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शक्ति तीर्थ पत्रिका का हुआ विमोचन

January 18, 2026

शक्ति तीर्थ पत्रिका का हुआ विमोचन

Shakti Teerth Patrika

शक्ति तीर्थ पत्रिका का विमोचन करते हुए डॉ विद्या बिंदु सिंह

लखनऊ : 18 जनवरी l मां दुर्गा उत्थान समिति , लखनऊ द्वारा आयोजित काव्य समारोह के अवसर पर शक्ति तीर्थ पत्रिका के 17 वे अंक का विमोचन एवं काव्य समारोह संपन्न हुआ l
समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ विद्या बिंदु सिंह तथा रूप शर्मा के मुख्य अतिथि में सुनील कुमार बाजपेई ने कुशल संचालन में शशांक पांडे ने वाणी वंदना से समारोह का शुभारंभ हुआ l महामंत्री जे बी सिंह ने संस्था का परिचय कराते हुए सभी का स्वागत अभिनंदन किया l
काव्य पाठ करने वाले डॉक्टर अनुराधा पांडे ,डॉक्टर उषा बाजपेई, डॉक्टर संगीता शुक्ला, राम सिंह, डॉक्टर रश्मि , इंद्रासन सिंह , संजय समर्थ ,डॉ अर्चना श्रीवास्तव, आर्यमन शुक्ला , शशांक पांडे अशोक शुक्ला ,अनजान ,दिलीप शुक्ला ,सपना श्रीवास्तव ,आशा सिंह ,रेखा शर्मा ,रूप शर्मा आदि ने काव्य पाठ किया । संस्था के संरक्षक शिवशरण दीक्षित के मार्गदर्शन में संस्था के अध्यक्ष डॉ राजकुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया l

बैंक में पत्रकार से अभद्रता

बलिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में प्रगतिशील ग्रामीण पत्रकार एसोशियेशन के जिला अध्यक्ष के साथ मैनेजर ने बदसलूकी कर दी। मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई है।
खेजूरी थाना क्षेत्र के खड़सरा भारतीय स्टेट बैंक में अपने खाते का स्टेटमेंट लेने गए प्रगतिशील ग्रामीण पत्रकार एसोशियेशन के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र नाथ सिंह के साथ शाखा प्रबंधक और गार्ड ने बदसलूकी की। उन्होंने चीफ मैनेजर से मामले की शिकायत की है।

प्रधानाध्यापक के कक्ष में लटका मिला सहायक अध्यापिका का शव

बाराबंकी, जिले के एक कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। अध्यापिका का शव प्राध्यापक के कार्यालय कक्ष में कुंडे से लटका मिला।

जानकारी के अनुसार सतरिख थाना क्षेत्र के ग्राम उड़वापुर में कंपोजिट विद्यालय में शनिवार को सहायक अध्यापिका ऊषा वर्मा (40) का शव प्राध्यापक के कमरे में मिलने से हड़कंप मच गया। शिक्षिका को विद्यालय स्टाफ द्वारा लगातार उत्पीड़ित किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। उधर मृतक के भाई ने ऊषा वर्मा की मृत्यु को संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ बताया है।

January 17, 2026

भाकियू अन्नदाता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ खोला मोर्चा

  • किशनपुर गांव में अपनी मांगों को लेकर अन्नदाताओं का अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन
  • महावन तहसील सहित अन्य तहसीलों में नहीं बांटी गई घरौंनियां
  • सरकारी योजनाओं में लगाया जा रहा पलीता किसानों को दिया जा रहा लॉलीपॉप
  • महावन क्षेत्र में किसानों के खेतों को सस्ते दामों में लेकर बनाई जा रही अवैध कॉलोनियां: भूरा पहलवान
Bharatiya Kisan Union Anndata

