Web News

www.upwebnews.com

एटा में चार हत्याओं का कातिल निकला दबा कारोबारी बेटा, 5 साल के मासूम ने दी 4 चिताओं को मुखाग्नि

January 20, 2026

एटा में चार हत्याओं का कातिल निकला दबा कारोबारी बेटा, 5 साल के मासूम ने दी 4 चिताओं को मुखाग्नि

Kotwali Etah

पुलिस की गिरफ्त में चार हत्याओं का आरोपित

एटा 20 जनवरी उप्रससे। कोतवाली नगर क्षेत्र में दवा कारोबारी बेटा ही अपने मां-बाप, पत्नी और बेटी का कातिल निकला है। पुलिस ने मंगलवार को 24 घंटे के भीतर हत्याकांड का खुलासा कर दिया।

 

अलीगढ़ रेंज के DIG प्रभाकर चौधरी ने बताया- कमल सिंह शाक्य ने ही पिता, मां, पत्नी और छोटी बेटी की बेरहमी से हत्या की थी। बेटी की शादी अगले महीने 11 फरवरी को तय थी। शादी चंडीगढ़ में अनुराग सक्सेना से होनी थी। शादी के लिए चार लाख का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। पत्नी कमल सिंह को ताना मारती थी। इसी बात को लेकर सोमवार दोपहर कमल का पत्नी से झगड़ा हुआ था। गुस्से में उसने पहले पत्नी की हत्या की। बाद में माता-पिता और बड़ी बेटी को भी मार दिया। कमल खुद को भी खत्म करना चाहता था।

 

हत्याकांड का खुलासा करते हुए डीआईजी अलीगढ़ प्रभाकर चौधरी ने पुलिस लाइन में अहम 4 बातें बताईं-

1- कमल सिंह ने पिता डॉ. गंगा सिंह शाक्य, मां श्यामा देवी, पत्नी रत्ना देवी और बेटी ज्योति की ईंट से कुचल कर हत्या की थी।

2-बेटी ज्योति शाक्य का चंडीगढ़ में नौकरी करने वाले अनुराग सक्सेना से अफेयर था। वह इंटरकास्ट मैरिज करना चाहती थी।

3- कमल इंटरकास्ट मैरिज के लिए तैयार था। 11 फरवरी को शादी होनी थी। लेकिन कमल 4 लाख रुपए जुटा नहीं पा रहा था।

4- पत्नी रत्ना उसे 4 लाख रुपए जुटा न पाने के लिए ताना मारती थी। झगड़े में वह आपा खो बैठा और हत्याएं कर दीं।

 

 

CCTV फुटेज से खुला राज

 

कमल सिंह शाक्य सोमवार दोपहर खाना खाने घर आया था। CCTV फुटेज के अनुसार, दिन के 12.40 पर आरोपी कमल सिंह शाक्य घर में गया और 1.55 पर घर से बाहर निकला। इसी बीच आरोपी ने हत्या को अंजाम दिया। पहले पत्नी, फिर बेटी, फिर मां और आखिर में पिता को मारा। पिता को सबूत छिपाने के लिए मारा। परिवार के मुखिया गंगा सिंह पिछले दो वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था।

 

डीआईजी ने बताया- CCTV, CDR, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर कमल सिंह की गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने कहा कि इसमें 80 फीसदी साक्ष्य साइंटिफिक एवीडेंस के थे। हत्या के बाद आरोपी कमल सिंह ने घर में खून के छींटे धोए और मेडिकल स्टोर पर चला गया। आरोपी खुद को भी खत्म करना चाह रहा था, लेकिन तभी उसकी बड़ी बेटी लक्ष्मी का फोन आ गया और उसने उनको बुला लिया। आगे की जांच के लिए 4 सदस्यों की टीम गठित की गयी है। जिसमें सीओ सिटी शामिल हैं।

 

पुलिस सुरक्षा के बीच चारों शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। जहां 5 साल के देवांश ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। मासूम देवांश ने अपने दादा-दादी, मां और बड़ी बहन के शवों को मुखाग्नि दी।

