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युवा आदर्श : स्वामी विवेकानंद

January 11, 2026

युवा आदर्श : स्वामी विवेकानंद

12 जनवरी विशेष:
मृत्युंजय दीक्षित
अध्यात्मिक शक्तिपुंज, युवा आदर्श तथा प्रेरक स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता के दत्त परिवार में 12 जनवरी 1863 ईसवी को हुआ था। स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ था। स्वामी विवेकानंद के पिता विश्वनाथ दत्त कई गुणों से विभूषित थे। वे अंग्रेजी एवं फारसी भाषाओं में दक्ष थे। स्वामी जी के पिता संगीतप्रेमी भी थे अतः उनकी इच्छा थी कि उनका पुत्र नरेंद्रनाथ भी संगीत की शिक्षा ग्रहण करे। स्वामी विवेकानंद की माता बहुत ही गरिमायी व धार्मिक परंपरा का पालन करने वाली महिला थीं। उन्हें देखकर लगता था कि मानों किसी राजवंश की हों।
बालक नरेंद्र नाथ बचपन में बहुत शरारती थे किन्तु उनमें कोई अशुभ लक्षण नहीं थे। सत्यवादिता उनके जीवन का मेरुदण्ड थी। वे दिन में खेलों में मगन रहते थे और रात्रि में ध्यान लगाने लगे थे। ध्यान के दौरान उन्हें अद्भुत दर्शन प्राप्त होने लगे थे। समय के साथ उनके व्यवहार में परिवर्तन आया और वे बौद्धिक कार्यो को प्राथमिकता देने लगे। पुस्तकों का अध्ययन आरम्भ किया और नियमित रूप से समाचार पत्र और पत्रिकाओं का अध्ययन करने लगे। सार्वजनिक भाषणों में उपस्थित रहने लगे तथा उन भाषणों की समीक्षा करने लगे। वे जो भी सुनते थे उसे अपने मित्रों के बीच वैसा ही सुनाकर सबको आश्चर्यचकित कर देते थे। उनकी पढ़ने की गति भी बहुत तीव्र थी, वे जो भी पढ़ाई करते उन्हें अक्षरशः याद हो जाया करता था। पिता विश्वनाथ ने अपने पुत्र की विद्वता को अपनी ओर खींचने का प्रयास प्रारम्भ किया। वे उसके साथ घंटों ऐसे विषयों पर चर्चा करते जिनमें विचारों की गहराई, सूक्ष्मता और स्वस्थता होती।
बालक नरेंद्र ने ज्ञान के क्षेत्र में बहुत अधिक उन्नति कर ली थी। उन्होने तत्कालीन एंट्रेस की कक्षा तक पढ़ाई के दौरान ही अंग्रेजी और बांग्ला साहित्य के सभी ग्रंथों का अध्ययन कर लिया था। उन्होनें सम्पूर्ण भारतीय इतिहास व हिंदू धर्म का भी गहन अध्ययन कर लिया था। कालेज की पढ़ाई के दौरान सभी शिक्षक उनकी विद्वता को देखकर आश्चर्यचकित हो गये थे। उन्होंने अपने कालेज जीवन के प्रथम दो वर्षों में ही पाश्चात्य तर्कशास्त्र के सभी ग्रंथों का गहन अध्ययन कर लिया था। इन सबके बीच नरेंद्र का दूसरा पक्ष भी था। उनमें आमोद- प्रमोद करने की कला थी ,वे समाजिक वर्गो के प्राण थे। वे मधुर संगीतकार भी थे। सभी के साथ मधुर व्यवहार करते थे। उनके बिना कोई भी आयोजन पूरा नहीं होता था। उनके मन में सत्य को जानने की तीव्र आकांक्षा पनप रही थी।
