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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजादी की लड़ाई को नई गति प्रदान की

January 23, 2026

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजादी की लड़ाई को नई गति प्रदान की

मुख्यमंत्री ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती ‘पराक्रम दिवस’ पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित किया
Neta Ji Subhash Chandra Bose

नेताजी की जयंती पराक्रम दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ : 23 जनवरी, 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आज पावन जयन्ती है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारत की आजादी का एक ऐसा नाम है, जिसके माध्यम से प्रत्येक भारतीय को उनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व का बोध होता है। उनके व्यक्तित्व से राष्ट्र के प्रति निष्ठा का भाव, असीम साहस, वीरता और निःस्वार्थ सेवा की प्रेरणा प्राप्त होती है।
मुख्यमंत्री जी आज यहां नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती ‘पराक्रम दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश सरकार व प्रदेशवासियों की ओर से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा के सम्मुख स्थित उनके चित्र पर पुष्प अर्पित उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के अभियान में दिये गये योगदान के कारण प्रत्येक भारतवासी नेताजी के प्रति अत्यन्त श्रद्धा व सम्मान का भाव रखता है। हमें उनके व्यक्तित्व में ओज, तेज और किसी विपरीत परिस्थिति में भी देशद्रोही और देश विरोधी तत्वों के सामने न झुकने का दृढ़ संकल्प दिखाई देता है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म सन् 1897 में कटक में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा ब्रिटेन से प्राप्त की। नेताजी ने उस समय की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त होने के बावजूद, ब्रिटिश हुकूमत के अधीन कार्य करने से मना कर दिया और भारत के स्वाधीनता आन्दोलन में कूद पड़े।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब पूरा देश गांधी जी के नेतृत्व में स्वाधीनता आन्दोलन को एक नई दिशा देने की ओर अग्रसर था। उन परिस्थितियों में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने भारत के क्रान्तिकारियों के सिरमौर के रूप में आजादी की लड़ाई को नई गति प्रदान की थी। उन्होंने देश की आजादी के लिये भारत के अंदर तथा बाहर अभूतपूर्व योगदान दिया। देश की आजादी की लड़ाई के दौरान उनके द्वारा किया गया आह्वान कि ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ भारत के नागरिकों के लिये मंत्र बन गया था। इस नारे ने युवाओं को देश की आजादी की लड़ाई में भाग लेने के लिये अत्यन्त प्रोत्साहित किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का उद्घोष ‘दिल्ली चलो’ प्रत्येक भारतीय को आज भी प्रेरित करता है। आज भी ‘कदम कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा’ भारतीय सेना के रिक्रूट व कमीशन प्राप्त अधिकारी अपने दीक्षांत समारोह में बड़ी शान के साथ गाते हैं। यह भी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की देन है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा व अमरेश कुमार, विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह, डॉ0 महेन्द्र कुमार सिंह, पवन कुमार सिंह तथा सलाहकार मुख्यमंत्री अवनीश कुमार अवस्थी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

