मथुरा। जनपद के विकास खंड गोवर्धन स्थित संविलित विद्यालय नगला खारी में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार अध्यापकों द्वारा की गई सामूहिक शिकायत के आधार पर गठित दो सदस्यीय जांच समिति की आख्या में विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक कुशल सिंह को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदेश के अनुसार 05 फर. 2025 को खंड शिक्षा अधिकारी बलदेव एवं मथुरा की संयुक्त जांच समिति गठित की गई थी। समिति द्वारा की गई विस्तृत जांच के उपरांत 28 दिसं 2025 को जांच आख्या प्रस्तुत की गई जिसमें कई गंभीर तथ्य सामने आए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय में लगातार तीन शैक्षिक सत्रों से छात्र नामांकन में गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले दो वर्षों के मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) से संबंधित रजिस्टर उपलब्ध नहीं कराए गए जिससे प्रधानाध्यापक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि विद्यालय में किसी प्रकार का शैक्षणिक या वित्तीय अभिलेख उपलब्ध नहीं है जो कि बेसिक शिक्षा नियमावली का खुला उल्लंघन है। विद्यालय परिसर में गंदगी, कबाड़ और अतिरिक्त कक्षों में अव्यवस्था पाई गई जिससे यह प्रतीत होता है कि प्रधानाध्यापक को शासकीय दायित्वों में कोई रुचि नहीं है।
जांच समिति ने अपनी आख्या में उल्लेख किया है कि विद्यालय को प्राप्त कम्पोजिट ग्रांट, खेलकूद सामग्री एवं ईको क्लब मद की धनराशि का कोई लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग एवं गबन की आशंका प्रबल हुई है। इसके अलावा अधिकांश शिक्षकों से समन्वय न करते हुए केवल एक शिक्षिका को अनुचित लाभ देना और उसे अवैध रूप से अनुपस्थित रहते हुए उपस्थित दर्शाना भी गंभीर कदाचार की श्रेणी में पाया गया है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने कुशल सिंह इंचार्ज प्रधानाध्यापक संविलित विद्यालय नगला खारी विकास खंड गोवर्धन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें संविलित विद्यालय कुंजैरा विकास खंड गोवर्धन से संबद्ध किया गया है।
निलंबन काल में उन्हें वित्तीय हस्तपुस्तिका के नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी समग्र शिक्षा मथुरा तथा खंड शिक्षा अधिकारी मांट की दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि आरोप पत्र शीघ्र जारी कर एक माह के भीतर विस्तृत जांच आख्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराई जाए।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से जनपद में हड़कंप मच गया है और इसे सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता व अनुशासन की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