वर्ष 1881 में नरेंद्र नाथ पहली बार रामकृष्ण परमहंस के सम्पर्क में आये। रामकृष्ण परमहंस पहले ही नरेंद्र को अपना मनोवांछित शिष्य मान चुके थे। प्रारम्भ में नरेन्द्र परमहंस को ईश्वरवादी पुरुष के रूप में मानने को तैयार न थे पर धीरे- धीरे विश्वास जमता गया। रामकृष्ण जी समझ गये थे कि नरेंद्र में एक विशुद्ध चित्त साधक की आत्मा निवास कर रही है अतः उन्होंने नरेन्द्र पर अपने प्रेम की वर्षा करके उन्हें उच्चतम आध्यात्मिक अनुभूति के पथ में परिचालित कर दिया। 1884 में बी. ए. की परीक्षा के दौरान नरेन्द्र के परिवार पर संकट आया, उनके पिता का देहावसान हो गया ।1885 में ही रामकृष्ण को गले का कैंसर हुआ जिसके बाद रामकृष्ण ने उन्हें संयास की दीक्षा दी और उनका नाम स्वामी विवेकानंद हो गया।1886 में स्वामी रामकृष्ण ने महासमाधि ली । वे स्वामी विवेकांनद को ही अपना उत्तराधिकारी घोषित कर गये। 1888 के पहले भाग में स्वामी विवेकानंद मठ से बाहर निकले और तीर्थाटन के लिये निकल पड़े। काशी में उन्होने तैलंगस्वामी तथा भास्करानंद जी के दर्शन किये। वे सभी तीर्थों का भ्रमण करते हुए गोरखपुर पहुंचे। यात्रा में उन्होंने अनुभव किया आम जनता में धर्म के प्रति अनुराग की कमी नहीं है। गोरखपुर में स्वामी जी को पवहारी बाबा का सानिध्य प्राप्त हुआ। फिर वे सभी तीर्थो, नगरों आदि का भ्रमण करते हुए कन्याकुमारी पहुंचे। यहां श्री मंदिर के पास ध्यान लगाने के बाद उन्हें भारतमाता के भावरूप में दर्शन हुए और उसी दिन से उन्होंने भारतमाता के गौरव को स्थापित करने का निर्णय लिया।
स्वामी जी ने 11 सितम्बर 1863 को अमेरिका के शिकागो में आयोजित धर्मसभा में हिंदुत्व की महानता को प्रतिस्थापित करके पूरे विश्व को चौंका दिया। उनके व्याख्यानों को सुनकर पूरा अमेरिका ही उनकी प्रशंसा से मुखरित हो उठा। न्यूयार्क में उन्होंने ज्ञानयोग व राजयोग पर कई व्याख्यान दिये। उनसे प्रभावित होकर हजारों अमेरिकी उनके शिष्य बन गये। उनके लोकप्रिय शिष्यों में भगिनी निवेदिता का नाम भी शामिल है। स्वामी जी ने विदेशों में हिंदू धर्म की पताका फहराने के बाद भारत वापस लौटे।
स्वामी विवेकानंद हमें अपनी आध्यात्मिक शक्ति में विश्वास रखने के लिए प्रेरित करते हैं।वे राष्ट्र निर्माण से पहले मनुष्य निर्माण पर बल देते हैं अतः देश की वर्तमान राजनैतिक एवं सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए देश के युवा वर्ग को स्वामी विवेकानंद के जीवन एवं साहित्य का गहन अध्ययन करना चाहिये। युवा पीढ़ी स्वामी विवेकानंद के विचारों से अवश्य ही लाभान्वित होगी। स्वामी विवेकानंद युवाओं से कहते थे कि बल ही जीवन है और दुर्बलता मृत्यु। युवा वर्ग स्वामी जी के वचनों का अध्ययन कर उनकी उद्देष्य के प्रति निष्ठा, निर्भीकता एवं दीन दुखियों के प्रति गहन प्रेम और चिंता से अत्यंत प्रभावित हुआ है। युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद के अतिरिक्त अन्य कोई अच्छ मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक नहीं हो सकता।
प्रेषकः- मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. -09198571540

सड़क दुर्घटना में घायल को Golden Hour में अस्पताल पहुँचाकर राहवीर बनें और 25,000 का पुरस्कार पाएं

