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वेद में वाणी की बड़ी महिमा,उसी का आधार लेकर राष्ट्र को जागृत किया जाता हैः स्वामी गोविन्द देव गिरि

January 11, 2026

वेद में वाणी की बड़ी महिमा,उसी का आधार लेकर राष्ट्र को जागृत किया जाता हैः स्वामी गोविन्द देव गिरि

स्वामी गोविन्द देव गिरि

#UP SaMachar SEWA

First Published on 15-apr-24 12:44 PM

सनातन धर्म और राष्ट्रधर्म की प्रेरणा जगाने वाले सबसे बड़े आदर्श छत्रपति शिवाजी हैंः स्वामी रामदेव

हरिद्वार।‘‘छत्रपति शिवाजी महाराज कथा’’के पाँचवे दिन स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज ने कहा कि मैं यहाँ शिवाजी महाराज की कथा कहने आया हूँ लेकिन जितना मैं कह रहा हूँ, उतनी ही अगाध ज्ञानश्रुति का श्रवण भी कर रहा हूँ। इसलिए यह कथा नहीं अपितु शिव कथा का संवाद हो गया। भगवद्गीता संवाद है,इसमें दोनों ओर से बोला जाता है। इसलिए भगवद्गीता के मंथन में सच्चा आनंद आता है। उन्होंने कहा कि वेद में वाणी की बड़ी महिमा है और उसी का आधार लेकर राष्ट्र को जागृत किया जाता है। स्वामी गोविन्द देव ने कहा कि महाभारत में स्पष्ट रूप से कहा है कि उत्तम राज्य वह है जहाँ सज्जन निर्भयता से विचरण करते हैं। पापियों के राज्य में सज्जनों को छिपकर रहना पड़ता है,महिलाओं को अपनी आत्मरक्षा का डर रहता है। इन्हीं सज्जनों की रक्षा के लिए भगवान राम दण्ड लेकर चले थे। संसार में कुछ दुर्जन ऐसे होते हैं तो दण्ड के भय से ही अनुशासन में रहते हैं। गीता में कहा है कि ऐसे पापियों का पूर्ण विनाश ही करना पड़ता है। कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने कहा कि शिवाजी महाराज के चरित्र,व्यक्तित्व व उनकी साधना पर पूरे देश को गौरव है। वे भगवान शिव के अंशावतार के साथ-साथ शक्ति-भक्ति व राष्ट्रधर्म के पूर्णावतार हैं। वे हमारी सनातनी परम्परा के बहुत बड़े गौरव हैं। प्रथम सनातन धर्म,हिन्दू धर्म,राष्ट्रधर्म, हिन्दू साम्राज्य की प्रतिष्ठा के प्रणेता,उद्गाता,उद्घोषक,पुरोधा,प्रेरक और भारतवासियों के हृदय में सनातन धर्म और राष्ट्रधर्म की प्रेरणा जगाने वाले सबसे बड़े आदर्श या रोल मॉडल छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी महापुरुष के चरित्र के एक-दो प्रधान तत्व होते हैं,जैसे मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम भगवान के पूर्ण अवतार हैं,यह तो उनका अध्यात्म तत्व है लेकिन उनका प्रधान तत्व राजधर्म और मर्यादा है। भगवान कृष्ण का प्रधान तत्व कर्मयोग और योग की सारी विभूतियाँ है। भगवान शिव,भगवान हनुमान,भगवान राम, छत्रपति शिवाजी महाराज आदि सभी महापुरूषों ने धर्म युद्ध में,देवासुर संग्राम में पाप व अधर्म का विनाश कर धर्म व न्याय की प्रतिष्ठा की। भगवान शिव में समाधि तत्व प्रधान है और शिव तो अनादि, अनंत है,अजन्मा हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज का सनातन धर्म हिन्दू धर्म मूलक राष्ट्रधर्म उनका प्रधान तत्व है और एक तत्व के निर्वहन के लिए एक-एक क्षण पुरुषार्थ करना होता है। इस अवसर पर गाथा मंदिर,धुले,महाराष्ट्र के संस्थापक पूज्य पांडुरंग जी ने कहा कि गोधर्म प्रतिपालक,हिन्दु धर्म रक्षक और स्वराज्य के स्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र के बड़े देवत्व हैं। शिवाजी महाराज ने हिन्दु धर्म की साधना व रक्षा की है। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी एन.पी.सिंह,भारत स्वाभिमान के मुख्य केन्द्रीय प्रभारी भाई राकेश‘भारत’व स्वामी परमार्थदेव,पतंजलि विश्वविद्यालय के आई.क्यू.ए.सी.सैल के अध्यक्ष प्रो.के.एन.एस.यादव,कुलानु शासक स्वामी आर्षदेव सहित सभी शिक्षण संस्थान यथा-पतंजलि गुरुकुल,आचार्यकुल,पतंजलि विश्वविद्यालय एवं पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्यगण व विद्यार्थीगण,पतंजलि संन्यासाश्रम के संन्यासी भाई व साध्वी बहनें तथा पतंजलि योगपीठ से सम्बद्ध प्रमुख अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे

