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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था के 1000 वर्ष

January 5, 2026

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था के 1000 वर्ष

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

सोमनाथ… ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित Somnath सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है…“सौराष्ट्रे सोमनाथं च…यानि ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है। ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है।

शास्त्रों में ये भी कहा गया है:

“सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।
लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥”

अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है। मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है।

दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था।

वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था।

सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे।

1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है। जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है। हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दुःख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है।

हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा। सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था। ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था। ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी। हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे।

सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है। ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है।

1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था। लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया। और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया।

महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ। उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही। साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है। वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है।

ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया। उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें।

1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया। 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की।

उन्होंने कहा, “दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे। ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे।

इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है। ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए। पहले की तरह सशक्त। पहले की तरह जीवंत। यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है। इसका अनुसरण आपको गौरव से भर देता है। इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु। इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा।”

ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।

सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’, अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।

जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है, हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है। हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही।

इन्हीं विचारों ने हमें हर कालखंड में, हर परिस्थिति में फिर से उठ खड़े होने, मजबूत बनने और आगे बढ़ने का सामर्थ्य दिया है। इन्हीं मूल्यों और हमारे लोगों के संकल्प की वजह से आज भारत पर दुनिया की नजर है। दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है। वो हमारे इनोवेटिव युवाओं में निवेश करना चाहती है। हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं। योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं। ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं। आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है।

अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है। सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा, “भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्याः क्षयमुपगता यस्य। अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं। जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गए हैं।

आज भी दादा सोमनाथ के दर्शन से ऐसी ही अनुभूति होती है। मन में एक ठहराव आ जाता है, आत्मा को अंदर तक कुछ स्पर्श करता है, जो अलौकिक है, अव्यक्त है।

1026 के पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद 2026 में भी सोमनाथ का समुद्र उसी तीव्रता से गर्जना करता है और तट को स्पर्श करती लहरें उसकी पूरी गाथा सुनाती हैं। उन लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठता रहा है।

अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं। उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। इतिहास के पन्नों में वे केवल फुटनोट हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है। सोमनाथ हमें ये बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ आज भी आशा का अनंत नाद है। ये विश्वास का वो स्वर है, जो टूटने के बाद भी उठने की प्रेरणा देता है।

अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं। एक नए संकल्प के साथ, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए। एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।

जय सोमनाथ !

 

बुलंदशहर में जमीन विवाद ने लिया खूनी रूप, पूर्व विधायक के भतीजे की पीट-पीटकर हत्या

बुलंदशहर। Bulandshahar यूपी के बुलंदशहर जनपद के कोतवाली देहात क्षेत्र में रविवार देर शाम जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गांव ग्यासपुर के निकट स्थित एक बाग की पैमाइश के दौरान दबंगों ने बसपा के पूर्व विधायक मरहूम हाजी अलीम के भतीजे सूफियान (43) की लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। हमले में सूफियान का बड़ा भाई अकरम (45) गंभीर रूप से घायल हो गया।
पैमाइश के दौरान भड़का विवाद
कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव नीमखेड़ा के पास स्थित बाग की भूमि को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से विवाद चल रहा था। रविवार को सूफियान और अकरम बाग की पैमाइश कराने मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष से कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गई।
आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने सूफियान और अकरम पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में दोनों भाई गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही गिर पड़े। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलने पर परिजन दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने सूफियान को मृत घोषित कर दिया। अकरम की हालत गंभीर होने पर उसे हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया है। सूफियान की मौत की खबर फैलते ही जिला अस्पताल में समर्थकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हालात को देखते हुए जिला अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। तनाव को देखते हुए कई थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है।

ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से बाइक सवार दंपती व बेटी की मौत, बेटा गंभीर

मुजफ्फरनगर। जिले के नई मंडी थाना क्षेत्र में जानसठ मार्ग पर रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार युवक, उसकी पत्नी और बेटी की मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया।
Mujaffar Nagar पुलिस अधीक्षक (नगर) सत्यनारायण प्रजापत ने बताया कि जानसठ रोड पर नई मंडी थाने के अंतर्गत एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। हादसे में सोनू (30), उसकी पत्नी राधिका (27) और उनकी 10 वर्षीय बेटी रिया की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, छह वर्षीय बेटा कला गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रजापत के अनुसार, यह दुर्घटना उस समय हुई जब सोनू अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से अपने गांव जादोदा लौट रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अंकिता भंडारी मामले को लेकर कांग्रेस का देहरादून में प्रदर्शन

