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भाषा संवाद के लिए, विवाद के लिए नहीः आशुतोष राणा

January 23, 2026

भाषा संवाद के लिए, विवाद के लिए नहीः आशुतोष राणा

Udeesha Chaupala Sahityotsav Moradabad

उदीषा साहित्योत्सव में गुरुकुल चोटीपुरा अमरोहा का छात्राएं वैदिक ऋचाओं का पाठ करती हुईं

मुरादाबाद, 22 जनवरी 2026 (उ.प्र.समाचार सेवा)। भाषा संवाद के लिए है विवाद के लिए नहीं। भाषा कभी भी विवाद का विषय नहीं रही है, यह संवाद का माध्यम है। ये उद्गार फिल्म अभिनेता, लेखक, निर्देशक आशुतोष राणा ने उदीषा चौपाला साहित्योत्सव के उद्धाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये।

श्री राणा ने भाषा और संवाद को लेकर फैले भ्रम को दूर किया। उन्होंने इसकी स्पष्टता को उजागर करते हुए कहा कि भाषा के आधार पर  टकराव से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा के माध्यम से विवाद किया जा सकता है लेकिन भाषा कभी विवाद का विषय नहीं रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कभी अपनी भाषा को किसी पर थोपना नहीं चाहिए। मैं स्वयं भी इस बात का ध्यान रखता हूं। कोई किसी भी भाषा में संवाद करे मैं अपनी भाषा में करता हूं। यही संवाद की सच्ची भावना है।

श्री राणा ने संवाद के मंच से कहा कि भाषा किसी किताब से अधिकार संस्कार और परिवेश से सीखी जाती है। उन्होंने कहा व्यक्ति की पहचान ही भाषा से है। यदि व्यक्ति की भाषा में शिष्टता और शालीनता नहीं है, ऊर्जा नहीं है तो आप कभी भी श्रेष्ठ व्यक्ति के रूप में नहीं जाने जाएंगे। उन्होंने परिवारों और अभिभावकों को संदेश दिया कि बच्चों के साथ बड़ी बड़ी वातें कीजिए ताकि वे बड़ा सोचें। उन्होंने कहा कि बड़ों से छोटी बात सुनके मन को कष्ट होता है।

संगीत सुनने से सुनने से ही समझ में आता हैः गुलाम अब्बास खान

गायक गुलाम अब्बास खान ने संस्कृति, गायन के सत्र में मंच पर चर्चा सत्र में कहा कि संगीत सीखने पर 20 प्रतिशत ही समझ में आता है, 80 प्रतिशत सुनने पर ही समझ में आता है। उन्होंने रियाज, तालमेल और सुनने पर चर्चा की। उन्होंने कई गजलों को सुनाया। खान ने कहा कि वे मुम्बई में रहते हैं लेकिन अपने घराने से जुड़े हुए हैं।

पार्श्व गायक सुखविन्दर सिंह ने किया गायन

साहित्योत्सव के मंच पर जब पार्श्व गायक सुखविन्दर सिंह पहुंचे तो युवक युवतियों में भारी उत्साह आ गया। उनके गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। इस दौरान वीडियो  बनाने और सेल्फी लेने की होड़ लगी रही।

 

 

January 22, 2026

यमुना एक्सप्रेसवे पर बस बनी आग का गोला

  • यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर बचाई जान
  • बांदा से दिल्ली जा रही थी स्लीपर बस
मथुरा।थाना राया क्षेत्र के अंतर्गत यमुना एक्सप्रेस-वे माइल स्टोन 110 पर गुरुवार की सुबह करीब 5.15 बजे चलती बस आग का गोला बन गई। इस घटना को देख यात्रियों में कोहराम मच गया। मौत को सामने देख यात्रियों ने खिड़की-दरवाजों से कूदकर जान बचाई सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की 4 गाड़ियों ने डेढ़ घंटे में आग पर काबू पाया।
पुलिस के मुताबिक  हादसा गुरुवार सुबह 5.15 बजे यमुना एक्सप्रेस-वे के राया थाना क्षेत्र में हुआ। स्लीपर बस (UP 90 AT 8837) बांदा से दिल्ली जा रही थी। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण टायर फटना बताया जा रहा है। सभी यात्री सुरक्षित हैं। यात्रियों को अन्य दूसरी बस में बैठाकर गंतव्य स्थान पर भेज दिया गया है।

