके से और बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो कुत्तों की संख्या का मानवीय प्रबंधन न केवल संभव है, बल्कि लंबे समय तक सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के लिए बेहद जरूरी भी है।

गोरखपुर के जटेपुर में नल से निकल रहा नाले जैसा गंदा पानी*

संतोष कुमार सिंह
गोरखपुर

*रामबाग मोहल्ले में जनस्वास्थ्य पर खतरा, शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन*

गोरखपुर। नगर निगम क्षेत्र के जटेपुर उत्तरी वार्ड नंबर 27 स्थित रामबाग मोहल्ले में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। यहां घरों में लगे नलों से पीने योग्य स्वच्छ जल के स्थान पर नाले जैसा गंदा, काला और बदबूदार पानी निकल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति इतनी खराब है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही किसी भी घरेलू उपयोग के लायक।
मोहल्ले के निवासियों के अनुसार पिछले कई दिनों से नलों से दूषित पानी आ रहा है। दुर्गंध इतनी तेज है कि पानी को छूना भी मुश्किल हो रहा है। कई परिवार मजबूरी में बाजार से बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग दूर के हैंडपंपों से पानी ढोकर ला रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि जिस पानी से वे अपने बच्चों की प्यास बुझाती थीं, आज वही पानी बीमारी का कारण बनता दिख रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और त्वचा संबंधी शिकायतें सामने आने लगी हैं। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो संक्रामक बीमारियां फैलना तय है।
मोहल्लेवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जलकल विभाग और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सबसे गंभीर बात यह है कि जलकल विभाग के जीएम का फोन तक नहीं उठ रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही फोन नहीं उठाएंगे तो जनता अपनी समस्या किससे कहे?
लोगों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि जनस्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दे पर विभाग की यह उदासीनता अस्वीकार्य है। “हर घर जल योजना का दावा करने वाले अधिकारी क्या जटेपुर की स्थिति से अनजान हैं, या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं? यदि पाइपलाइन में लीकेज है या सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है तो उसे तत्काल दुरुस्त करना विभाग की जिम्मेदारी है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, हम टैक्स और पानी का बिल समय से जमा करते हैं, लेकिन बदले में हमें गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा है। शिकायत करने पर फोन तक नहीं उठाया जाता। आखिर हमारी सुनवाई कौन करेगा?”
विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी के सेवन से हैजा, टायफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन को इसे सामान्य तकनीकी समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए, बल्कि इसे संभावित जनस्वास्थ्य आपात स्थिति की तरह लेना चाहिए।
मोहल्ले के लोगों ने मांग की है कि तत्काल जलकल और नगर निगम की संयुक्त टीम मौके पर भेजी जाए, पाइपलाइन की जांच हो, पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और जब तक समस्या का स्थायी समाधान न हो, तब तक स्वच्छ पानी के टैंकरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
जनता का यह भी कहना है कि यदि अधिकारी फोन तक नहीं उठाएंगे और जमीनी हालात का जायजा नहीं लेंगे तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का स्पष्ट उदाहरण होगा। रामबाग मोहल्ले के लोग फिलहाल भय और आक्रोश के बीच जीवन जी रहे हैं। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और क्या जीएम जलकल जनता की पीड़ा सुनने के लिए आगे आएंगे, या हालात किसी बड़ी बीमारी के बाद ही सुधरेंगे?
जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और ठोस कार्रवाई ही प्रशासन की संवेदनशीलता की असली परीक्षा होगी।

Gorakhpur कैंप में ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखों की रोशनी गई, डीएम ने दिए जांच के आदेश

Posted on 19.02.2026, Thursday Time 05.50 PM, Santosh Kumar Singh, Gorakhpur संतोष कुमार सिंह , गोरखपुर*मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, कई की रोशनी गई*