Swami Vivekanand से प्रेरणा लेकर पत्रकार सत्य का उद्घाटन करें: स्वामी मुक्तिनाथानन्द

  • विवेकानन्द जयंती पर उपजा ने आयोजित किया युवा पत्रकार सम्मेलन
  • सत्य का उद्घघाटन करने में पत्रकार भयभीत न हों:स्वामी मुक्तिनाथानन्द
  • 150 वीं जयंती के शुभारम्भ पर विश्व संवाद केन्द्र सभागार में हुआ सम्मेलन
  • पत्रकारिता के धर्म, कर्म और मर्म को जान लेना मूल कार्यः हृदयनारायण दीक्षित

    श्रीरामकृष्ण मठ निराला नगर लखनऊ के प्रमुख स्वामी मुक्तिनाथानन्द 12 जनवरी 2012 कोो लखनऊ में आयोजित युवा पत्रकार सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए

    First  Publised on :12.01.2012, 23:11   
    Tags: #UPJA Yuva Patrakar Sammelan, #Swami Muktinathanand

लखनऊ,12 जनवरी 2012, (यूपी समाचार सेवा UP Samachar Sewa)। सत्य का उद्धाटन करने में पत्रकार भयभीत न हों। पत्रकार निर्भीक होकर सत्य के रास्ते पर चलें तो विजय निश्चित है। लेकिन, यह कार्य चुनौती पूर्ण है। स्वामी विवेकानन्द की वाणी से प्रेरणा लेकर इस कार्य को आसानी से किया जा सकता है। ये विचार रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने व्यक्त किये। वे आज अपरान्ह लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा स्वामी विवेकानन्द की 150 वीं जयंती वर्ष के शुभारम्भ पर विश्व संवाद केन्द्र के सभागार में आयोजित युवा पत्रकार सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रनीति सत्यमेव जयते की है। सत्स के रास्ते पर चलने वाले की विजय होती है। स्वामी विवेकानन्द ने संदेश दिया कि भयहीन होकर कार्य करो, आपकी विजय होगी। उन्होंने कहा कि जो डरता है वह हारता है। स्वामी जी की वाणी से अनप्रणीत होकर यदि पत्रकार कार्य करें तो उनके चुनौती पूर्ण कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी। स्वामी जी ने कहा कि सत्य के रास्ते पर चलने वाला पत्रकार सिर ऊंचा करके चल सकता है। उन्होंने कहा कि सत्य को छिपाने वाले लोग पत्रकार का सामना नहीं कर सकते हैं। स्मामी मुक्तिनाथानन्द ने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि हमारा समाज नेतृत्व विहीन है। हमारे पास ज्ञान, विज्ञान, प्रतिभा सब कुछ है लेकिन यदि अभाव है तो केवल एक चीज वह है नेतृत्व । हमारे पास आदर्श नेता नहीं है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लेखक हृदयनारायण दीक्षित ने कहा कि युवा को पढ़ाई बढानी चाहिए। पत्रकारिता के धर्म, कर्म और मर्म को जान लेना मूल कार्य है। पत्रकारिता चुनौती पूर्ण कार्य है। कोई भी चुनौती तभी आती है जब कोई लक्ष्य लेकर कार्य किया जाए। यदि जीवन का कोई लक्ष्य नहीं होगा तो चुनौती भी नहीं होगी। भारत की पत्रकारिता का मूल उद्देश्य भारतीयता से अवगत कराना है। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार डा.एस.के.पाण्डे ने कहा कि पत्रकार को असत्य को स्वीकार नहीं करना चाहिए। चाहे वह बड़ा हो या छोटा। लखनऊ पत्रकारिता और जनसंचार संस्थान के निदेशक अशोक सिंहा ने कहा कि पत्रकार को समदर्शी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने समदर्शी होने की शिक्षा दी। उन्होंने गरीब की सेवा को धर्म बताया।