वाइफ स्वैपिंग और हमारे रिश्तों की टूटती नींव: समाज का आईना 

– डॉ. प्रियंका सौरभ
कुछ विषय ऐसे होते हैं जिन पर लिखना आसान नहीं होता। वे केवल शब्दों की नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और नैतिक साहस की भी माँग करते हैं। यह विषय भी उन्हीं में से एक है, जहाँ चुनौती केवल प्रस्तुति की नहीं, बल्कि उस सच को सामने लाने की है जिसे समाज अक्सर ढककर रखना चाहता है। संस्कृति की आड़ में या आधुनिकता के नाम पर जिस चुपचाप गिरावट को स्वीकार किया जा रहा है, उस पर प्रश्न उठाना अब ज़रूरी हो गया है। आज जब परिवार की पवित्र संस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, ‘वाइफ स्वैपिंग’ जैसी प्रवृत्ति न केवल वैवाहिक बंधनों को चुनौती दे रही है, बल्कि पूरे समाज के मूल्यों को झकझोर रही है।
“वाइफ स्वप्पिंग” सुनते ही अधिकतर लोग इसे पश्चिमी संस्कृति या महानगरों तक सीमित मान लेते हैं। यह सोच हमें आत्मसंतोष देती है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक असहज और व्यापक है। क्या यह प्रवृत्ति वास्तव में केवल बड़े शहरों तक सीमित है, या फिर इसकी छाया गाँवों और छोटे कस्बों तक भी पहुँच चुकी है—बस हम उसे देखने से बच रहे हैं? उत्तर प्रदेश, केरल और लद्दाख जैसे क्षेत्रों से सामने आए मामले बताते हैं कि यह समस्या ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर मौजूद है।
यह विषय सनसनी फैलाने के लिए नहीं, बल्कि समाज के भीतर बदलते रिश्तों को समझने के लिए ज़रूरी है। यह विवाह संस्था की कमजोर होती नींव, रिश्तों में बढ़ती दरार और आधुनिकता के नाम पर मूल्यों की गलत व्याख्या की ओर ध्यान दिलाता है। यह केवल शारीरिक इच्छा का प्रश्न नहीं, बल्कि असुरक्षा, मानसिक अधूरापन, संवादहीनता और सामाजिक पाखंड का परिणाम भी है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से इसमें भावनात्मक शोषण, ईर्ष्या और विश्वास का पूर्ण विघटन होता है।
इस तरह के संवेदनशील विषय को संतुलित और मर्यादित भाषा में रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि गंभीरता बनी रहे। यह भी सामने आता है कि किस प्रकार सामान्य दिखने वाले परिवार धीरे-धीरे ऐसे कुचक्र में फँस जाते हैं, जहाँ रिश्ते भावनाओं की जगह समझौते और दिखावे का रूप ले लेते हैं। बैंगलोर, हापुड़ जैसे स्थानों से सामने आए मामले इसकी पुष्टि करते हैं।
आज यह मान लेना भूल होगी कि ऐसी प्रवृत्तियाँ केवल महानगरों तक सीमित हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट ने जहाँ स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के नए रास्ते खोले हैं, वहीं मूल्यों के क्षरण को भी आसान बना दिया है। आभासी दुनिया में “सामान्य” लगने वाली भाषा, व्यवहार और रिश्ते वास्तविक जीवन में परिवारों की नींव हिला रहे हैं। आईटी क्रांति, उपभोक्तावादी संस्कृति और पश्चिमी प्रभाव ने युवा वर्ग में प्रयोग की होड़ बढ़ाई है। आर्थिक असमानता, संयुक्त परिवार का विघटन और महिलाओं की आर्थिक निर्भरता इसे बढ़ावा दे रही हैं। मनोवैज्ञानिक रूप से यह यौन असंतोष, ईर्ष्या और रोमांच की तलाश से उपजता है।
भारतीय संदर्भ में यह पुरुषप्रधान समाज की देन है। पत्नियाँ डर के मारे चुप रहती हैं—तलाक का कलंक, आर्थिक असुरक्षा या परिवार का विघटन। सोशल मीडिया ग्रुप्स ने इसे संगठित रूप दिया है। टियर-2 शहरों में तकनीक-साक्षर युवा इसमें लिप्त हैं। इसके प्रभाव विनाशकारी हैं। वैवाहिक स्तर पर विश्वास टूटता है, ईर्ष्या बढ़ती है, भावनात्मक लगाव नए पार्टनर से हो जाता है। बच्चों पर असर लंबे समय तक रहता है—वे असुरक्षा और रिश्तों की अस्थिरता सीखते हैं। विस्तारित परिवार समर्थन छोड़ देता है। समाज स्तर पर यह नैतिक क्षय और महिलाओं के शोषण को बढ़ावा देता है। भारत में परिवार संरचना बदल रही है, लेकिन यह विकृति नई चुनौतियाँ ला रही है।
यह विमर्श केवल प्रश्न खड़े नहीं करता, बल्कि समाधान की ओर भी संकेत करता है। परिवार स्तर पर खुला संवाद, काउंसलिंग, भावनात्मक अंतरंगता आवश्यक है। समाज स्तर पर स्कूलों में नैतिक शिक्षा, महिलाओं का सशक्तिकरण ज़रूरी है। कानूनी स्तर पर IPC धाराओं का सख्त उपयोग, परिवार परामर्श नीतियाँ बनानी चाहिए।
यह विषय अश्लीलता नहीं, बल्कि समाज का आईना है। यह पाठक को असहज करता है, सोचने पर मजबूर करता है। शायद इसी असहजता में इसका सबसे बड़ा सामाजिक महत्व निहित है—कि हम अपने रिश्तों को पुनः परिभाषित करें। समय है जागने का।
  (डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)