गोरखपुर, 19 फरवरी। जिले के सिकरीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में आयोजित मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप के बाद सामने आए गंभीर संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑपरेशन के बाद कई मरीजों की हालत बिगड़ गई, जिनमें से नौ मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, जबकि कई अन्य की आंखों की रोशनी चली गई। यह मामला सामने आते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि 1 फरवरी को न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में आई कैंप आयोजित किया गया था, जिसमें करीब 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, खून आना और मवाद जैसी शिकायतें शुरू हो गईं। धीरे-धीरे स्थिति इतनी बिगड़ी कि 18 मरीजों में गंभीर संक्रमण पाया गया।
इन्दारी निवासी संजय सिंह ने बताया कि वे अपने पिता का ऑपरेशन कराने अस्पताल गए थे। ऑपरेशन के बाद आंख से लगातार खून आने लगा। पहले वाराणसी ले जाया गया, फिर दिल्ली तक इलाज कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। अंततः डॉक्टरों ने आंख निकालने की सलाह दी। संजय सिंह का कहना है कि उनके परिवार के दो लोगों का ऑपरेशन हुआ था और दोनों की स्थिति गंभीर हो गई।
इसी तरह रेखा नामक महिला ने बताया कि उनकी सास का ऑपरेशन भी इसी कैंप में हुआ था। ऑपरेशन के बाद आंख में तेज दर्द और मवाद की शिकायत शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि 18 मरीजों की हालत बिगड़ने की जानकारी है और कई लोग अलग-अलग शहरों में इलाज करा रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई मरीजों को गोरखपुर से बाहर दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच और कल्चर रिपोर्ट में गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई है।
मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि सिकरीगंज के एक निजी अस्पताल में आंख के ऑपरेशन के बाद संक्रमण की बात सामने आई है। पीड़ित मरीजों का अलग-अलग स्थानों पर इलाज चल रहा है। कुछ मरीजों को गंभीर संक्रमण हुआ है। अस्पताल को सील कर दिया गया है और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई और पंजीकरण निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि 4 फरवरी को जानकारी मिली कि 1 फरवरी को 30 ऑपरेशन किए गए थे। कई मरीजों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जिला स्तरीय कमेटी गठित कर जांच शुरू की गई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर संक्रमण का प्रतीत हो रहा है। एहतियातन अस्पताल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है और संबंधित ऑपरेशन थिएटर की जांच की जा रही है।
इस घटना ने निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था और ऑपरेशन प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि लापरवाही और संक्रमण नियंत्रण में कमी के कारण यह स्थिति बनी। कई परिवारों की जिंदगी में अंधेरा छा गया है।
फिलहाल पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पीड़ित परिवार न्याय और उचित उपचार की उम्मीद में हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।

14 हजार की रिश्वत लेते तहसील का मुंशी समेत दो गिरफ्तार


संभल जिले में गुन्नौर तहसील में गुरुवार का मामला, मुरादाबाद की एंटी करप्शन( Anti corruption) की कार्रवाई

मुरादाबाद की एंटी करप्शन टीम ने मारा छापा, कोर्ट में होंगे पेश

Post on 19.2.26
Thursday. Time 5.15 PM
Moradabad, Rajesh Bhatia

मुरादाबाद, 19 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
संभल जिले की गुन्नौर तहसील में एंटी करप्शन टीम ने छापा मारकर दो लोगों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। टीम ने तहसील के मुंशी और प्राइवेट व्यक्ति से घूस के 14 हजार रुपए नकद बरामद किए। गिरफ्तार लोगों को अब मुरादाबाद की एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया जाएगा।
गुन्नौर तहसील में रिश्वतखोरी की शिकायतें मिल रही थी। तहसील में भ्रष्टाचार की शिकायत संभल के जुनावाई निवासी बलबीर सिंह ने की। तहसील में काम कराने के लिए बलबीर सिंह ने तहसील के संपत्ति कानूनगो तस्लीम अहमद से संपर्क साधा। इस पर काम कराने की एवज में तहसील में प्राइवेट व्यक्ति महेन्द्र पाल ने संपर्क किया। महेंद्र सिंह ने बलबीर सिंह से 14 हजार रुपए की रकम मांगी।
यह मामला मुरादाबाद में भ्रष्टाचार निवारण संगठन के पास पहुंचा तो एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) विभाग ने छापेमारी की तैयारी शुरू कर की।
गुरुवार की सुबह विभाग के निरीक्षक नवल मारवाह अपनी टीम लेकर गुन्नौर तहसील जा पहुंचे। टीम ने सादे कपड़ों में शिकायतकर्ता के संग रहीं। तहसील कर्मी ने जैसे ही घूस की रकम ली तभी टीम ने उसे दबोच लिया। टीम ने मौके से तहसील में मुंशी तस्लीम अहमद व निजी व्यक्ति महेन्द्र पाल को पकड़ लिया।
विभाग के प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि मौके से रिश्वत की रकम और वार्ता की आडियो रिकार्डिंग समेत अन्य दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

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