वरिष्ठ पत्रकार शिवशंकर गोस्वामी ने कहा कि पत्रकारों को सकारात्मक पत्रकारिता करनी चाहिए। इससे समाज का हित होता है। उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि हमें पत्रकारिता में एथिक्स विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन करना चाहिए। कार्यक्रम में लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया एवं महामंत्री भारत सिंह ने परिचय कराया। कार्यक्रम का संचालन उपजा के प्रदेश महामंत्री सर्वेश कुमार सिंह ने किया। इसके पूर्व मुख्य अतिथि स्वामी मक्तिनाथानन्द ने दीप प्रवलित कर एवं स्वामी विवेकानन्द के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का उद्धाटन किया। युवा दिवस पर आयोजित युवा पत्रकार सम्मेलन एवं पत्रकारिता एथिक्स विषय कार्यशाला में राजधानी के नवोदित पत्रकार, संवाद सूत्र एवं पत्रकारिता प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

वीबी-जी राम जी देश के ग्रामीण परिवारों के लिए ऐतिहासिक कदम है- राज्य मंत्री

  • रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, जो कि मेहनतकश ग्रामीण समाज के लिए बहुत बड़ा परिवर्तन है
मथुरा, 11 जनवरी 2026 (उप्रससे)।प्रभारी मंत्री,राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग संदीप सिंह ने  रविवार को मथुरा के कलेक्ट्रेट सभागार में  विकसित भारत-जी राम जी योजना के संबंध में प्रेसवार्ता की ।
प्रेसवार्ता के दौरान  सांसद (राज्यसभा)  तेजवीर सिंह , महापौर विनोद अग्रवाल, ,  विधायक गोवर्धन मेघश्याम सिंह , महानगर अध्यक्ष  हरीशंकर राजू यादव  सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
प्रभारी मंत्री ने बताया कि संसद द्वारा हाल ही में पारित ‘‘विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गांरटी मिशन ग्रामीणः वीबी-जी राम जी अधिनियम’’ देश के ग्रामीण परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह कानून संशोधित नए स्वरूप में ग्राम पंचायतों में ग्रामीण विकास, आजीविका, समाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को और मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ता का अधिकार, ससमय मजदूरी का भुगतान, ग्राम स्तर पर योजना निर्माण की स्वतंत्रता, टेक्नोलॉजी के माध्यम से निगरानी, अधिक समय से लंबित भुगतान हेतु अधिकारियों की जिम्मेदारी आदि उक्त योजना की विशेषताएं है।
