Web News

www.upwebnews.com

विजय दिवसःक्या व्यर्थ चला गया 4 हजार सैनिकों का बलिदान

December 31, 2025

विजय दिवसःक्या व्यर्थ चला गया 4 हजार सैनिकों का बलिदान

समय है 71 की चूक को सुधार लेने का

सर्वेश कुमार सिंह

हम पिछले 54 साल से विजय दिवस मना रहे हैं। हर साल जब 16 दिसम्बर आता है तो पाकिस्तान पर निर्णायक विजय और बांग्लादेश के उदय का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2022 में जब इस विजय के पचास वर्ष हुए तो भारत और बंगलादेश में बडा उत्सव मनाया गया। लेकिन इस बार का विजय दिवस कछ अलग संदेश और मायने रखता है। यह दिन अब इस बात की समीक्षा और सिंहावलोकन को आमंत्रण देता है कि क्या भारत द्वारा 1971 में लिया गया फैसला और करीब 3843 भारतीय सैनिकों का बलिदान व्यर्थ चला गया है? क्या हम सिर्फ इस खुशफहमी में हैं कि हमने पाकिस्तान के दो टुकडे करके पूर्वी सीमा को सदैव के लिए सुरक्षित कर लिया है?

पांच अगस्त 2024 के बाद जो कुछ बंगलादेश में घट रहा है और वहां की काम चलाऊ सरकार यानि कि सलाहकार समूह जैसे फैसले ले रही है। उससे तो यही लगता है कि हम ठगे गए हैं। एक पडोसी पर उनकी ही इस्लामी सेना के अत्याचारों, हत्याओं, बलात्कारों की घटनाओं से तत्कालीन भारत सरकार का मन आहत हुआ था। एक अनुमान के अनुसार पाकिस्तान की सेना ने बंगलादेश में 30 लाख लोगों को अकराण मार डाला था और 3 लाख महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुई थीं। इस अत्याचार और पापकर्मों की चीत्कार भारत के द्रवित मन ने सुनी थी। तत्कालीन भारतीय नेतृत्व ने पूर्वी पाकिस्तान को अपनी इच्छा शक्ति और प्रबल सैन्य शक्ति के बल पर बंगलादेश में बदल दिया था।

जब ढाका में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोडा पाकिस्तानी सेना के कमांडर जनरल एएके नियाजी से आत्मसर्पण दस्तावेज पर 16 दिसम्बर को हस्ताक्षर करा रहे थे, तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि इसी ढाका में एक बार फिर ऐसी सलाहकार सरकार नोबेल पुरस्कार विजेता मो यूनुस के नेतृत्व में आएगी जिसकी सरपरस्ती में भारतीय सेना की जीत के उपलक्ष्य और बंगलादेश की आजादी के प्रतीक उस प्रमिमा को जो इस समर्पण को दर्शाती थी, बंगलादेश के वही अतिवादी जेहादी तोड देंगे जिनके लिए भारतीय सेना ने बलिदान दिये। भारत की जनता ने एक करोड से अधिक बंगलादेशी शरणार्थियों को अपने यहां रखा और उनकी सभी तरह की मदद की। यह स्टेच्यु ढाका में स्थापित था। शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बंगलादेश में जो कुछ हुआ और अभी हो रहा है। इससे भारतीय जन-मन अत्यधिक आहत है। वहां के अल्पसंख्यकों पर जिस तरह हमले हुए हैं और अभी जारी हैं। उन्हें प्रताणित किया जा रहा है। हिन्दू मन्दिरों को तोडा गया है। इस्कान और काली के मन्दिर तो ढाका और चटगांव में एकता और सेवा के प्रतीक बने थे। इन्हें जला दिया गया। इस्कान ढाका के पूर्व सचिव चिन्मयदास को सिर्फ इस लिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि उन्होंने अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद की। जो वकील उनकी पैरवी के लिए गए उन्हें हमला करके गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।

आज समय है कि इस विषय पर विमर्श शुरु हो कि हम अपने पडोसी की पचास साल की तक हर तरह की मदद करते रहे और उसने हमारी भावनाओं की कतई भी कद्र नहीं की और न ही हमारे राष्ट्रीय हितों को कोई तवज्जो दी। इन्ही पचास सालों में बंगलादेश हूजी जैसे आतंकवादी संगठन का जन्मदाता बन गया। जिसने भारत में कई आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दिया है। भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों में आतंकवादी भेजने के लिए और उनके प्रशिक्षण के लिए लांचिंग पैड बन गया। अब हालत यह है कि बंगलादेशी सेना को प्रशिक्षण देने के लिए पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी पहुंच गए हैं। आईएसआ के अधिकारियों का दल पूरे बंगलादेश विशेष रूप से भारतीय सीमा क्षेत्र का भ्रमण कर रहा है। हमारे शत्रु की शरण स्थली अब बंगलादेश बन गया है। अब इस स्थिति में  भारत की नई भूमिका क्या हो। सबसे पहली प्राथमिकता है कि बंगलादेश के अल्पसंख्यक हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध और इसाई समुदायों की जान मान की रक्षा हो, वह कैसे होगी यह विचार भारत सरकार को करना है।