मुरादाबाद में सांस्कृतिक महोत्सव उदीषा का उद्घाटन

https://x.com/Comm_Moradabad/status/2013287427574833556?t=bdt1z8vIuIKQIBv9r6NydQ&s=08

https://x.com/Comm_Moradabad/status/2013287427574833556?t=bdt1z8vIuIKQIBv9r6NydQ&s=08

Ashutosh Rana inUdeesha Chaupala Mahotsav Moradabad

मुरादाबाद के गांधी मैदान में उदीषा चौपाला महोत्सव का उद्घाटन एक्टर आशुतोष राना ने किया

आशुतोष राणा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारम्भ

मुरादाबाद, 22 जनवरी 2026 (उ.प्र.समाचार सेवा)। बहुप्रतीक्षित, बहुआयामी सांस्कृतिक महोत्सव का शुभारम्भ आज अपरान्ह मण्डल के जनप्रतिनिधियों, राष्ट्रीय ख्याति के रंगमंचीय, सिने जगत और अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। बसंत पंचमी की पूर्व संध्या से आरम्भ हुआ साहित्योत्सव उदीषा चौपाला उत्तर प्रदेश दिवस और गणतंत्र दिवस के गौरव को समेटे हुए है। चार दिवसीय महोत्सव में जहां विविध सांस्कृतिक आयामों का आगाज होगा, वहीं विविध क्षेत्रों की प्रतिभाओं का मुरादाबाद के इस साहित्य मंच पर आगमन हो रहा है।

उदीषा चौपाला साहित्योत्सव में मंडलायुक्त मुरादाबाद आंजनेय कुमार सिंह

उदीषा साहित्यात्सव के उदघाटन समारोह में दीप प्रज्ज्वलित करते हुए मंडलायुक्त मुरादाबाद आंजनेय कुमार सिंह

दिल्ली मार्ग स्थित बुद्धि बिहार के गांधी मैदान में आयोजित हो रहे उदीषा चौपाला का विधिवत उद्घाटन अपरान्ह 2 बजे फिल्म जगत की पहचान आशुतोष राणा ने किया। इस अवसर पर विधान परिषद् सदस्य डा. जय पाल सिंह व्यस्त एवं सत्यपाल सिंह सैनी विधायक रितेश गुप्ता एवं रामवीर सिंह, महापौर विनोद अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष डा. शैफाली चौहान, मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक मुनिराज, स्वामी कैलाशानन्द जी महाराज, जिलाधिकारी अनुज सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्यपाल अंतिल, कुलपति गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय प्रो.सचिन माहेश्वरी, नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुभव सिंह, गुरुकुल चोटीपुरा की प्रमुख डा. सुमेधा, बाल आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता समेत नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति, साहित्यकार, रंगमंच कलाकर और उद्यमी उपस्थित थे।

Udeesha Chaupala

मुरादाबाद में उदीषा चौपाला के मंच पर विधान परिषद् सदस्य डा जय पाल सिंह व्यस्त, मेयर विनोद अग्रवाल और मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह का स्वागत

उदीषा में क्या है खास

उदीषा साहित्योत्सव विविध आयामी है। इसके कई मंच होंगे। इनमें साहित्य मंच पर मुरादाबाद मंडल के साहित्य और लेखन की चर्चा होगी, तो पुस्तक मेले में ख्यातिनाम साहित्यकारों, लेखकों की पुस्तकें प्रमुख प्रकाशकों के स्टाल पर मिलेंगीं। रंगमंच में भारत की विलक्षण कलाओं, गायन, मंचन से लेकर सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति होगी। इसमें खासतौर से पारसी नाटक की विधा से दर्शक एक बार परिचित होंगें तो शास्त्रीय संगीत और नृत्य के साथ ओडिसी, कथक जैसी प्रस्तुतियां भी यहां मिलेंगी। मुरादाबाद की रामलीला शैली को उदीषा के मंच पर सजीव मंचन के रूप मे देखा जा सकेगा। बरेली के राधेश्याम कथावाचक की नाटक और गायन शैली को यहां एक बार फिर जीवंत किया जाएगा।