उप्रससे ,अजय बरया

ललितपुर- राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दृष्टिगत जिलाधिकारी जनपद ललितपुर व पुलिस अधीक्षक, मो0 मुश्ताक के निर्देशन जनपद ललितपुर के थाना पुलिस द्वारा गांव-गांव जाकर एवं जनचौपाल के माध्यम से ग्रामिणों/ वाहन चालकों/आम जनमानस को सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान कर जागरूक किया गया।

अभियान के अंतर्गत पुलिस द्वारा ग्रामिओं/ वाहन चालकों / आम नागरिकों को यातायात नियमों के पालन के संबंध में निम्नलिखित जानकारियाँ प्रदान की गई

दो-पहिया वाहन पर दोनों सवारियों के लिए हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य है।
चार-पहिया वाहन में चालक सहित सभी सवारियों के लिए सीट बेल्ट का प्रयोग अनिवार्य है ।
दो पहिया वाहन पर तीन सवारी न बैठाने के नियम का पालन ।
रॉन्ग साइड ड्राइविंग न करने एवं निर्धारित दिशा में ही वाहन चलाने की अपील ।
कोहरे के समय वाहन धीमी गति से चलाएं तथा आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखें
वाहन चलाते समय हेडलाइट, फॉग लाइट प्रयोग करें
वाहन पर रिफ्लेक्टर लगाएँ, ताकि अंधेरे या कम रोशनी में अन्य चालक आपको आसानी से देख सके और दुर्घटना से बचाव हो।
हाई बीम का अनावश्यक उपयोग न करें तथा दृश्यता कम होने पर सावधानीपूर्वक वाहन संचालित करें।

ड्रिंक एंड ड्राइव के संबंध में विशेष अपील

नशे की हालत में वाहन चलाना (Drunk & Drive) की स्थिति में चालक के साथ-साथ अन्य राहगीरों का जीवन भी खतरे में पड़ सकता है तथा ऐसा करना गंभीर अपराध है जिसके लिए कानून में कठोर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। अतः सभी वाहन चालकों से अपील की जाती है कि नशे की स्थिति में वाहन बिल्कुल न चलाएँ।

राहवीर बनें

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को हादसे के पहले 60 मिनट (Golden Hour) में अस्पताल पहुँचाकर राहवीर बनें और 25,000 पुरस्कार पाएं। मदद करने वाले राहवीर को पुलिस पूछताछ और कानूनी परेशानियों से सुरक्षा दी जाती है। अस्पताल, घायल व्यक्ति की सूचना पुलिस को देती है, और सत्यापन के बाद जिलाधिकारी के अनुमोदन के पश्चात पुरस्कार सीधे राहवीर के बैंक खाते में जमा किया जाता है।

बरेली में जिलाधिकारी द्वारा स्वयं जाकर विभिन्न बूथों का किया गया निरीक्षण

  • विधानसभा निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अंतर्गत आज बीएलओ द्वारा बूथों पर निर्वाचक नामावलियो के प्रालेख्य को पढ़कर सुनाया गया

बरेली, 11 जनवरी।  आज विधानसभा निर्वाचक नामावली विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत बूथों पर निर्वाचक नामावलियो कि अंन्तिम सूची को आमजन को बीएलओ द्वारा पढ़ कर सुनाया गया।

उक्त कार्य का  जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी अविनाश सिंह ने आज विभिन्न बूथों पर जाकर स्वयं निरीक्षण किया गया।

जिलाधिकारी द्वारा हाफिज सद्दीकी इण्टर कॉलेज,रविन्द्र नाथ टैगौर इण्टर कॉलेज, आर्य पुत्री इण्टर कॉलेज, सरस्वती शिशु मंदिर कॉलेज तथा साहू गोपी नाथ कन्या इण्टर कॉलेज में बूथों पर जाकर बीएलओ द्वारा किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया।