 

तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमॉर्टम, सिर-चेहरे कुचलकर हत्या की पुष्टि

 

तीन डॉक्टरों के पैनल ने चारों शवों का पोस्टमॉर्टम किया। इनमें डॉ. राजीव किशोर, डॉ. उत्सव जैन और डॉ. श्वेता राजपूत शामिल थे।

 

डॉक्टरों ने बताया कि हमलावरों ने पहले पत्नी रत्ना देवी की हत्या की। इसके बाद बेटी ज्योति को बेरहमी से मारा गया। जब बुजुर्ग मां श्यामा देवी बीच-बचाव के लिए आईं, तो उन पर भी सिलसिलेवार हमले किए गए और उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया गया। तीनों महिलाओं के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान मिले।

 

 

कमल सिंह करता रहा पुलिस को गुमराह

 

आरोपी कमल सिंह चार हत्याएं करने के बाद पुलिस को गुमराह करता रहा। उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उसने बताया था- दोपहर एक बजे के आसपास मैं अपने मेडिकल स्टोर से खाना खाने घर आया था। दुकान पर बड़ी बेटी लक्ष्मी को बिठाकर आया था। उस समय घर पर सबकुछ ठीक था। सभी लोग घर पर थे। खाना खाने के बाद मैं मेडिकल स्टोर चला गया। वहां से मार्केट चला गया। मेरा बेटा स्कूल से लौटा तो कमरे में पंखा चल रहा था। उसने बरामदे में अपने शूज उतारे और कहने लगा कि ठंड में पंखा कौन चला रहा है। जब कोई जवाब नहीं मिला तो अंदर जाकर देखा। अंदर का मंजर देख उसकी चीख निकल पड़ी। उसने शोर मचाकर लोगों को बुलाया तब हत्याकांड का पता चला।

 

मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में उमडेगा श्रद्धा का सैलाव 

अतिशय क्षेत्र सेरोन देवगढ जहाजपुर में पंचकल्याणक महामहोत्सव सुनिश्चित

उप्रससे, अजय बरया

जजितपुर। जैन समाज का महत्वपूर्ण महामहोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव ललितपुर जिले के अतिशय क्षेत्र सतोदय तीर्थ सेरोन, देवोदय तीर्थ देवगढ़ एवं शान्तोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में तीर्थ चक्रवर्ती निर्यापक मुनि सुधासागर महराज के सानिध्य में आयोजित किया जाना सुनिश्चित हुआ। जिसको लेकर जैन समाज उत्साहित है और आयोजन की सफलता हेतु दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति ललितपुर ने स्वंयसेवी संस्थाओं के साथ रणनीति बनाई।

 

प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी प्रदीप जैन सुयश के अनुसार ललितपुर जिले में तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में सतोदय तीर्थसेरोन में  4मार्च से 8 मार्च 26 तक, देवोदय तीर्थ देवगढ़ में 28 मार्च से 2 अप्रेल 26 एवं शान्तोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में अप्रैल माह 2026 में पंचकल्याणक महोत्सव होगा। प्रतिष्ठा महोत्सव में तीनों क्षेत्रों में मूलनायक भगवान शन्तिनाथ के अतिरिक्त अनेक प्रतिमाओं की  प्राण प्रतिष्ठित की जाएगी। उक्त आयोजन को लेकर जैन समाज काफी समय से प्रतीक्षारत रही और निरंतर महाराज श्री से आयोजन के लिए निवेदन करती रही। ललितपुर जनपद के निकवर्ती क्षेत्र तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट में विरजित निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महराज के सम्मुख जैन समाज के श्रेष्ठजनों एवं दिगम्बर जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने निवेदन किया जिसकी स्वीकृति मिलते ही समाज में उत्साह की लहर दौड़ गई।

 