देहरादून,04 जनवरी 2026, अंकिता भंडारी की हत्या मामले ने उत्तराखंड की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। इसी मामले को लेकर कांग्रेस ने रविवार को देहरादून में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन और मुख्यमंत्री आवास तक मार्च के भारी संख्या में नागरिक पहुंचे। इनमें महिलाओं की भी पर्याप्त संख्या थी।

अंकिता भंडारी Ankita Bhandari का मामला गत दिनों उर्मिला सनावर के आरोपों के बाद सुर्खियों में आया है। उन्होंने इस मामले को किसी वीआईपी से जोड़ते हुए सनसनी फैला दी थी। तभी से उत्तराखंड में विपक्ष इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। इसी मांग को लेकर कांग्रेस रविवार को मुख्यमंत्री आवास तक कूच करने का फैसला किया। हालांकि पुलिस ने बैरिकेडिंग करके प्रदर्शनकारियों को पहले ही रोक दिया। लेकिन प्रदर्शन के कारण शहर में यातायात जाम की स्थिति हो गई। पूरा राजपुर रोड जाम हो गया।

11 को देहरादून बंद

प्रदर्शन में भारी संख्या में अन्य पहाड़ी जिलों के लोग भी पहुंचे। इससे कांग्रेस उत्साहित है। अब कांग्रेस ने 11 जनवरी को देहरादून बंद का आह्वाहन किया है।

हमारा व्यवहार परस्पर आत्मीयता व समरसतापूर्ण होना चाहिए: स्वान्त रंजन

हिन्दू समाज को तोड़ने का काम कर रहे तथाकथित राजनेता: क्षेत्र प्रचारक अनिल

तथाकथित राजनेताओं ने हमारे देवी देवताओं व महापुरूषों को जातियों में बांटा

हिन्दव: सोदरा सर्वे के उदघोष के साथ हिन्दू सम्मेलन शुरू

लखनऊ,04 जनवरी। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा लखनऊ विभाग के चारों जिलों में रविवार को भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य के विषयों को रखा। सम्मेलन में सभी जाति बिरादरी के महिला,पुरूष,बाल व युवाओं की सहभागिता रही। लखनऊ दक्षिण भाग की आनन्द बस्ती में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन जी ने कहा कि
मिलजुलकर साथ रहना सीखें। हमारा व्यवहार परस्पर आत्मीयता व समरसतापूर्ण होना चाहिए। सम्पूर्ण हिन्दू समाज को जोड़कर चलना है। समाज को तोड़ने के प्रयत्न चल रहे हैं। हिन्दू समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए मिलकर प्रयत्न करना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने रविवार को गंगोत्री इन्क्लेव में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दू समाज को टुकड़े —टुकेड़े में तोड़ने का काम देश के तथाकथित राजनेताओं के द्वारा किया जा रहा है। तथाकथित राजनेताओं ने हमारे देवी देवताओं को बांटा। इससे भी पेट नहीं भरा तो इन्होंने महापुरूषों का भी जाति में बंटवारा कर दिया। क्षेत्र प्रचारक ने कहा कि महापुरूषों ने सर्व समाज के लिए काम किया। हम सब को मिलकर सभी महापुरूषों की जयंती मनानी चाहिए।
अनिल जी ने कहा कि दुनिया के ​किसी भी देश में जाति की पार्टी नहीं है। दु​निया में एकमात्र देश भारत है जहां हर जाति की पार्टी बनाई जा रही है। समाज को तोड़ने के षड़यंत्र को समझना होगा। क्षेत्र प्रचारक ने कहा कि बाबा साहब डा. आम्बेडकर ने कहा था कि शिक्षित बनो, संगठित बनो। किसी एक जाति के लिए नहीं कहा था। लेकिन उनके भाषण को तोड़मरोड़ कर सुनाया जाता है। दुनिया में हिन्दुओं को संरक्षण देने वाला एक मात्र देश भारत है। हम सब को जाति के बंधनों से ऊपर उठकर संगठित होना पड़ेगा।