विधानसभा निर्वाचक नमावली की अंन्तिम सूची का प्रकाशन विगत दिनांक 06 जनवरी 2026 को कर दिया गया था तथा मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को भी ड्राफ्ट की सूची दे दी गयी है और यह सूची ऑनलाइन भी उपलब्ध है, जिसे कोई भी मतदाता डाउनलोड कर देख सकता है। दावा-आपत्ति आगामी 06 फरवरी 2026 तक की जा सकती है। नोटिस चरण और दावों/आपत्तियों का निस्ताण 06 जनवरी 2026 से 27 फरवरी 2026 तक होगा और अंतिम मतदाता सूची 06 मार्च 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि उक्त के अतिरिक्त 01.01.2026 के आधार पर 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे नवयुवा अथवा ऐसे अर्ह मतदाता जिनका नाम आलेख्य निर्वाचक नामावली में सम्मिलित नहीं है उनके द्वारा अपना नाम निर्वाचक नामावली में सम्मिलित करने हेतु बीएलओ से निर्धारित प्रारूप-6 प्राप्त कर अपना आवेदन कर सकते हैं।

इस अवसर पर बूथों पर ईआरओगण, सुपरवाइजर, बी.एल.ओ. सहित आमजन उपस्थित थे।

बिना फिटनेश की नही चलेगी बस सेवा, वही लोग बाड़ी बना सकते है जो अधिकृत होंगे: दयाशंकर सिंह

बलिया, 11 जनवरी 2026, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा है कि बिना फिटनेश बस सेवा नहीं चलेगी। इसके लिए राष्ट्रीय मानक तय हैं। अधिकृत संस्था ही फिटनेस कर सकती है।
एक कार्यक्रम के दौरान यूपी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने ओवर लोड गाड़ियों को रोककर देखा ।सड़क सुरक्षा को लेकर किए गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि एक जनवरी से लेकर पूरे जनवरी तक सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है।लोगों को जागरूक किया जा रहा है और जो भी सांकेतिक है सड़क सुरक्षा को लेकर सभी को पालन करना चाहिए इस समय कोहरा का समय चल रहा है और गाड़ियों को धीमी गति से ले जाए। क्योंकि दुर्घटना को रोकना हम सभी का दायित्व है।पूरे देश के मंत्रियों के साथ नितिन गडकरी के निर्देश पर मीटिंग हुई है कई जगह घटनाएं घटी है। उत्तर प्रदेश के मोहन लालगंज में भी घटना घटी जिसमे पांच लोग जलकर मर गए उसमे राजस्थान में घटनाएं हुई बहुत सारे प्रांत में घटनाएं हुई है जो छोटे छोटे बाड़ी बिल्डर है जो मानक के अनुरूप बाड़ी नही बना रहे है कई जगह यह देखने को मिला कि मार्सिटिज और बोल्वो के फर्जी बाड़ी बना दे रहे है।उनपर स्टार लिख दे रहे है बोलते है कि बोलवो बस है वह ओरीजिनल नही होती है ओरीजिनल वायर नही लगाते है उसका जो नियम है उसकी थिकनेस नही होती बाड़ी की इस लिए दुर्घटनाएं बढ़ती है अब उसपर कानून बनने जा रहा है अब वही लोग बाड़ी बना सकते है जो अधिकृत होंगे और इसका एक मानक तय होगा राष्ट्रीय स्तर पर और बहुत जल्द इस पर भारत सरकार का निर्देश प्राप्त होगा।

January 10, 2026

समाज के लिए भी रोज कुछ करो: मोहन भागवत

सुदामा कुटी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर मनाया जा रहा शताब्दी महोत्सव