भारतीय किसान यूनियन अन्नदाता ने दिया धरना

मथुरा।भारतीय किसान यूनियन अन्नदाता के प्रदेश अध्यक्ष भूरा पहलवान एवं जिला अध्यक्ष जीतू जोशी के नेतृत्व में सैकड़ों किसान महावन तहसील के गांव किशनपुर में यमुना एक्सप्रेसवे के निकट भ्रष्टाचार के खिलाफ एवं अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर  प्रदर्शन करते हुए अनिश्चित कालीन धरना पर बैठ गए।
भारतीय किसान यूनियन अन्नदाता के पदाधिकारियों ने तहसील पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि मथुरा जनपद में तहसील स्तर पर किसानों का शोषण किया जा रहा है उनकी समस्याओं की अनदेखी कर बुरा बर्ताव किया जाता है।
अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर   प्रदेश अध्यक्ष भूरा पहलवान ने कहा कि महावन तहसील क्षेत्र में तहसील प्रशासन की मिली भगत से किसानों से सस्ती जमीन खरीद कर अवैध कॉलोनियां का निर्माण किया जा रहा है इस पर रोक लगाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
राजपुर खादर क्षेत्र के किसानों के निरस्त किए पट्टे बहाल किए जाए। सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर सभी ग्राम पंचायतों में खेल के मैदान एवं ओपन जिम का निर्माण कराया जाए। अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों का सौंदर्यीकरण करके साफ सफ़ाई करवाई जाए इस योजना के लाभ से काफी गांव वंचित हैं किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त विद्युत सप्लाई उपलब्ध कराई जाए विद्युत् कटौती से किसानों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिलाध्यक्ष जीतू जोशी ने कहा कि जनपद में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे को हटवाया जाए, ग्राम सिहोरा की एक गली  कीचड़ युक्त है एवं बलदेव के ग्राम कचनाउ से बरौली तक कीचड़ युक्त मार्ग है जिसके कारण मॉडर्न पब्लिक स्कूल में छात्र छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय जाने में असमर्थ हैं लेकिन ब्लॉक से लेकर बार बार शिकायत करने पर भी जिला प्रशासन इस समस्या की अनदेखी कर रहा है।
लोक निर्माण विभाग द्वारा बलदेव से कचनाऊ के सड़क मार्ग को चौड़ीकरण नहीं कराया जा रहा है जिसका ठेका लेने वालों की जांच होनी चाहिए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जे एस जाट एवं मंडल अध्यक्ष गोपाल सिकरवार ने कहा कि जनपद के प्रत्येक ग्राम में पशु चिकित्सालय की व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि इसके इलाज के अभाव में पशुओं की अकाल मौत हो रही है। निराश्रित गौ वंश किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं एवं सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं इनकी व्यवस्था प्रशासन गौशालाओं में नहीं कर रहा है  इसलिए अपनी विभिन्न समस्याओं से दुखी होकर अन्नदाता अनिश्चित कालीन धरना देने पर मजबूर है।

देश के सामने दो ही विकल्प मोदी के नेतृत्व में विकास या बिखरा हुआ इंडी गठबंधनः सुधांशु त्रिवेदी

लखनऊ 17 जनवरी 2026। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आज शनिवार को लखनऊ स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित किया। डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि भाजपा ने दिल्ली, केरल और महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में मजबूत उपस्थिति दर्ज की, तिरुवनंतपुरम में पहली बार मेयर बनाया और 40 वर्षों के कम्युनिस्ट शासन को हटाया। भाजपा सांसद ने इंडी गठबंधन की विफलता, पश्चिम बंगाल में बीएलओ अशोक चंद्र दास की आत्महत्या, पंजाब में मीडिया पर दमन और तमिलनाडु में न्यायालयिक हस्तक्षेप की घटनाओं को लोकतंत्र के लिए खतरे के रूप में बताया। डॉ. त्रिवेदी ने यह स्पष्ट किया कि देश के सामने दो विकल्प हैं, एक ओर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विकास और सामाजिक समरसता और दूसरी ओर बिखरी हुई, असंगठित विपक्षी दलों का इंडी गठबंधन।

