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Hathras: डॉ. राकेश सिंह राणा के नेतृत्व में हस्ताक्षर अभियान तेज, ट्रॉमा सेंटर को चालू कराने की माँग

January 25, 2026

Hathras: डॉ. राकेश सिंह राणा के नेतृत्व में हस्ताक्षर अभियान तेज, ट्रॉमा सेंटर को चालू कराने की माँग

Rakesh Singh Rana

डा राकेश राणा का हस्ताक्षर अभियान तेज

हाथरस। सिकंदराराऊ ट्रॉमा सेंटर को सुचारु एवं पूर्ण रूप से संचालित कराए जाने की माँग को लेकर चल रहा जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में 25 जनवरी 2026 को ग्राम टाटी डांडिया, मुबारकपुर एवं टीकरी कला में हस्ताक्षर अभियान के तहत व्यापक जनसंपर्क किया गया, जहां ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हस्ताक्षर कर आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। अभियान के दौरान लोगों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिली।
इस अवसर पर पूर्व विधान परिषद सदस्य डॉ. राकेश सिंह राणा ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण लगातार जानें जा रही हैं। यह स्थिति शासन-प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले ट्रॉमा सेंटर की इमारत बनकर तैयार हो चुकी है, बावजूद इसके आज तक उसे मानकों के अनुरूप पूर्ण रूप से संचालित नहीं किया गया, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
डॉ. राणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या व्यक्तिगत स्वार्थ से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह आम जनता के जीवन और भविष्य की लड़ाई है। जब तक सिकंदराराऊ ट्रॉमा सेंटर पूरी क्षमता के साथ चालू नहीं हो जाता, तब तक यह जनआंदोलन निरंतर और और अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने भी एक स्वर में ट्रॉमा सेंटर को तत्काल चालू करने की माँग करते हुए कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ जनता का अधिकार हैं, न कि सरकार की कृपा। हस्ताक्षर अभियान में पवन पुंडीर, जोगिंदर सिंह, देवेंद्र सिंह, शालू राजभान सिंह, राम बहादुर सिंह, नरेंद्र सिंह, अशोक, वीरपाल सिंह, घीमर, वीरेश लोधी, अरुण दीक्षित, राकेश शर्मा, राजपाल बघेल, पूर्व प्रधान धर्मेंद्र सिसोदिया, शिवम दीक्षित, रूम सिंह प्रधान, रिंकू शर्मा, मोहन अहेरिया, राजीव शर्मा, शालू शर्मा, धर्मवीर सिंह पुंडीर, शाहिद खान, रमेश चंद दीक्षित, पिंकी सिसोदिया, शीलू सिसोदिया एवं भूपेंद्र सिसोदिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

गणतंत्र के 77 वर्ष: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य का संकल्प

 