मथुरा, 10 जनवरी 2026 (उप्रससे)। वृंदावन की सुदामा कुटी आश्रम के शनिवार को 100 वर्ष पूर्ण हुए। इस उपलक्ष्य में 10 दिवसीय शताब्दी महोत्सव  बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। नाभापीठाधीश्वर सुतीक्ष्णदास महाराज के अनुसार आश्रम का शताब्दी महामहोत्सव मनाया जा रहा है। रोजाना 10 दिन तक आध्यात्मिक आयोजन होंगे। यहां हजारों लोग पहुंचेंगे।हर दिन सुबह 8 से 10 बजे तक श्रीराम महायज्ञ होगा। पूरे आयोजन में 11 टन हवन सामग्री और 200 पीपा देसी घी का इस्तेमाल होगा। शाम के समय यहां भजन कीर्तन होंगे, इसमें हर दिन अलग-अलग संत शामिल होंगे। शताब्दी महोत्सव में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत शामिल होकर दीप प्रज्जवलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने सुदामा दास जी महाराज के जीवन परिचय और नाभा पीठ का परिचय जानने के लिए प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया।

इसके बाद उन्होंने संबोधित करते हुए कहा- वह हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। लेकिन जैसे हमें तैयार होना है, वैसे हम तैयार नहीं हुए हैं। इसलिए वह हमारे सामने नाच रहे हैं। अंदर से खोखले हो गए हैं, सारी दुनिया में हार रहे हैं। जैसे-जैसे सनातन धर्म के सब लोग एक होते जाएंगे। वैसे-वैसे यह टूटते जाएंगे। आप देख लीजिए पिछले 50 सालों में जैसे-जैसे हिंदू एक होता गया। वैसे-वैसे इनके टुकड़े होते चले गए। मंच पर पीठाधीश्वर बलराम दास, कमल नयन दास महाराज, साध्वी ऋत्मभरा, ज्ञानानंद महाराज, गौरी शंकर दास महाराज, कुमार स्वामी, राजेंद्र दास महाराज, भूरी वाले बाबा, सुदर्शन दास महाराज, मनोज मोहन शास्त्री, विहिप के बड़े दिनेश भी मौजूद थे।

सुबह में आश्रम से शोभयात्रा निकाली गई। महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज रथ पर सवार होकर भ्रमण करने निकले। शोभायात्रा अलग-अलग चौराहों से होते हुए दोपहर 3 बजे वापस सुदामा कुटी आश्रम पहुंची थी। मोहन भागवत ने मंच पर कहा कि अपने लिये रोज करते हो, अपने परिवार के लिए रोज करते हो, तो समाज के लिए भी रोज कुछ करो।

सुदामा कुटी की स्थापना 1926 में हुई

सुदामा कुटी की स्थापना सुदामादास महाराज ने 1926 में की थी। सुदामा कुटी आश्रम बंसीवट और गोपेश्वर महादेव मंदिर के बीच स्थित है, जहां हजारों संतों की निशुल्क सेवा की जाती है। आश्रम के महंत अमरदास महाराज ने बताया-सुदामादास महाराज का जन्म बिहार के गोपालगंज स्थित छिपाया गांव में 1899 में हुआ था। वह पहले अयोध्या में कुछ दिन रहे। इसके बाद 1926 में वृंदावन आ गए। तब से ही वे संत सेवा में लग गए। सुदामा कुटी में कई मंदिर हैं जहां सुबह से शाम तक भर्जन कीर्तन चलता रहता है। संतों की सेवा में लगे संत गोशाला में गोसेवा भी करते हैं।

शताब्दी महोत्सव में गृहमंत्री, रक्षामंत्री समेत कई राज्यों के सीएम पहुंचने की संभावना

10 दिन चलने वाले आयोजनों में 4 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। साथ ही, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भी न्योता भेजा गया है। 2025 में सुदामा कुटी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी आ चुकी हैं। वह स्पेशल ट्रेन से दिल्ली से वृंदावन पहुंची थीं। वृंदावन में यमुना किनारे पूजास्थल तैयार किए गए हैं, यहां हर रोज 10 हजार लोग फ्री भोजन करेंगे। इस कुटी के बारे में कहा जाता है कि कोई भी इस कुटी से भूखा नहीं लौटता है, यहां लोगों और संतों की सेवा 24 घंटे चलती रहती है।

 

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