वंदे मातरम के 150 वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय भावना को प्रदर्शित करती थीम पर राष्ट्र भक्ति की अनुभूति आगंतुकों को होगी।

January 21, 2026

मातृशक्ति की भव्य कलश यात्रा से नगर में गूंजे राष्ट्रभक्ति के नारे

Hathras, Matra Shakti Sammelan

मातृशक्ति की भव्य कलश यात्रा से नगर में गूंजे राष्ट्रभक्ति के नारे

कार्यक्रम में उपस्थित पालिकाध्यक्ष स्वेता दिवाकर व अन्य जनप्रतिनिधि

हाथरस, 21 जनवरी 2026, दाऊजी महाराज हिन्दू सम्मेलन समिति के तत्वावधान में मातृशक्ति द्वारा हिन्दू सम्मेलनों के जनजागरण के उद्देश्य से नगर में विशाल कलश यात्रा श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ निकाली गई। कलश यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर राष्ट्रभक्ति और पारंपरिक गीतों की धुन पर नाचते-गाते चलती रहीं। भगवा पताकाएं लहराती रहीं और जय श्री राम, भारत माता की जय के नारों से वातावरण देशभक्ति मय हो गया।
कलश यात्रा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय से प्रारंभ होकर घंटाघर, नजिहाई बाजार, मोती बाजार, नयागंज, चक्की बाजार, सर्कुलर रोड, कमला बाजार और रामलीला ग्राउंड होते हुए पुनः पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय पर संपन्न हुई। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। भव्य रूप से सजी बग्घी में भारत माता के स्वरूप में सजी बाल कन्या आकर्षण का केंद्र रही, जहां-जहां यात्रा पहुंची वहां भारत माता की आरती उतारी गई।कलश यात्रा से पूर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ब्रजप्रान्त प्रचारक धर्मेन्द्र ने मातृशक्ति से हिन्दू सम्मेलनों में सहभागिता करने का आह्वान करते हुये कहा  कि हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य समाज को जोड़ना, सांस्कृतिक मूल्यों को जाग्रत करना और आने वाली पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि सभ्य एव संस्कारित समाज निर्माण में मातृशक्ति  का योगदान महत्वपूर्ण होता है। मातृशक्ति संस्कृति और परंपराओं की संरक्षक होने के साथ समाज को एक नई दिशा देती है। एकजुट कर सशक्त परिवार और समाज बनाती है।  हम सभी अपनी जिम्मेदारी के लिये आगे बढ़कर आयेंगे तो निश्चित ही एक सांस्कारिक समाज के साथ सशक्त और विकसित राष्ट्र का निर्माण होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्ष  दीप्ति वार्ष्णेय ने कहा कि नारी शक्ति समाज की रीढ़ है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से महिलाओं की सहभागिता और नेतृत्व क्षमता को नया आयाम मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन सारिका बहन ने किया।
कलश यात्रा में महिला जनप्रतिनिधि विधायक सदर अंजुला सिंह माहौर , जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय ,पालिकाध्यक्ष स्वेता चौधरी , ब्लॉक प्रमुख हाथरस पूनम पांडेय  ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
इस अवसर पर रूमी अग्रवाल , ऋतु गौतम ,स्मृति पाठक , दीप्ति वार्ष्णेय ,प्रियंसी वार्ष्णेय , संध्या आर्य  ,बबली चाहर , सारिका ,प्रगति कौशिक , अखिलेश गुप्ता ,पूनम सेंगर , दीक्षा कुशवाह , माधवी सिंह ,शालनी पाठक , उषा पाठक , कवियत्री मीरा दीक्षित , दिशा कुशवाह आदि काफी संख्या में मातृशक्ति मौजूद रही।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में विधायिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण: ओम बिड़ला

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं को नियोजित गतिरोध पर चेताया