– डॉ. सत्यवान सौरभ
Satywan Saurabh, Writer

सत्यवान सौरभ, लेखक, स्वतंत्र पत्रकार

भारत का गणतंत्र आज 77 वर्ष का हो चुका है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुए संविधान ने एक नई भारत की नींव रखी, जो स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों से प्रेरित थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से हमने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की—साहित्य, खेल, कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर आर्थिक-सैन्य क्षमता तक। विविध संस्कृति को मजबूत करते हुए राष्ट्र ने वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाई। चंद्रयान मिशनों से अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी बने, यूपीआई जैसी डिजिटल क्रांति ने भुगतान व्यवस्था बदल दी, जबकि ओलंपिक-एशियाड में पदकों की बौछार ने खेलक्षेत्र में नई ऊंचाइयां छुईं। आज विश्व भारत को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखता है, जहां सात से आठ प्रतिशत की विकास दर ने गरीबी उन्मूलन में योगदान दिया। लेकिन यह यात्रा सहज नहीं रही। आंतरिक चुनौतियां, सीमापार खतरे और सामाजिक विषमताएं बनी रहीं। गणतंत्र दिवस पर आत्मचिंतन आवश्यक है: हमने क्या पाया, क्या खोया और भविष्य के लिए क्या संकल्प लें?
भारत की पहली और सबसे बड़ी चुनौती थी—विविधता में एकता। महाद्वीप के आकार का यह देश सौ तीस करोड़ से अधिक लोगों, सैकड़ों भाषाओं-बोलियों, विविध धर्मों-संस्कृतियों का मेल था। स्वतंत्रता के समय आशंका थी कि यह एकजुट नहीं रहेगा। विभाजन की त्रासदी ने आशंकाओं को बल दिया, लाखों जानें गईं, लेकिन संविधान ने संघीय ढांचे से एकता सुनिश्चित की। अनुच्छेद एक ने ‘भारत एक अखंड राज्य’ घोषित किया। भाषाई राज्यों का पुनर्गठन, एकीकृत न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को मुख्यधारा से जोड़ा। नक्सलवाद, अलगाववाद जैसी चुनौतियों के बावजूद हमने एकता बनाए रखी। पिछले 25 वर्षों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रियाएं इसका प्रमाण हैं। आज ‘एक देश, एक राशन’ जैसी योजनाएं विविधता को शक्ति बना रही हैं। यह उपलब्धि कम नहीं—विश्व के अधिकांश बहुलवादी देश टूट चुके, लेकिन भारत अटल खड़ा है।
दूसरी चुनौती थी—लोकतंत्र को जीवंत बनाना। संविधान ने वयस्क मताधिकार, मौलिक अधिकार, धर्मनिरपेक्षता प्रदान की। संसदीय प्रणाली अपनाई, जो ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित किंतु भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप। नेहरू युग से चली आ रही परंपरा में अठारह लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण हुए। न्यायपालिका ने जनहित याचिका के माध्यम से गरीबों के अधिकार स्थापित किए—विशाखा दिशानिर्देशों से महिला सुरक्षा, शिक्षा का अधिकार से शिक्षा का अधिकार। महिला आरक्षण ने पंचायती राज में तैंतीस से पचास प्रतिशत क्रांति लाई, जो राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की प्रतीक्षा कर रहा। सूचना का अधिकार ने पारदर्शिता बढ़ाई, जबकि वस्तु एवं सेवा कर ने आर्थिक एकीकरण किया। चुनौतियां रहीं—आपातकाल जैसे काले अध्याय, लेकिन संस्थाओं ने पुनरुद्धार किया। आज त्रस्तंभ मजबूत हैं: चुनाव आयोग निष्पक्ष, भारतीय रिज़र्व बैंक आर्थिक स्थिरता का प्रहरी। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र ने साबित किया कि गरीबी और निरक्षरता के बावजूद प्रजातंत्र फल-फूल सकता है।
तीसरी चुनौती थी विकास। 1947 में सकल घरेलू उत्पाद दो लाख तीस हजार करोड़ था, आज चार सौ लाख करोड़ से अधिक। हरित क्रांति ने अन्न भंडार भरे, सफेद क्रांति ने दूध उत्पादन में विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसरो के सौ से अधिक उपग्रह मिशन, कोविशील्ड वैक्सीन ने आत्मनिर्भरता दिखाई। डिजिटल भारत ने सौ करोड़ से अधिक आधार कार्ड जोड़े, जबकि स्टार्टअप भारत ने एक लाख से अधिक स्टार्टअप जन्मे। सामाजिक मोर्चे पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने अस्सी करोड़ को सस्ता अनाज दिया, स्वच्छ भारत ने बारह करोड़ शौचालय बनाए। आयुष्मान भारत ने पचास करोड़ गरीबों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया। लेकिन असमानता बनी—ऊपर दस प्रतिशत के पास सत्तावन प्रतिशत संपत्ति, जबकि निचले पचास प्रतिशत के पास तीन प्रतिशत। ग्रामीण-शहरी खाई, किसान आत्महत्याएं चिंताजनक। फिर भी, गरीबी रेखा से बाहर पच्चीस करोड़ लोग निकले—यह गर्व का विषय।
गणतंत्र की उपलब्धियां गर्व का कारण हैं, किंतु खोया भी बहुत। भ्रष्टाचार ने जड़ें जमा लीं—दो जी, कोयला आवंटन जैसी घोटालों ने अरबों लूटे। चुनावी बॉन्ड पर सवाल, नोटबंदी के बाद काला धन वापसी असफल। महिला असुरक्षा चरम पर—निर्भया से हाथरस तक बलात्कार की घटनाएं थम नहीं रही। जातिगत हिंसा, दलित अत्याचार जारी। किसान संकट गहरा: न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग, कर्जमाफी नाकाफी। युवा बेरोजगारी तीनों प्रतिशत पर, असंतोष से हिंसा भड़क रही। प्रदूषण घातक, प्रांतीयता का जहर बरकरार। अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर दुरुपयोग। नक्सलवाद, आतंकवाद बने सिरदर्द। ये घाव भारत माता को रक्तरंजित कर रहे।
खोया भले हो, लेकिन हल संभव। भ्रष्टाचार पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने रिसाव रोका। महिला सुरक्षा हेतु फास्ट-ट्रैक कोर्ट, निर्भया कोष उपयोग बढ़ाएं। किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान उत्पादक संगठन मजबूत करें। रोजगार हेतु कौशल भारत, आत्मनिर्भर तीन से दस करोड़ नौकरियां सृजित संभव। सामाजिक सद्भाव हेतु संविधान जागरण अभियान चलाएं। प्रदूषण पर विद्युत वाहन नीति, नमामि गंगे को गति। पंचायती राज को सशक्त बनाएं—महिला प्रतिनिधित्व से स्थानीय शासन मजबूत। युवाओं को मुख्यधारा जोड़ें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता-बिग डेटा से नफरत फैलाव रोका जा सकता। 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने हेतु एकजुट हों।
गणतंत्र दिवस मात्र परेड-झंडारोहण नहीं, आत्मचिंतन का अवसर। हमने एकता, लोकतंत्र, विकास पाया; भ्रष्टाचार, असमानता खोया। लेकिन युवा शक्ति हमारा हथियार। आशावादी रहें—भारतीय मॉडल अपनाएं। राष्ट्रपिता गांधी, संविधान निर्माता अम्बेडकर के सिद्धांतों पर चलें। गणतंत्र को कंटीली झाड़ियों से निकालें, उज्ज्वल भविष्य बनाएं। जय हिंद, जय भारत!
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)