बगलादेश का उद्भव और भारत की भूमिका पर एक टिप्पणी जो करीब दो साल पहले बलोचिस्तान की निर्वासित सरकार की प्रधानमंत्री डा नायला कादरी ने की थी,उसका उल्लेख यहां समीचीन होगा। भारत भ्रमण पर आयी डा कादरी ने एक स्थानीय चैनल को साक्षात्कार देते समय कहा था कि भारत ने 1971 में बडी गलती की थी। उस समय बंगलादेश भारत के कब्जे में था, लाहौर तक भारतीय सेना पहुंच चुकी थी। ऐसे में अलग देश बनाने की बजाय बंगलादेश का भारत में विलय कर लिया जाना चाहिए था। उनकी इस प्रतिक्रिया को उस समय अतिरेक में कही गयी बात माना गया क्योंकि वे पाकिस्तान के खिलाफ बलूचों के संघर्ष को नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। उनकी पाकिस्तान से नाराजगी जग जाहिर है। लेकिन, 5 अगस्त 2024 को जो हुआ और उसके बाद हो रहा है उसे देखते हुए लगता है कि डा नायला कादरी की बात सही थी।

भारत में यह विमर्श पहले से चल रहा है कि 71 में लाहौर और बंगलादेश को मिला लिया जाना चाहिए था। पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों को हमने शिमला समझौते में यूं ही क्यों छोड दिया। वे युद्ध बंदी थे उनपर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में युद्ध अपराध का मुकदमा दर्ज होना चाहिए था। या फिर हम उनके बदले कुछ और हासिल करते।

अब भारतीय उपमहाद्वीप में नया खतरा जो सामने है वह यह है कि हमारी सीमाएँ एक बार फिर तनावग्रस्त हैं। हम अब यह भी नहीं कह सकते कि हम पूर्वी सीमा पर निश्चिन्त हैं। लेकिन एक अवसर अभी भी है वह यह कि बंगलादेश की निर्वाचित प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में हैं। वे आज भी तकनीकी रूप से बंगलादेश की प्रधानमंत्री हैं उन्होंने त्यागपत्र नही दिया है। बंगलादेश के राष्ट्रपति कह भी चुके हैं कि उनके पास हसीना कोई त्यागपत्र नहीं है। इसलिए हसीना ही बंगलादेश की संवैधानिक सरकार की प्रमुख हैं। उनसे वार्ता और समझौता करके 71 की चूक को सुधार लेना चाहिए। समझौते को मूर्त देने में भारतीय सेना सक्षम है।

(लेखक परिचयः स्वतंत्र पत्रकार, उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय लखनऊ)

 

 

कुछ लोगों अयोध्या को भी बना दिया था उपद्रव और संघर्ष का अड्डाः योगी आदित्यनाथ

अयोध्या, 31 दिसंबरः श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामना देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही अहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के

तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था।

*पिछली सरकारों के शासन में होते थे आतंकी हमले*

सीएम योगी ने पिछली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं होता था, उस अयोध्या में पिछली सरकारों के शासन में आतंकी हमले होते थे। अयोध्या को लहुलूहान करने का प्रयास हुआ था, लेकिन जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां कोई आतंकी कैसे घुस जाता। 2005 में जैसे ही आतंकियों ने दुस्साहस किया, तैसे ही पीएसी के जवानों ने ठक-ठक करके उन्हें मार गिराया।

*कभी विस्मृत नहीं हो सकती तीन तिथियां*

सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष के अंदर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। स्वतंत्र भारत में पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या में आगमन हुआ। उन्होंने उस दिन यहां श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी) को फिर अयोध्या धाम आकर प्रधानमंत्री ने रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न किया। 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी पर प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा को प्रतिष्ठित किया और संदेश दिया कि सनातन से ऊपर कोई नहीं। सनातन का पताका हमेशा ऐसी ही दिखाई देगी।

 

*श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिका*

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राजनाथ सिंह जी की श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका रही है। 500 वर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के विराजमान होने और मंदिर के इस भव्य स्वरूप को देखकर वे आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करने वाले रक्षा मंत्री जी प्रतिष्ठा द्वादशी पर जब मां अन्नपूर्णा के मंदिर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण कर रहे थे तो मैंने उन्हें भावुक होते देखा है।

*पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्या*

सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, कनेक्टिविटी, सुरक्षा भी नहीं थी। जयश्रीराम बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी होती थी, लेकिन अयोध्या के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए देश-दुनिया का हर सनातन धर्मावलंबी अब यहां दर्शन करके अभिभूत होता है। पहले कुछ लाख लोग यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच साल में 45 करोड़ से अधिक श्रदधालु अयोध्या आए। सूर्य वंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हो गई है। अयोध्या धाम में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, अयोध्या रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ गया है। हर ओर से यहां कनेक्टिविटी बेहतर हुई। जिस अयोध्या में सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज फोरलेन की सड़कें हैं।

*देश में अब हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-राम*

गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में अब हर जगह जयश्रीराम और राम-राम बोल सकते हैं। अब भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के नाम पर आ गई है। यह रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है। कोई भी बेरोजगार कहेगा कि मुझे अपनी ग्राम पंचायत में रोजगार चाहिए तो उसे साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी गांव में ही मिल जाएगी।

*रामभक्तों ने नहीं की लाठी और गोली की परवाह*

सीएम योगी ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। पांच सौ वर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1528 से लेकर 1992 और इसके उपरांत भी अयोध्या में हर 20-25 वर्ष में राम मंदिर को वापस लेने के लिए राम भक्त लगातार संघर्ष करता रहा। वह रूका, झुका और बैठा नहीं। उसने सत्ता, दमन, लाठी व गोली की परवाह नहीं की बल्कि वह लड़ता रहा। यह आंदोलन सफलता की नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब आरएसएस ने नेतृत्व दिया। पूज्यों संतों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल ने सफलता हासिल की। गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ।

*यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है*

सीएम योगी ने कहा कि आज प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित हुआ। अयोध्या की भव्यता, दिव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी को आगे बढ़ना होगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित करना है। पीएम मोदी ने हर भारतवासी को विकसित भारत की संकल्पना दी है। देश जब आजादी के 100 वर्ष पूरा करेगा तो हर भारतवासी का संकल्प होना चाहिए कि विरासत का संरक्षण करते हुए अपने क्षेत्र में उत्कृष्टतम कार्य करके दिखाना है। देश और सनातन धर्म की ध्वजा पताका को ऊपर उठाने के लिए हम सभी को मिलकर सामूहिक प्रयास को बढ़ाना पड़ेगा। य़ही प्रयास भारत को दुनिया की बड़ी ताकत के रूप में स्थापित करेगा।

श्री राम जन्मभूमि परिसर में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर रक्षा मंत्री ने की धर्मध्वजा की स्थापना

भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा, भारत की आध्यात्मिक शक्ति की प्राण प्रतिष्ठा है- राजनाथ सिंह

अयोध्या, 31 दिसंबर। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु रामलला के विराजमान होने के प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह के द्वितीय वार्षिकोत्सव में शामिल होने, आज देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अयोध्या धाम पहुंचे। इस पावन अवसर पर उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में हनुमान जी का दर्शन पूजन कर, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु रामलला के दर्शन किये। इसके बाद उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में बने में मां अन्नपूर्णा मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा को स्थापित किया।इस दौरान अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने अपने मनोभावों को व्यक्त करते हुए कहा कि “नाथ आजु मैं कहा न पावा”। ऐसा लग रहा है कि जीवन में मैं जो पाना चाहता था, वह सब कुछ मुझे मिल गया। राघवेंद्र सरकार ने इस दिन के लिए स्वयं मुझे चुना था, इसलिए आज यह अवसर मुझे मिल रहा है।

अयोध्या की हर गली, हर चौराहा क्या पूरा भारतवर्ष आज राममय है

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यशाली दिन बताते हुए कहा, “आज से दो वर्ष पूर्व जब प्रभु श्रीराम यहां पुनर्प्रतिष्ठित हुए, वो समस्त भारतवासियों के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण था। प्रभु श्रीराम अपनी कीर्ति से आज केवल भारतवर्ष ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को विभूषित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या की हर गली-हर चौराहा राममय हो गया हो। कनक भवन, दशरथ महल, हनुमानगढ़ी, संपूर्ण अयोध्या मां सरयु की गोद में शोभायमान हो रही है। यह आभा केवल अयोध्या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण अवध और भारतवर्ष आज राममय है। उन्होंने इस दिन को गौरवपूर्ण बताते हुए याद दिलाया कि यह वही भूमि है, जिसने वर्षों तक भगवान राम के लिए असहनीय बलिदान दिया, अपमान सहा, लेकिन आस्था को कभी डिगने नहीं होने दिया। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को राजनाथ सिंह ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति की प्राण प्रतिष्ठा कहा। उन्होंने कहा, हम सभी पिछले अनेक पीढ़ियों की तुलना में अत्यतं सौभाग्यशाली हैं कि हमने वह क्षण अपनी आंखों से देखा।