बैंकों में भी 5 कार्य दिवस की एक मात्र मांग

Bank Officer's Association, NBEA

पत्रकारों से वार्ता करते हुए बैंक एसोसिएशन के पदाधिकारी

लखनऊ 23 जनवरी 2026, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस द्वारा 5 दिवसीय बैंकिंग लागू न करने के विरोध में आज स्टेट बैंक, प्रधान कार्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए दिनेश कुमार सिंह, महामंत्री (एनसीबीई) ने बताया कि बैंक शाखाओं में कर्मचारियों व अधिकारियों पर बढ़ते तनाव एवं दबाव को देखते हुए यूनाइटेड फोरम ने पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करने की मांग की थी।

सिंह ने कहा कि अन्य वित्तीय संस्थानों जैसे रिजर्व बैंक, जीवन बीमा, सेबी, नाबार्ड, जीआईसी तथा विभिन्न सरकारी विभागों में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है, किंतु सरकार बैंककर्मियों की इस एक मात्र मांग की उपेक्षा कर रही है।

उन्होंने आगे बताया कि बैंकों में पहले से ही दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश हो रहा है तथा आईबीए और यूएफबीयू की सहमति के अनुसार शेष बचे 2/3 शनिवारों को भी अवकाश घोषित करने के बदले बैंककर्मी सोमवार से शुक्रवार प्रत्येक दिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य किया करेंगे।

विदित हो कि कल मुख्य श्रमायुक्त से हुई समझौता वार्ता में भी सरकार की हठधर्मिता के कारण कोई हल नहीं निकल पाया। अतः बाध्य होकर बैंककर्मी आगामी 27 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने जा रहे हैं। इस हड़ताल के कारण जन समुदाय को होने वाली असुविधा के लिए सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है।

फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया बैंक कर्मियों ने अनेक प्रदर्शन, धरना, ट्विटर अभियान, रैली आदि करके सरकार से इस मांग को पूरा करने का आग्रह किया, पर सरकार अभी भी अपनी जिद पर है।

प्रेस वार्ता को फोरम के वरिष्ठ पदाधिकारियों सर्वश्री लक्ष्मण सिंह, आर.एन शुक्ला, शकील अहमद, वी के माथुर, संदीप सिंह, विभाकर कुशवाहा, प्रभाकर अवस्थी, बी डी पाण्डेय आदि ने संबोधित किया।

अनिल तिवारी, मीडिया प्रभारी ने बताया कि 27 जनवरी को होने वाली देशव्यापी बैंक हड़ताल के दिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मियों द्वारा इंडियन बैंक, हजरतगंज में 11:30 बजे से सभा एवं विशाल प्रदर्शन किया जाएगा।

पत्रकारिता का मूल आधार है सत्य, निष्पक्षता व जनहित -राजीव

ललितपुर। मां सरस्वती जी के अवतरण दिवस (बसंत पंचमी) एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जन्म जयंती पं. गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकार भवन में प्रेस क्लब रजि. के तत्वाधान में धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले सप्पू ने की। वहीं संचालन महामंत्री अमित सोनी ने किया।