आयोजन को लेकर सावरकर चौक स्थित जैन अटामंदिर के सभागार में महत्वपूर्ण बैठक जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ अक्षय टड़या की अध्यक्ष एवं समाजा श्रेष्ठी शीलचन्द अनोरा के मुख्यतिष्य सम्पन हुई और ललितपुर जिले में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के आगमन एवं उनके सानिध्य में आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें प्रमुख रूप से देवोदय तीर्थ के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल संजीव जैन सीए सतीश जैन बजाज, मनोज जैन बबीना, अरविन्द जैन आष्टीकल्स, धन्यकुमार जैन एड, भूपेन्द्र जैन सिद्धि समूह, अखिलेश गदयाना, रवि जैन चुनगी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर प्रमुख रूप से स्वतन्त्र मोदी, सुरेश बाबू जैन,विजय जैन लागोन, संजय मोदी, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, आनंद जैन एलआईसी, सनत जैन खजुरिया, सौरभ जैन सीए, प्रमात जैन लागीन, अजय जैन जखोरा, अनिल जैन डोगरा, राजेश जैन चन्द्रा सिधेश्वर जमोरिया आदि मौजूद रहे। सभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन द्वारा किया गया। मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से उद्घारित ललितपुर जनपद के प्रमुख तीर्थक्षेत्र मूर्तिकला की धरोहर अतिशय क्षेत्र देवगढ, सतोदय तीर्थ सेरोन, शान्तोदय तीर्थ चांदपुर जहाज में मूलनायक भगवान शान्तिनाथ की प्रतिष्ठ

कार की डिक्की तोड़कर पुलिस ने महिला को बचाया

अपहरण सहित हर एंगल से जांच आरोपियों का खंगाला जा रहा आपराधिक इतिहास

सिकंदरपुर (बलिया), थाना क्षेत्र के बिच्छीबोझ नहर के समीप सोमवार–मंगलवार की रात पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की। पुलिस ने एक कार की डिक्की तोड़कर उसमें बंद 55 वर्षीय महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। महिला की हालत उस समय अत्यंत भयभीत और दयनीय थी।

जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के उचराव गांव निवासी नीतीश राम सोमवार की रात करीब दो बजे सिकंदरपुर थाने पहुंचे और पुलिस को सूचना दी कि उनकी बुआ का फोन उनके मोबाइल पर आया है, जिसमें उन्होंने बताया कि वह किसी गाड़ी में बंद हैं और अज्ञात स्थान पर रखी गई हैं। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और मोबाइल लोकेशन के आधार पर महिला के संभावित स्थान का पता लगाया। पुलिस टीम जब बताए गए स्थान बिच्छीबोझ नहर के पास पहुंची तो वहां एक कार खड़ी मिली, जिसके आसपास कोई मौजूद नहीं था। इसी दौरान कार की डिक्की से महिला की आवाज सुनाई दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने तत्काल प्रभारी थाना अध्यक्ष चंद्रशेखर यादव को सूचना दी। उनके निर्देश पर एएसआई राम सकल यादव के नेतृत्व में सेकंड मोबाइल टीम मौके पर भेजी गई। काफी प्रयास के बावजूद कार की डिक्की नहीं खुल सकी, जिसके बाद रात में ही एक मिस्त्री को बुलाकर डिक्की तुड़वाई गई। डिक्की खुलते ही अंदर से एक महिला रोती हुई और अत्यंत घबराई हुई अवस्था में मिली। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महिला को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पहुंचाया, जहां उसका उपचार कराया गया।

पुलिस ने रात में ही कार मालिक को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में कार मालिक ने बताया कि एक युवक उसकी गाड़ी धुलवाने के बहाने लेकर गया था, जो पेशे से बस चालक है। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने बस मालिक को भी हिरासत में लिया है, हालांकि मुख्य आरोपी व बाइक सवार दोनों युवक अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि वह ऊंचवार में अपनी मां की तबीयत खराब होने की सूचना पर उनसे मिलने गई थी। वहां से उसी दिन पैदल घर लौटते समय बाइक सवार दो युवकों ने उसे रोका और छोड़ने की बात कही। आगे ले जाकर आरोपियों ने उसे कुछ सुंघा दिया, जिसके बाद उसे कुछ भी याद नहीं है। होश आने पर उसने खुद को कार की डिक्की में बंद पाया। किसी तरह अपने छोटे मोबाइल से उसने भतीजे नीतीश को फोन कर मदद मांगी।