कृष्णानगर की इंद्रलोक कॉलोनी के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने अपने उद्बोधन में हिंदू समाज की एकता, संगठन और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का आहवान किया। उन्होंने सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों, राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखा।

सरस्वती विद्या मंदिर सेक्टर क्यू अलीगंज में मारूति बस्ती के हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए इतिहास संकलन समिति के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री संजय श्रीहर्ष ने कहा कि संघ स्थापना काल से हिन्दू समाज की एकता अखण्डता एवं सम्प्रभुता के लिए कार्य कर रहा है। हमने सदैव वसुधैव कुटुम्बकम का पूर्णतया पालन किया है।

उत्तर भाग के लवकुशनगर की रामकृष्ण बस्ती में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोजकांत जी ने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए संगठित हिंदू समाज की आवश्यकता समझाते हुए समाज को जागरूक और सक्रिय रहने का आह्वान किया।

सुभाष नगर की सदर बस्ती के हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए सामाजिक समरसता गतिविधि के प्रान्त प्रमुख राजकिशोर ने कहा कि हमारे मंदिर जन जागृति का केन्द्र बनने चाहिए। पंच परिवर्तन व्यक्ति परिवार तथा समाज के आचरण में अभिव्यक्त हो। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज से विषमता दूर होनी चाहिए। सामाजिक समरसता के लिए संघ आज देशभर में काम कर रहा है।

जियामऊ स्थित कल्याण मण्डप में हिन्दू महासम्मेलन को संबोधित करते हुए विभाग कार्यवाह अमितेश ने कहा कि कहीं भाषा के नाम पर कहीं जाति के नाम पर देश को बांटने के षड़यंत्र हो रहे हैं। संगठित हिन्दू समाज ही सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है।
विभाग प्रचारक अनिल जी ने रैदास नगर और प्रान्त बाल कार्य प्रमुख आशुतोष जी ने लकड़ मण्डी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित किया।
हनुमान गढ़ी अयोध्या के महंत राजू दास,बावन मंदिर अयोध्या के महंत वैदेही वल्लभ शरण महाराज,महंत दिव्या गिरि,अमृत चैतन्य ने अलग—अलग स्थानों पर हिन्दू सम्मेलन की अध्यक्षता की।

लखनऊ के चारों भागों में हुए हिन्दू सम्मेलन
लखनऊ उत्तर भाग के हनुमान नगर, लवकुश नगर, विवेकानंद नगर, केशव नगर, महर्षी नगर, सुहेलदेव नगर, भाऊराव नगर और जानकी नगर में हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें लगभग 4000 स्वयंसेवक सम्मिलित हुए।
दक्षिण भाग के सरस्वती नगर, सवाद नगर, सुभाष नगर, संत रैदास नगर, वासुदेव नगर, माधव नगर, आनंद नगर, केशव नगर, गोकुल नगर और श्रीकृष्णा नगर में हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 3000 लोग शामिल हुए।
पश्चिम भाग के शत्रुघ्न नगर, बजरंग नगर, लक्ष्मण नगर में हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 1500 लोग शामिल हुए। लखनऊ पूरब भाग के श्रद्धानंद नगर , दयानंद नगर, सरदार पटेल नगर, बलिराम नगर में हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 3000 लोग शामिल हुए।

सह विभाग कार्यवाह ब्रजेश जी ने बताया कि लखनऊ की सभी बस्तियों में हिन्दू सम्मेलन होगा। आज प्रथम दिन था। 31 जनवरी तक हिन्दू सम्मेलन होंगे। हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, एकता और देशभक्ति की अद्भुत झलक देखने को मिली। सभी जगह संघ साहित्य की भी स्टाल लगाये गये थे। कई स्थानों पर समरसता भोज का भी आयोजन किया गया। हिन्दू सम्मेलन की शुरूआत सामूहिक वंदे मातरम और समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ।
जियामऊ ​के हिन्दू सम्मेलन में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य श्रीमान प्रेम कुमार जी, लखनऊ कैंसर संस्थान की निदेशक डा.निर्मला पंत,बृजनन्दन राजू,नगर कार्यवाह संदीप चतुर्वेदी,विजय विश्वकर्मा,डा.उमेश राय,शशिकांत प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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