Lok Sabha Ahyaksh Om Bidla address 86th AIPOC

सदन में नियोजित गतिरोध पर दलीय नेताओं को चेताया

86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) लखनऊ में संपन्न; लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र को किया संबोधित

विधायिका को अधिक प्रभावी और जनोपयोगी बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा: लोक सभा अध्यक्ष

राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए: लोक सभा अध्यक्ष

Disruption नहीं, Discussion और Dialogue की संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा: लोक सभा अध्यक्ष

पीठासीन अधिकारी संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक हैं: लोक सभा अध्यक्ष

लखनऊ; 21 जनवरी, 2026: उत्तर प्रदेश विधान भवन, लखनऊ में 19 से 21 जनवरी, 2026 तक आयोजित 86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) आज लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन भाषण के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य सभा के  उपसभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के  सभापति एवं उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष ने अपने विचार व्यक्त किए।

अपने समापन भाषण में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा, जिससे देशभर के विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि हो सके। उन्होंने इस संबंध में एक समिति के गठन की जानकारी भी दी।
श्री बिरला ने कहा कि राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विधानमंडल जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का एक प्रभावी मंच बन सकें। उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।

नियोजित गतिरोध लोकतंत्र के लिए हानिकारक 

लोक सभा अध्यक्ष ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया। आगामी बजट सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के बारे में सवाल का जवाब देते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में लगातार नियोजित गतिरोध और व्यवधान देश के लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हैं। जब सदन में व्यवधान होता है, तो सबसे अधिक नुकसान उस नागरिक का होता है जिसकी समस्या पर चर्चा होनी थी। उन्होंने कहा कि हमें Disruption नहीं, बल्कि Discussion और Dialogue की संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा।

उन्होंने सभी दलों के नेताओं व सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की तथा कहा कि लोकतंत्र में लोक सर्वोपरि है, और जनता के प्रति हमारी जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर दिन और हर क्षण है।
श्री बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी केवल कार्यवाही संचालित करने वाले नहीं होते, बल्कि वे संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक होते हैं। उनकी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और दृढ़ता ही सदन की दिशा तय करती है।

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में कुल छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए

संकल्प संख्या 1 – सभी पीठासीन अधिकारी अपनी-अपनी विधायिकाओं के कार्य संचालन के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करेंगे, ताकि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दिया जा सके।

संकल्प संख्या 2 – सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाकर राज्य विधायी निकायों की न्यूनतम तीस (30) बैठकें प्रति वर्ष की जाएँ तथा विधायी कार्यों के लिए उपलब्ध समय और संसाधनों का रचनात्मक एवं प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाएं जनता के प्रति उत्तरदायी हो सकें।

संकल्प संख्या 3 – विधायी कार्यों की सुगमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को निरंतर सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके।

संकल्प संख्या 4 – सहभागी शासन की सभी संस्थाओं को आदर्श नेतृत्व प्रदान करना निरंतर जारी रखना, ताकि राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराएँ और मूल्य और अधिक गहरे तथा सशक्त बन सकें।

संकल्प संख्या 5 – डिजिटल प्रौद्योगिकी के कुशल उपयोग के क्षेत्र में सांसदों एवं विधायकों की क्षमता निर्माण का निरंतर समर्थन तथा विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ़ करना।

संकल्प संख्या 6 – विधायी निकायों के कार्य संपादन का वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर मूल्यांकन एवं तुलनात्मक आकलन (बेंचमार्किंग) करने हेतु एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) का निर्माण, जिससे जनहित में अधिक उत्तरदायित्व के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने हेतु अनुकूल वातावरण स्थापित हो सके।

तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई।
• पारदर्शी, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग,
• विधायकों की क्षमता-वृद्धि द्वारा कार्यकुशलता में सुधार एवं लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना, तथा
• जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही।

इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से 36 पीठासीन अधिकारियों ने भागीदारी की। इस प्रकार सहभागिता की दृष्टि से 86वाँ AIPOC अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन रहा।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाते हैं, आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
श्री बिरला ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश विधान सभा, विधान परिषद, लोक सभा एवं राज्य सभा सचिवालय, तथा सभी प्रतिभागी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

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