इस संबंध में प्रभारी थाना अध्यक्ष चंद्रशेखर यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर महिला को सुरक्षित मुक्त कराया। पूरे मामले की अपहरण सहित हर एंगल से गहन जांच की जा रही है। कार मालिक सलमान खान व बस मालिक तौफीक खान उर्फ भूवर को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है आरोपियों के आपराधिक इतिहास खंगाले जा रहे हैं और विधिक कार्रवाई की जा रही है।

लोक सभा अध्यक्ष बिरला ने विधायी संस्थाओं के कार्यप्रणाली में गुणवत्ता के मानक स्थापित करने पर ज़ोर दिया 

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के दूसरे दिन एजेंडा विषयों पर व्यापक चर्चा

AIPOC LUCKNOW

ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं के कार्यप्रणाली में गुणवत्ता के मानक स्थापित करने पर पुनः ज़ोर दिया

पारदर्शी, प्रभावी एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, विधायकों की क्षमता निर्माण तथा जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही पर विचार-मंथन

लखनऊ; 20 जनवरी, 2026:  86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का दूसरा दिन तीन प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श के साथ संपन्न हुआ । सम्मेलन में  पारदर्शी, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग, विधायकों की क्षमता-वृद्धि द्वारा कार्यकुशलता में सुधार एवं लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना; तथा जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही के लिए जिम्मेदारी पर बल दिया गया।

इन पूर्ण सत्रीय विचार-विमर्शों में लोक सभा के  अध्यक्ष  ओम बिरला उपस्थित रहे। राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने चर्चा का संचालन किया। सभा को संबोधित करते हुए  लोक सभा अध्यक्ष श्री  बिरला ने देश भर की विधायिकाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों की प्रशंसा की। श्री बिरला ने विधायकों की शैक्षणिक योग्यताओं एवं पेशेवर अनुभवों को पहचानकर उनका रचनात्मक उपयोग करने की श्री महाना की पहल की भी सराहना की।

पूर्ववर्ती AIPOC सम्मेलनों के प्रमुख विमर्शों को स्मरण करते हुए श्री बिरला ने उत्कृष्टता, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर बल दिया। इस संदर्भ में देहरादून में 2019 में आयोजित AIPOC में हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य विधायिकाओं की कार्यकुशलता एवं कार्यप्रणाली में सुधार पर अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दोहराया। उन्होंने बताया कि इस दिशा में एक समिति का गठन किया गया है, जो भारत में विधायी निकायों की प्रक्रियाओं एवं प्रथाओं के मानकीकरण से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रही है।

राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने विधान मंडलों की कार्यकुशलता में वृद्धि करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर बल दिया, साथ ही इस तकनीक को उपयुक्त एवं विश्वसनीय बनाने के लिए अपेक्षित विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया। संसद में एआई के व्यावहारिक उपयोग एवं इसके क्रियान्वयन के विभिन्न तरीकों को रेखांकित करते हुए, उन्होंने संसद और राज्य विधान मंडलों के बीच अधिक समन्वय किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे विधान मंडलों के संस्थागत ज्ञान का उपयोग संसद तथा राज्य विधान सभाओं, दोनों के द्वारा प्रभावी रूप से किया जा सके।

 

उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करना समय की आवश्यकता हैः प्रो. नचिकेता तिवारी

हिन्दुत्व की शाश्वत प्रासंगिकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