इस योजना से श्रमिकों को गरिमा एवं सम्मान मिलेगा। भुगतान में देरी होती है, तो ब्याज के साथ भुगतान किया जाएगा। काम न प्रदान करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उक्त योजना का उद्देश्य सभी को मुख्य धारा में जोड़ने है। योजना की मॉनिटिंग के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समिति बनाई जाएगी। यह एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत का आत्म सम्मान पत्र है। देश का किसान और श्रमिक मजबूत होगा।
संदीप सिंह ने कहा कि विकसित भारत- रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत अब 125 दिन ग्रामीण रोजगार की गारंटी,  बेरोजगारी भत्ते के लिए बेहतर प्रावधान, समय पर मजदूरी का भुगतान और देरी होने पर मुआवजा, तकनीक के जरिए सशक्तिकरण करना, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल आधारित निगरानी, स्थानिक प्रौद्योगिकी सक्षम आयोजन, रियल टाइम डैशबोर्ड, जियो टैगिंग, ए0आई0 आधारित विश्लेषण, नागरिक सहभागिता प्लेटफार्म आदि है।
कार्य की चार प्रमुख श्रेणीयां है जिसमें, जल सुरक्षा और संरक्षण कार्य, ग्रामीण अवसंरचना से जुड़े कार्य, आजीविका संवर्धन के कार्य, जल वायु परिवर्तन व प्रतिकूल मौसम से निपटने वाले कार्य। ये चारों क्षेत्र मिलकर विकास, सशक्तिकरण, कन्वर्जेंस और स्थाई आजीविका का आधार बनेगा।
विभागों का एकीकरण और पारदर्शिता इस अधिनियम के तहत ग्राम सभा के सभी कार्य विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर एकत्रित होंगे। इससे दोहराव बंद होगा, विभागों के बीच तालमेल बढ़ेगा और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
इस योजना से राज्य सरकार द्वारा बुवाई एवं कटाई संबंधी मुख्य कृषि संबंधी गतिविधियों हेतु कुल मिलाकर 60 दिनों की अवधि निर्धारित करने का प्रावधान है, इस दौरान इस अधिनियम के तहत कार्यों का क्रियान्वयन नहीं होगा, जिससे कृषि कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सके।
मनरेगा के तहत जो काम अभी चल रहे हैं, वो बिल्कुल सुरक्षित हैं। कोई भी काम रुकेगा नहीं, सब पहले की तरह पूरे होंगे। आगे वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025 लागू होने के बाद, इसके हिसाब से नए काम शुरू हो जाएंगे। काम में रुकावट नहीं-बल्कि ज्यादा मौके मिलेंगे। गाँव का विकास और तेज़ी से आगे बढ़ेगा। विकसित भारत-जी राम जी योजना पूरी तरह लागू होने पर आपको न केवल 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, बल्कि अधिनियम के लागू होने पर नई बढ़ी हुई मजदूरी दरों का भी लाभ प्राप्त होगा। उक्त योजना का क्रियान्वयन ग्राम स्वराज की अवधारणा को धरातल पर उतारने का कार्य करेगा, कोई भी पात्र इस योजना के लाभ से वंचित नहीं रहेगा, पूरी पारदर्शिता एवं नवीन तकनीक के माध्यम से योजना का लाभ पात्र तक पहुंचेगा।