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि विगत वर्ष में दिल्ली और उसके बाद केरल के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। तिरुवनंतपुरम में पहली बार भाजपा का मेयर बना है और 40 वर्षों से कम्युनिस्टों के शासन को हटाया गया। इसके साथ ही, महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में शानदार सफलता हासिल करते हुए भारतीय जनता पार्टी जिस स्थिति में पहुंची है, उससे एक बात स्पष्ट है कि विपक्षी दल, जो लगातार हार से कुंठित हैं और वोटों के लालच में घुसपैठिया परस्त हैं, अब निरंतर ध्वस्त होते चले जा रहे हैं। परंतु इसके साथ ही, इंडी गठबंधन की सरकारों का रवैया घनघोर लोकतांत्रिक विरोधी है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया इस समय पूरे देश में चल रही है और आज पश्चिम बंगाल से एक दुखद खबर आई कि वहां के बीएलओ अशोक चंद्र दास जी ने आत्महत्या की। उनकी पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार उनके ऊपर भारी दबाव था कि किसी का भी नाम न काटा जाए। अर्थात्, जो संदिग्ध मतदाता हैं और जिनके पास आधिकारिक और औपचारिक दस्तावेज नहीं हैं, उनके नाम भी न काटे जाएं। पश्चिम बंगाल की सरकार द्वारा दी गई मानसिक प्रताड़ना के कारण यह घटना हुई। यह दर्शाता है कि स्वस्थ और पारदर्शी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विपक्षी दलों की आस्था नहीं है। दूसरी ओर, पंजाब में यदि मीडिया ने कोई प्रतिकूल खबर प्रकाशित की, तो वहां के न्यूज़पेपर और मीडिया संस्थानों पर जिस तरह रेड की गई, लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई और कार्रवाई की गई, वह अपने आप में लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। आज देश में यह स्पष्ट है कि संविधान खतरे में है। उत्तर प्रदेश में 1994 में, आज से लगभग 30-32 साल पहले, जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब यहां के दो बड़े समाचार पत्रों के कार्यालयों पर विधिवत हमला किया गया था। इसका कारण केवल यह था कि उन समाचार पत्रों में प्रकाशित कुछ समाचार उस समय की मुलायम सिंह की सरकार को अच्छे नहीं लगे थे। वही प्रवृत्ति और वही फितरत आज 30-32 साल बाद भी यथावत दिखाई पड़ती है। जहां एक ओर तमिलनाडु में कोर्ट के निर्णय के बावजूद, केवल एक स्तंभ के पास दीप जलाने की अनुमति देने में वहां की सरकार असमर्थ थी और न्यायाधीश को आतंकित करने के लिए उनके विरुद्ध महाभियोग लाने का नोटिस तक दे दिया गया। वहीं पश्चिम बंगाल में कोर्ट की सुनवाई के दौरान इतना उपद्रव किया गया कि उच्च न्यायालय को अपनी कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी और उसने कहा कि ‘ऐसे वातावरण में न्यायालय की प्रक्रिया नहीं चल सकती। आज पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने वही रवैया अपनाया है। इससे एक बात बहुत स्पष्ट है कि हार की खिसियाहट और बौखलाहट में संवैधानिक व्यवस्थाओं को तार-तार करते हुए विपक्षी दल सामने आ रहे हैं। यह पूरी तरह सत्य है कि ये लोग संविधान को अपनी जेब में ही रखते हैं और उसे उसी भाव से रखते हैं।

भाजपा सांसद ने कहा कि विपक्षी दलों बताएं कि 2024 के बाद जितने भी चुनाव हुए हैं, यह तथाकथित इंडी गठबंधन एक के बाद एक बिखरता जा रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में इंडी गठबंधन नाम की कोई भी चीज फ्लोर ऑफ द हाउस पर मौजूद नहीं है। हमारे एनडीए के नेता, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हैं और सभी एनडीए सहयोगी दलों ने बाकायदा मीटिंग करके नेता चुनकर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को दे रखा है। मगर इंडी गठबंधन ने कोई पत्र राज्यसभा के सभापति या लोकसभा अध्यक्ष को नहीं दिया है कि सदन के पटल पर यह एक गठबंधन है और इसका नेता कोई व्यक्ति है। यानी यह गठबंधन वैसे ही हवा में निराधार था। 2025 में पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी अलग हुई, केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस और कम्युनिस्ट अलग-अलग लड़े और महाराष्ट्र के चुनावों में शिवसेना उबाठा (यानी उद्धव ठाकरे जी की शिवसेना) और कांग्रेस भी अलग हो गए। यह तय माना जाए कि बंगाल के चुनाव में टीएमसी कांग्रेस को कोई सीट नहीं देने जा रही है। तमिलनाडु के चुनाव में डीएमके, जो उनकी सबसे बड़ी सहयोगी दल है और जो इरेडिकेशन ऑफ सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म को समूल नाश करने के संकल्प के लिए मशहूर है, वह 239 में से एक चौथाई सीट भी कांग्रेस को देने के लिए तैयार नहीं है। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो, ‘रुपये में चवन्नी’ कहते हैं ना, वह चवन्नी लायक भी कांग्रेस की स्थिति नहीं समझी जा रही है।

