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हिन्दू समाज समरस होना चाहिए – स्वांत रंजन

March 2, 2026

हिन्दू समाज समरस होना चाहिए – स्वांत रंजन

 

स्वान्त रंजन ने किया समरस समाज विकसित भारत का आधार पुस्तक का लोकार्पण
लखनऊ,02 मार्च, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने सोमवार को महामना मालवीय विद्या मंदिर के सभागार में ”समरस समाज— विकसित भारत की ओर” पुस्तक का लोकार्पण किया। इस पुस्तक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी और डा. हिमांशु अग्रवाल ने लिखी है। इस अवसर पर प्रांत
प्रचारक कौशल जी, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी
बावन मंदिर अयोध्या के महंत वैदेही वल्लभ शरण महाराज और सामाजिक समरसता गतिविधि के प्रान्त प्रमुख राज किशोर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने कहा कि सामाजिक विषमता मानसिक बीमारी है l इसे दूर करने की आवश्कता है तभी समाज समरस होगा l उन्होंने कहा संपूर्ण हिन्दू समाज समरस होना चाहिये l जातियां होंगी लेकिन किसी दूसरी जाति से दुश्मनी नहीं चाहिए l हम सब हिन्दू समाज के अंग हैं l इस नाते हमारा व्यावहार चाहिए l

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी ने कहा समाजिक समरसता से ही देश का भविष्य उज्जवल होगा हम अपने परिवार मुहल्ले में समरसता का संस्कार देना है l
उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता निरंतर साधना का विषय है। इसकी आवश्यकता समाज के प्रत्येक स्तर पर रहती है। उन्होंने कहा समाज को जोड़ने की प्रक्रिया व्यवहार,सेवा और सतत संवाद से आगे बढ़ती है।

डा. हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल नीतियों,योजनाओं या संरचनाओं से नहीं होता,बल्कि नागरिकों के आपसी संबंधों,विश्वास और सहयोग से होता है।

सामाजिक समरसता गतिविधि के प्रान्त प्रमुख राज किशोर ने बताया कि यह पुस्तक समरस समाज विकसित भारत का आधार इस दृष्टि को केन्द्र में रखकर लिखी गयी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बावन मंदिर अयोध्या के महंत वैदेही वल्लभ शरण महाराज ने कहा कि आज संघ नहीं होता तो समाज बट गया होता संघ समाज को समरसता की ओर ले जा रहा है l
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के
वरिष्ठ प्रचारक वीरेन्द्र सिंह, अशोक केडिया यशोदा नन्दन नरेंद्र भदौरिया, नरेंद्र सिंह, अपर्णा यादव पवन सिंह चौहान प्रशांत भाटिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।