केन्द्र और राज्य कर्मी पुरानी पेंशन बहाली के लिए एकमत

 राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का खिचड़ी भोज

लखनऊ 11 जनवरी 26। पूर्व वर्षानुसार इस वर्ष भी डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन प्रागण में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा नववर्ष एवं खिचड़ी भोज का कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इं. अमरनाथ यादव और मुख्य अतिथि शिवगोपाल मिश्रा, विशिष्ठ अतिथि इं. हरि किशोर  तिवारी द्वारा की गई। कार्यक्रम में केन्द्र एवं राज्य कर्मचारी संगठनों के सैकड़ों पदाधिकारियों ने भागीदारी दर्ज कराते हुए अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम के संयांेजक कार्यवाहक अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी ने सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए सभी संगठनों को एकजुट होकर आन्दोलन के प्रति अपनी प्रतिबंधता जताई। उन्होंने बताया कि नार्दन मेन्स यूनियन के महासचिव कामरेड़ शिवगोपाल मिश्रा चूकि ऑठवे वेतन आयेाग एवं पुरानी पेंशन की उच्च स्तरीय केन्द्र सरकार द्वारा बनाई गई कमेटियों में पक्ष रखकर निर्णय कराते हेै। इस अवसर पर सभी ने एकजुट होकर पुरानी पेशन बहाली पर एकमत विचार प्रस्तुत करते हुए पुरानी पेंशन बहाली पर जोर दिया।
खिचडी भोज में उपस्थिति विभिन्न केन्द्र एवं राज्य कार्मिक संगठनों के नेताओं को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि नार्दन मेन्स यूनियन के महासचिव कामरेड़ शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि आठवा वेतन आयोग को लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, कुछ अधिकारी नही चाहते थे कि इसे लाया जाए। इसकी शुरूआत पिछले वर्ष इसी खिचडी भोज में तय की गई थी। उसी के अनुरूप पत्राचार और आन्दोलनों की तैयारी से केन्द्र सरकार को अवगत कराते हुए वार्ता क्र्रम जारी हुआ और उसके परिणाम स्वरूप वेतन आयोग आया। अब कम से कम 9वें और 10वे वेतन आयेाग का रास्ता साफ हो गया है। इस प्रकार पिछले 12 वर्षों तक पुरानी पेंशन बहाली पर विशेष कर आप लोगों ने लखनऊ से दिल्ली साइकिल यात्रा से लेकर कई बार लाखों की संख्या में रैली, धरना प्रदर्शन, मशाल जुलूस आदि के माध्यम से विरोध प्रदर्शन ध्यानाकर्षण तथा फिर 2023 में हमारे केन्द्रीय कर्मचारियों के साथ इसी प्रकार के कई और बड़े आन्दोलन तथा दिल्ली के रामलीला मैदान को भरकर लाखों की संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई जिसके परिणाम स्वरूप पुरानी पेंशन के लिए कमेटी बनाकर वार्ता शुरू हुई। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ तथ्यों के आधार पर यूपीएस मोडल जिसमें पुरनी पेंशन की भॉति अन्तिम वेतन का 50 प्रतिशत थिा उस पर महंगाई भत्ता देय होगा। इसी प्रकार पारिवारिक पेंशन व्यवस्था भी पूर्व से अच्छी हुई है। कुछ कमियॉ दिख रही है उस पर कार्य करने की आवश्यकता हैै। इस अवसर पर इं. हरिकिशोर तिवारी अध्यक्ष राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कहा कि हमें हमारे हक अपने आप समय से नही मिलते उन्हें एकजुटतापूर्ण आन्देालन  से ही प्राप्त किया जा सकता है। कार्यवाहक अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी ने कहा कि चुनावी वर्षों में आन्दोलन के दबाव में कुछ कर्मचारी हितों को हासिल किया जा सकता है। प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पाण्डेय ने कहा कि कार्मिकों को जो पूर्वजों से मिला हुआ है उसे बचाने के लिए आन्दोलन करना पड़ रहा है। कार्यक्रम को आयकर के रविन्द्र सिंह, एआईआरएफ के का. एस.यू. शाह, विभूति मिश्रा, इं. शिवशंकर मिश्रा, कामरेड आर.के पाण्डेय रेलवे, राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय,इं. एस.पी. मिश्रा, इं. श्रीप्रकाश गुप्ता, अशोक तिवारी, इं.क्षमा नाथ दुबे, पी.के. शर्मा,सुशील कुमार त्रिपाठी, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अतिरिक्त महामंत्री डा. नरेश, यदुवीर सिंह यादव, विजय कुमार त्रिपाठी, संतोष तिवारी, एस.सी. दीक्षित, इं. एच.एन. मिश्रा, चालक संघ के सुभााष मिश्रा,अखिल भारतीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के महासचिव सुरेश सिंह यादव, इं. राजेश वर्मा, इं. दिवाकर राय, इं. सुशील परिहार ,फहीम अख्तर कृषि विभाग,इं. श्रवण कुमार, सुशील कुमार बच्चा, लोनिवि आउटसोर्सिंग चालक संघ के अनिल सिंह और राहुल सिंह  सहित कई वरिष्ठ कर्मचारी नेताओं ने अपने विचार रखें।