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सबसे मुख्य विपक्षी दल, समाजवादी पार्टी पर बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनावों में, उनके अरमानों पर जो गाज गिरी है। समाजवादी पार्टी केवल एक सीट जीत पाई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी पहली बार मुंबई में मेयर बनाने जा रही है। एआई एमआईएम ने चार सीटें जीती हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी यह प्रश्न किया जाना चाहिए कि अब उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन का अस्तित्व है या नहीं? क्योंकि सपा ने उपचुनावों में कांग्रेस को कोई सीट नहीं दी थी और कांग्रेस ने भी आम आदमी पार्टी को दिल्ली के चुनाव में कोई सीट नहीं दी थी। दिल्ली, मुंबई और पटना के अनुभव के बाद लखनऊ में अखिलेश यादव का क्या विचार है? यह देश की जनता जानना चाहती है कि इंडी गठबंधन अभी भी मौजूद है या अब समाप्त हो चुका है। आने वाले 2026 के चुनावों में भी इसकी गति दुर्गति की ओर बढ़ती दिखाई पड़ रही है। अब इन विपक्षी दलों को इस तथाकथित इंडी गठबंधन के नाम पर देश की जनता को मूर्ख बनाने का भ्रामक प्रचार छोड़ देना चाहिए।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि एसआईआर को लेकर अखिलेश यादव के स्वयं के बयान बड़े विचित्र और विडंबनापूर्ण हैं। जब उन्हें लगता है कि उनके वोटर एसआईआर में जुड़ गए हैं, तो वह बड़े खुश हो जाते हैं और कहते हैं कि ‘भाजपा के वोटर कट गए हैं’। फिर उन्हें लगता है कि ‘नहीं, अब उनके वोट कट रहे हैं और भाजपा के वोट जुड़ रहे हैं’। ऐसी में अखिलेश यादव बताएं कि ‘कटे’ में भी आप हैं और ‘जुड़े’ में भी आप हैं, यह समझ ही नहीं आ रहा है कि वह कहाँ खड़े हैं? आज देश की जनता बहुत स्पष्ट रूप से देख चुकी है कि दो विकल्पों के बीच में चुनाव है। एक विकल्प, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता, सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव के साथ विकास के पथ पर बढ़ता हुआ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ है। दूसरी ओर, वर्ग और प्रांत में बटा हुआ, उत्तर और दक्षिण में बटा हुआ, जातियों में बंटा हुआ और आपस में लड़ता हुआ गठबंधन है, जो ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह’ का समर्थन करता है और ऐसे लोगों को ‘भटके नौजवान’ कहने वाला बिखरा हुआ विकल्प है।

भाजपा सांसद ने कहा कि आज देश की जनता को तय करना है कि वह निखरता हुआ भारत देखना चाहती है या बिखरता हुआ भारत। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव बताएं कि क्या बिहार में तेजस्वी यादव के अनुभव से कोई सबक लेना चाहेंगे या कांग्रेस की नाकाम सियासी हसरतों का जनाजा अपने कंधे पर यूपी में भी ढोने के लिए तैयार रहेंगे? उत्तर प्रदेश में एक ओर मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उभरता हुआ उत्तर प्रदेश है, जो विकास के मार्ग पर बढ़ रहा है और जहाँ अनुशासन और कानून व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मुकाम पर है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के जमाने का उत्तर प्रदेश था, जिसके लिए हमें बोलने की जरूरत नहीं है, 2007 का बहुजन समाज पार्टी का नारा ही पर्याप्त है। इसलिए भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर इंडी गठबंधन से पूछना चाहती है कि पश्चिम बंगाल में बीएलओ को आत्महत्या के लिए प्रताड़ित करना, पंजाब में मीडिया पर अटैक करना, तमिलनाडु में न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर न्यायाधीशों को आतंकित करने का प्रयास करना, क्या इसे नहीं माना जाएगा कि इंडी गठबंधन के हाथ में लोकतंत्र खतरे में है? नाम रख लेने से किसी का काम नहीं बदल जाता। विपक्षी दलों ने नाम ‘इंडिया’ रखा था और जब इंडिया की टीम ने वर्ल्ड कप जीता, तब बधाई देना भी उचित नहीं समझा गया। अखिलेश यादव ने भी भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव को बधाई देना उचित नहीं समझा। इसलिए प्रदेश स्तर पर भाजपा अखिलेश यादव से पूछना चाहती है कि अब इंडी गठबंधन का उत्तर प्रदेश में अस्तित्व है या वह कुंठाग्रस्त, घुसपैठिया परस्त होकर ध्वस्त हो चुका है?

 

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