30 जनवरी से रफ्तार भरेंगी बरेली-बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन

छस साल पहले रेलवे ने कोरोना महामारी में रोका था ट्रेनों का संचालन

मुरादाबाद, 25 जनवरी 2026, (उप्र समाचार सेवा।)
कोरोना काल में बंद बरेली बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन का 30 जनवरी से संचालन शुरू हो जाएगा। राजस्थान में मेंहदीपुर बालाजी समेत अन्य जगहों पर पर जाने वाले यात्रियों को ट्रेन की सुविधा मिलेगी।
छह साल पहले कोरोना वायरस के प्रभाव को देखते हुए रेलवे ने पैसेंजर समेत कई एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन रोक दिया था। अब आम यात्रियों की सुविधा को रेलवे ने दोबारा से बहाल करने का निर्णय लिया है।
मुरादाबाद के सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता के अनुसार बरेली बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन का टाइम टेबल जारी किया गया है। पहले पैसेंजर ट्रेन 54461-62 नंबर से चलती थी। अब ट्रेन का नया नंबर 543655-56 जारी हुआ है।
30 जनवरी को ट्रेन बरेली से चलेगी। अगले दिन 31 जनवरी को बांदीकुई से ट्रेन को चलाया जाएगा। रोजाना चलने वाली ट्रेन रामगंगा ब्रिज, आंवला, चंदौसी, हरदुआगंज, अलीगढ़, एत्मादपुर, हाथरस, मथुरा, आगरा फोर्ट, अछनेरा, भरतपुर समेत कई स्टेशनों पर रुकेंगी।