राम मंदिर आंदोलन, दुनिया का सबसे ग्रैंड नैरेटिव है

राम मंदिर आंदोलन को उन्होंने दुनिया का सबसे ग्रैंड नैरेटिव बताते हुए कहा कि यह आंदोलन भूगोल और समय दोनों के हिसाब से अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि भारत से लेकर पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड जैसे अनेकों देश जहां हिंदुओं के अलावा अन्य समुदायों के लोग भी प्रभु राम से खुद को जुड़ा हुआ मानते हैं, यह उन सब राम को मानने वालों का आंदोलन था। 500 वर्षों के लम्बें अहिंसक संघर्ष से चलने वाला ऐसा आंदोलन इतिहास में कहीं देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में केवल श्रीराम मंदिर का ही निर्माण नहीं हुआ है बल्कि हवाई अड्डा, रेल नेटवर्क, रोड कनेक्टिविटी के साथ उद्योग, व्यापार का सभी क्षेत्रों में अयोध्या विकास के नये आयाम रच रही है। विकास की यह धारा केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे अवध प्रांत से लेकर देश के कोने-कोने तक पहुंच रही है। अवधपुरी की इस विकास यात्रा के लिए उन्होंने डबल इंजन सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और सफल प्रयास की सराहना की और बधाई दी।

*ऑपरेशन सिंदूर में हमने आतंकियों को उनके ठिकानों में घुस कर सबक सिखाया*

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए प्रभु श्रीराम की मर्यादा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने युद्ध में मर्यादा न छोड़ने की शिक्षा हम सबको दी है, उसी प्रकार हमारी सेना ने भी सीमित, नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकियों को सबक सिखाना था, हमने उनके ठिकाने में घुस कर सबक सिखाया है। साथ ही उन्होंने बताया कि जिस तरह भगवान राम का दिव्य-भव्य मंदिर आयोध्या धाम में प्रतिष्ठित है, उसी तरह पुनौराधाम में मां जानकी की जन्मस्थली में भव्य मंदिर का भी निर्माण हो रहा है। अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने प्रार्थना की, “जब तक गगन में चंद्र और दिवाकर विद्यमान हैं, तब तक सनातन आस्था की ये धर्मध्वजा लहराती रहे। प्रभु राम हम सबको कर्तव्य का मार्ग दिखाएं।”

एटा में खराब पड़े राजकीय नलकूप के कारण फसले हो रही बर्बाद

एटा 31 दिसंबर उप्रससे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही किसानों को निःशुल्क विद्युत उपयोग किए जाने का तोहफा भले ही दे दिया हो, लेकिन सरकारी नलकूपों की स्थिति कैसी है यह किसी से छिपी नहीं है। कभी किसी नलकूप में कोई खराबी तो कभी किसी नलकूप में खराबी होने के चलते किसानों की फसलों को समय से पानी नहीं मिल पाने के चलते किसान परेशान है। किसानों ने नलकूप सही कराए जाने की गुहार डीएम एवं अधिशासी अभियंता नलकूप खण्ड से लगाई है। किसानों ने बताया कि विकास खण्ड निधौली कलां के गांव गदुआ में राजकीय नलकूप संख्या 227 ई०जी० काफी समय से खराब पड़ा हुआ है जिसके चलते गेहूं की फसल बर्बाद होने के कगार पर है। इस नलकूप को सही कराए जाने हेतु कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया गया, लेकिन अवर अभियंता ओमप्रकाश कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। किसान नलकूप विभाग के चक्कर काटकर परेशान हो चुके हैं। किसानों ने अधिशासी अभियंता नलकूप खंड एवं जिले के डीएम प्रेमरंजन सिंह से नलकूप संख्या 227 गदुआ को सही कराए जाने की गुहार लगाई है। शिकायत करने वाले किसान रवि यादव ब्लॉक अध्यक्ष युवक मंगल दल निधौली कला, सर्वेश कुमार, सुरेश चंद्र, देवेंद्र कुमार, सत्यपाल सिंह, सौरभ कुमार, अरवेश कुमार आदि प्रमुख हैं।

 

एटा में श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भक्तिमय रहा माहौल

http://UPWEBNEWS.COMएटा 31 दिसंबर उप्रससे। जनपद के सकीट नगर में अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर तृतीय विशाल मेले का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। भगवान श्रीराम ब्राह्मण समाज मंदिर, सकीट के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम के तहत मंदिर परिसर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां शामिल थीं। ढोल-नगाड़ों की गूंज और “जय श्रीराम” के जयकारों से पूरा नगर भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहां नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर इसका स्वागत किया और श्रद्धा भाव से आरत…

« Newer PostsOlder Posts »