इस मौके पर मां सरस्वती जी के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर माल्र्यापण किया गया। वहीं नेताजी के आदर्शो पर चलने आवाहन किया गया। इस मौके पर प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले सप्पू ने कहा कि पत्रकारिता का मूल आधार सत्य निष्पक्षता और जनहित है। मां सरस्वती जी के आर्शीवाद से ही सशक्त होता है। पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व है। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पत्रकार कुन्दन पाल की पूज्यनीय माता जी के निधन पर दो मिनट का मौन धारण कर शोक संवेदनाएं प्रकट की गयीं। इस मौके पर प्रेस क्लब संरक्षक संतोष शर्मा, मंजीत सिंह सलूजा, पवन संज्ञा, अजित जैन भारती, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय जैन कल्लू, अजय तिवारी नीलू, डा. संजीव जैन बजाज, कोषाध्यक्ष अमर प्रताप सिंह, राजीव कुमार शुक्ला, जसपाल सिंह, अजय बरया, प्रमोद गोस्वामी, सौरभ कुमार, अशोक तिवारी, बृजेश तिवारी, अशोक गोस्वामी, अनूप सेन, बृजेश पंथ, रविशंकर सेन, अक्षय दिवाकर, रवि जैन चुनगी, अनूप मोदी, विनीत चतुर्वेदी, लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा, मो. नसीम खान, राहुल कुमार जैन, रमेश रायकवार, अमित पाण्डेय, राहुल शुक्ला, विकास त्रिपाठी, संजना सिंह, हरीशंकर अहिरवार, सर्वदेश तिवारी, अनूप राठौर, राहुल चौबे, अजितेश भारती, पुष्पा झा, अजय तोमर, नीरज सुडेले, संजीव नामदेव, जयेश बादल, अमित जैन मोनू, पूजा कश्यप, अजय श्रीवास्तव, संभव सिंघई, बिहारी लाल सविता, निहाल सेन पटना, हितेन्द्र जैन, शिब्बू राठौर, अमित लखेरा, सुनील सैनी, शैलेन्द्र सिन्हा, सुनील जैन, अजित सिंह, संजय ताम्रकार, विनोद मिश्रा, संदीप शर्मा, दिव्यांश शर्मा, आशीष तिवारी, सूरज सिंह राजपूत, मनोज वैद्य, पंकज रैकवार, अमित राठौर, शुभम पस्तोर, स्वतंत्र रिछारिया, सोनम यादव, आशीष पाण्डेय, दीपक जैन, महेश वर्मा, अर्जुन झा, आलोक खरे, आकाश ताम्रकार, कमलेश साहू, राहुल साहू खिरिया, बलराम पचौरा, आरिफ खान, भगवत नारायण श्रोती, कपिल नायक भैंसाई, अजय सिंह, दीपक पाराशर, शैलेश जैन पिन्टू, मनीष सोनी, दीपक सोनी, नितिन गिरि, संजय जैन रिंकू, आलोक चतुर्वेदी, नीतेश जैन, भूपेन्द्र सोनी, कृष्णकांत सोनी, विकास सोनी, इमरान खान, बाबा कुरैशी, सौरभ गोस्वामी, इंद्रजीत सिंह गौतम, अजय जैन अज्जू, मनीष जैन, साहिल, राकेश श्रीवास्तव, प्रदीप रिछारिया, राजेश कुमार राठौर, महेन्द्र सिंह बुन्देला, रामप्रताप सिंह, के पी यादव सहित अनेकों पत्रकार बंधु मौजूद रहे।

बार काउंसिल चुनाव में मुरादाबाद से 3522 वकील डालेंगे वोट

एडीजे-नौ अरुण कुमार चुनाव प्रभारी बनाया गया

मुरादाबाद, 23 जनवरी 2026 (उप्र समाचार सेवा)। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में सदस्य पद का चुनाव जोरों पर है। प्रदेश में चार चरणों में चुनाव हो रहे है। तीसरा चरण 27-28 जनवरी को होगा। इस चरण में
मुरादाबाद समेत विभिन्न जिलों में वोट पड़ेंगे। मुरादाबाद में 3522 अधिवक्ता बार काउंसिल में सदस्य के लिए मतदान करेंगे। शुक्रवार को बार काउंसिल के प्रत्याशी वकीलों का समर्थन पाने की कोशिश में जुटे रहें।
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में तीसरे चरण में मतदान मंगलवार व बुधवार को होगा। काउंसिल में सदस्य पद के लिए 333 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। जबकि मुरादाबाद से भी तीन प्रत्याशियों ने दम लगाया हुआ है। सदस्य के लिए प्रत्याशी हर जिले में जमकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। चुनाव का तीसरा चरण करीब होने से शुक्रवार को खराब मौसम के बावजूद चुनावी सरगर्मी बढ़ी रही।
शुक्रवार को मुरादाबाद में बारिश के बीच बरेली से पूर्व चेयरमैन और सदस्य प्रत्याशी श्रीश मेहरोत्रा अपने समर्थकों संग पहुंचे।कचहरी और आसपास के चेंबरों में वकीलों से मिले और समर्थन पाने को जनसंपर्क किया। मुरादाबाद में प्रत्याशी सुभाष चन्द्र माथुर भी वकीलों से मिले। और समर्थन मांगा।न्याय भवन में बनेंगे 25 बूथ, होंगी चार टेबल कचहरी में न्याय भवन में 25 बूथ बनाए जाएंगे। अधिवक्ताओं सीओपी नंबर और आईडी कार्ड के बाद बैलेट पेपर मिल सकेगा।
दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने बताया कि यूपी बार काउंसिल में सदस्य पद के लिए मतदान मंगलवार व बुधवार को होगा। मुरादाबाद में 3522 वकील मतदान करेंगे। न्याय भवन में चार टेबलों पर वोटर लिस्ट होगी। सीओपी नंबर और आईडी कार्ड के बाद ही बैलेट पेपर दिया जाएगा। चुनाव प्रभारी एडीजे नौ अरुण कुमार को बनाया गया है।

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