युवा आदर्श : स्वामी विवेकानंद

12 जनवरी विशेष:
मृत्युंजय दीक्षित
अध्यात्मिक शक्तिपुंज, युवा आदर्श तथा प्रेरक स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता के दत्त परिवार में 12 जनवरी 1863 ईसवी को हुआ था। स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ था। स्वामी विवेकानंद के पिता विश्वनाथ दत्त कई गुणों से विभूषित थे। वे अंग्रेजी एवं फारसी भाषाओं में दक्ष थे। स्वामी जी के पिता संगीतप्रेमी भी थे अतः उनकी इच्छा थी कि उनका पुत्र नरेंद्रनाथ भी संगीत की शिक्षा ग्रहण करे। स्वामी विवेकानंद की माता बहुत ही गरिमायी व धार्मिक परंपरा का पालन करने वाली महिला थीं। उन्हें देखकर लगता था कि मानों किसी राजवंश की हों।
बालक नरेंद्र नाथ बचपन में बहुत शरारती थे किन्तु उनमें कोई अशुभ लक्षण नहीं थे। सत्यवादिता उनके जीवन का मेरुदण्ड थी। वे दिन में खेलों में मगन रहते थे और रात्रि में ध्यान लगाने लगे थे। ध्यान के दौरान उन्हें अद्भुत दर्शन प्राप्त होने लगे थे। समय के साथ उनके व्यवहार में परिवर्तन आया और वे बौद्धिक कार्यो को प्राथमिकता देने लगे। पुस्तकों का अध्ययन आरम्भ किया और नियमित रूप से समाचार पत्र और पत्रिकाओं का अध्ययन करने लगे। सार्वजनिक भाषणों में उपस्थित रहने लगे तथा उन भाषणों की समीक्षा करने लगे। वे जो भी सुनते थे उसे अपने मित्रों के बीच वैसा ही सुनाकर सबको आश्चर्यचकित कर देते थे। उनकी पढ़ने की गति भी बहुत तीव्र थी, वे जो भी पढ़ाई करते उन्हें अक्षरशः याद हो जाया करता था। पिता विश्वनाथ ने अपने पुत्र की विद्वता को अपनी ओर खींचने का प्रयास प्रारम्भ किया। वे उसके साथ घंटों ऐसे विषयों पर चर्चा करते जिनमें विचारों की गहराई, सूक्ष्मता और स्वस्थता होती।
बालक नरेंद्र ने ज्ञान के क्षेत्र में बहुत अधिक उन्नति कर ली थी। उन्होने तत्कालीन एंट्रेस की कक्षा तक पढ़ाई के दौरान ही अंग्रेजी और बांग्ला साहित्य के सभी ग्रंथों का अध्ययन कर लिया था। उन्होनें सम्पूर्ण भारतीय इतिहास व हिंदू धर्म का भी गहन अध्ययन कर लिया था। कालेज की पढ़ाई के दौरान सभी शिक्षक उनकी विद्वता को देखकर आश्चर्यचकित हो गये थे। उन्होंने अपने कालेज जीवन के प्रथम दो वर्षों में ही पाश्चात्य तर्कशास्त्र के सभी ग्रंथों का गहन अध्ययन कर लिया था। इन सबके बीच नरेंद्र का दूसरा पक्ष भी था। उनमें आमोद- प्रमोद करने की कला थी ,वे समाजिक वर्गो के प्राण थे। वे मधुर संगीतकार भी थे। सभी के साथ मधुर व्यवहार करते थे। उनके बिना कोई भी आयोजन पूरा नहीं होता था। उनके मन में सत्य को जानने की तीव्र आकांक्षा पनप रही थी।