बरेली से रात 9.05 बजे से चलने वाली ट्रेन चंदौसी में रात 11.30 बजे और अगले दिन 9.50 बजे बांदीकुई पहुंचेंगी। जबकि वापसी में बांदीकुई से दोपहर 2.45 बजे चलकर चंदौसी सुबह 6.20 बजे पहुंचेंगी। रेल प्रशासन का कहना है कि पैसेंजर ट्रेन में रूट पर सभी छोटे स्टेशनों पर ठहराव निर्धारित किया गया है। इससे यात्रियों को सुविधा का लाभ मिलेगा।

-पुशपुल पैसेंजर के संचालन की आस बढ़ी
बरेली बांदीकुई पैसेंजर ट्रेन के पटरी पर लौटने की तैयारी के बीच मुरादाबाद रूट की प्रमुख ट्रेन पुशपुल पैसेंजर ट्रेन के संचालन की आस बढ़ गई है। मुरादाबाद दिल्ली के बीच चलने वाली ट्रेन की आज भी बड़ी डिमांड है। ट्रेन से आम यात्री के अलावा ड्यूटी पर जाने वाले, मजदूर, कामगार समेत अन्य लोग आवागमन करते। कोरोना काल के दौरान ट्रेन का संचालन रोक दिया गया। दोपहर में मुरादाबाद से दिल्ली के बीच पैसेंजर ट्रेन की आज भी यात्री कमी महसूस करते हैं।

युवा ऊर्जा के प्रतीक हैं नितिन नबीनः मुख्यमंत्री

CM Yogi Adityanath in Mathura

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मथुरा आगमन पर स्वागत समारोह में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ जी महाराज

  • मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संग वृंदावन में सुनी ‘मन की बात’
  • मुख्यमंत्री ने ब्रज की धरा पर नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष का किया स्वागत
  • विकास की गति को बढ़ाने के लिए प्राणप्रण से जुटकर योगदान देगा हर कार्यकर्ताः सीएम योगी

मथुरा, 25 जनवरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन संग प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ सुनी। वृंदावन के अक्षयपात्र में आयोजित कार्यक्रम में दोनों नेता सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री ने पहली बार यूपी के दौरे पर पहुंचे भाजपा अध्यक्ष का ब्रज की धरा पर स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने राधे-राधे, वृंदावन बिहारी लाल, राधा रानी, यमुना मैया, हर-हर महादेव, जय श्रीराम, भारत माता की जय तथा वंदे मातरम की गूंज के साथ आध्यात्मिक व राष्ट्रवादी चेतना का संचार करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की।

सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन युवा ऊर्जा के प्रतीक हैं। बिहार विधानसभा में पांचवीं बार विधायक के रूप में सेवाए दे रहे हैं। संगठन के विभिन्न पदों का निर्वहन करने के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भाजपा ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नया दायित्व दिया है। इस दायित्व के पश्चात योगेश्वर श्रीकृष्ण की पावन धरा पर उनका प्रथम आगमन आह्लादकारी क्षण है।

तीर्थ भूमि है ब्रज, आज भी विरासत का अंश ढूंढते हैं श्रद्धालु

Swagat Nitin Nabin President BJP

मथुरा आगमन पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी

सीएम योगी ने कहा कि ब्रज प्राचीन काल से तीर्थ भूमि रही है। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, गोवर्धन, नंदगांव, बलदेव तीर्थ हजारों वर्षों से सनातन धर्मावलंबियों के लिए प्रेरणा हैं। यहां के रज-रज, कण-कण में श्रीकृष्ण, राधा रानी और हजारों वर्षों की विरासत का अंश श्रद्धालु आज भी ढूंढते हैं। उसके साथ तारतम्य स्थापित करने का प्रयास करते हैं। अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की पावन जन्मभूमि भी मथुरा में पड़ती है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से ब्रज भूमि भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के साथ ही विकास के नित नए प्रतिमान स्थापित करते हुए बढ़ रही है।

यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का संबल बन रहा
सीएम योगी ने कहा कि यूपी अब ‘बीमारू’ नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथ्रू बनकर संबल बन रहा है। पांच साल से अधिक समय से यूपी रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में है। डबल इंजन सरकार डबल स्पीड के साथ बड़े-बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के कार्यों को धरातल पर उतारती है। हर नागरिक को सुरक्षा का अहसास कराती है। गरीब कल्याणकारी योजनाओं के साथ बिना भेदभाव वंचित, नौजवान, किसान, महिलाओं समेत हर तबके को वरीयता के आधार पर शासन की योजना का लाभ दे रही है। डबल इंजन सरकार के माध्यम से यूपी में विकास की योजनाओं को बिना भेदभाव गांव से शहर तक, प्रत्येक जगह प्रभावी ढंग से लागू करने का कार्य देखने को मिल रहा है।

अब पहचान के लिए मोहताज नहीं है यूपी का नौजवान

Mathura

भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन का मथुरा में स्वागत

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी का नौजवान अब पहचान के लिए मोहताज नहीं है। देश में अब वह कहीं भी जाकर गर्व से कह सकता है कि मैं यूपी का नागरिक हूं। एक समय था, जब यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा किया गया था, लोग यहां की विरासत को कोसते थे, हमें अपमानित करते थे, बीमारू राज्य होने के कारण हमारे बारे में लोगों का दृष्टिकोण भिन्न था, लेकिन यूपी अब बीमारू नहीं है। देश के विकास के अभियान में जुड़कर यहां के युवा, किसान व आधी आबादी भी कार्य कर रही है। यह भाजपा के प्रति आमजन के विश्वास का प्रतीक है।

विकास की गति को बढ़ाने के लिए प्राणप्रण से जुटकर योगदान देगा हर कार्यकर्ता
सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन, प्रेरणा व नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले 9 वर्ष में विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। सीएम योगी ने विश्वास जताया कि इस गति को और तेजी से बढ़ाने के लिए यूपी का एक-एक कार्यकर्ता प्राणप्रण से जुटकर वर्तमान व भावी भविष्य के निर्माण में योगदान देगा।

इस दौरान केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम, कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, महापौर विनोद अग्रवाल, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह, विधायक श्रीकांत शर्मा, मेघश्याम सिंह, राजेश चौधरी, पूरन प्रकाश, जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी किशन सिंह, विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, अशोक कटारिया, ओमप्रकाश सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य, जिलाध्यक्ष निर्मल पांडेय, महानगर अध्यक्ष हरिशंकर राजू यादव आदि मौजूद रहे।

वाराणसी: सपा प्रतिनिधि को रोकने पर सांसद धरने पर

वाराणसी, 25 जनवरी 2026, समाजवादी पार्टी के जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि मंडल को मणिकाणिका घाट जाने से रोके जाने पर सांसद सांसद वीरेंद्र सिंह अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। जानकारी के अनुसार सपा का एक प्रतिनिधिमंडल मणिकर्णिका घाट के निरीक्षण के लिए जा रहा था, तभी पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

प्रतिनिधिमंडल में कुल 11 सदस्य शामिल थे, जिन्हें प्रशासन से अनुमति भी मिली थी। टीम में बलिया से सपा सांसद सनातन पांडेय, चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह, मछलीशहर की सांसद प्रिया सरोज, एमएलसी आशुतोष सिंहा, पाल समाज के अध्यक्ष महेंद्र पाल सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को अलग-अलग स्थानों पर रोक दिया। इससे नाराज सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और कार्यकर्ता उनके आवास के बाहर धरने पर बैठ गए।

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