(World Association of Hindu Academicians – WAHA

वर्ल्ड एसोसिएशन आफ हिन्दू एकेडमिशियन्स का सम्मेलन सम्पन्न

लखनऊ, 20 जनवरी 2026, विश्व हिन्दू परिषद के आयाम विश्व हिन्दू अकादमिक संगठन (World Association of Hindu Academicians – WAHA) द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से “The Eternal Relevance of Hindutva: Reviving Cultural Consciousness and Transformation” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 20 जनवरी 2026 को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ जिसमें सैकड़ों प्राध्यापक एवं शिक्षाविद् शामिल हुए । दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि एवं वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ किया गया।

WAHA के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. नचिकेता तिवारी ने संगठन की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि “गुरुकुल परंपरा में ज्ञान और संस्कार साथ-साथ दिए जाते थे; आज उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः स्थापित करना समय की आवश्यकता है।” उन्होंने विश्वविद्यालयों में भारतीय दर्शन आधारित शोध को प्रोत्साहित करने के उदाहरण प्रस्तुत किए।

विशिष्ट अतिथि गजेन्द्र, जोनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी, लखनऊ जोन, विश्व हिन्दू परिषद ने कहा कि “योग, संस्कृत और भारतीय पर्वों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि यह प्रमाण है कि सांस्कृतिक चेतना स्वतः समाज में पुनर्जीवित हो रही है।” मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार शर्मा, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय जीवन-दृष्टि सत्य, अहिंसा, करुणा और कर्तव्यबोध जैसे मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे विचार आज के सामाजिक और वैश्विक संकटों के समाधान का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू मूल्य समाज में सह-अस्तित्व, नैतिकता और समरसता को सुदृढ़ करते हैं।

मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने काशी, अयोध्या और मथुरा के सांस्कृतिक पुनरुद्धार का उदाहरण देते हुए कहा कि “सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से न केवल आस्था, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बल मिला है।” अध्यक्षीय उद्बोधन में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा को शामिल किए जाने को हिन्दुत्व की समावेशी भावना का आधुनिक उदाहरण बताया। अपराह्न द्वितीय सत्र में विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) विक्रम सिंह, CMS, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने कहा कि “योग और प्राणायाम जैसी भारतीय चिकित्सा परंपराओं ने कोविड काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता पद्मश्री रमेश पतंगे ने सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय समाज की शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि परिवार, सेवा-भाव और सांस्कृतिक परंपराएँ समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग, संवाद और समान दायित्व की भावना से ही सामाजिक समरसता सुदृढ़ होती है, जो राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय सिंह, कुलपति, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने की और दिव्यांग पुनर्वास को हिन्दुत्व की करुणा और मानवीय गरिमा की परंपरा से जोड़ा।

समापन सत्र (Valedictory Session) में विशेष वक्ता प्रो. नचिकेता तिवारी ने सम्मेलन के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि “हिन्दुत्व जीवन को संतुलन, सहअस्तित्व और कर्तव्यबोध की दिशा देता है।” मुख्य वक्ता डॉ. निखिल वलिम्बे ने सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. निखिल वालिम्बे ने इस्लाम और उसके सामाजिक प्रभावों पर विचार रखते हुए कहा कि किसी भी धर्म का प्रभाव उसकी ऐतिहासिक व्याख्याओं और सामाजिक प्रयोगों से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कालखंडों में इस्लाम का प्रभाव कहीं सांस्कृतिक समन्वय के रूप में तो कहीं कठोर धार्मिक दृष्टिकोण के कारण सामाजिक चुनौतियों के रूप में सामने आया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसी बहुलतावादी संस्कृति में संवाद, सह-अस्तित्व और विवेक आधारित दृष्टि ही सामाजिक संतुलन बनाए रख सकती है तथा हिन्दुत्व की समावेशी सोच इसी भावना को सशक्त करती है।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. आर. के. मित्तल, कुलपति, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों के साथ भारतीय संस्कृति के सहअस्तित्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रान्त संगठन मंत्री विजय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन, WAHA के पदाधिकारियों, आयोजक समिति, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की साझा यात्रा है।”

« Newer PostsOlder Posts »