वर्ष 1881 में नरेंद्र नाथ पहली बार रामकृष्ण परमहंस के सम्पर्क में आये। रामकृष्ण परमहंस पहले ही नरेंद्र को अपना मनोवांछित शिष्य मान चुके थे। प्रारम्भ में नरेन्द्र परमहंस को ईश्वरवादी पुरुष के रूप में मानने को तैयार न थे पर धीरे- धीरे विश्वास जमता गया। रामकृष्ण जी समझ गये थे कि नरेंद्र में एक विशुद्ध चित्त साधक की आत्मा निवास कर रही है अतः उन्होंने नरेन्द्र पर अपने प्रेम की वर्षा करके उन्हें उच्चतम आध्यात्मिक अनुभूति के पथ में परिचालित कर दिया। 1884 में बी. ए. की परीक्षा के दौरान नरेन्द्र के परिवार पर संकट आया, उनके पिता का देहावसान हो गया ।1885 में ही रामकृष्ण को गले का कैंसर हुआ जिसके बाद रामकृष्ण ने उन्हें संयास की दीक्षा दी और उनका नाम स्वामी विवेकानंद हो गया।1886 में स्वामी रामकृष्ण ने महासमाधि ली । वे स्वामी विवेकांनद को ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर गये। 1888 के पहले भाग में स्वामी विवेकानंद मठ से बाहर निकले और तीर्थाटन के लिये निकल पड़े। काशी में उन्होने तैलंगस्वामी तथा भास्करानंद जी के दर्शन किये। वे सभी तीर्थों का भ्रमण करते हुए गोरखपुर पहुंचे। यात्रा में उन्होंने अनुभव किया आम जनता में धर्म के प्रति अनुराग की कमी नहीं है। गोरखपुर में स्वामी जी को पवहारी बाबा का सानिध्य प्राप्त हुआ। फिर वे सभी तीर्थो, नगरों आदि का भ्रमण करते हुए कन्याकुमारी पहुंचे। यहां श्री मंदिर के पास ध्यान लगाने के बाद उन्हें भारतमाता के भावरूप में दर्शन हुए और उसी दिन से उन्होंने भारतमाता के गौरव को स्थापित करने का निर्णय लिया।
स्वामी जी ने 11 सितम्बर 1863 को अमेरिका के शिकागो में आयोजित धर्मसभा में हिंदुत्व की महानता को प्रतिस्थापित करके पूरे विश्व को चौंका दिया। उनके व्याख्यानों को सुनकर पूरा अमेरिका ही उनकी प्रशंसा से मुखरित हो उठा। न्यूयार्क में उन्होंने ज्ञानयोग व राजयोग पर कई व्याख्यान दिये। उनसे प्रभावित होकर हजारों अमेरिकी उनके शिष्य बन गये। उनके लोकप्रिय शिष्यों में भगिनी निवेदिता का नाम भी शामिल है। स्वामी जी ने विदेशों में हिंदू धर्म की पताका फहराने के बाद भारत वापस लौटे।
स्वामी विवेकानंद हमें अपनी आध्यात्मिक शक्ति में विश्वास रखने के लिए प्रेरित करते हैं।वे राष्ट्र निर्माण से पहले मनुष्य निर्माण पर बल देते हैं अतः देश की वर्तमान राजनैतिक एवं सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए देश के युवा वर्ग को स्वामी विवेकानंद के जीवन एवं साहित्य का गहन अध्ययन करना चाहिये। युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद के विचारों से अवश्य ही लाभान्वित होगी। स्वामी विवेकानंद युवाओं से कहते थे कि बल ही जीवन है और दुर्बलता मृत्यु। युवा वर्ग स्वामी जी के वचनों का अध्ययन कर उनकी उद्देष्य के प्रति निष्ठा, निर्भीकता एवं दीन दुखियों के प्रति गहन प्रेम और चिंता से अत्यंत प्रभावित हुआ है। युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद के अतिरिक्त अन्य कोई अच्छ मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक नहीं हो सकता।
प्रेषकः- मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. -09198571540

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